Bharat Darshan
(0)
₹
149
₹ 123.67 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
भारतीय सिविल सेवाओं की ट्रेनिंग में स्टडी टूर को आम बोलचाल में 'भारत दर्शन' कहते हैं। युवा आई.ए.एस. अधिकारी निशान्त जैन ने इस किताब में अपनी ट्रेनिंग के दौरान 45 दिन के इस भारत दर्शन में 18 राज्यों की अनूठी यात्रा के अपने अनुभवों को उकेरने की कोशिश की है। इसमें न सिर्फ़ भारत की एक साफ़ तस्वीर उभरती है बल्कि एक भावी युवा प्रशासक की जिज्ञासा और अन्तर्दृष्टि भी दिखाई पड़ती है। यात्रा की विवरणात्मक ढंग से चलती कहानी भावनात्मक प्रवाह में अनेकशः काव्यमय हो गयी है। निशान्त जैन निशान्त जैन युवा लेखक व प्रशासक हैं। वह 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक के साथ सफल होकर हिंदी मीडियम टॉपर बने। उनका जन्म मेरठ के एक साधारण परिवार में हुआ। मेरठ कॉलेज से एम.ए. और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.फिल. के बाद लोक सभा सचिवालय में दो साल नौकरी भी की। वहीं रहते हुए वह आई.ए.एस. में चयनित हुए। तत्पश्चात सेवा में रहते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर हिन्दी और अंग्रेजी में उनकी कई किताबें काफी लोकप्रिय रही हैं। वह 2015 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी हैं और राजस्थान में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
Read moreAbout the Book
भारतीय सिविल सेवाओं की ट्रेनिंग में स्टडी टूर को आम बोलचाल में 'भारत दर्शन' कहते हैं। युवा आई.ए.एस. अधिकारी निशान्त जैन ने इस किताब में अपनी ट्रेनिंग के दौरान 45 दिन के इस भारत दर्शन में 18 राज्यों की अनूठी यात्रा के अपने अनुभवों को उकेरने की कोशिश की है। इसमें न सिर्फ़ भारत की एक साफ़ तस्वीर उभरती है बल्कि एक भावी युवा प्रशासक की जिज्ञासा और अन्तर्दृष्टि भी दिखाई पड़ती है। यात्रा की विवरणात्मक ढंग से चलती कहानी भावनात्मक प्रवाह में अनेकशः काव्यमय हो गयी है। निशान्त जैन निशान्त जैन युवा लेखक व प्रशासक हैं। वह 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक के साथ सफल होकर हिंदी मीडियम टॉपर बने। उनका जन्म मेरठ के एक साधारण परिवार में हुआ। मेरठ कॉलेज से एम.ए. और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.फिल. के बाद लोक सभा सचिवालय में दो साल नौकरी भी की। वहीं रहते हुए वह आई.ए.एस. में चयनित हुए। तत्पश्चात सेवा में रहते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर हिन्दी और अंग्रेजी में उनकी कई किताबें काफी लोकप्रिय रही हैं। वह 2015 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी हैं और राजस्थान में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
Book Details
-
ISBN9789348497192
-
Pages114
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age0-11 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Mahatirth Ke Kailasbaba
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
