Samay ki Kharad Par
(0)
₹
225
₹ 184.5 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
वर्तमान समय में जब प्रतिरोध के सारे दरवाज़े बंद किये जा रहे हैं ऐसे में सतत विरोध की आवाज़ सिर्फ लेखकों के पास ही बची है। कथाकार-संपादक गौरीनाथ के 52 लेखों और टिप्पणियों का संकलन 'समय की ख़राद पर' को पढऩे के बाद यह महसूस होता है कि लेखक की भूमिका रचनात्मकता और विवेक-सम्मत प्रतिरोध के द्वैत से निर्मित होती है। तक़रीबन डेढ़ दशक की भारतीय राजनीति, संस्कृति और समाज के बुनियादी परिवर्तनों को इन टिप्पणियों और लेखों से जाना जा सकता है। ये लेख और टिप्पणियाँ अपने समय की आंतरिक लय को पकडऩे, उनके आरोह-अवरोह को समझने और समकालीन समाज की सांस्कृतिक विस्मृति को एक साथ उजागर करती हैं। इन लेखों का विषय वैविध्य इस बात की तस्दीक करता है कि उदारीकरण ने हर तरह की केन्द्रीयता को नष्ट कर एक विभ्रम की स्थिति निर्मित कर दी है। लेखक इस बात से पूरी तरह वाक़िफ़ है और इसीलिए अपने समय के सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन को बहुलताओं के कोलाज़ के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अर्थ में ये लेख एक नई समग्रता की परिकल्पना प्रस्तुत करते हैं-बहुलताओं का कोलाज़। संस्कृति के उत्तर-आधुनिक रूपों और उपभोक्तावादी मानस पर सबसे अधिक चोट इन लेखों में किया गया है। फ़िल्मों पर लिखे लेखों को अपसंस्कृति की आलोचना के बतौर पढ़ा जा सकता है। चमक और ताक़त के प्रति नकार की चेतना ही कठिन समय में प्रतिरोध का सूक्ष्म विरोध निर्मित करती है। इस आधे अंधे मोड़ पर इन टिप्पणियों को पढऩा बेहद लम्बी यात्रा पर निकले मुसाफ़िर का किसी पेड़ के नीचे दो घड़ी सुस्ताने जैसा है। अपने फेफड़ों में ताज़ा हवा भरने की एक अनिवार्य कोशिश। अगले मोड़ पर ज़हरीली हवाओं का झोंका आने को है, ऐसे में अपने फेफड़े दुरुस्त रखना तभी संभव है जब आप समय की ख़राद पर गुज़रने से गुरेज न करें।
Read moreAbout the Book
वर्तमान समय में जब प्रतिरोध के सारे दरवाज़े बंद किये जा रहे हैं ऐसे में सतत विरोध की आवाज़ सिर्फ लेखकों के पास ही बची है। कथाकार-संपादक गौरीनाथ के 52 लेखों और टिप्पणियों का संकलन 'समय की ख़राद पर' को पढऩे के बाद यह महसूस होता है कि लेखक की भूमिका रचनात्मकता और विवेक-सम्मत प्रतिरोध के द्वैत से निर्मित होती है। तक़रीबन डेढ़ दशक की भारतीय राजनीति, संस्कृति और समाज के बुनियादी परिवर्तनों को इन टिप्पणियों और लेखों से जाना जा सकता है। ये लेख और टिप्पणियाँ अपने समय की आंतरिक लय को पकडऩे, उनके आरोह-अवरोह को समझने और समकालीन समाज की सांस्कृतिक विस्मृति को एक साथ उजागर करती हैं। इन लेखों का विषय वैविध्य इस बात की तस्दीक करता है कि उदारीकरण ने हर तरह की केन्द्रीयता को नष्ट कर एक विभ्रम की स्थिति निर्मित कर दी है। लेखक इस बात से पूरी तरह वाक़िफ़ है और इसीलिए अपने समय के सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन को बहुलताओं के कोलाज़ के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अर्थ में ये लेख एक नई समग्रता की परिकल्पना प्रस्तुत करते हैं-बहुलताओं का कोलाज़। संस्कृति के उत्तर-आधुनिक रूपों और उपभोक्तावादी मानस पर सबसे अधिक