BPSC Mains - Bihar Lok Seva Ayog Mukhya Pariksha Solved Papers (Paper I & II 67th Se 48th) Sanyukt Pareeksha
Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 236
₹
295
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789354886157
Pages: 220
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bihar Polytechnic Combined Entrance Exam (BCECE Polytechnic Entrance Competitive Exam 10 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aaj Bhi Khare Hain Talab
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SSC CGL Combined Graduate Level Tier-I & Tier II (Include Latest Solved Question Papers) Guide Book Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ek Sainik Ka Atmachintan
- Author Name:
A.K. Vidyarthi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rashtriya Aarakshan Neeti Aur Aligarh Muslim Vishwavidyalaya
- Author Name:
Ishwar Sharan Vishwakarma
- Book Type:

- Description: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है, किंतु दुर्भाग्य से इसकी स्थापना से लेकर आज तक इस बात को लेकर विवाद है कि क्या यह अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है? वास्तव में इसकी स्थापना से लेकर संविधान सभा, संसद और न्यायपालिका ने सदैव इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय स्वीकार किया; साथ ही इसके संस्थापकों ने भी इस बात को हमेशा माना कि यह देश के सभी वर्गो धर्मो के लिए बना है। इस पुस्तक की रचना के पीछे भी यही उद्देश्य है कि चूँकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भारत राष्ट्र की धरोहर है, अतः केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण इस विश्वविद्यालय में भी राष्ट्र आरक्षण नीति के तहत SC/ST/OBCs को आरक्षण मिले तथा राष्ट्र निर्माण तथा सामाजिक न्याय की प्रक्रिया में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में मिलनेवाला SC/ST/OBCs आरक्षण, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में भी मिले, यही इस पुस्तक का वैचारिक अधिष्ठान है।
Trivendra : Ek Zindaginaama
- Author Name:
Dr. Nandan Singh Bisht "Vishw"
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Loksanskriti Mein Rashtravad
- Author Name:
Badri Narayan
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘लोकसंस्कृति में राष्ट्रवाद’ में शोध को एक ढाँचा प्रदान करने के लिए तीन लोक-कवियों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है जो लोक-चेतना के तीन कालखंडों में प्रतिनिधि हैं। लोकसंस्कृति के कुछ अन्य रूपों का उपयोग इतिहास लेखन और लोकसंस्कृति में किया गया है। इसमें सन् 1857 के ग़दर की झलक भी शामिल है। लोकसंस्कृति को समय में बाँधने के कारण इस अध्ययन की कई सीमाएँ बन गई हैं।
पुस्तक में अन्तःअनुशासनिक तकनीकों एवं प्रविधियों का उपयोग किया गया है। इसमें मौखिक इतिहास की उपलब्ध प्रविधि को विकसित करने का प्रयास है। पुस्तक छह खंडों में विभाजित है—‘राष्ट्रवाद का प्रमेय’, ‘इतिहास-लेखन और लोकसंस्कृति’, ‘रचना-काल (1857 से 1900 ई.) : लोक-सजगता एवं सुखदेव भगत की संघटना का वृत्तान्त’, ‘विरचना-काल (1900-1920 ई.) : लोकसंस्कृति में स्वीकार और बहिष्कार : निर्धिनराम की गाथा’, ‘पुनर्रचना-काल (1920-1947 ई.) : लोकचेतना की क्रियात्मक क्षमता का पुनर्निर्माण और कवि कैलाश का सन्दर्भ’ तथा ‘निष्कर्ष’।
पुस्तक निश्चय ही पठनीय और संग्रहणीय है।
Angreji Raj Aur Hindi Ki Pratibandhit Patrakarita
- Author Name:
Santosh Bhadoria
- Book Type:

