Yugpurush Jaiprakash Narayan
Author:
Uma Shanker VermaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 480
₹
600
Unavailable
जनक्रांति झुग्गियों से न हो जब तलक शुरू,
इस मुल्क पर उधार है इक बूढ़ा आदमी।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के क्रांतिकारी व्यक्तित्व की झलक देतीं सूर्यभानु गुप्त की उपरोक्त पंक्तियाँ बतलाती हैं कि आम जन में परिवर्तन के सपने को जयप्रकाश नारायण ने कैसे रूपाकार दिया था। युगपुरुष जयप्रकाश में प्रसिद्ध कवि, संपादक उमाशंकर वर्मा ने हिंदी के ऐसे सैकड़ों कवियों की कविताएँ संकलित की हैं, जिन्होंने जयप्रकाश के क्रांतिकारी उद्घोष को सुना और उससे उद्वेलित हुए।
भगीरथ, दधीचि, भीष्म, सुकरात, चंद्रगुप्त, गांधी, लेनिन और न जाने कैसे-कैसे संबोधन जे.पी. को दिए कवियों ने। उन्हें याद करते हुए आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने सही कहा कि ‘इस देश की संस्कृति का जो कुछ भी उत्तम और वरेण्य है, वह उनके व्यक्तित्व में प्रतिफलित हुआ है।’
आरसी प्रसाद सिंह, इंदु जैन, उमाकांत मालवीय, कलक्टर सिंह केसरी, जगदीश गुप्त, जानकी वल्लभ शास्त्री, धर्मवीर भारती, पोद्दार रामावतार अरुण, बालकवि बैरागी, बुद्धिनाथ मिश्र, रामधारी सिंह दिनकर, कुमार विमल, नीरज आदि प्रसिद्ध कवियों-गीतकारों सहित सैकड़ों रचनाकारों की लोकनायक के प्रति काव्यांजलि को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।
—कुमार मुकुल
ISBN: 9789350480830
Pages: 224
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘फरटाइडिगुं डेअर वोल्फ़े’ (भेड़िए की वकालत)—इस शीर्षक के कविता-संग्रह के साथ बीसवीं सदी के पचास के दशक में एक नौजवान जर्मन कवि सामने आया—हंस माग्नुस एंत्सेनस्बेर्गर। उनकी मणिभीय भाषा, तीखे व्यंग्य व विद्रोही तेवर से स्पष्ट हो गया था कि यहाँ द्वितीय विश्वयुद्धोत्तर जर्मन समाज के विरोधाभासों को गहराई से पहचाननेवाली कविता उभर रही है। इसी दशक के द्वितीयार्द्ध में जब उनका काव्य-संग्रह ‘लांडेष्प्राखे’ (देश की भाषा) प्रकाशित हुआ था, तो प्रसिद्ध आलोचक अल्फ़्रेड आन्दर्ष ने उनकी तुलना साहित्य-जगत में हाइनरिष हाइने के पदार्पण से की थी। बाद के वर्षों में अपने हर संग्रह के साथ एंत्सेनस्बेर्गर निखरते गए। सन् 1968 के छात्र-विद्रोह के बौद्धिक प्रवक्ता के रूप में उन्हें स्वीकृति मिली। कविता के क्षेत्र में अनेक नए प्रयोग देखने को मिले।
लेकिन प्रतिबद्ध कवि? ब्रेष्ट की परम्परा? जैसाकि कुछ आलोचकों का दावा था? एंत्सेनस्बेर्गर का आक्रामक विद्रोही स्वर परिणत पूँजीवाद की विसंगतियों पर प्रहार तो करता है, लेकिन क्या उनमें एक विकल्प की आशा है? दूसरी ओर—हालाँकि बाद की कविताओं में प्रकट निराशावाद से उनके प्रारम्भिक वामपन्थी भक्त अक्सर निराश हुए, लेकिन उन्हें भी मानना पड़ा कि उभरते हुए उत्तर-आधुनिक सूचना-समाज की जटिलताओं को शायद ही कोई दूसरा कवि इतने स्पष्ट रूप में प्रस्तुत कर सका है।
एंत्सेनस्बेर्गर के लगभग हर संग्रह से कुछ-न-कुछ कविताएँ चुनकर इस संकलन में उनके कवि-व्यक्तित्व को पहचानने की कोशिश की गई है। उन्होंने एक बार कहा था कि वे कविता न पढ़नेवालों के लिए कविताएँ लिखते हैं। आशा है कि हिन्दी में भी कविता न पढ़नेवाले पाठक होंगे।
Javednama
- Author Name:
Mohd. Ikbal
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‘जावेदनामा’ मुहम्मद इक़बाल का ऐसा महाकाव्य है जिसमें पहली बार विश्व के सभी प्रमुख धर्मों के महान व्यक्तित्वों को सम्मानजनक स्थान देकर उन्हें मानवता की विरासत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस्लाम के अन्तिम पैग़म्बर मुहम्मद के मे’राज के बहाने यह काव्यकृति हिन्दुत्व, बौद्ध, ज़रतुश्त और इस्लाम समेत ईसाई धर्म की समेकित अभिव्यक्ति है।
मूल फ़ारसी में सन् 1932 में प्रकाशित इस काव्यकृति ने क्लासिक का दर्जा पा लिया था। इसे ‘शाहनामा’, ‘गुलिस्ताँ’, ‘दीवान’, ‘डिवाइन कॉमेडी’ और ‘फ़ाउस्ट’ की क़तार में शुमार किया जाने लगा। एशिया का ‘डिवाइन कॉमेडी’ कहे गए इस महाकाव्य के सभी मुख्य पात्र, यथा—मौलाना रूमी, विश्वामित्र, ज़रतुश्त, गौतमबुद्ध, टॉल्स्टाय, ग़ालिब, ताहिरा, हल्लाज, अब्दाली, नादिरशाह, टीपू सुल्तान, जमालउद्दीन अफ़ग़ानी, सईद हलीम पाशा और संस्कृत कवि भर्तृहरि सभी एशिया के हैं। गोएटे की तरह इक़बाल में भी अन्य परम्पराओं एवं संस्कृतियों के प्रति सहिष्णुता और आदर की भावना है। ‘जावेदनामा’ के माध्यम से इक़बाल का मक़सद सम्बन्धित क़ौमों को पाश्चात्य साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए उत्प्रेरित भी करना था।
हिन्दी में पहली बार तथा विश्व की लगभग तमाम प्रमुख भाषाओं में अनूदित इस महाकाव्य में इक़बाल तत्त्व मीमांसात्मक विमर्शों से मुठभेड़ करने के साथ बीसवीं सदी की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक और धार्मिक पेचीदगियों के परिप्रेक्ष्य में अपनी महान कलात्मक क्षमताओं का इस्तेमाल मूलतः एक भविष्योन्मुख विश्वदृष्टि की स्थापना के लिए करते हैं। अपने ढंग की अपूर्व और अनूठी कृति जिसकी मिसाल विश्व साहित्य में नहीं मिलती।
Phases of the Moon
- Author Name:
Ismaeel Ahmad
- Rating:
- Book Type:

- Description: Intimate. Raw. Emotional. The moon doesn’t get tired of making people feel full even when she’s empty, does she? This book is a collection of poetry that has been built by tears, laughter, friends, family, the obscure niceties and fallacies of this world. Just like the moon, we seldom struggle with being full, and other times with being empty, and sometimes a conflict in between. But, we are whole, nevertheless. Being trapped in a cycle is not always an endless routine, but new beginnings, pure intentions, untethered release too. This book will carry you into themes of heartbreak, rebirth, sadness, happiness, friendship, loneliness and more. Hold my hand, and let’s walk through hurting, healing, and loving.
Pratinidhi Kavitayen : Vishnu Khare
- Author Name:
Vishnu Khare
- Book Type:

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Description:
विष्णु खरे एक विलक्षण कवि हैं—लगभग लासानी। एक ऐसा कवि जो गद्य को कविता की ऊँचाई तक ले जाता है और हम पाते हैं कि अरे, यह तो कविता है! ऐसा वे जान-बूझकर करते हैं—कुछ इस तरह कि कविता बनती जाती है—कि गद्य छूटता जाता है। पर शायद वह छूटता नहीं—कविता में समा जाता है। ...वे लम्बी कविताओं के कवि हैं—जैसे मुक्तिबोध लम्बी कविताओं के कवि हैं। पर दोनों में अन्तर है। मुक्तिबोध की लम्बाई लय के आधार को छोड़ती नहीं—धीरे-धीरे वह कम ज़रूर होता गया है। विष्णु खरे गद्य की पूरी ताक़त को लिए-दिए चलते हैं—उसे तोड़ते-बिखेरते हुए, बीच-बीच में संवाद का सहारा लेते और जहाँ-तहाँ उसे डालते हुए चलते हैं और लय को न आने देते हुए।
किसी चीज़ को शब्दों में ज़िन्दा कर देना एक कवि की सिफ़त है और विष्णु खरे के पास वह जादू है।
—केदारनाथ सिंह
HINDI KI CHUNINDA GHAZALEN
- Author Name:
Editor : Gourinath
- Book Type:

- Description: collection of best hindi ghazals
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