Talespin
Author:
Nickunj MalikPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 480
₹
600
Available
Awating description for this book
ISBN: 9788184303155
Pages: 312
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Rajendra Yadav Rachanawali : Vols. 1-15
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र यादव आज़ाद हिन्दुस्तान की दहलीज़ पर तैयार खड़ी नौजवान पीढ़ी के उस समुदाय के सदस्य हैं जिसकी मानसिकता 20वीं सदी के तीसरे-चौथे-पाँचवें दशक में विश्वव्यापी निराशा और मोहभंग में संरचित हुई है। दहलीज़ पर खड़ी आज़ाद, नौजवान पीढ़ी के इस समुदाय के लिए विचार, दर्शन, रणनीति, भविष्य की संरचना, आगामी का नक़्शा—सब कुछ एक भिन्न विवेक और नए तर्क के सहारे गढ़ा जाना है। उसकी मंशा में नई शुरुआत अतीत के साथ सम्पूर्ण विच्छेद से होनी है।
राजेन्द्र यादव के रचनात्मक उपक्रम की अन्तर्वस्तु यही विचार है जो नई दुनिया की रचना का मूलाधार है। यह ‘कैंड़े’ के आदमी का काम है; गुर्दा चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो यह एक विरल पराक्रम है। अपनी पीढ़ी के रचनाकारों में राजेन्द्र यादव विशेषत: अपने विचार को उसकी तार्किक संगति की आख़िरी हद तक ले जा सकने की क्षमता से लैस दिखाई देते हैं। उनके उपन्यासों में ऐसे ही किसी जड़ीभूत पारिवारिक-सामाजिक-राजनीतिक आग्रहों के उच्छेदन का अभियान छेड़ा गया है। रचनावली के खंड 1 से 5 तक में संकलित उपन्यास इसकी गवाही देते हैं।
राजेन्द्र जी ने अपने लेखन का प्रारम्भ कविताओं से किया। परन्तु बाद में 1945-46 की इन आरम्भिक कविताओं को महत्त्वहीन मानकर नष्ट कर दिया। बाद में लिखी उनकी कविताएँ 'आवाज़ तेरी है' नाम से 1960 में ज्ञानपीठ प्रकाशन से प्रकाशित हुईं। इनके अतिरिक्त राजेन्द्र यादव की कुछ कविताएँ अभी तक अप्रकाशित हैं। रचनावली का पहला खंड उनके इसी आरम्भिक लेखन को समर्पित है। जिसमें एक तरफ़ उनकी प्रकाशित-अप्रकाशित कविताएँ हैं और दूसरी तरफ़ ‘प्रेत बोलते हैं’ और ‘एक था शैलेन्द्र’ जैसे प्रारम्भिक उपन्यास। दूसरे खंड में ‘उखड़े हुए लोग’ तथा ‘कुलटा’, तीसरे खंड में ‘सारा आकाश’, ‘शह और मात’, ‘अनदेखे अनजान पुल’ और चौथे खंड में ‘एक इंच मुस्कान’ तथा ‘मंत्रविद्ध’ जैसे उपन्यास शामिल हैं। रचनावली का पाँचवाँ खंड राजेन्द्र जी के अधूरे-अप्रकाशित उपन्यासों को एक साथ प्रस्तुत करता है। अधूरे होने के कारण इन सबको एक ही खंड में शामिल किया गया है।
Interpretations Of The Shrimad Bhagwat Gita
- Author Name:
Mamta Mehrotra
- Book Type:

