Prasad Kavya-Kosh

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जयशंकर प्रसाद ने ब्रजभाषा और हिन्दी में कविताएँ रची थीं। छायावाद के वे श्रेष्ठ कवि और नाटककार हैं; मगर उनकी रचना-यात्रा छायावाद से एक दशक पहले से प्रारंभ हो चुकी थी। प्रसाद का देहांत और छायावाद का ‘युगांत’ लगभग एक साथ घटित हुआ था। छायावाद का अधिकतम प्रतिनिधित्व प्रसाद की रचनाएँ करती हैं।</p> <p>‘कामायनी’, ‘आँसू’, ‘लहर’, ‘झरना’ आदि काव्य-पुस्तकों के साथ उनके नाटकों के गीतों को मिलाकर उनके कवि-व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता रहा है। प्रसाद का ब्रजभाषा काव्य उनके काव्य-संस्कार की बुनियाद को बनाता है और नाटकों के गीतों में इतिहास-सम्मत भावजगत बिखरा हुआ है। इस प्रभूत काव्य-संसार में शब्दों और पदबंधों की विविधता भरी-सजी है।</p> <p>जयशंकर प्रसाद की समस्त काव्य-कृतियों में प्रयुक्त शब्दों और पदबंधों के आधार पर 'प्रसाद काव्य-कोश' का निर्माण किया गया है। प्रसाद के शब्द-प्रयोगों से जुड़ी काव्य-पंक्तियों को एक साथ पढ़कर अलग ढंग का आनंद आता है और उसके अर्थ की विभिन्न छायाओं को जानकर महसूस होता है कि हिन्दी की काव्य-भाषा कितनी समृद्ध है! प्रसाद के शब्द-संसार का सम्बन्ध संस्कृत, ब्रज और हिन्दी से भाषिक स्तर पर तो है ही, उनके ज्ञान का दायरा न जाने कितने ढंग के लोक और शास्त्र से जुड़ा है। उनके साहित्य में आया हुआ लोक अनेक कालखंडों से सम्बद्ध है। इन सब का प्रभाव उनके शब्द-संसार के वैविध्य और विस्तार पर पड़ा है।</p> <p>गहरी साहित्यिक रुचि को आज भी प्रसाद का काव्य आकर्षित करता है। प्रसाद के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यह कोश अर्थ तक पहुँचने में मददगार होगा।&nbsp;

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ISBN
9788197927157
Pages
344
Avg Reading Time
11 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

जयशंकर प्रसाद ने ब्रजभाषा और हिन्दी में कविताएँ रची थीं। छायावाद के वे श्रेष्ठ कवि और नाटककार हैं; मगर उनकी रचना-यात्रा छायावाद से एक दशक पहले से प्रारंभ हो चुकी थी। प्रसाद का देहांत और छायावाद का ‘युगांत’ लगभग एक साथ घटित हुआ था। छायावाद का अधिकतम प्रतिनिधित्व प्रसाद की रचनाएँ करती हैं।</p>
<p>‘कामायनी’, ‘आँसू’, ‘लहर’, ‘झरना’ आदि काव्य-पुस्तकों के साथ उनके नाटकों के गीतों को मिलाकर उनके कवि-व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता रहा है। प्रसाद का ब्रजभाषा काव्य उनके काव्य-संस्कार की बुनियाद को बनाता है और नाटकों के गीतों में इतिहास-सम्मत भावजगत बिखरा हुआ है। इस प्रभूत काव्य-संसार में शब्दों और पदबंधों की विविधता भरी-सजी है।</p>
<p>जयशंकर प्रसाद की समस्त काव्य-कृतियों में प्रयुक्त शब्दों और पदबंधों के आधार पर 'प्रसाद काव्य-कोश' का निर्माण किया गया है। प्रसाद के शब्द-प्रयोगों से जुड़ी काव्य-पंक्तियों को एक साथ पढ़कर अलग ढंग का आनंद आता है और उसके अर्थ की विभिन्न छायाओं को जानकर महसूस होता है कि हिन्दी की काव्य-भाषा कितनी समृद्ध है! प्रसाद के शब्द-संसार का सम्बन्ध संस्कृत, ब्रज और हिन्दी से भाषिक स्तर पर तो है ही, उनके ज्ञान का दायरा न जाने कितने ढंग के लोक और शास्त्र से जुड़ा है। उनके साहित्य में आया हुआ लोक अनेक कालखंडों से सम्बद्ध है। इन सब का प्रभाव उनके शब्द-संसार के वैविध्य और विस्तार पर पड़ा है।</p>
<p>गहरी साहित्यिक रुचि को आज भी प्रसाद का काव्य आकर्षित करता है। प्रसाद के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यह कोश अर्थ तक पहुँचने में मददगार होगा।&nbsp;

Book Details

  • ISBN
    9788197927157
  • Pages
    344
  • Avg Reading Time
    11 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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