तिब्बत की रहस्यमयी भैरवी माताजी के निर्देश पर कैलासबाबा की खोज में मैं गया था चौरासी महासिद्ध श्मशान और फिर पार किया पाप-परीक्षा-पत्थर। पुण्यभूमि शिवस्थल, कैलासनाथ के चरण-कमल में बैठकर चित्ताकाश में पाया था नर्मदा नाम, किन्तु हाय, गँदले मन की स्थिरता के अभाव में उस महासत्य को न जान पाया। इशारा पाने के बावजूद आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में मन में आए उस आकस्मिक विचार को पकड़कर नहीं रख पाया। मेरी राय में ज्ञानगंज के एक भिखारी लामा ही ज्ञानीगुरु थे, जिन्होंने मुझे देखते ही मन्तव्य दिया था कि मेरा मन ही है 'गँदला पानी'। शिवस्थल के स्थान माहात्म्य के प्रभाव में चित्ताकाश के नर्मदा नाम को मैं प्रश्रय न दे पाया। दरअसल सत्य को पकड़कर रखने की क्षमता मुझमें नहीं थी। इसके बाद देखते-देखते गुज़र गए दो साल। मैं भले ही भूल जाऊँ पर काल की पोथी में अंकित था मेरा प्राप्य। सन् 2009 में मिल गया 'दर्शन'—मिट गईं सारी इच्छाएँ। महातीर्थ के वही कैलासबाबा वर्तमान में परमपूज्य कायकल्पी बर्फ़ानी दादाजी हैं। उन्हीं की कृपा से प्रकाशित हुई है यह पुस्तक 'महातीर्थ के कैलासबाबा'।
—भूमिका से
Uttar Ki Yatrayen
- Author Name:
Matsuo Basho
- Book Type:

-
Description:
‘जापानी महाकवि बाशो उन बिरले कवियों में से हैं जिनकी कविता का अनुवाद शायद संसार की हर छोटी-बड़ी भाषा में हुआ है। हाइकू नामक विधा का ज़िक्र आते ही प्राय: सभी रसिकों को जो पहला नाम याद आता है वह बाशो का है। बाशो जितने बड़े और अविराम कवि थे उतने ही अथक यात्री भी। उनका यह यात्रा-वृत्त अपने क़िस्म का अनोखा है। वरिष्ठ कवि सुरेश सलिल ने बहुत मनोयोग और कल्पनाशीलता से इसे अंग्रेज़ी से अनूदित किया है। उन्होंने बहुत जतन से यथास्थान सन्दर्भ के नोट्स भी दिए हैं जिनसे स्थानों, कवियों, राजवंशों आदि का पता भी होता चलता है। रज़ा पुस्तक माला में एक महाकवि का यात्रा-वृत्त बहुत अच्छे हिन्दी अनुवाद में प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।’
—अशोक वाजपेयी।
O Fakira Maan Ja
- Author Name:
Dayashankar Shukla Sagar
- Book Type:

-
Description:
मन यायावर हो और तन की मजबूरी हो कि एक जरूरी रूटीन से खुद को बाँधे रखे तो यह एक दुखद विडम्बना है। लेकिन कहते हैं कि मन अगर अपनी कामनाओं के पार फैलता ही रहे, इच्छा हर रोज और बलवती होती जाए तो राहों की रुकावटों को भी राह आखिर देनी ही पड़ती है।
ये यात्राएँ ऐसे ही यायावर की हैं जिन्हें एक के बाद एक संयोगों ने वह दिया जो उनकी आत्मा चाहती थी यानी सफ़र, घुमक्कड़ी और अब वे यहाँ, इस किताब में, एक चितेरे यात्रावृत्तकार के रूप में उपस्थित हैं। जो उन्होंने देखा, जिनसे वे गुजरे उन्हें उतने ही जीते-जागते स्वरूप में हमारे सामने शब्दों में उकेरते हुए।
एशिया, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न देशों की ये यात्राएँ सिर्फ पर्यटन-स्थलों का विवरण नहीं हैं, इतिहास, संस्कृति, समाज, साहित्य और राजनीति का पसमंजर इन वृत्तान्तों को एक सजीव, बहुआयामी लैंडस्केप बनाता है। पता ही नहीं चलता कि पढ़ते-पढ़ते आप कब इन अदेखी गलियों में टहलने लगे जो लेखक के भीतर अब भी अपने शोर और सन्नाटों के साथ जीवित हैं।