- Description: पेशे से प्राध्यापक संतोष भदौरिया ने ब्रिटिश काल के मीडिया पर बेहद महत्वपूर्ण अनुशीलन प्रस्तुत किया है। उनकी किताब पढ़ते हुए आज के पाठक जान सकेंगे कि पराधीन भारत में किस तरह शब्दों पर पहरे बिठा दिए जाते थे। किस तरह पत्रिकाओं को प्रतिबंधित किया जाता था और प्रतिबंधों के बावजूद किस तरह तत्कालीन पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाया और स्वाधीनता संग्राम में हिस्सेदारी के लिए आम जनता को प्रेरित किया। संतोष ने उन अखबारों-पत्रिकाओं के तेवर, रुझान और प्रतिबद्धता का गंभीर अध्ययन किया है, जिन पर ब्रिटिश शासनकाल में प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। क्या आज के नए पत्रकारों को पता है कि 1907 में इलाहाबाद से निकले 'स्वराज साप्ताहिक' के आठ- आठ संपादकों को जेल हुई। एक संपादक जेल जाता तो दूसरा संपादक आता। इसी तरह के कई तथ्यों का पता संतोष भदौरिया की किताब से चलता है। प्रकारान्तर से संतोष की किताब पराधीनता के उस काले दौर में हिंदी पत्रकारिता के संघर्ष का लेखा-जोखा भी है तो वहीं देश की आजादी की लड़ाई में प्रतिबंधित पत्र-पत्रिकाओं के अवदान को भी सामने लाती है। इन कृतियों से आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता के योगदान का भी पता चलता है। संतोष पत्रकारिता के इतिहास के अन्यतम अध्येता और विशेषज्ञ हैं। वे विचारों से प्रगतिशील हैं। उनके साहित्य में सुसंगत इतिहास बोध और इतिहास दृष्टि है, इसी कारण वे मूल्यवान इतिहास रच सके हैं और पाठकों को भी वे अतीत में उतरने का मौका देते हैं। पत्रकारिता के इतिहास के विद्यार्थियों को संतोष से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि तरह-तरह की किंवदंतियों के घटाटोप को पार कर कैसे तथ्यों और प्रामाणिक सूचनाओं पर आधारित अनुशीलन किया जाता है। - महाश्वेता देवी
Sanskriti : Varchswa Aur Pratirodh
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
‘संस्कृति : वर्चस्व और प्रतिरोध’ भारतीय समाज और संस्कृति के उन सुविधाजनक सवालों से टकराने के क्रम में लिखी गई है, जिनसे बचने का हर सम्भव प्रयास अब तक किया जाता रहा है। संस्कृति पर अमूर्तनों की भाषा में लिखे गए तमाम पोथों से भिन्न यह पुस्तक मोहक आवरणों से ढके छद्म को उद्घाटित करती है। बढ़ता साम्प्रदायिक ज़हर, शोषण के नए तरीक़े, कुर्सी हथियाने के लिए धर्म का सीढ़ी की तरह किया जानेवाला इस्तेमाल, स्त्री-दमन का अनवरत सिलसिला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ जारी होनेवाले फ़तवे, उभरते दलित आन्दोलन को नाकाम करने में लगी अमानुषिक ताक़तें और मानवीय संवेदनातंत्र के निरन्तर छीजते जाने की प्रक्रिया—ये अब हमारे समय की कटु वास्तविकताएँ हैं। ईमानदार रचनाधर्मी मानस ने इन सभी मुद्दों को इस पुस्तक में उठाया है, सरलीकरणों से बचने की सफल कोशिश की है और इन प्रश्नों से जुड़ी प्रचलित प्रगतिशील व्याख्याओं की जाँच भी की है। सुपरिभाषित सांस्कृतिक प्रतीकों को पुरुषोत्तम अग्रवाल ने नई दृष्टि से विश्लेषित करने का प्रयास किया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इसी कारण यह पुस्तक हमारे परम्परागत संस्कारों, स्वीकृत मूल्यों और प्रश्नातीत बना दी गई आस्थाओं को झकझोर देने में समर्थ हो सकेगी।
अपने भाषिक रचाव में यह पुस्तक विशिष्ट है। विचारगत नवीनता भाषा का नया तेवर चाहती है, जिसे डॉ. अग्रवाल ने सघन सर्जनात्मकता में अर्जित किया है। मधुर पदबन्धों के आदी हो चुके लोगों को इसमें ज़रूरी औषधीय कड़वाहट मिलेगी, साथ ही आद्यन्त कवि-सुलभ रससिक्तता भी।
तथाकथित ‘जातिवाद’ के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों की सर्वथा नई व्याख्या और वर्णाश्रम के सांस्कृतिक अर्थ का विचारोत्तेजक रेखांकन इस पुस्तक के तर्क की अपनी विशेषताएँ हैं।
