Chemical Innovations
Author:
Dr.Sanjay RoutPublisher:
ISL PUBLICATIONSLanguage:
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Science0 Ratings
Price: ₹ 76.5
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90
Available
Chemical Innovations is a book written by Dr. Sanjay Rout, an expert in the field of chemical engineering and technology. In this book, he explores the history of chemical innovations and their impact on modern society. He provides insight into how these advances have shaped our lives today and what potential they hold for our future as well.
Dr. Sanjay research focuses on both historical events that brought about significant chaanges in chemistry as well as current topics such as nanotechnology, renewable energy sources, artificial intelligence (AI) technologies and synthetic biology applications to everyday life problems like water purification or drug development processes . His writing style is engaging yet informative; readers can easily understand his explanations while learning something new at the same time! Additionally ,he has included interviews with leading scientists from around the world who offer their perspectives on various aspects of innovation within chemistry .
Overall , Chemical Innovations offers an exciting look into one of humanity’s most important fields: Chemistry! With its comprehensive coverage ranging from past achievements to present-day advancements , it serves not only those interested in science but also anyone looking for a deeper understanding about how we use chemicals every day - no matter if you are a student or professional scientist alike ! Whether you want to learn more about some specific topic related to chemistry or just get inspired by stories behind great inventions - this book will certainly be worth your time!
ISBN: 9781637458501
Pages: 200
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: बैंगन के पौधे में बैंगन ही क्यों, टमाटर क्यों नहीं? ख़रगोश से ख़रगोश ही क्यों पैदा होता है? कौए काले ही क्यों होते हैं, उजले क्यों नहीं? —सभ्यता के आरम्भ काल से ही ऐसे कई सवालों से मनुष्य टकराता रहा है। ‘अथ श्री जीन कथा’ पुस्तक आनुवंशिक विज्ञान के ऐसे तमाम सवालों का जवाब व्याख्या सहित देती है। बीसवीं सदी की शुरुआत में ग्रिगोर मेंडल द्वारा प्रतिपादित आनुवंशिकी आज एक सम्पूर्ण और प्रौढ़ विज्ञान बन चुकी है। मात्र सौ सालों के अल्पकालिक इतिहास में ही इस विज्ञान ने आणविक जीव विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी और जीनोमिकी जैसे नए विज्ञानों को जन्म दे दिया है। नरसिंह दयाल के अथक श्रम की सुफल यह पुस्तक जीन विज्ञान की ऐतिहासिक कथा-यात्रा को हमारे सामने प्रस्तुत करती है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों को इसमें समाहित किया गया है। विषय को बीस अध्यायों में विभक्त किया गया है जिनमें जीन-कथा को लेखक ने क़िस्से और कहानी की शैली में कहने का सफल प्रयास किया है। हालाँकि ये बीस कहानियाँ नहीं, कहानियों जैसी ज़रूर हैं, जिन्हें लेखक ने अत्यन्त सरल और प्रवाहमयी भाषा में लिखा है।
Adbhut Brahmand
- Author Name:
Chandramani Singh
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक ब्रह्माण्ड के बनने की जिज्ञासा, उसके बने रहने की उम्मीद और एक दिन उसके ख़त्म होने की आशंकाओं को तमाम वैज्ञानिक साक्ष्यों और आयामों के परिप्रेक्ष्य में सहज-सरल तरीक़े से प्रस्तुत करती है। ब्रह्माण्ड के रहस्यों, खोजों और उसके क्रिया-कलापों तथा घटनाओं में उलझने और उलझाने के बजाय उनको सुलझाने की दृष्टि का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है. लेखक ने न्यूटन, आइन्स्टीन से लेकर आज के वैज्ञानिकों तक के नियमों, सिद्धान्तों और खोजों के परिप्रेक्ष्य में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एवं विकास-क्रम, उसके विशाल होने की सम्भावना, आकाशगंगाओं में घटनाओं के चक्र आदि को काल के भीतर और बाहर देखने के लिए कैनवस की सफल रचना की है। साथ ही, यह पुस्तक ब्रह्माण्ड में कृष्ण पदार्थ और कृष्ण ऊर्जा के अस्तित्व तथा महत्त्व; सममिति और दिक् का स्वरूप; महाविस्फोट की पुनर्रचना; बहुब्रह्माण्डीय परिकल्पना; क्वाण्टम-सिद्धान्त; प्रकृति के मौलिक सिद्धान्तों का एकीकरण; सूत्रिका-सिद्धान्त की भूमिका; ब्रह्माण्डीय संयोग; सौन्दर्यमयी ज्यामिति; गुरुत्व एवं ब्रह्माण्ड आदि पाठों के अन्तर्गत विज्ञान-सम्मत सूत्रों को विश्लेषित और परिभाषित करने की अभिनव दृष्टि प्रदान करती है। 'अद्भुत ब्रह्माण्ड’ ब्रह्माण्ड की अन्तर्गुम्फित सत्ताओं के रहस्य के विपरीत उसके अन्वेषण की एक यथार्थवादी भूमिका रेखांकित करती है जो ब्रह्माण्डिकी में अभिरुचि रखनेवाले पाठकों को अपने वर्तमान और भविष्य के प्रति चेतना-सम्पन्न तो बनाती ही है, हिन्दी में विज्ञान विषयक पुस्तकों की कमी की भरपाई भी करती है।
Aadhunik Bharat Ke Mahan Vaigyanik
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों ने अपने ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे। आधुनिक काल के वैज्ञानिक अपने शोध-निबन्ध अंग्रेज़ी में लिखते हैं। अत: इन वैज्ञानिकों के कृतित्व को आज की जनभाषा में प्रस्तुत करने में जो कठिनाइयाँ होती हैं, उनकी कल्पना करना कठिन नहीं है। पुराने संस्कृत ग्रन्थों के ज्ञान को आज की भारतीय भाषाओं में समझाना उतना कठिन नहीं हैं। परन्तु विरेशी भाषाओं में प्रस्तुत किए गए आधुनिक विज्ञान को जनभाषा में समझाने में अनेक कठिनाइयाँ हैं। आधुनिक विज्ञान अब विशेष सांकेतिक चिन्हों और पारिभाषिक शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। आधुनिक भारत के दस वैज्ञानिकों को मैंने चुना है। दस को ही चुनना था, इसीलिए यह चुनाव। वरना, और भी कई वैज्ञानिकों को चुना जा सकता है। अक्सर यह होता है कि ‘प्रशासक-वैज्ञानिक’ को अधिक प्रसिद्ध मिल जाती है और अपने क्षेत्र में विशेष कार्य करनेवाले वैज्ञानिक जनसाधारण के लिए गुमनाम बने रहते हैं। आशा है, पाठक इस पुस्तक को पसन्द करेंगे। —‘अपनी बात’ से
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