Drishti
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Author:
Ravindra KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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कविता अनुभूतियों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। जब से मानव ने अव्यक्त को अनुभव करना सीखा, तभी से उन विचारों के संप्रेषण हेतु कविता ने जन्म लिया होगा। ‘दृष्टि’ में प्रस्तुत कविताएँ शिक्षित-अशिक्षित, विकसित-अविकसित मानस के लिए यथार्थ के दर्पण सदृश हैं। ये कविताएँ पारंपरिक होते हुए भी लीक से बँधी हुई नहीं हैं। ‘परिवार’ कविता वर्तमान परिस्थितियों से जूझते व बिखरते हुए परिवार की तसवीर है तो ‘नींद’ कविता धन, वैभव एवं संपत्ति की प्राप्ति के पश्चात भी मानव-मन की अशांति का बिंब दरशाती है। ‘हँसने की कोशिश’ जीवटता का संदेश देती हुई सदैव प्रसन्न रहने की प्रेरणा देती है। ‘थाना दिवस’ कविता भावुक हृदय का करुण-क्रंदन है; वैश्विक महामारी की बलि चढ़े हुए एक वृद्ध की विधवा की जिले के मुखिया से की गई एक हृदयविदारक याचना है, जिसमें वह विलाप करती हुई अपने एकमात्र अवलंब, अपने पति को खोजने की फरियाद करती है। यह कविता एक प्रशासक की वेदना है, जो साधन-संपन्न व सक्षम होने के बावजूद कभी-कभी स्वयं को असहाय महसूस करता है। इस संग्रह की सभी कविताएँ कर्तव्य, दायित्व और नैतिक आचरण की ओर पाठकों को उन्मुख करती हैं।
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कविता अनुभूतियों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। जब से मानव ने अव्यक्त को अनुभव करना सीखा, तभी से उन विचारों के संप्रेषण हेतु कविता ने जन्म लिया होगा।
‘दृष्टि’ में प्रस्तुत कविताएँ शिक्षित-अशिक्षित, विकसित-अविकसित मानस के लिए यथार्थ के दर्पण सदृश हैं। ये कविताएँ पारंपरिक होते हुए भी लीक से बँधी हुई नहीं हैं। ‘परिवार’ कविता वर्तमान परिस्थितियों से जूझते व बिखरते हुए परिवार की तसवीर है तो ‘नींद’ कविता धन, वैभव एवं संपत्ति की प्राप्ति के पश्चात भी मानव-मन की अशांति का बिंब दरशाती है। ‘हँसने की कोशिश’ जीवटता का संदेश देती हुई सदैव प्रसन्न रहने की प्रेरणा देती है। ‘थाना दिवस’ कविता भावुक हृदय का करुण-क्रंदन है; वैश्विक महामारी की बलि चढ़े हुए एक वृद्ध की विधवा की जिले के मुखिया से की गई एक हृदयविदारक याचना है, जिसमें वह विलाप करती हुई अपने एकमात्र अवलंब, अपने पति को खोजने की फरियाद करती है। यह कविता एक प्रशासक की वेदना है, जो साधन-संपन्न व सक्षम होने के बावजूद कभी-कभी स्वयं को असहाय महसूस करता है।
इस संग्रह की सभी कविताएँ कर्तव्य, दायित्व और नैतिक आचरण की ओर पाठकों को उन्मुख करती हैं।
Book Details
-
ISBN9789390372386
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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