समाज, संस्कृति और सर्जनात्मकता का गतिशील परिप्रेक्ष्य विकसित करने की बौद्धिक बेचैनी से भरपूर यह किताब उन सबके लिए ज़रूरी है, जो भारतीय समाज के अन्तर्निहित वर्चस्वतंत्र से जिरह करना चाहते हैं।
Bharat Ka Ankaha Itihas
- Author Name:
Raghu Hari Dalmia +1
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में आप पढ़ेंगे एक अहिंसक तानाशाह को, जिसने नियमों को हमेशा ताक पर रखा। कहानी कम्युनिज्म के नशे में चूर एक युवा नेता की, जिसने यहाँ तक कह दिया कि “सोवियत की जेलों में रहना बेहतर है, बजाय भारत की किसी फैक्टरी में काम करने से !'' कहानी एक ऐसे संगठन की, जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मान कर भारतीय अस्मिता की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा। साथ ही हम जानेंगे, आखिर कैसे रचा गया खालिस्तान का षड्यंत्र ? कितनी बार हुआ कश्यप की धरती पर उन्हीं के वंशजों का पलायन ? हम बात करेंगे इतिहास के मिथ्याकरण की, जिसमें कपटपूर्ण चालों से झूठ को सच बताया गया। आप पढ़ेंगे एक ऐसे वीर को, जिसके साहस के आगे समुद्र को भी अपनी रफ्तार धीमी करनी पड़ी और फ्रांस जैसे सशक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को त्यागपत्र तक देना पड़ा। आज आवश्यकता है इतिहास के पुनरावलोकन की, ताकि हम स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करनेवाले सच्चे वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें एवं उनसे प्रेरणा लेकर भविष्य की चुनौतियों का हल निकालने का प्रयास करते हुए स्वाधीनता की 100वीं वर्षगाँठ पर भारत को एक विश्वगुरु के रूप में प्रतिस्थापित कर सकें |
Sainik School Pravesh Pareeksha-2023 Kaksha 6 Ke Liye (Sainik School Entrance Exam Book for Class 6 in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nano Technology
- Author Name:
D. D. Ojha
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
Vimarsh-Akaal Me Utsav
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: ‘‘इस साल उपन्यासों में केवल एक किताब उल्लेखनीय है -पंकज सुबीर का उपन्यास ‘अकाल में उत्सव’। यह गाँव और किसान जीवन के दुख-दर्द कहने वाली रचना है। इस उपन्यास को पढ़कर कहा जा सकता है कि किसान जीवन में आजकल सुख कम और दुख ज़्यादा है। इस उपन्यास में एक किसान की आत्महत्या भी है। शासन-प्रशासन द्वारा उस किसान को पागल घोषित कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है।’’ -डॉ. मैनेजर पांडेय (शीर्ष आलोचक) ‘जनसत्ता’ समाचार पत्र में ‘साहित्य इस बरस’ चर्चा के अंतर्गत वर्ष 2016 की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की चर्चा करते हुए।
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Vigyan Practice MCQs (MPTET Science Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
English Seekhen Aur Safal Banen
- Author Name:
Jagdish Narayan Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Paltu Bagh Aur Anya Kahaniyan (Hindi Translation of Collected Short Stories)
- Author Name:
Ruskin Bond
- Book Type:

- Description: वह बहुत पहले की बात है'' “कितना लंबा समय ?'' “पाँच साल पहले की ।'' ''ओह, पाँच साल ! तो पता करो, पता करो।!! “कोई फायदा नहीं। अब उसके पास कोई मूवी कैमरा नहीं है । उसने बेच दिया।'! “बेच दिया,'' किशोर ने ऐसे कहा जैसे मैंने उसे चोट पहुँचा दी, “परंतु तुमने उसे क्यों नहीं खरीदा ? हमें बस सिर्फ एक मूवी कैमरा की ही जरूरत है। फिर हमारा भाग्य बदल जाएगा। मैं फिल्म प्रोड्यूस कर दूँगा, मैं ही निर्देशित कर दूँगा और मैं गाने लिख दूँगा। चार्ली चैपलिन और राज कपूर दोनों एक साथ ।'' “तुमने कैमरा क्यों नहीं खरीदा ?“ “क्योंकि मेरे पास पैसा नहीं था।“ “परंतु हमसे उधार ले लिया होता।“ “अगर तुम इस स्थिति में हो कि धन उधार दे सकते हो तो जाओ एक दूसरा कैमरा खरीद लो ।'' “कभी नहीं। मुझे फिर से किसी समस्या में नहीं पड़ना ।' –इसी पुस्तक से सुप्रसिद्ध कहानीकार रस्किन बॉण्ड के इस कहानी-संग्रह "पालतू बाघ और अन्य कहानियाँ” में बच्चों के बाल मनोविज्ञान को बड़ी बारीकी से उकेरा गया है। कहानियाँ पठनीय हैं और खूब मनोरंजक भी |