चोट इन लेखों में किया गया है। फ़िल्मों पर लिखे लेखों को अपसंस्कृति की आलोचना के बतौर पढ़ा जा सकता है। चमक और ताक़त के प्रति नकार की चेतना ही कठिन समय में प्रतिरोध का सूक्ष्म विरोध निर्मित करती है। इस आधे अंधे मोड़ पर इन टिप्पणियों को पढऩा बेहद लम्बी यात्रा पर निकले मुसाफ़िर का किसी पेड़ के नीचे दो घड़ी सुस्ताने जैसा है। अपने फेफड़ों में ताज़ा हवा भरने की एक अनिवार्य कोशिश। अगले मोड़ पर ज़हरीली हवाओं का झोंका आने को है, ऐसे में अपने फेफड़े दुरुस्त रखना तभी संभव है जब आप समय की ख़राद पर गुज़रने से गुरेज न करें।
Book Details
-
ISBN9789385013867
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Karbala Dar Karbala
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
1980's blindings to 1989's massacre 'कर्बला दर कर्बला' अपने ढंग का एक अलग उपन्यास है। विमर्शों के इस दौर में यह अपना नया विमर्श चाहता है। गौरीनाथ का यह उपन्यास हमें एक भयावह दुनिया में ले जाता है। ऐसी दुनिया में जो अपराध जगत, पुलिस-प्रशासन और कट्टर धार्मिक संगठनों के गँठजोड़ से बनी है और जहाँ युवाओं के मधुर हो सकने वाले पल भी सहसा कटु हो उठते हैं। यह भागलपुर की दास्तान है। उसी भागलपुर की, जहाँ का अँखफोड़वा काण्ड और नब्बे के दशक में महीनों चले साम्प्रदायिक दंगों ने पूरे इतिहास को ही झकझोर दिया था। शिव और ज़रीना के सपनों की कहानी के बहाने लेखक ने ऐसी कथा बुनी है जो सत्ता और पूँजी के बल पर उत्पीड़ित और लांछित मानवता की कहानी बन गई है। 'कर्बला दर कर्बला' में कल्पना और यथार्थ से भी आगे बढ़कर तथ्यात्मकता को जिस तरह पिरोया गया है वह हिन्दी में उपन्यास-लेखन के क्षेत्र में एक साहसिक प्रयोग है। इस उपन्यास को पढऩा एक दु:स्वप्न से गुज़रना है। मगर उस दु:स्वप्न में कोई फ़ैंटेसी नहीं, बल्कि सच्चाइयों के बनते-बिगड़ते चित्र भरे पड़े हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र। —अब्दुल बिस्मिल्लाह ... और... भागलपुर से डॉ चन्द्रेश कहते हैं-- लेखक-पत्रकार गौरीनाथ ने बिहार के भागलपुर शहर को केन्द्र में रखकर लगभग दस साल के कालखण्ड में हुए उन चर्चित घटनाओं को समेटने की कोशिश की है, जिसने इस अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के चेहरे को दाग़दार बनाया है, वह चाहे कुख्यात अंधाकरण काण्ड हो या 1989 का भयानक हिन्दू-मुस्लिम दंगा। लेखक ने यथासंभव तटस्थ भाव से इन घटनाओं का सूक्ष्म अन्वेषण कर इसके इर्द-गिर्द गल्प का ताना-बाना बुना गया है, जो उपन्यास के बहाने अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है यानी दस्तावेज़ में उपन्यास की महक और उपन्यास में दस्तावेज़ की झलक।
Beej-Bhoji
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