फ्रांस के राजा की सजा-ए-मौत, नेपोलियन की प्रेमिकाएँ, काफ्का की चिट्ठियाँ, अफ्रीकी नागरिकता वाले अपने को हिन्दुस्तानी बतानेवाले अफ्रीकी, चीन के मकाऊ के जुआघर, अमेरिका के कभी रिटायर न होने वाले और अस्सी से पहले सीनियर सिटीजन नहीं कहलाने वाले लोग, और इन सबको दर्ज करता एक भारतीय मन! इस सफरनामे को पढ़ना एक जीवन्त अनुभव से गुजरना है।
Sud Me Harsud
- Author Name:
Vasant Sakargaye
- Rating:
- Book Type:

- Description: travel
Darra-Darra Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description: — ‘दर्रा-दर्रा हिमालय’ एक परिवार की हिमालय पर घुमक्कड़ी का वृत्तान्त है। ऐसा परिवार जो फ़ुर्सत के क्षणों में विदेशों की सैर के बजाय बर्फ़ ढँके इन पहाड़ों को वरीयता देता है। इंदौर के अजय सोडानी को हिमालय की सर्द, मनोहारी और जानलेवा वादियों से गहरा अनुराग है। काल्पनिक से लगनेवाले सौन्दर्यशाली पहाड़ों पर सपरिवार चढ़ाई और बर्फ़ के गगनचुम्बी शिखरों को दर्रा-दर्रा महसूस करने के दौरान प्रकृति के मनोरम स्पर्श से भीगे तन-मन कई बार मौत के मुक़ाबिल भी रहे, लेकिन ज़िन्दगी के पन्ने पर हौसले की स्याही से साहस की गाथा रचनेवाले मौत की परवाह कहाँ करते। जनश्रुतियों और पौराणिक ग्रन्थों में चर्चित स्थलों और मार्गों की सत्यता को परखने, हिमालय और वहाँ के जनजीवन के विलुप्तप्राय सौन्दर्य को निहारने-समझने की उत्कंठा में क़रीब बीस हज़ार फ़ीट की ऊँचाई वाले कालिंदी खाल पास को लाँघते हुए भी मौत का भय बर्फ़ की तरह पिघलता रहा। हिमालय की घाटियों में विचरती वायु में जाने ऐसा क्या था कि अजय बार-बार वहाँ लौटे और हर बार हिमालय की दी हुई एक नई चुनौती को स्वीकार किया। 'दर्रा-दर्रा हिमालय' अपनी राष्ट्रीय धरोहरों और प्रतीकों के प्रति अनुरक्ति वाले मानस की साहसिक यायावरी की गाथा तो कहती ही है, साथ ही रोज़-ब-रोज़ बढ़ती प्रदूषण की समस्या और पर्यावरण संरक्षण पर उसकी चिन्ता से भी रू-ब-रू कराती है।
Aap Biti-Jag Biti
- Author Name:
Sandeep Bhutoria
- Book Type:

- Description: वास्तव में यात्रा करना और दृष्टि के साथ यात्रा करना, दो भिन्न बातें हैं। हम सभी यात्रा करते हैं, लेकिन कितने ऐसे होते हैं जो हमें सृजनात्मक अभिव्यक्ति का रूप देते हैं या सोद्देश्यपूर्ण बना पाते हैं। जब यात्रा-वृत्तान्त या सफ़रनामा सृजनात्मकता का स्पर्श करता है, तब यह यात्रा साहित्य के जगत में प्रवेश करने लगता है। संक्षेप में, यात्रा-वृत्तान्त परिचित या अपरिचित समाज व क्षेत्र को स्व-अवलोकन के माध्यम से जानने-समझने की एक सृजनात्मक प्रक्रिया है और जिज्ञासा इसकी कुतुबनुमा होती है। युवा जिज्ञासु संदीप भूतोड़िया ने अपनी पहली यात्रा-कथा ‘आपबीती-जगबीती’ में एक सजग व संवेदनशील यात्रा लेखक का परिचय देकर मुझे निःसन्देह चौंकाया है। क़रीब सात-आठ वर्ष पहले कोलकाता में स्व. डॉ. प्रभा खेतान के निवास पर संदीप से संक्षिप्त भेंट हुई थी। उस समय इतना ही बतलाया गया था कि संदीप की रुचि व्यापार में कम है और सामाजिक कार्यों में इनकी सक्रियता रहती है। विभिन्न अन्तरालों से हुई मुलाक़ातों से यह भी पता चला कि संदीप संयुक्त राष्ट्र से सम्बन्धित संस्थाओं से भी सम्बद्ध हैं और अपने कार्य के सिलसिले में देश-विदेश की यात्राएँ अक्सर करते रहते हैं। विभिन्न समाजों और जीवन-शैलियों का क़रीब से अवलोकन करना भी संदीप भूलते नहीं हैं। इस अवलोकन का ही परिणाम है प्रस्तुत पुस्तक। —रामशरण जोशी
