Prem : Khoj, Pahal Aur Paribhasha
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जो व्यक्ति स्वयं को प्रेम करता है, वह एकान्त से दूर भागने के लिए बावरा नहीं बन जाता और इसीलिए वह अकेलेपन से पीड़ित भी नहीं होता। वह हमेशा अपने समय का उपयोग सार्थक, सर्जनात्मक उद्देश्यों के लिए करता है—उसे जहाँ-तहाँ समय बिताने की जरूरत नहीं रहती। वह व्यक्ति स्वयं अपना इतना अच्छा मित्र होता है कि उसे दूसरे मित्रों की जरूरत नहीं होती। इसीलिए स्वाभाविक रूप से कुसंगत करने की जगह वह खुद के साथ रहना पसन्द करता है।
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जो व्यक्ति स्वयं को प्रेम करता है, वह एकान्त से दूर भागने के लिए बावरा नहीं बन जाता और इसीलिए वह अकेलेपन से पीड़ित भी नहीं होता। वह हमेशा अपने समय का उपयोग सार्थक, सर्जनात्मक उद्देश्यों के लिए करता है—उसे जहाँ-तहाँ समय बिताने की जरूरत नहीं रहती। वह व्यक्ति स्वयं अपना इतना अच्छा मित्र होता है कि उसे दूसरे मित्रों की जरूरत नहीं होती। इसीलिए स्वाभाविक रूप से कुसंगत करने की जगह वह खुद के साथ रहना पसन्द करता है।
Book Details
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ISBN9789395737968
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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