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Arun RohankarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
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कहानियों के माध्यम से जीवन के अनेक अनोखे पहलुओं को नाटकीय और रोचक ढंग से प्रस्तुत करना लेखक के लिए एक सुखद अनुभव होता है। ये कहानियाँ न केवल पाठकों का मनोरंजन करती हैं, बल्कि उन्हें सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं। इस संग्रह की कई कहानियाँ विशिष्ट अनुभूतियाँ प्रदान करती हैं। वे कभी मानव जीवन के विविध रूपों को उजागर करती हैं तो कभी हमारे आसपास की दुनिया के रहस्यों की झलक दिखाती हैं। हर कहानी अपने आप में विशिष्ट है- चाहे वह किसी अप्रत्याशित मोड़ की बात हो, किसी गहरी व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि का खुलासा हो या फिर ऐसी दुनिया की झलक हो, जिसकी हमने कल्पना तक न की हो। जैसे-जैसे आप 'लॉटरी टिकट एवं अन्य कहानियाँ' के इस संग्रह में यात्रा करेंगे, जीवन के आपको विविध रंगों का दिग्दर्शन होगा। आशा है, ये कहानियाँ आपके हृदय से संवाद करेंगी और अंतिम पृष्ठ पलटने के बाद भी आपके मन पर गहरी छाप छोड़ेंगी। संभव है कि इनमें आपको ऐसे पात्र मिलें, जो आपको स्वयं की या किसी ऐसे व्यक्ति की याद दिलाएँ, जिन्हें आप जानते हैं।
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कहानियों के माध्यम से जीवन के अनेक अनोखे पहलुओं को नाटकीय और रोचक ढंग से प्रस्तुत करना लेखक के लिए एक सुखद अनुभव होता है। ये कहानियाँ न केवल पाठकों का मनोरंजन करती हैं, बल्कि उन्हें सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं। इस संग्रह की कई कहानियाँ विशिष्ट अनुभूतियाँ प्रदान करती हैं। वे कभी मानव जीवन के विविध रूपों को उजागर करती हैं तो कभी हमारे आसपास की दुनिया के रहस्यों की झलक दिखाती हैं।
हर कहानी अपने आप में विशिष्ट है- चाहे वह किसी अप्रत्याशित मोड़ की बात हो, किसी गहरी व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि का खुलासा हो या फिर ऐसी दुनिया की झलक हो, जिसकी हमने कल्पना तक न की हो।
जैसे-जैसे आप 'लॉटरी टिकट एवं अन्य कहानियाँ' के इस संग्रह में यात्रा करेंगे, जीवन के आपको विविध रंगों का दिग्दर्शन होगा। आशा है, ये कहानियाँ आपके हृदय से संवाद करेंगी और अंतिम पृष्ठ पलटने के बाद भी आपके मन पर गहरी छाप छोड़ेंगी। संभव है कि इनमें आपको ऐसे पात्र मिलें, जो आपको स्वयं की या किसी ऐसे व्यक्ति की याद दिलाएँ, जिन्हें आप जानते हैं।
Book Details
-
ISBN9789355717894
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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हम लोग अपनी शैक्षिक योग्यता प्रमाणित कर चुके हैं। जवान हैं, मेहनत कर सकते हैं। कोई कमी नहीं है, किंतु आपकी महान् व्यवस्था हमारे लिए दैनिक मजूर के बराबर वेतन का भरोसा भी तो हमें नहीं दे पाती। हम क्या करें अपनी योग्यता का? हम क्या करें अपनी ऊर्जा का? क्या करें अपने खौलते लहू का? और अपने उबलते हुए गुस्से का क्या करें? हमारे साथ पढ़नेवाले फिसड्डी लड़के पाँच सितारा जिंदगी जी रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि वे किसी मंत्री के बेटे हैं या आई.ए.एस. अफसर के दामाद हैं या बड़े तस्कर के सपूत हैं!’ ‘जिन्होंने हमें पहचाना, हमारे माथे पर लगा बेरोजगार का दाग पोंछ दिया, हमें बीस, तीस, कभी-कभी चालीस हजार रुपए महीने तक वेतन देते हैं, वे कौन हैं, हम नहीं जानते? जानने की उत्सुकता न रखना ही हमारी ‘योग्यता’ है। आपकी न्याय-व्यवस्था देश को बेचकर स्विस बैंक भरनेवालों को गंदा नहीं कहती। भूख से बिलबिलाता बच्चा होटल से रोटी चुराकर खा ले तो उसके लिए जेल की सजा है और देश को हर तरह से लूटनेवालों के लिए है सार्वजनिक अभिनंदन-समारोह।’ —इसी संग्रह से ‘अपहरण’ की कहानियाँ समाज में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक असमानता, कुरूपता और विसंगतियों को तो उजागर करती ही हैं, साथ ही राजनीति, चुनाव और मानवीय संबंधों का गहराई से विश्लेषण करती हैं। पठनीयता से भरपूर सुरुचिपूर्ण कहानियाँ।
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