Cheramanuni Preyasi
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Author:
Aripirala Suvarna, KannadasanPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
TeluguCategory:
Literary-fiction₹
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చేరమానుని ప్రేయసి చేరమాన్ కాదలి నవలలోని కథానాయకుడు భాస్కర రవివర్మ రెండో చేరమాన్ పెరుమాళ్ బావమరిది కుమారుడు. ఇతని మొదటి ప్రియురాలు యూదు యువతి యూజియానా ఆమె గర్భవతి అయింది. నంబూద్రీల కుట్ర వలన ఇజ్రాయిల్కు పంపించేస్తారు. రెండో ప్రియురాలు ముస్లిం మహిళ సలీమా. ఈమె సంబంధీకులు రవివర్మని ముస్లీంగా మత మార్పిడి చేశాక, మూడో చేరమాన్ పెరుమాళ్ తన ముస్లీం భార్యతో అరేబియా రేవు పట్టణం చేరి అక్కడ నుంచి మక్కా వెళ్లి మహమ్మదీయ మతస్థునిగా మారి అబ్దుల్ రహమాన్ చామొరియన్గా మతం మార్చుకుని జబార్ అన్న ఊరిలోకి చేరుకుని కొంత కాలం జీవించాడు... కాలక్రమేణా వృద్ధాప్యం పైబడి మహమ్మదీయస్తీ పరిచర్యలో కొంత కాలం జీవించాడు... రవివర్మ జబార్లోనే క్రీ.త. 838లో చనిపోయాడు... ఆయనకా ఊరిలోనే ఆయన శరీరాన్ని ఖననం చేసి సమాధి కట్టారు... దాని మీద చేరదేశ రాజు 'అబ్దుల్ రెహమాన్ చామొరియన్' ఈయన ఏ. ఎచ్ -212లో వచ్చి ఏ. ఎచ్-216లో మరణించారు అని ఆరేబియన్ భాషలో రాసుంది. 'చేరమాన్' అన్న చారిత్రాత్మిక నవల తమిళంలో ప్రసిద్ధ కవి, రచయిత కీ.శే. కణ్ణదాసన్ గారు... అనేక సినిమాలకు (తమిళ) పాటలు, సంభాషణలు రాశారు. వారి 'చేరమాన్ కాదలి'కి 1983లో సాహిత్య అకాదెమి పురస్కారం లభించింది.
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చేరమానుని ప్రేయసి
చేరమాన్ కాదలి నవలలోని కథానాయకుడు భాస్కర రవివర్మ రెండో చేరమాన్ పెరుమాళ్ బావమరిది కుమారుడు. ఇతని మొదటి ప్రియురాలు యూదు యువతి యూజియానా ఆమె గర్భవతి అయింది. నంబూద్రీల కుట్ర వలన ఇజ్రాయిల్కు పంపించేస్తారు. రెండో ప్రియురాలు ముస్లిం మహిళ సలీమా. ఈమె సంబంధీకులు రవివర్మని ముస్లీంగా మత మార్పిడి చేశాక, మూడో చేరమాన్ పెరుమాళ్ తన ముస్లీం భార్యతో అరేబియా రేవు పట్టణం చేరి అక్కడ నుంచి మక్కా వెళ్లి మహమ్మదీయ మతస్థునిగా మారి అబ్దుల్ రహమాన్ చామొరియన్గా మతం మార్చుకుని జబార్ అన్న ఊరిలోకి చేరుకుని కొంత కాలం జీవించాడు... కాలక్రమేణా వృద్ధాప్యం పైబడి మహమ్మదీయస్తీ పరిచర్యలో కొంత కాలం జీవించాడు... రవివర్మ జబార్లోనే క్రీ.త. 838లో చనిపోయాడు... ఆయనకా ఊరిలోనే ఆయన శరీరాన్ని ఖననం చేసి సమాధి కట్టారు... దాని మీద చేరదేశ రాజు 'అబ్దుల్ రెహమాన్ చామొరియన్' ఈయన ఏ. ఎచ్ -212లో వచ్చి ఏ. ఎచ్-216లో మరణించారు అని ఆరేబియన్ భాషలో రాసుంది.
'చేరమాన్' అన్న చారిత్రాత్మిక నవల తమిళంలో ప్రసిద్ధ కవి, రచయిత కీ.శే. కణ్ణదాసన్ గారు... అనేక సినిమాలకు (తమిళ) పాటలు, సంభాషణలు రాశారు. వారి 'చేరమాన్ కాదలి'కి 1983లో సాహిత్య అకాదెమి పురస్కారం లభించింది.
Book Details
-
ISBN9789387989405
-
Pages480
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
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‘सेवा सदन’ को प्रेमचन्द की वह औपन्यासिक रचना माना जाता है जिसने उन्हें उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठित किया। मूल रूप से उर्दू में ‘बाज़ारे-हुस्न’ नाम से लिखे गए इस उपन्यास की रचना को 2019 में सौ साल पूरे हुए और इस अवसर पर अनेक स्थानों पर इस सम्बन्ध में कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस मूल उर्दू उपन्यास का हिन्दी संस्करण पहले प्रकाशित हुआ था, बाद में मूल उर्दू भी प्रकाशित हुआ।
उपन्यास के केन्द्र में सुमन है जिसके जीवन की कथा के बहाने प्रेमचन्द ने उस समय के समाज और उसकी अनेक उलटबाँसियों का चित्रण किया है। दहेज की समस्या, धन के चलते पैदा हुए सामाजिक असन्तुलन, अनमेल विवाह और वेश्या-जीवन की विसंगतियों पर प्रकाश डालनेवाले इस उपन्यास को कुछ लोग हिन्दी का पहला आधुनिक उपन्यास भी मानते हैं।
बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में, वाराणसी की पृष्ठभूमि में एक ब्राह्मण युवती को अनमेल विवाह से निकलकर वेश्या बनते और तदनन्तर एक समाज-सुधारक के रूप में ढलते दिखाना उस समय रचनाकार के लिए बेहद साहसिक काम था जो प्रेमचन्द ने बख़ूबी किया।
Journey of Love
- Author Name:
Aditi Srivastava
- Book Type:

- Description:
Not everyone in this world gets love at first chance. Ritika and Divakar, a couple made in heaven. Perfect understanding, perfect for each other but then nothing remains perfect for too long. Things changed and Ritika had only stars to preach and love. But life doesn�t stop it goes on. In this pace, will Ritika be able to get someone who will love her? Will she be able to get someone whom her conscience would allow or will she be forced to live with remorse?
Pride And Prejudice
- Author Name:
Jane Austen
- Book Type:

- Description:
Pride and Prejudice is a romantic novel by Jane Austen set in the 18th century, first published in 1813. The story plot is about Bennet family that has 5 unmarried but attractive daughters. Mrs. Bennet is always looking for eligible prospects for her daughters especially military officers, until one day the family meets two rich, good looking and eligible bachelors who come to stay in their neighbourhood. Things are starting to build, speculations rise and sparks fly when the youngest daughter Elizabeth encounters the young and rich Mr. Darcy. But shortly after the two gentlemen leave for London leaving the whole town wondering will they come back?
Tantya
- Author Name:
Baba Bhand
- Book Type:

- Description:
टंट्या भील मध्यभारत में उन्नीसवीं सदी के महान आदिवासी जननायक के रूप में जाना जाता है। बचपन तथा युवावस्था में टंट्या को असहनीय यातनाओं से गुज़रना पड़ा। टंट्या की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे, उसके परिवार और समाज को बदहाली, अन्याय और शोषण का शिकार क्यों होना पड़ा। धीरे-धीरे वह सोचने लगा, इसी सोच ने उसे अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी। उसने सामन्ती व्यवस्था तथा उस व्यवस्था की रक्षा करनेवाली ब्रिटिश राजसत्ता को गम्भीर चुनौती दी। दलितों-शोषितों और आम आदमी ख़ासकर सर्वहारा किसानों-मज़दूरों का पक्ष लेकर उन्हें इस महासंग्राम में शामिल करने के लिए टंट्या ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी। प्रचलित नीतिमूल्यों को नज़रअन्दाज़ कर गहरे मानवीय मूल्यों पर उसने अपने संघर्ष की नींव रखी। सरकार की नज़र में वह डकैतों का सम्राट था, लेकिन लोकमानस में वह ईश्वरीय अंश धारण करनेवाला जननायक माना गया। वह आज भी लोकमानस में मिथक के रूप में अमर है।
टंट्या जैसे अलौकिक जननायक पर उपन्यास लिखने का प्रयास कठिन कर्म है। टंट्या की जीवनगाथा मिथकों और लोककथाओं में इस क़दर घुल-मिल गई है कि रहस्य तथा चमत्कार को यथार्थ से अलग करना असम्भव-सा था, लेकिन उपन्यासकार ने अपने प्रामाणिक शोध के ज़रिए और रचनात्मकता के सहारे जीवन-चरित्र के यथार्थ को उजागर करने का प्रयास किया है। यह ग़ौरतलब है कि लोकप्रिय या सरलीकृत वर्णन की फिसलन इस उपन्यास में नहीं दिखती। अनावश्यक भावुकता से बचाव, चिन्तनशीलता, संयत भाषिक अभिव्यक्ति, गहन मानवीय अन्तर्दृष्टि, इतिहास और समकालीनता के बीच जटिल अन्तर्सम्बन्धों का अहसास आदि कई विशेषताओं के कारण यह उपन्यास सर्जन के सहारे इतिहास की पुनर्रचना का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन गया है। उपन्यासों के भारतीय परिदृश्य में बाबा भांड की यह कृति निस्सन्देह महत्त्वपूर्ण है तथा प्रो. निशिकान्त ठकार जैसे अनुवादक के हाथों से हुआ इस कृति का अनुवाद पाठकों के लिए मूल्यवान उपलब्धि है।
—प्रो. चन्द्रकान्त पाटील
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