Agneyam
(0)
Author:
V.R. Ganapathi, P. VatsalaPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
TeluguCategory:
Literary-fiction₹
350
₹ 290.5 (17% off)
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కథాంశము: నంగేమ అంతర్జనం అనే అభ్యుదయ భావాలు కలిగిన ఒక నంబూద్రి మహిళ కథ ఇది. భర్త సమాజం కోసం సర్వస్వాన్ని త్యాగం చేసి తన ఆశయాలేవీ సాకారం కాకుండానే, పసివాళ్ళను దారిద్ర్యంలో వదిలేసి మరణించినాడు. కష్టాలను అధిగమించటానికి తన తమ్ముడితో కలిసి పరాయి ప్రదేశమైన వయనాడుకు వలస వెళ్తుంది నంగేమ. చిన్నగా అక్కడి గిరిజన స్త్రీలకు, కూలీలకు అవసరమైన నిత్యావసర వస్తువుల వ్యాపారాన్ని ప్రారంభిస్తుంది. తన సంపాదనతో పాటు కొంత అప్పు చేసి పొలాన్ని కొని స్వయంగా పర్యవేక్షిస్తూ ఎంతో సాహసంతో వ్యవసాయాన్ని నిర్వహిస్తుంది. స్వంత ఇంటిని నిర్మించుకుంటుంది. ఆమె ఎంతో వద్దనుకున్నా కొడుకు కూడా తండ్రి లాగే విప్లవపు బాటలో నడుస్తాడు. పోలీసుల చెరలో చిక్కుతాడు. చివరికి అన్నింటినీ వదిలేసుకుని నంగేమ తిరిగి తన స్వంత ఊరికి వెళ్ళిపోతుంది.
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కథాంశము: నంగేమ అంతర్జనం అనే అభ్యుదయ భావాలు కలిగిన ఒక నంబూద్రి మహిళ కథ ఇది. భర్త సమాజం కోసం సర్వస్వాన్ని త్యాగం చేసి తన ఆశయాలేవీ సాకారం కాకుండానే, పసివాళ్ళను దారిద్ర్యంలో వదిలేసి మరణించినాడు. కష్టాలను అధిగమించటానికి తన తమ్ముడితో కలిసి పరాయి ప్రదేశమైన వయనాడుకు వలస వెళ్తుంది నంగేమ. చిన్నగా అక్కడి గిరిజన స్త్రీలకు, కూలీలకు అవసరమైన నిత్యావసర వస్తువుల వ్యాపారాన్ని ప్రారంభిస్తుంది. తన సంపాదనతో పాటు కొంత అప్పు చేసి
పొలాన్ని కొని స్వయంగా పర్యవేక్షిస్తూ ఎంతో సాహసంతో వ్యవసాయాన్ని నిర్వహిస్తుంది. స్వంత ఇంటిని నిర్మించుకుంటుంది. ఆమె ఎంతో వద్దనుకున్నా కొడుకు కూడా తండ్రి లాగే విప్లవపు బాటలో నడుస్తాడు. పోలీసుల చెరలో చిక్కుతాడు. చివరికి అన్నింటినీ వదిలేసుకుని నంగేమ తిరిగి తన స్వంత ఊరికి వెళ్ళిపోతుంది.
Book Details
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ISBN9789355483386
-
Pages400
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Avg Reading Time13 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
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भारत के विभाजन और विस्थापन का गहरा चित्रण सबसे ज़्यादा उर्दू, उसमें भी ख़ासकर पाकिस्तान के कथा-साहित्य में हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण शायद यह है कि मुख्य भूमि को छोड़कर वहाँ गए लेखक अब भी किसी न किसी स्तर पर विस्थापन के दर्द को महसूस करते हैं। हालाँकि, उनका लेखन एक महान सामाजिक संस्कृति और विरासत से कट जाने के दर्द तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसमें अपनी अस्मिता को नए ढंग से परिभाषित करने का उपक्रम भी है।
पाकिस्तान के सुविख्यात लेखक अब्दुल्लाह हुसैन के इस उपन्यास की विशेषता यह है कि इसका कथानक विभाजन और विस्थापन तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कई प्रकार की अस्मिताओं की टकराहट इसमें देखी जा सकती है। भारतीय उपमहाद्वीप के परम्परागत समाज के आधुनिक समाज में तब्दील होने की जद्दोजहद इसके केन्द्र में है।
उपन्यास का कथानक प्रथम विश्वयुद्ध के कुछ पूर्व से विभाजन और उसके पश्चात् की घटनाओं और उपद्रवों के समय तक फैला हुआ है। विशाल कैनवस वाला यह उपन्यास तीन युगों का दस्तावेज़ है। पहला अंग्रेज़ी साम्राज्य का युग, दूसरा स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए संघर्ष का काल और तीसरा विभाजन के पश्चात् का ज़माना। इसमें हिन्दुस्तान में बसनेवाली कई पीढ़ियों के साथ बदलते हुए ज़मानों का चित्रण है और समाज, सभ्यता तथा राजनीति की पृष्ठभूमि में बदलती हुई सोच का भी।
‘उदास नस्लें’ का नायक कोई व्यक्ति न होकर, समकालीन जीवन के विभिन्न कालखंड और उनसे गुज़रते हुए संघर्ष तथा व्यथा के भँवर में घिरी तीन पीढ़ियाँ हैं। इतिहास का ताना-बाना उन्हीं के अनुभवों के इर्द-गिर्द बुना गया है। इसमें शहरी तथा ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले दो परिवारों की कथा है।
