Rachna Ka Antrang
Author:
DevendraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
अर्थशास्त्र जाननेवाले कहते हैं कि गाँव की तरक़्क़ी हो गई है। समाजशास्त्र के विद्वान कहते हैं कि रिश्तों में दरार आ गई है। गाँव के लोग कहते हैं कि अब वह बात नहीं रहीं। बहुत उदास-उदास लगता है। यहाँ रहने का मन नहीं होता। लब्बोलुबाब यह कि इतनी उदास, मनहूस और क़र्ज़ में डूबी तरक़्क़ी। बैंकों की मदद से हमारे गाँव में तीन लोगों ने ट्रैक्टर ख़रीदे और तीनों के आधे खेत बिक गए। ट्रैक्टर औने-पौने दाम में बेचने पड़े। पता नहीं क़र्ज़ चुकता हुआ कि नहीं? पंचायती राज में लोकतंत्र को गाँवों तक ले जाने का कार्यक्रम बना। फिर तो, अपहरण, हत्याएँ और मुकदमेबाज़ी। सारे के सारे गाँव थानों और कचहरियों में जाकर क़ानून की धाराएँ रटने लगे।...</p>
<p>—'अस्सी की एक शाम' से
ISBN: 9788194272984
Pages: 167
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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1930 में ज़ोहरा आपा ड्रेस्डेन, जर्मनी में मैरी विगमैन के डांस-स्कूल में आधुनिक नृत्य का प्रशिक्षण लेने के लिए गईं। नवाबों की पारिवारिक पृष्ठभूमि से आईं एक भारतीय युवती के लिए यह फ़ैसला अस्वाभाविक था। लेकिन कुछ अलग हटकर करने का नाम ज़ोहरा सहगल है। 1933 में वे वापस आईं और 1935 में उदयशंकर की अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध नाट्य दल से जुड़ीं। कामेश्वर सहगल भी इसी कम्पनी में थे जिनसे 1942 में उनकी शादी हुई।
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अनन्या मुखर्जी के शब्दों में कहें तो ‘जब मुझे पता चला कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर है, मैं विश्वास नहीं कर सकी। इस ख़बर ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। लेकिन जल्द ही मैंने अपने आत्मविश्वास को समेटकर अपने को मज़बूत किया। मैं जानती थी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा...!’
लेकिन पहली बार हुआ कि वो भविष्य के अँधेरों से जीत नहीं पाई।
18 नवम्बर, 2018 को अनन्या कैंसर से अपनी लड़ाई हार गईं। लेकिन अनन्या जीवित हैं, दोस्तों-परिवार की उन ख़ूबसूरत यादों में जिन्हें वे उनके लिए छोड़ गई हैं। साथ ही, डायरी के उन पन्नों में जो कैंसर की लड़ाई में उनके साथी रहे।
यह किताब कैंसर की अँधेरी लड़ाई में एक रोशनी की तरह है (कमरे की खिड़की पर बैठे गंदे कौवे की तुलना अपने एकदम साफ़, बिना बालों के सर से करना), एक कैंसर के मरीज़ के लिए कौन सा गिफ़्ट उपयोगी है ऐसी सलाह देना (जैसे रसदार मछली भात के साथ कुछ उतनी ही स्वादिष्ट कहानियाँ एक अच्छा उपहार हो सकती हैं), साथ ही एक कैंसर मरीज़ का मन कितनी दूर तक भटकता है (जैसलमेर रोड ट्रिप और गंडोला–एक तरह के पारम्परिक नाव–में बैठ इटली के ख़ूबसूरत, पानी में तैरते हुए, शहर वेनिस की सैर)।
‘ठहरती साँसों के सिरहाने से’ किताब उम्मीद है, हिम्मत है। यह किताब सुबह की चमकती, गुनगुनाती धूप की तरह ताज़गी से भरी हुई है जो न केवल कैंसर से लड़ते मरीज़ के लिए बल्कि हम सभी के लिए जो अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़ते आए हैं, कभी न हार माननेवाली उम्मीद की किरण है।
‘शरीर के अन्दर बीमारी से लड़ना किसी अँधेरी गुफ़ा के भीतर घुसते जाना है, इस विश्वास के साथ कि इसका अन्तिम सिरा रौशनी से भरा होगा। काश, मैं अनन्या से मिलकर उन्हें बता सकता कि उन्होंने कितनी ख़ूबसूरती से कैंसर से लड़ाई की कहानी इस किताब में लिखी है ।’
—युवराज सिंह
APRATIM NAYAK DR. SYAMA PRASAD MOOKERJEE (PB)
- Author Name:
Tathagat Roy
- Book Type:

- Description: डॉ. श्यामाप्रसाद मुकर्जी (1901-1953) सर आशुतोष मुकर्जी के द्वितीय पुत्र एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी ही नहीं, एक महान् शिक्षाविद्, देशभक्त, राजनेता, सांसद, अदम्य साहस के धनी और सहृदय मानवतावादी थे। बावन वर्षों से भी कम के जीवनकाल में और उसमें से भी राजनीति में सिर्फ चौदह साल में वे स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुँचे; जिसे उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में हुए अल्पसंख्यक हिंदुओं के नरसंहार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से गंभीर मतभेद होने पर ठुकरा दिया। इससे पहले वे जिन्ना के पाकिस्तान से छीनकर बनाए गए पश्चिम बंगाल और पूर्वी पंजाब के अस्तित्व में आने के पीछे एक सक्रिय ताकत रहे। कैबिनेट मंत्री के पद को ठुकराने के बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसकी परिणति आज की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रूप में हुई। यह पुस्तक भलीभाँति शोध की हुई मातृभूमि के उस महान् सपूत की समग्र जीवनी है, जो उनके प्रेरणादायी जीवन का ज्ञान कराती है।
Rameswaram Se Rashtrapati Bhavan Tak
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
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- Description: यह पुस्तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कलाम के समय पर भी प्रकाश डालती है, एक ऐसी अवधि, जिसके दौरान उन्होंने एक विकसित और समृद्ध भारत के अपने दृष्टिकोण से राष्ट्र को प्रेरित करना जारी रखा। पूरी पुस्तक द्वारा पाठकों को कलाम के व्यक्तित्व, उनके मूल्यों और उनकी मान्यताओं के बारे में अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। यह पुस्तक उन लोगों के व्यापक शोध और साक्षात्कार पर आधारित है, जो कलाम को व्यक्तिगत रूप से जानते थे, जिनमें उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों को शामिल किया गया था। हमें आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को कलाम के पदचिन्हों पर चलने और एक बेहतर, अधिक समृद्ध और अधिक समावेशी भारत बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करेगी। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि यह भारत के महानतम सपूतों में से एक और एक सच्चेदूरदर्शी के लिए उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी।
Sunhu Tat Yah Akath Kahani
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

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Description:
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।
कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।
इस पुस्तक में शिवानी की आत्मवृत्तात्मक ‘सुनहु तात यह अकथ कहानी’ और ‘सोने दे’ शीर्षक के लेख शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।
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