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Ravindra Gita

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भगवान् श्रीकृष्ण संपूर्ण सृष्टि के सबसे बड़े आकर्षण, सबसे बड़े सम्मोहन और सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। इन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण का दिव्य वचनामृत है—‘श्रीमद्भगवद्गीता’। यह भगवान् श्रीकृष्ण का परम आदेश, परम निर्देश तो है ही, साथ ही यह संपूर्ण मानवता का परम उपयोगी संविधान भी है। चूँकि ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ जीवमात्र के लिए परम उपयोगी और संपूर्ण मानवता के लिए एक संविधानस्वरूप है, इसलिए इस महाउपयोगी महाग्रंथ का सरल और सर्वग्राही होना परम आवश्यक है। ‘रवीन्द्र गीता’ भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा उपदेशित मूल श्रीमद्भगवद्गीता का सरल हिंदी पद्यानुवाद है। सरस्वती-पुत्र, परम संगीत-साधक, विलक्षण सृजन प्रतिभा के धनी रवींद्र जैनजी ने संगीत की सेवा से संपूर्ण विश्व में ईश्वर की महिमा और भक्ति-भावना को एक नई ऊँचाई, एक नया स्वरूप, एक नया आकर्षण दिया। ‘रामायण’, ‘श्रीकृष्ण’, ‘जय हनुमान’ जैसे अनेकानेक पौराणिक विषयों को ग्रंथों से निकालकर संगीत और स्वर से सजाकर जनसामान्य तक सरलता, व्यापकता और पूरी सफलता के साथ पहुँचाया। यह कृति योगेश्वर श्रीकृष्ण के शाश्वत संदेश को जनमानस तक पहुँचाकर समाज में सकारात्मकता और सद्मूल्यों को विकसित करे, तो इसका लेखन तथा प्रकाशन सार्थक होगा।

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भगवान् श्रीकृष्ण संपूर्ण सृष्टि के सबसे बड़े आकर्षण, सबसे बड़े सम्मोहन और सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। इन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण का दिव्य वचनामृत है—‘श्रीमद्भगवद्गीता’। यह भगवान् श्रीकृष्ण का परम आदेश, परम निर्देश तो है ही, साथ ही यह संपूर्ण मानवता का परम उपयोगी संविधान भी है।
चूँकि ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ जीवमात्र के लिए परम उपयोगी और संपूर्ण मानवता के लिए एक संविधानस्वरूप है, इसलिए इस महाउपयोगी महाग्रंथ का सरल और सर्वग्राही होना परम आवश्यक है।
‘रवीन्द्र गीता’ भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा उपदेशित मूल श्रीमद्भगवद्गीता का सरल हिंदी पद्यानुवाद है।
सरस्वती-पुत्र, परम संगीत-साधक, विलक्षण सृजन प्रतिभा के धनी रवींद्र जैनजी ने संगीत की सेवा से संपूर्ण विश्व में ईश्वर की महिमा और भक्ति-भावना को एक नई ऊँचाई, एक नया स्वरूप, एक नया आकर्षण दिया। ‘रामायण’, ‘श्रीकृष्ण’, ‘जय हनुमान’ जैसे अनेकानेक पौराणिक विषयों को ग्रंथों से निकालकर संगीत और स्वर से सजाकर जनसामान्य तक सरलता, व्यापकता और पूरी सफलता के साथ पहुँचाया।
यह कृति योगेश्वर श्रीकृष्ण के शाश्वत संदेश को जनमानस तक पहुँचाकर समाज में सकारात्मकता और सद्मूल्यों को विकसित करे, तो इसका लेखन तथा प्रकाशन सार्थक होगा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
200 grams
ISBN-13
9789355210043
Pages
152
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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