नईम और अज़रा दो भिन्न समाजों और मानसिक और भावात्मक सरोकार के दो विपरीत पक्षों के प्रतिनिधि हैं। उनके बीच प्रक्रिया और प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी रहता है। वे दोनों अपनी जड़ों से तो नहीं कट सकते, क्योंकि वे उनके संस्कारों का हिस्सा बन चुकी हैं, फिर भी एक प्रकार के कायाकल्प की प्रक्रिया से वे ज़रूर गुज़रते हैं।
नईम अपने स्वभाव और मूल वृत्तियों से धरती का बेटा है, परन्तु अज़रा के माध्यम से उसका परिचय उस जीवन से होता है जो किसी हद तक परम्परागत मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। नईम और अज़रा की आपसी निष्ठा और आत्मीयता में प्रेम का तत्त्व उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना दो अस्मिताओं में एकत्व पैदा करने और उनके अन्दर विस्तार तलाश करने की भावना। परन्तु, अन्त में उसकी पराजय हृदयविदारक है।
अब्दुल्लाह हुसैन का यह बहुचर्चित उपन्यास पहली बार पाकिस्तान में 1963 में छपा था। 1964 में इसे ‘आदम जी पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।
Woh Aadmi
- Author Name:
Fazal Tabish
- Book Type:

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उपन्यास ‘वो आदमी’ एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक कालखंड का प्रामाणिक दस्तावेज़ है जिसमें भोपाल से सम्बन्धित कथाएँ और किंवदन्तियाँ बहुत ख़ूबी और बिना किसी दिखावे के, बचपन की यादों के साथ, ख़ासतौर पर पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की यादें, जो समय के साथ ख़ामोश बदलाव के पात्र भी हैं और साक्षी भी, बुनी गई हैं। सॉमरसेट मॉम का भावार्थ उधार लेकर कहें तो किसी क़ीमती ग़लीचे के रहस्यमय पैटर्न में बुनी गई हैं।
यह उपन्यास दरअसल एक प्लॉट-रहित गाथा है, जो कि शायद ज़िन्दगी की असलियत भी है। इसे पढ़ते एहसास होता है कि बढ़ना और बदलना एक-दूसरे के बिना सम्भव नहीं, और कुछ होने के लिए बहुत सारी कभी रह चुकी चीज़ों का खो जाना ज़रूरी है।
‘वो आदमी’ पाठक को एक ओर जहाँ नॉस्टेल्जिया से भरता है, वहीं दूसरी सतह पर उससे मुक्त होने को सचेत भी करता है। सबसे महत्त्वपूर्ण, यह बताता है कि दुनिया किधर से आ रही है और किस दिशा में बढ़ रही है, और पाठक को अपने भीतर झाँक सकने के साहस के साथ ज़िन्दगी में भागीदारी का न्योता देता है।
Out of Love
- Author Name:
Swetha R Mohan
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Some relationships in life begin casually and come with us for a very long-time, more than we expected! Sometimes we misunderstand people and a few times we misunderstand what they mean to us. When we realize it, It is too late. Do we get a chance to restart? This fiction is about a few people in their prime part of life - late teens to early twenties. Priya, the Talkative, boisterous girl sets the pace of the story. She can be friends with anyone unlike sanjana, who sees her bestial and only friend in Oriya. All Indian teenage girls have a thing in common - their liking for Reel life heroes. The girls were no exception. They are die-hard fans of an upcoming actor from a star family, Rishi. Not an everyday thing, but it did happen to them. Priya, sanjana and Rishi cross paths. They meet, greet, get friendly and get closer. It is about these three people's journey - their emotions, their behaviour, and their relationship. The same love that brings them closer drifts them apart when dynamics change. Out of love, do they make, break or mend their relationship!.
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