Ayurveda va Yoga Dwara Vazan Ghatayen
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Author:
Dr. Vinod VermaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Lifestyle-and-wellness₹
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"डॉ.एस. राधाकृष्णन ने हिंदू धर्म के केंद्रीय सिद्धांतों, इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक सिद्धांत, धार्मिक अनुभव, नैतिक चरित्र और पारंपरिक धर्मों की व्याख्या की है। हिंदू धर्म परिणाम नहीं एक प्रक्रिया है, विकसित होती परंपरा है, न कि निश्चित रहस्योद्घाटन—जैसा कि अन्य धर्मों में होता है। उन्होंने ईसाई धर्म, इसलाम और बौद्ध धर्म की तुलना हिंदू धर्म के संदर्भ में की है और इस बात पर बल दिया है कि इन धर्मों का अंतिम उद्देश्य सार्वभौमिक स्वयं की प्राप्ति है। धर्म को लेकर राधाकृष्णन का विश्लेषण परम बौद्धिक और संतुलित है तथा उनके व्याख्यानों को विश्व भर में हार्दिक प्रतिक्रिया मिली है। इस पुस्तक के लेख इस महान् दार्शनिक के मन को प्रतिबिंबित करते हैं, जिनका अभिवादन एक और विवेकानंद के रूप में किया गया है। हिंदू धर्म का विहंगम दिग्दर्शन करानेवाली पठनीय पुस्तक।
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"डॉ.एस. राधाकृष्णन ने हिंदू धर्म के केंद्रीय सिद्धांतों, इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक सिद्धांत, धार्मिक अनुभव, नैतिक चरित्र और पारंपरिक धर्मों की व्याख्या की है। हिंदू धर्म परिणाम नहीं एक प्रक्रिया है, विकसित होती परंपरा है, न कि निश्चित रहस्योद्घाटन—जैसा कि अन्य धर्मों में होता है। उन्होंने ईसाई धर्म, इसलाम और बौद्ध धर्म की तुलना हिंदू धर्म के संदर्भ में की है और इस बात पर बल दिया है कि इन धर्मों का अंतिम उद्देश्य सार्वभौमिक स्वयं की प्राप्ति है। धर्म को लेकर राधाकृष्णन का विश्लेषण परम बौद्धिक और संतुलित है तथा उनके व्याख्यानों को विश्व भर में हार्दिक प्रतिक्रिया मिली है। इस पुस्तक के लेख इस महान् दार्शनिक के मन को प्रतिबिंबित करते हैं, जिनका अभिवादन एक और विवेकानंद के रूप में किया गया है।
हिंदू धर्म का विहंगम दिग्दर्शन करानेवाली पठनीय पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9789352663460
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह पुस्तक उन दिनों की साथी है जब मन में माता-पिता बनने के मीठे सपने खिलने लगते हैं और घर किलकारियों से गूँज उठता है। सन्तान-बीज के गर्भ में आने से लेकर शिशुजन्म और बच्चे की पहली वर्षगाँठ तक समस्त जानकारियों को सरल व स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत करनेवाली यह पुस्तक सभी दम्पतियों, दादा-दादियों और नाना-नानियों के लिए पठनीय है—कैसे करें गर्भधारण की तैयारी, गर्भधारण के लिए महीने की कौन-सी तिथियाँ अनुकूल हैं, क्या बेटे या बेटी का पहले से चुनाव हो सकता है, गर्भावस्था की रोमांचक घटनाएँ, बच्चा गर्भ में कब से आँख-मिचौनी खेलना शुरू कर देता है, गर्भावस्था में क्या खाएँ और क्यों, आरामदेह मुद्राएँ और लाभकारी व्यायाम, डॉक्टरी जाँच-परीक्षण : कब और कैसे, अल्ट्रासाउंड और दूसरे टेस्ट कब-कब किए जाते हैं, आम तकलीफ़ : कैसे पाएँ निजात, कैसे करें शिशु के आगमन की तैयारी, बच्चे का जन्म कैसे होता है, सीज़ेरियन की ज़रूरत कब-कब होती है, बच्चे की सँभाल के लिए क्या-क्या बातें जानना ज़रूरी है, बच्चे को कब, कौन-से टीके लगवाने होते हैं। एक बेहद महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक।
Nari Swasthya Aur Saundarya
- Author Name:
Yatish Agarwal +1
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न में सुख और ख़ुशियों के रंग भरने के लिए अपनी देह और मन के बारे में जानना हर स्त्री के लिए ज़रूरी है। इसी से वह अपने भीतर के रचना-संसार, उसकी बनावट और व्यवहार को ठीक से समझ सकती है और सामान्य–असामान्य की पहचान कर सकती है। अत्यन्त सरल और दिलचस्प शैली में रची गई यह पुस्तक नारी शरीर की दुनिया, मासिक धर्म और उससे जुड़े विकारों, जनन अंगों के रोगों, सन्तान की चाह पूरी करने के नूतन उपायों, अनचाहे गर्भ से बचे रहने के तरीक़ों, गर्भाशय और स्तन के कैंसरों, विविध जाँच–परीक्षणों, रूप–सौन्दर्य आदि पर प्रामाणिक व्यावहारिक जानकारी का ख़ज़ाना है। इन विषयों पर आपके हर सवाल का नारी स्वास्थ्य और सौन्दर्य में समाधान प्रस्तुत है— नारी, स्त्री, अम्बा, वामा शब्द कैसे बने?; किशोरावस्था, यौवन और जीवन के अलग–अलग चरणों में शरीर के भीतर क्या–क्या परिवर्तन आते हैं?; मासिक धर्म के दिनों में अपनी देखभाल कैसे करें?; गर्भाशय की रसौली, बच्चेदानी के नीचे सरकने, एंडोमेट्रियोसिस, यू.टी.आई. जैसे रोगों का क्या इलाज है?; स्तन में हुई गिलटी का क्या समाधान है?; काम–क्रीड़ा में कष्ट होने पर निजात के क्या तरीक़े हैं?; मासिक धर्म में दर्द, अधिक ख़़ून जाने पर क्या करें?; योनिस्राव के क्या–क्या कारण हैं और उनका इलाज क्या है?; गर्भ–निरोध के लिए कौन–सा साधन उत्तम है?; सन्तान न होने के क्या कारण हैं और इनका क्या इलाज है?; सुन्दर–सलोना रूप पाने के क्या–क्या उपाय हैं?; बालों और त्वचा की देखभाल कैसे करनी चाहिए?; और, और भी बहुत कुछ…। न सिर्फ़ स्त्रियों के लिए, बल्कि पुरुषों के लिए भी एक पठनीय पुस्तक
Swasthya Ke Teen Sau Sawal
- Author Name:
Yatish Agarwal
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भोजन हमारे जीवन का भी आधार है, और सेहत का भी। उसी से यह शरीर बनता है, हमें शक्ति मिलती है और हम हृष्ट-पुष्ट रह पाते हैं। स्वस्थ तन और मन के लिए क्या खाएँ, कितना खाएँ, किस खाद्य पदार्थ में कौन-सा पोष तत्त्व है, विटामिन और खनिज हमें किस-किस भोजन से मिलते हैं, उनकी शरीर को कितनी ज़रूरत है, यह कृति जीवन से जुड़े इन सभी बुनियादी पक्षों पर बेहद सरल और व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करती है।
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