- Description: We all come to this earth with a purpose. Our existence itself is for going through new experiences, making inferences out of them, learning, and moving on. In fact, at every step, we are seekers of knowledge. We have to learn and move on to the next Gigha plane. This goes on in our world's journey of self-completion. The day we realise our purpose for existence on this earth, that very day we become enlightened, or the learned one. The irony is that unlike our yesteryear education, where Gurukul Parampara existed and every learning was associated with a blessing from Guru, education in today's parlance has become commercial and money-oriented. From Guru to Shishya, everyone is seeking education to make money out of it. Lost are the traditions, the value system, and the orientation in education. It is time that educationists and academicians give it a serious thought, and reorient and revamp our education system.
PRAKRITIK AAPDAYEN (NATURAL DISASTER)
- Author Name:
Dr. D.D. Ojha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jeene Ki Asha "जीने की आशा" | Hindi Translation of Hope | Wisdom Book For Survival In A Hopeless World
- Author Name:
Devdutt Pattanaik
- Rating:
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Garbhawati Ki Dekhbhal
- Author Name:
Smt. Parvesh Handa
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shanti ka samar
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों में भावनाओं, विचारों और सन्देहों का एक बड़ा-सा जंजाल आज़ादी के समय से फैला हुआ है, जो समय–समय पर टकराव की स्थिति पैदा कर देता है। इस पुस्तक में इस जंजाल की छानबीन गहरे धीरज और इस आशा के साथ की गई है कि दोनों देश अपनी–अपनी राष्ट्रीय अस्मिताओं को बनाए रखते हुए शान्ति के एक नए दक्षिण एशियाई सन्दर्भ की रचना कर सकते हैं। महात्मा गांधी की हत्या से लेकर कश्मीर–समस्या और विश्व स्तर पर उभरे अस्मिताओं के संघर्ष तक अनेक विषयों की पड़ताल करते हुए लेखक ने कई महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया है : राष्ट्रपिता की हत्या क्यों हुई? विभाजन के इतिहास को अनुभूति के स्तर पर आज किस तरह देखा जाए? गांधी और जिन्ना की विरासतें आज तक हमें किस तरह प्रभावित करती रही हैं? आदि प्रश्नों की मदद से यह पुस्तक हमें विचारोत्तेजक समाधि की अवस्था में ले जाती है। इसे पढ़ते हुए हम शान्ति की सम्भावना को लेकर एक नई तरह का तर्क रचने की प्रेरणा पाते हैं जिसका आधार बीते हुए कल की रूमानी यादों में न हो। दक्षिण एशिया में सामूहिक शान्ति के पक्ष में सहमति बनाने के सिलसिले में यह पुस्तक बच्चों और युवाओं की शिक्षा के अलावा मीडिया की भूमिका पर भी रोशनी डालती है।
Patriotic Pilgrimage of India
- Author Name:
Rishi Raj
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Saral Hindi
- Author Name:
Ramvachan Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SSC GD Constable 2025 Staff Selection Commission Recruitment Exam 15 Practice Sets And 6 Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chanakya Neeti
- Author Name:
R.P. Jain
- Book Type:

- Description: Chanakya was an Indian teacher, philosopher and royal advisor. He managed the first Maurya emperor Chandragupta's rise to power at a young age. He is widely credited for having played an important role in the establishment of the Maurya Empire, which was the first empire in archaeologically recorded history to rule most of the Indian subcontinent.Chanakya is traditionally identified as Kautilya or Vishnu Gupta, who authored the ancient Indian poltical treatise called Arthasastra. As such, he is considered as the pioneer of the field of economics and political science in India, and his work is thought of as an important precursor to Classical Economics.Chanakya Neeti is a treatise on the ideal way of life, and shows Chanakya�s deep study of the Indian way of life. Chanakya also developed Neeti-Sutras (aphorisms�pithy sentences) that tell people how they should behave. Of these well-known 455 sutras, about 216 refer to rajaneeti (the do,s and don�ts of running a kingdom). Apparently, Chanakya used these sutras to groom Chandragupta and other selected disciples in the art of ruling a kingdom.
PRAMUKH DESHON KE RASHTRIYA DHWAJ
- Author Name:
Anushka
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sankal, Sapne Aur Sawal
- Author Name:
Sudha Arora
- Book Type:

-
Description:
प्रतिष्ठित रचनाकार सुधा अरोड़ा का वैचारिक और रचनात्मक लेखन स्त्री के सवालों और उसकी चिन्ताओं का पक्षधर रहा है। वे किसी पूर्व-निर्धारित आग्रह या घिसे-पिटे स्त्रीवादी नारों को दोहराने की जगह एक खुले, परिवर्तनशील और आधुनिक समाज में व्यावहारिक स्तर पर स्त्री को पुरुष के बरक्स बराबरी का सम्मानजनक हिस्सा दिलवाने में यक़ीन रखती है।
‘साँकल, सपने और सवाल’ में लेखिका के पिछले बीस वर्षों के लेखन से चुने गए आलेख संग्रहित है। इनमें पाठक को समाज की उन साँकलों और वर्जित दहलीज़ों को लाँघने का साहस दिखाई देगा, जिन पर सदियों से दुराग्रहों और वर्जनाओं के तालों का साम्राज्य रहा है। भारतीय सामजिक पृष्ठभूमि और उसकी पारम्परिक सीमाओं के बीच शहरी एवं आंचलिक स्त्री के लिए नैसर्गिक स्पेस की ज़रूरत और उसकी जायज़ माँग ही इन आलेखों का बीज सूत्र है।
इन आलेखों के विषय आज की स्त्री के फैलते आकाश की तरह चहुमुखी और विविध हैं। धर्म, मीडिया, फ़िल्म और साम्प्रदायिकता से लेकर समलैंगिकता, तेज़ाबी हमले, शिक्षित लड़कियों की आत्महत्या, सम्पत्ति अधिकार यानी घरेलू और सामाजिक शोषण के हर पहलू पर लेखिका की पैनी नज़र है। वे मानती हैं कि आज के तेज़ी से बदलते समाज में स्त्री का समय किसी सीमित चौखट के भीतर क़ैद नहीं किया जा सकता। विविध मुद्दों पर सुधा जी कई सवालों से टकराती हैं। इस उत्तर-आधुनिक और ग्लोबल समय में स्त्री-देह के भोगवादी नजरिए के विरुद्ध सुधा अरोड़ा का कारगर हस्तक्षेप रेखांकित किया जा सकता है।
बेहद आसान और सरल भाषा में लिखे गए इन आलेखों की पठनीयता एवं प्रतिबद्धता ही अन्तत: इनकी सबसे बड़ी सफलता और सार्थकता है।
Gita Gyansagar
- Author Name:
Sunil Bajpayee
- Book Type:

- Description: "पिछले सात दशक की राजनीति में भारत में एक व्यक्तित्व उभरा और देश ने उसे सहज स्वीकार किया। जिस तरह इतिहास घटता है, रचा नहीं जाता; उसी तरह नेता प्रकृति प्रदत्त प्रसाद होता है, वह बनाया नहीं जाता बल्कि पैदा होता है। प्रकृति की ऐसी ही एक रचना का नाम है पं. अटल बिहारी वाजपेयी। अटलजी के जीवन पर, विचार पर, कार्यपद्धति पर, विपक्ष के नेता के रूप में, भारत के जननेता के रूप में, विदेश नीति पर, संसदीय जीवन पर, उनकी वक्तृत्व कला पर, उनके कवित्व रूपी व्यक्तित्व पर, उनके रसभरे जीवन पर, उनकी वासंती भावभंगिमा पर, जनमानस के मानस पर अमिट छाप, उनके कर्तृत्व पर एक नहीं अनेक लोग शोध कर रहे हैं। आज जो राजनीतिज्ञ देश में हैं, उनमें अगर किसी भी दल के किसी भी नेता से किसी भी समय अगर सामान्य सा सवाल किया जाए कि उन्हें अटलजी कैसे लगते हैं? तो सर्वदलीय भाव से एक ही उत्तर आएगा—‘उन जैसा कोई नहीं!’ इस पुस्तक में अटलजी की मस्ती हमारी और आपकी सुस्ती को सहज भगा देगी। इन अनछुए पहलू में प्रेरणा, प्रयोग, प्रकाश, परिणाम, परिश्रम, परमानंद, प्रमोद, प्रकल्प, प्रकृति, प्रश्न, प्रवास और साथ ही साथ जीवन कैसे जिया जाता है, कितने प्रकार से जीया जाता है? आनंद को भी आनंद से आनंदित करने के लिए कितने प्रकार के आनंद की आवश्यकता होती है, इस संस्मरणों में उसका भी आनंद लिया जा सकता है। अटलजी के संपूर्ण जीवन का दिग्दर्शन कराती प्रेरणाप्रद पुस्तक ‘हमारे अटलजी’।"
AAO SEEKHEN JODNA
- Author Name:
MUKESH
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Trilochan Rachanawali Vol. 1-4
- Author Name:
Trilochan
- Book Type:

-
Description:
जनसाधारण की दुख-प्रसूत स्थानिक संवेदना को कविता में ढालकर मनुष्यता की सार्वभौमिक चेतना से जोड़ने वाले, शास्त्र की सटीकता और जनजीवन के नित नवीन अनुभवों को कई-कई छन्दों में अंकित करनेवाले विद्वान कवि त्रिलोचन हिन्दी के विराट कविता-लोक में अपनी तरह के अनूठे हस्ताक्षर हैं।
कई भाषाओं के ज्ञाता, संस्कृत के विद्वान और प्रगतिशील चेतना से सम्पन्न कवि त्रिलोचन ने रोला और बरवै जैसे प्राचीन छन्दों को भी साधा, गीत-ग़ज़ल भी लिखे और 'सॉनेट' जैसे विदेशी छन्द को हिन्दी का अपना बना दिया। मुक्त-छन्द भी लिखा और 'गद्य-वद्य' लिखते हुए आलोचना को भी एक आत्मीय रंग दिया।
यह त्रिलोचन की रचनावली है, जिसकी ज़रूरत लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। त्रिलोचन महज़ एक कवि नहीं, कविता के विद्यालय थे; मौज़ूदा और आनेवाले रचनाकार उनसे हमेशा ही सीख सकते हैं। प्रस्तुत रचनावली में त्रिलोचन का सम्पूर्ण संकलित है।
कविताओं के साथ-साथ त्रिलोचन ने आलोचनात्मक गद्य भी लिखा। इस खंड में उनके द्वारा लिखित आलोचनात्मक लेखों, समीक्षाओं आदि को लिया गया है। कविता हो या गद्य उन्होंने बोलचाल की भाषा को ही प्राथमिकता दी। यह इन आलेखों से भी ज़ाहिर होता है। कुछ अप्रकाशित लेख भी यहाँ प्रस्तुत हैं। साथ में उनकी दैनन्दिनी भी।
Cancerman To Ironman: A Police Officer’s Journey of Arresting Illness | An Inspiring Journey To Defeat Cancer With Strong Will Power And Courage
- Author Name:
Nidhin Valsan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chandausi Junction Stories Book in Hindi
- Author Name:
Shankar Sahay::Priti Sahay
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Brihat Tithi Kosh
- Author Name:
Vijay Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Film Ke Jagat Ke Pitamaah Dadasaheb Falke
- Author Name:
Sukesh kumar
- Book Type:

- Description: भारतीय फिल्म उद्योग के पितामह के रूप में विख्यात दादासाहेब फाल्के विलक्षण भारतीय कार थे। वे मंच के अनुभवी अभिनेता थे, उत्कृष्ट जादूगर थे। उन्होंने भारतीय फिल्म निर्माण की नींव रखी, जिसके ऊपर आज भारत का सिने उद्योग टिका है। उनके अभिनव प्रयोगों और नवाचार के कारण ही आज भारत में प्रतिवर्ष इतनी बड़ी संख्या में विविध विषयों पर फिल्में बन रही हैं और दर्शकों में लोकप्रिय हो रही हैं। 1891 में दादासाहेब फाल्के ने मुंबई में एक विदेशी मूक चलचित्र 'लाइफ ऑफ क्राइस्ट' देखा। उन्हें प्रभु ईसामसीह के स्थान पर कृष्ण, राम, समर्थ गुरु रामदास, शिवाजी, संत तुकाराम इत्यादि महान् विभूतियाँ दिखाई दे रही थीं । उन्होंने सोचा, क्यों न चलचित्र के माध्यम से महान् भारतीय विभूतियों के चरित्र को चित्रित किया जाए। उन्होंने इस चलचित्र को कई बार देखा और फिर क्या, उनके हृदय में चलचित्र निर्माण का अंकुर फूट पड़ा। आठ महीने की कठोर साधना के बाद दादासाहेब के द्वारा पहली मूक फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र'
Towards the Sound: Understanding Our Origins
- Author Name:
Suryansh Shekhar
- Book Type:

- Description: A Journey through Consciousness It is such a pleasure to open a book and be met with an excellent writing: a mellifluous flow of deeply-considered thoughts and fine expression. That is the experience of reading Suryansh Shekhar's ""Towards the Sound"". He brings a remarkable youthful vigor to a world of deep intellect. Who we are, who we think we are and how are these identities constructed? In today's matter-of-fact world most people live in thoughtless oblivion, not searching for such knowledge. The author takes us into a world of nuanced understanding, through logical and brilliant journeys into essential truths. This is a delightful must-read book for every sensitive person who likes to examine his travel through life. The author presents a handbook of understanding oneself and one's interactions with the world. He offers a path to freedom, leaving behind the chains of our previous conditioning. Finally, I must say that the entire journey of the book, through the many caverns of the mind, is shared through a clearly and wonderfully-written prose.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book