बीज-भोजी' किसान आत्महत्या और अभाव से हो रही मौतों की दुखभरी गाथा है। किसान होना किसी व्यक्ति के जीवट की मुकम्मल गवाही है। वह किसान अंत तक जूझता है और अंतत: कर्ज और भूख में दबकर मर जाता है। यह मौत हमारी सभ्यता के मृत होने की मुखर घोषणा है। 'पैमाइश' कहानी एक तरफ गाँव की पतनशीलता का आख्यान है तो दूसरी तरफ दुस्साहसी, स्वच्छंद तथा कर्मठ स्त्री 'संन्यासिन' के डायन में तब्दील होने का लोमहर्षक दस्तावेज़ भी। कोई प्रखर और परिश्रमी स्त्री क्यों गाँव-भर में डायन बताई जाने लगती है, इसके पीछे कौन-सा क्षुद्र स्वार्थ छुपा होता है इसे 'पैमाइश' पढ़कर अच्छी तरह जाना जा सकता है। इसी प्रकार 'एक एकाउण्टेंट की डायरी में मिट्टी की गंध' कहानी का नायक महानगरीय जीवन की तमाम सुख-सुविधाओं को हासिल कर लेने के बावजूद बचपन से प्राणों में घुली मिट्टी की गंध पाने के लिए बदहवास फिरता है, जबकि उसके घर के लोग उसे मिट्टी से दूर रखने की जी-तोड़ कोशिशें करते हैं। 'तर्पण' कहानी गाँव के भीतर ही अपने मन में बसे गाँव को बचाए रखने की असफल कोशिशों को सामने लाती है और यह भी बताती है कि किस तरह शहरीकरण का दैत्य गाँव को गाँव नहीं रहने देने के लिए बेताब है। 'बीज-भोजी' गौरीनाथ का तीसरा कहानी संग्रह है.
Manus
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
मानुस की कहानियों में पेड़-पल्लव, नदी-नाले, ताल-तलैया और तालमखाने, बालू के ढूह और विस्तार, रोहू, झींगा, टेंगरा, मांगुर, गरई और अन्है मछलियों की बहार है और इन्हीं के बीच बिना किसी शिकवा-शिकायत के अपने जीवन को भोगते आम गरीब लोग हैं। इन रचनाओं में कहीं रास है तो कहीं हास, कहीं दुःख है तो कहीं सुख-स्वाद।
Nach Ke Bahar
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
A Collection of Short Stories by Gourinath
Bhai Saheb Mane Raj Mohan Jha
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
Memoirs
Kisan Andolan Aa Mithila Samaj
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
A Collection of Maithili Articles Collected from Antika Magazine
Khaksiyah
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description:
Collection of maithily short stories
Vetal Pachchisi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
"वेताल पच्चीसी 25 कहानियों का एक अनूठा संग्रह है, जो जगत्-प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य के न्याय-प्रेम के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है | प्रत्येक कहानी के अंत में वेताल विक्रमादित्य से गुदगुदाने वाला एक प्रश्न पूछता है, जिसका उत्तर राजा को देना होता है | जैसे ही विक्रमादित्य उत्तर देते हैं, पहले से तय शर्त के अनुसार, वेताल फिर से अपने पसंदीदा पेड़ पर लटकने के लिए उड़ जाता है। ये कहानियाँ राजा विक्रमादित्य के ज्ञान, न्यायप्रियता, प्रजाप्रेम, शौर्य और मूल्ययरक शासन से परिचय करवाती हैं। इन्हें पढ़कर पाठकों को तत्कालीन शासन व्यवस्था का बोध हो सकेगा।"
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
- Author Name:
J.B. Kriplani
- Book Type:

- Description:
अनेक दूसरे लोगों की तरह मैं भी विदेशी साम्राज्यवाद के जुए से मातृभूमि को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी आंदोलन से करीब से जुड़ा था। गांधीजी जब सन् 1915 के शुरू में दक्षिण अफ्रीका से आए तो उनके निकट संपर्क में आने वाला मैं पहला राजनीतिक कार्यकर्ता था। मैं उनके पहले सत्याग्रह आंदोलन के साथ भी करीब से जुड़ा था, जो चंपारण (बिहार) में गोरे निलहों के अत्याचार के खलाफ हुआ। हमारी आजादी की लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण और बेचैनी वाले दौर में मैं कांग्रेस का बारह वर्ष तक महामंत्री रहा। जिस साल देश को आजादी मिली, उस वक़्त मैं कांग्रेस अध्यक्ष था। मेरे दोस्तों को लगता है कि हमारे राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में मेरी जानकारी काफी अंतरंग और नई चीजें सामने लाने वाली होगी। इस कारण मेरे संस्मरणों का कुछ ऐतिहासिक महत्व होगा। इसलिए मैंने जो कुछ लिखा है, उसमें अपने बारे में कम लिखकर हमारी आजादी की लड़ाई पर ज्यादा लिखा है। इस पुस्तक को मैंने ‘माई टाइम्स : मेरा दौर’ नाम दिया है, पर इसमें ‘मैं’ का जिक्र उतना ही भर है, जितना जरूरी है। मेरे जीवन की कथा में भी कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का बड़ा हिस्सा समाया हुआ है। इसलिए यह कोई आत्मकथा न होकर, इन बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड भी है और इनका वर्णन करते हुए मैंने यह जिक्र कम किया है कि मैंने क्या-क्या किया, बल्कि यह बताने की कोशिश की है कि मैंने तब क्या देखा और समझा।
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
J.B. Kriplani
20% off₹ 900
₹ 720
Available
Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description:
"जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया। जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया। उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।
Sadak Se Sansad Tak
- Author Name:
Shivanand Tiwari
- Book Type:

- Description:
लोहिया, जेपी, किशन पटनायक, रामानन्द तिवारी, कर्पूरी ठाकुर वाली परम्परा के ही नेता हैं शिवानंद तिवारी। जितना लम्बा उनका राजनीतिक जीवन है आज की राजनीति में कम लोगों का है। वे गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई राजनीति करते रहे हैं और सन् पैंसठ के पहले से सक्रिय हैं। बाबा के नाम से विख्यात शिवानन्द जी के पास अनुभव, किस्सों और प्रत्यक्ष देखी घटनाओं का सम्भवत: सबसे बड़ा खजाना है। वे साठ के दशक के आखिर में शुरू हुए अंग्रेजी हटाओ आन्दोलन वाले दौर से सक्रिय रहे हैं और चौहत्तर के जेपी आन्दोलन के अगुआ लोगों में हैं। उन्होंने किशन पटनायक के साथ लोहिया विचार मंच और समता संगठन की राजनीति की और उनसे अलग होकर भी उनकी वैचारिक और व्यावहारिक राजनीति के पाठ से अलग नहीं हुए। इन भाषणों और टिप्पणियों से उनके चिन्तन का दायरा और दिशा झलकती है। साफ लगता है कि भूमंडलीकरण और साम्प्रदायिक राजनीति उनकी चिन्ता के केन्द्र में है। शिवानंद जी के इन भाषणों में किसानों की आत्महत्या, बुनकरों की भुखमरी और आत्महत्या, पेटेंट रीजीम से होने वाली मुश्किलों और उसकी कानूनी लड़ाई, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा गरीबों का भोजन बढ़ाने से महँगाई आने के कुतर्क की आलोचना, किसानों के खेती छोड़ने पर टिप्पणी है। और इसमें से काफी चीजों के लिए नई आर्थिक नीतियों को दोषी बताया गया है। यह आलोचना सही थी और यह किताब का महत्त्व है क्योंकि भूमंडलीकरण के पूरे दौर में कहीं से संसद के अन्दर इन नीतियों की आलोचना नहीं हुई।
