Fatikchand
(0)
Author:
Satyajit RayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
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फटिकचन्द महान फिल्मकार और बांग्ला साहित्य के अप्रतिम लेखक सत्यजित राय का अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास है। बांग्ला भाषा-भाषी समाज का शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो अपने किशोरवय में इस उपन्यास से न गुजरा हो। कोलकाता के एक सम्पन्न परिवार के लड़के के अपहरण की कहानी उस वक्त नया मोड़ ले लेती जब अपहर्ताओं की कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और वे लड़के को सड़क किनारे बेहोश छोड़कर भाग जाते हैं। बाद में, होश में आने पर लड़के को कुछ याद नहीं आता—न घर का पता, न माता-पिता का नाम। दरअसल दुर्घटना में चोट लगने से उसकी याददाश्त चली जाती है। फिर तो अपने आसपास के हरेक शख्स से एकदम नए सिरे से परिचित होने वाले उस किशोर के सामने एक बिलकुल नई दुनिया खुलती है, जिसमें कोलकाता महानगर की झुग्गी बस्ती का अनदेखा संसार भी शामिल है। अन्तत: याददाश्त बहाल होने और सकुशल घर लौटने तक फटिकचन्द जो कुछ देखता-जानता है, वह उसको ही नहीं, इस उपन्यास के पाठक को भी हमेशा के याद रह जाता है।
Read moreAbout the Book
फटिकचन्द महान फिल्मकार और बांग्ला साहित्य के अप्रतिम लेखक सत्यजित राय का अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास है। बांग्ला भाषा-भाषी समाज का शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो अपने किशोरवय में इस उपन्यास से न गुजरा हो।
कोलकाता के एक सम्पन्न परिवार के लड़के के अपहरण की कहानी उस वक्त नया मोड़ ले लेती जब अपहर्ताओं की कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और वे लड़के को सड़क किनारे बेहोश छोड़कर भाग जाते हैं। बाद में, होश में आने पर लड़के को कुछ याद नहीं आता—न घर का पता, न माता-पिता का नाम। दरअसल दुर्घटना में चोट लगने से उसकी याददाश्त चली जाती है।
फिर तो अपने आसपास के हरेक शख्स से एकदम नए सिरे से परिचित होने वाले उस किशोर के सामने एक बिलकुल नई दुनिया खुलती है, जिसमें कोलकाता महानगर की झुग्गी बस्ती का अनदेखा संसार भी शामिल है। अन्तत: याददाश्त बहाल होने और सकुशल घर लौटने तक फटिकचन्द जो कुछ देखता-जानता है, वह उसको ही नहीं, इस उपन्यास के पाठक को भी हमेशा के याद रह जाता है।
Book Details
-
ISBN9788189850296
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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प्रवीण झा विविध रुचि के लेखक हैं, जिनकी हर पुस्तक अलग ही फ़्लेवर है। उनकी चर्चित पुस्तक ‘कुली लाईंस’ (वाणी प्रकाशन) गिरमिटिया इतिहास पर गंभीर शोध है, वहीं ‘वाह उस्ताद’ (राजपाल प्रकाशन) हिंदुस्तानी संगीत घरानों का क़िस्सों के माध्यम से इतिहास है जिसे 2021 में ‘बुक ऑफ़ द ईयर’ (कलिंग लिटरेचर फ़ेस्टिवल) से सम्मानित किया गया है। मैंड्रेक प्रकाशन से नॉर्वे की संस्कृति पर आधारित एक रोचक पुस्तक है- ‘ख़ुशहाली का पंचनामा।’ उन्होंने आइस्लैंड और नीदरलैंड पर भी अलहदे अन्दाज़ में यात्रा संस्मरण लिखे। उनके अन्य इतिहास विषयक पुस्तक हैं – ‘जे पी: नायक से लोकनायक तक,’ ‘केनेडी: बदलती दुनिया का चश्मदीद,’ ‘रेनैसॉँ: भारतीय नवजागरण की दास्तान,’ ‘दास्तान ए पाकिस्तान।’ उन्होंने प्रवास और बेगम अख़्तर पर अंग्रेज़ी और हिंदी में सम्पादित पुस्तकों में भी लिखा है। उनके बहुमुखी लेख हिंदुस्तान, प्रभात ख़बर, प्रजातंत्र, कादम्बिनी, अहा ज़िंदगी, सदानीरा आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। अपनी गंभीर पुस्तकों से भिन्न प्रवीण की रुचि व्यंग्य विधा में है। उनके व्यंग्य ‘जानकीपुल’ पर नियमित प्रकाशित होते रहे, जो समाज और राजनीति पर अक्सर असहज प्रश्नों पर होते हैं। ‘उल्टी गंगा’ उनके समस्त व्यंग्य-कथाओं का अनूठा संकलन है। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न शहरों से गुज़रते अमरीका और यूरोप महादेश में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
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