Khushhali Ka Panchnama
- Author Name:
Parveen Jha
- Book Type:

- Description: ‘ख़ुशहाली का पंचनामा’ एक यात्रा संस्मरण नही प्रवास संस्मरण है। प्रवास संस्मरण संस्कृति का हिस्सा बन कर लिखा जाता है जबकि यात्रा संस्मरण संस्कृति को बाहर से देखने की क़वायद है। यह पुस्तक मैंने नॉर्वे की संस्कृति के आकलन पर लिखी है। मेरे सामने प्रश्न यह था कि क्या वाक़ई ख़ुशहाली परिभाषित की जा सकती है। नॉर्वे जैसे देश जो सबसे खुशहाल देशों में माने जाते हैं, क्या वे वाक़ई खुशहाल हैं? अगर हैं, तो उनके सूत्र क्या हैं? अगर नहीं हैं, तो आख़िर कहे किस आधार पर जाते हैं? यह डायरी चूँकि एक भारतीय की लिखी है, इस कारण दोनों संस्कृतियों की तुलना भी की गयी है। कई सूत्र एक जैसे हैं, तो कई भिन्न ध्रुवों पर है। उन्हें जानने के लिए यह किताब एक रोचक यात्रा हो सकती है।
Meri Tibbat Yatra
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: स्त्री-जीवन के क़ानूनी पहलू पर विस्तार और प्रामाणिक जानकारी से लिखते हुए अरविन्द जैन ने स्त्री-विमर्श की सामाजिक-साहित्यिक सैद्धान्तिकी में एक ज़रूरी पहलू जोड़ा। क़ानून की तकनीकी पेचीदगियों को खोलते हुए उन्होंने अक्सर उन छिद्रों पर रोशनी डाली जहाँ न्याय के आश्वासन के खोल में दरअसल अन्याय की चालाक भंगिमाएँ छिपी होती थीं। इसी के चलते उनकी किताब ‘औरत होने की सज़ा’ को आज एक क्लासिक का दर्जा मिल चुका है। स्त्री लगातार उनकी चिन्ता के केन्द्र में रही है। बतौर वकील भी, बतौर लेखक भी और बतौर मनुष्य भी। सम्पत्ति के उत्तराधिकार में औरत की हिस्सेदारी का मसला हो या यौन शोषण से सम्बन्धित क़ानूनों और अदालती मामलों का, हर मुद्दे पर वे अपनी किताबों और पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पाठक का मार्गदर्शन करते रहे हैं। ‘बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री’ उनकी नई किताब है जो काफ़ी समय के बाद आ रही है। इस दौरान भारतीय स्त्री ने अपनी एक नई छवि गढ़ी है, और एक ऐसे भविष्य का नक़्शा पुरुष-समाज के सामने साफ़ किया है जिसे साकार होते देखने के लिए शायद अभी भी पुरुष मानसिकता तैयार नहीं है। लेकिन जिस गति, दृढ़ता और निष्ठा के साथ बीसवीं सदी के आख़िरी दशक और इक्कीसवीं के शुरुआती वर्षों में पैदा हुई और अब जवान हो चुकी स्त्री अपनी राह पर बढ़ रही है, वह बताता है कि यह सदी स्त्री की होने जा रही है और सभ्यता का आनेवाला समय स्त्री-समय होगा। इस किताब का आधार-बोध यही संकल्पना है। तार्किक, तथ्य-सम्मत और सद्भावना से बुना हुआ स्त्री के भविष्य का स्वप्न। उनका विश्वास है कि अब साल दर साल देश के तमाम सत्ता-संस्थानों में शिक्षित, आत्मनिर्भर, साधन-सम्पन्न, शहरी स्त्रियों की भूमिका और भागीदारी अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगी। समान अधिकारों के लिए सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष तेज़ होंगे और भविष्य की स्त्री हर क्षेत्र में हाशिये के बजाय केन्द्र में दिखाई देने लगेगी। समानता और न्याय की तलाश में निकली स्त्री अपना सबकुछ दाँव पर लगा रही है। सो भविष्य की स्त्री इन्साफ माँगेगी। सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक इन्साफ़। देह और धरती पर ही नहीं सबकुछ पर बराबर अधिकार।
