Dweetiyonasti
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अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहीन कणों को, मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलाऐं पर गिरते देखा है, बादलों को घिरते देखा है। तुंग हिमालय के कंधों पर छोटी-बड़ी कई झीलें हैं, उनके श्यामल नील सलिल में समतल देशों से आ-आकर पावस की उमस से आकुल तिक्त-मधुर विषतंतु खोजते हंसों को तिरते देखा’’ —नागार्जुन स्फटिक- निर्मल और दर्पन-स्वच्छ, हे हिम-खंड, शीतल औ समुज्जवल, तुम चमकते इस तरह हो, चाँदनी जैसे जमी है या गला चाँदी तुम्हारे रूप में ढाली गई है। —हरिवंशराय बच्चन
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अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है।
छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहीन कणों को,
मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलाऐं पर गिरते देखा है,
बादलों को घिरते देखा है। तुंग हिमालय के कंधों पर
छोटी-बड़ी कई झीलें हैं, उनके श्यामल नील सलिल में
समतल देशों से आ-आकर पावस की उमस से आकुल
तिक्त-मधुर विषतंतु खोजते हंसों को तिरते देखा’’
—नागार्जुन स्फटिक-
निर्मल और दर्पन-स्वच्छ,
हे हिम-खंड, शीतल औ समुज्जवल,
तुम चमकते इस तरह हो, चाँदनी जैसे जमी है
या गला चाँदी तुम्हारे रूप में ढाली गई है।
—हरिवंशराय बच्चन
Book Details
-
ISBN9789350483138
-
Pages124
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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