Adhyatm Parampara Aur Gorakhbani
(0)
Author:
Pooja SomaniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
795
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गोरख का लक्ष्य अध्यात्म प्राप्ति है। पिंड और ब्रह्मांड ही इसके तत्व हैं। पिंड ब्रह्मांड की लघु प्रतिभूति है। अतः आत्मा को जानने के लिए बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं है। वह काष्ठ में अग्नि की भाँति अन्तर्निहित है। ब्रह्मचर्य, आत्मसंयम, आत्म-विचार, युक्ताहार-विहार द्वारा दैनंदिन कार्यों को निष्पादित करते हुए भी सहज समाधि में स्थित रह सकता है। अपनी प्रकृति व स्वभाव के अनुसार किसी भी स्तर से चेतना को भीतर उलटाने की प्रेरणा गोरख के योग में मंत्रयोग, लययोग, राजयोग, ज्ञानयोग का अनुभव कराती है। गोरख स्त्री-विरोधी नहीं हैं। वह सम्मोहित कर साधन-पद से च्युत करने वाली शक्ति के रूप में स्त्री का विरोध करते हैं। विगलित सामाजिक रूढ़ियों, वाह्याचार, साम्प्रदायिक संकीर्णताओं के प्रति घोर विरोध प्रदर्शित करते हैं। जर्जरित मूल्य-मर्यादाओं का पुनरुद्धार करने वाले गोरख के प्रति लोगों में उदासीनता रही है, जबकि उनके आत्मज्ञान का डिंडमनाद परवर्ती सन्त साहित्य में गुंजायमान होकर सम्मानित होता है। गोरख के क्रान्तिकारी विचार अद्यतन प्रासंगिक व मूल्यवान हैं, जो हमारे जीवन के लक्ष्य तथा सामाजिक दृष्टि को आमूल बदल सकते हैं। दुरुहता व रहस्यात्मकता के कोर-कल्पित आवरण से निकालकर गोरख को नए सिरे से जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।
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गोरख का लक्ष्य अध्यात्म प्राप्ति है। पिंड और ब्रह्मांड ही इसके तत्व हैं। पिंड ब्रह्मांड की लघु प्रतिभूति है। अतः आत्मा को जानने के लिए बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं है। वह काष्ठ में अग्नि की भाँति अन्तर्निहित है। ब्रह्मचर्य, आत्मसंयम, आत्म-विचार, युक्ताहार-विहार द्वारा दैनंदिन कार्यों को निष्पादित करते हुए भी सहज समाधि में स्थित रह सकता है। अपनी प्रकृति व स्वभाव के अनुसार किसी भी स्तर से चेतना को भीतर उलटाने की प्रेरणा गोरख के योग में मंत्रयोग, लययोग, राजयोग, ज्ञानयोग का अनुभव कराती है। गोरख स्त्री-विरोधी नहीं हैं। वह सम्मोहित कर साधन-पद से च्युत करने वाली शक्ति के रूप में स्त्री का विरोध करते हैं। विगलित सामाजिक रूढ़ियों, वाह्याचार, साम्प्रदायिक संकीर्णताओं के प्रति घोर विरोध प्रदर्शित करते हैं। जर्जरित मूल्य-मर्यादाओं का पुनरुद्धार करने वाले गोरख के प्रति लोगों में उदासीनता रही है, जबकि उनके आत्मज्ञान का डिंडमनाद परवर्ती सन्त साहित्य में गुंजायमान होकर सम्मानित होता है। गोरख के क्रान्तिकारी विचार अद्यतन प्रासंगिक व मूल्यवान हैं, जो हमारे जीवन के लक्ष्य तथा सामाजिक दृष्टि को आमूल बदल सकते हैं। दुरुहता व रहस्यात्मकता के कोर-कल्पित आवरण से निकालकर गोरख को नए सिरे से जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।
Book Details
-
ISBN9789349180611
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Islam Ke Dharmik Aayam
- Author Name:
Zafar Raza
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Description:
इस्लाम के धार्मिक आयाम का समुचित संज्ञान हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में ही
सम्भव है, जिसके नायक इस्लामी पैग़म्बर के सगे नाती हज़रत इमाम हुसैन थे, जिन्होंने सत्य एवं न्याय की प्रतिरक्षा में जिहाद किया और अपने सहयोगियों तथा परिवारजनों सहित कर्बला में शहीद हुए। इमाम हुसैन की शहादत के सर्वव्यापी प्रभाव का अनुमान इससे किया जा सकता है कि हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी ने इमाम हुसैन के व्यक्तित्व को ही वास्तविक इस्लाम माना है—“दीन अस्त हुसैन व दीनपनाह अस्त हुसैन।”
हुसैनी क्रान्ति के अनेक आयाम हैं—धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आदि। इस महत्त्वपूर्ण विषय पर हिन्दी भाषा में किसी पुस्तक का नितान्त अभाव रहा है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस कमी
को पूरा ही नहीं करता, वरन् इस महत्त्वपूर्ण विषय पर यह एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है। विद्वान लेखक प्रो. जाफ़र रज़ा ने जिस प्रकार हुसैनी क्रान्ति के उद्देश्यों, घटनाक्रमों एवं निष्कर्षों का वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष भाव से विश्लेषण किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है। संवेदनशील विषयों पर उनका दृष्टिकोण सन्तुलित, सहज एवं उदार रहा है। जो बात भी कही है, वह ठोस आधार पर प्रामाणिक है। इस्लाम विषयक उनकी विशिष्ट कृतियों के अध्ययन से लगता है कि यही उनका अस्ल मैदान है। इस्लामी इतिहास, धर्म एवं संस्कृति पर उन्हें पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
हुसैनी क्रान्ति विषयक पुस्तकों में प्रस्तुत ग्रन्थ शोधपरक वैज्ञानिक दृष्टि के आधार पर अद्वितीय है। उर्दू ही नहीं, फ़ारसी, अरबी या अंग्रेज़ी में भी ऐसी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं है। विश्वास है कि हिन्दी-
जगत् प्रस्तुत ग्रन्थ का स्वागत करेगा।
—प्रो. वहाब अशरफ़ी; 16 फरवरी, 2011
Bhagavadgeethe Kannada Kavya
- Author Name:
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- Description: DESCRIPTION AWAITED
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