Smrtiyon Me Ramte Hue
- Author Name:
Dr. Kamal Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Book
Shahargoi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description: Book
Kuchh Idhar Zindagi Kuchh Udhar Zindagi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description: Book
Wah Bhi Koi Des Hai Mahraj
- Author Name:
Anil Yadav
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Roos Mein Pachchis Mas
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘मैं रूस में, जर्मनी की लड़ाई के समाप्त होने के थोड़ी ही देर बाद पहुँचा था। रूस की अन्नदायिका भूमि का बहुत सा भाग जर्मनों के हाथ में चला गया था। लेकिन रूसियों ने ‘अधिक अन्न उपजाओ’ जैसा मज़ाक करके प्रोपेगेंडा पर करोड़ों रुपया बेकार खर्च नहीं किया, बल्कि अन्न उपजाने के लिए नहरों के पानी और खाद की आवश्यकता होती है, इसे समझकर इस ओर पूरा ध्यान दिया।’ राहुल जी के ये शब्द बताते हैं कि रूस की तत्कालीन शासन और सामाजिक व्यवस्था के प्रति उनके मन में कितना प्रशंसा-भाव था। यह उनकी तीसरी रूस यात्रा थी। इस यात्रा-वृत्त में वे सोवियत व्यवस्था को बहुत गहरी उम्मीद के साथ देखते हुए विश्वास जताते हैं कि आज या कल सभी मुल्कों को अपनी समस्याओं का हल इसी रास्ते से मिलेगा जिस पर उस समय रूस चल रहा था, और बाद में चीन भी चला। अच्छी बातों के साथ-साथ उन्होंने उस समय दिखाई पड़ रही ऐसी बातों को लिखने में भी संकोच नहीं किया जिन्हें अच्छा नहीं कहा जा सकता। जीवन के लिए आवश्यक साधारण चीजों का अभाव, दुर्व्यवस्था और कुछ लोगों की अकर्मण्यता पर भी उनकी नज़र जाती है, लेकिन उन्हें फिर भी लगता है कि यह स्थायी नहीं है। जो पाठक तत्कालीन सोवियत संघ को जानने की इच्छा रखते हैं उनके लिए इस पुस्तक में अंकित राहुल जी के ऐतिहासिक महत्व के पर्यवेक्षण बेहद सहायक होंगे।
Prithvi Gandhmayi Tum
- Author Name:
Anurag Chaturvedi
- Book Type:

- Description: ’पृथ्वी गंधमयी तुम’ एक अलग तरह का यात्रा-वृत्त है जिसमें लेखक ने सिर्फ़ यायावर की आँख से नहीं, समाजशास्त्री और वैश्विक अर्थतंत्र के जानकार की तरह भी चीजों को देखा है। इसमें शामिल पन्द्रह यात्राएँ उस समय की हैं जब दुनिया का रूप-रंग और ढाँचा बदलाव से गुज़र रहा था। साम्यवाद और पूँजीवाद की बहस से निकल कर दुनिया एक नए ढंग की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रही थी। अमेरिका और चीन, दो बड़ी ताक़तों के रूप में चर्चित हो रहे थे। उदारवाद, निजीकरण और वैश्वीकरण की प्रक्रिया को लेखक ने कई देशों में जाकर समझा और इस यात्रा-वृत्तान्त में दर्ज किया है। चीन और अमेरिका के साथ जापान, हांगकांग, कैरेबियन देशों, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समाज की अन्दरूनी जानकारी भी इस किताब में है और यूरोप के वर्तमान के साथ-साथ उसके अतीत से साक्षात्कार भी। निस्सन्देह एक बेहद पठनीय और सग्रहणीय किताब!