Sampoorna Sawasthya ke Liye Yoga
- Author Name:
Dr. Vinod Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BINDO KA LADKA (PB)
- Author Name:
Sharat Chandra Chattopadhyaya
- Book Type:

- Description: इसे वे ही नहीं बल्कि बाहर के लोग भी भूल गए थे कि यादव मुखर्जी और माधव मुखर्जी दोनों सगे भाई नहीं हैं। जाने कितनी तकलीफें उठाकर बेचारे यादव मुखर्जी ने अपने छोटे भाई माधव को कानून की शिक्षा दिलाई थी। बड़ी मेहनत व कोशिशों के बाद कहीं वे धनी-मानी जमींदार की एकमात्र संतान, पुत्री बिंदुवासिनी को अपनी भ्रातृ बहू बनाकर घर में लाए थे। बहू बिंदुवासिनी बहुत ही रूपवती थी, असाधारण सुंदरी। पहले ही दिन जब बहू बिंदुवासिनी अपना बेजोड़ रूप तथा दस हजार रुपयों के प्रामेसरी नोट लेकर घर में आई थी तब बड़ी बहू अन्नपूर्णा की आँखों से आनंद के आँसू लुढ़कने लगे थे। घर में सास-ननद तो थी नहीं। वे ही घर की मालकिन थीं। उसी दिन छोटी देवरानी का मुँह अपने हाथों से ऊपर उठाकर उन्होंने जाने कितने गर्व से पड़ोसिनों के सामने कहा था ‘घर में बहू आवे तो ऐसी! हूबहू लक्ष्मी का रूप।’ मगर दो ही दिनों में उन्हें पता लग गया कि उनका सोचना गलत था। दो ही दिन में सर्वविदित हो गया कि बहू अपने साथ जिस नाप-तौल से रूप व रुपया लाई है उससे कई गुना ज्यादा अहंकार व अभिमान भी साथ लेती आई है। फौरन ही बड़ी बहू ने अपने पति को एक ओर बुलाकर कहा, ‘क्यों जी, क्या रूप और रुपयों की गठरी को ही देखकर बहू को ले आए थे, जाना-पहचाना भी था? यह तो काली नागिन है, नागिन!
Manovigyan Ka Paribhashik Shabdkosh
- Author Name:
Nirmala Sherjang
- Book Type:

-
Description:
शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए शिक्षा के माध्यम को बदलना अनिवार्य है, अंग्रेज़ी के स्थान पर हिन्दी अथवा मातृभाषा का उपयोग नितान्त आवश्यक है। किन्तु इस कार्य में मुख्य कठिनाई मानकित पुस्तकों की है।
यह पुस्तक इसी दिशा में एक प्रयास है। इसमें मनोविज्ञान के हिन्दी पर्यायवाची शब्दों के साथ-साथ उनके सम्बन्ध में संक्षिप्त किन्तु समुचित परिचय भी दिया गया है। इसमें यथासम्भव उन पर्यायवाची शब्दों का उपयोग किया गया है जिन्हें भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है अथवा जो बहुत प्रचलित हो चुके हैं।
यह पुस्तक केवल छात्रों की आवश्यकताओं को ही नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और साहित्य के लेखकों की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर लिखी गई है। मनोविज्ञान का महत्त्व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिनोदिन बढ़ता जा रहा है और इसका प्रभाव साहित्य पर भी बहुत पड़ा है। मनोविज्ञान की पारिभाषिक पदावली से भली-भाँति परिचित न होने से प्रायः मनोवैज्ञानिक शब्दों का भ्रान्तिमय उपयोग हो जाता है। इसी दृष्टिकोण से इस पुस्तक में प्रत्येक शब्द के साथ उसकी धारणा का भी संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
इस कोश के दो भाग हैं—पहले भाग में अंग्रेज़ी के हिन्दी पर्याय तथा उनकी परिभाषा और संक्षिप्त विवरण है। दूसरे भाग में हिन्दी शब्दों के अंग्रेज़ी पर्यायवाची शब्द हैं। हिन्दी शब्द के अर्थ अंग्रेज़ी पर्याय की सहायता से पहले भाग से देखे जा सकते हैं।
Traces Of Indian Culture In Vietnam
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...