THE WORLD IS THE NEXT VILLAGE
- Author Name:
Solon Karthak +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: it is a collection of 25 travel tales that talk about his trips around the world.
Door Durgam Durust : Purvgrahon Ke Paar Purvottar Ki Yatra
- Author Name:
Umesh Pant
- Book Type:

- Description: ‘दूर दुर्गम दुरुस्त’ दरअसल पूर्वोत्तर से जुड़ी यात्राओं की एक दस्तावेज़ है। इसे आप एक घुमक्कड़ की मनकही भी कह सकते हैं जो अक्सर अनकही रह जाती है। मुख्यधारा में पूर्वोत्तर की जितनी भी चर्चा होती है, उसमें उसके दुर्गम भूगोल की चीख़-पुकार ही शामिल रहती हैं। यह किताब उनसे विलग उन आहटों को सुनने की कोशिश है जो कहीं दबकर रह जाती हैं। इस किताब में मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर के कुछ हिस्सों में की गई यात्राओं के वृत्तान्त हैं। जगहों और लोगों की कहानियाँ हैं। पूर्वोत्तर में भटकता एक यात्री मन, देखने और सुनने से एक क़दम आगे बढ़कर महसूस करने की ललक में जो कुछ समेट सका है, उसकी शाब्दिक यात्रा है यह किताब!
Hindi Yatra-Sahitya
- Author Name:
Shashi Shekhar Tiwari
- Book Type:

- Description: मनुष्य की सृजनात्मक कृतियों में यात्रा संस्मरणों की बहुमूल्य सहभागिता और अक्षय अवदान को पाश्चात्य साहित्य के साथ - साथ हिन्दी साहित्य में भी स्वीकार किया गया है । किन्तु हिन्दी में , उसे अपेक्षित प्रतिष्ठा नहीं मिली है । निःसन्देह यह अपने बलबूते एक स्वतन्त्र विधा होने का सामर्थ्य रखता है । इसके कई कारणों में एक भारतीयों की आत्ममुग्धाता न होकर , उनका वह जीवन दर्शन है , जिसमें परम देव - सत्ता को ही सब - कुछ मान लिया जाता है । ' सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज , श्रीमद्भगवद्गीता , 18 वाँ अध्याय किन्तु इस महान् देश की चेतना और संवेदना , समस्त सृष्टि में परिव्याप्त सत्यम् शिवम् और सुन्दरम् को भी अपनी स्पन्दित स्मृतियों में सँजोती - सँवारती रही है । फलस्वरूप आधुनिक हिन्दी साहित्य में गद्य का विकास , आवागमन और मुद्रण की सुविधा एवं पत्र पत्रकारिता के प्रसार के साथ भूमण्डलीय सम्पर्क तथा संचार साधनों की वृद्धि के कारण हुआ । इससे , विशेषतः हिन्दी - साहित्य के अन्तर्गत , यात्रा संस्मरण के लेखन - क्षेत्र में निरन्तर अपूर्व सक्रियता दिखायी देती रही है । निःसन्देह हिन्दी का यात्रा - साहित्य भी काल क्रम में हिन्दी का ही नहीं , राष्ट्र की बहुमूल्य निधि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है ।
Afghanistan Se Khat-O-Kitabat
- Author Name:
Rakesh Tiwari
- Book Type:

-
Description:
अफ़ग़ानिस्तान की जो तस्वीरें इधर दशकों से हमारे ज़ेहन में आ-आ कर जमा होती रही हैं, ख़ून, बारूद, खँडहरों और अभी हाल में जहाज़ों पर लटक-लटक कर गिरते लोगों की उन तमाम तस्वीरों का मुक़ाबला अकेला काबुलीवाला करता रहा है, जो हमारी स्मृति की तहों में आज भी अपने ऊँचे कंधों पर मेवों का थैला लटकाए टहलता रहता है।
यह किताब उसी काबुलीवाले के देश की यात्रा है जिसे लेखक ने 1977 के दौरान अंजाम दिया था। तेईस साल की उम्र में बहुत कम संसाधनों और गहरे लगाव के साथ लेखक ने पैदल और बसों में घूम-घाम कर जो यादें इकट्ठा की थीं, इस किताब में उन्हें, तमाम ऐतिहासिक-भौगोलिक जानकारियों, तथ्यों के साथ सँजो दिया है। आज की पृष्ठभूमि में इसे पढ़ना एक अलग तरह का सुकून देता है, और इसे पढ़ना यह जानने के लिए ज़रूरी है कि बीती चार दहाइयों ने दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगहों में एक, अनेक धर्मों की भूमि रहे उस देश से क्या-क्या छीन लिया है।
विश्व की बड़ी सैन्य ताक़तों के ख़ूनी खेल का मोहरा बनने से पहले का यह अफ़ग़ानिस्तान-वर्णन बर्फ़ीली घाटियों, पहाड़ों के बीच मोटे गुदगुदे गर्म कपड़ों में गुनगुनी चाय का प्याला हाथों में दबाए, राजकपूर की फ़िल्मों के गाने सुनने का-सा अहसास जगाता है।
Jahan-Jahan Kadam Pade
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

-
Description:
वर्षों से निलम्बित साहस को बटोरकर, अपने सुरक्षित दैनिक व्यापार के दुष्चक्र को तोड़कर जब हम यात्राओं पर निकलते हैं तो वह सिर्फ बाहर की यात्रा नहीं होती, भीतर की भी होती है; अपने भीतर, अपने आपको नया करने की यात्रा। असीम तक फैले इस विराट संसार से एकमेक होकर स्वयं को एक नवीन रूप में देखने-जानने की यात्रा।
‘जहाँ-जहाँ क़दम पड़े’ पुस्तक में संकलित, वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता के यात्रा-वृत्त इसी अहसास के साथ की गई यात्राओं का विवरण देते हैं। यात्राएँ जिनका आरम्भ उत्सुकता से हुआ, और जो पूर्ण हुईं इस बोध के साथ कि ‘छोटी-छोटी यात्राएँ कभी-कभार हमारी चेतना में दबे अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर’ एक आभा के साथ हमारे सम्मुख रख देती हैं।
अमेरिका, सिंगापुर, डिज्नीलैंड, सी वर्ल्ड, योसिमिटी नेशनल पार्क, पशुपतिनाथ धाम, जगन्नाथ धाम और उनकी अपनी वादी श्रीनगर, कश्मीर के अलावा इस पुस्तक में अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सामंजस्य की कोशिश करते अमेरिकावासी भारतीयों की कथा भी हमारा ध्यान खींचती है।
इन यात्राओं से प्राप्त अपने अनुभव के आधार पर चन्द्रकान्ता सही ही कहती हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने देखे-समझे को जीवन्ततापूर्वक अंकित करना भी एक तरह से इतिहास ही लिखना है, एक ‘जेनुइन इतिहास’, जो उन्होंने इन यात्रा-संस्मरणों में सम्भव किया भी है।
Yatraon Ke Indradhanush
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description: Book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book