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Hanuman Gatha (Shri Hanuman Ji Ka Sampuran Jeevan Gatha) Devotional & Spiritual Hanuman Katha Book in Hindi
- Author Name:
Ashok Narayan
- Book Type:

- Description:
ज्ञानिनामाग्रगण्य सकल गुणनिधान कपिप्रवर हनुमान के बारे में कौन नहीं जानता? अद्वितीय प्रतिभा और अतुलित बल के कुबेर होते हुए भी उन्होंने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग कभी नहीं किया। साधारण मनुष्य में यदि विद्या, गुण या कौशल आदि थोड़े से गुण भी आ जाएँ, तो वह दर्प से चूर हो जाता है, परंतु हनुमान सर्वगुण-संपन्न होकर भी सेवक ही बने रहे। प्रस्तुत पुस्तक ‘हनुमानगाथा’ में संकट-मोचक हनुमान के संपूर्ण जीवन को रामायण, रामचरितमानस आदि ग्रंथों के परिप्रेक्ष्य में आत्मकथात्मक शैली में पवनपुत्र के श्रीमुख से विवेचन हुआ है। हनुमान का चरित्र अलौकिक गुणों से संपन्न असंभव को संभव बनानेवाला है। आज के भौतिकवादी संसार में हनुमान के पावनचरित को अपनाए जाने की महती आवश्यकता है। वर्तमान में संसार को सेवा और भक्ति की पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है। इसके लिए सबसे बड़े आदर्श और प्रेरणास्रोत हनुमान ही हो सकते हैं। इस नाते परोपकारी हनुमान का चरित अनुकरणीय है। सुधी पाठक हनुमान के पावन गुणों को आत्मसात् कर घोर कष्टों और अशांति से निजात पाएँ, इसी में इस पुस्तक के लेखन की सफलता है।
Ethics For Civil Services With 100 Case Studies
- Author Name:
Alok Ranjan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Leo Tolstoy Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Book Type:

- Description:
"‘‘क्या वे लोग खेत जोत रहे हैं? क्या उन लोगों ने अपना काम खत्म कर लिया?’’ ‘‘उन लोगों ने आधे से अधिक खेत जोत लिये हैं।’’ ‘‘क्या कुछ भी काम बचा नहीं है?’’ ‘‘मुझे तो नहीं दिखा; पर उन्होंने जुताई अच्छी तरह से की है। वे सभी डरे हुए हैं।’’ ‘‘ठीक है। अब तो जमीन ठीक हो गई है न?’’ ‘‘हाँ, अब खेत तैयार हैं और उनमें अफीम के पौधों के बीज डाले जा सकते हैं।’’ मैनेजर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘वे लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं? क्या वे मुझे गाली देते हैं?’’ बूढ़ा कुछ हकलाने लगा, पर माइकल ने उसे सच बोलने के लिए कहा, ‘‘तुम मुझे सच बताओ। तुम अपने शब्द नहीं, बल्कि किसी और के शब्द बोल रहे हो। यदि तुम मुझे सच-सच बताओगे, तब मैं तुमको इनाम दूँगा; और अगर तुम मुझे धोखा दोगे तो ध्यान रखना, मैं तुम्हें बहुत मारूँगा। कर्तुशा! इसे एक गिलास वोदका दो, ताकि इसमें साहस पैदा हो।’’ —इसी संग्रह से • सुप्रसिद्ध रूसी कथाकार लियो टॉलस्टॉय ने जीवन के सभी पक्षों पर प्रभावी रचनाएँ की हैं। उन्होंने धर्म में व्याप्त पाखंड तथा तत्कालीन कुरीतियों को अनावृत किया। मनोरंजन के साथ-साथ मन को उद्वेलित करनेवाली सरस टॉलस्टॉय की लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।"
The Little Book of Rumi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Ikigai
- Author Name:
Dr. Rashmi
- Book Type:

- Description:
क्या है इकिगाई इकिगाई के बारे में कोई भी चर्चा मिएको कामिया के उल्लेख के बिना पूरी नहीं होगी, जिन्हें प्राय: ‘इकिगाई मनोविज्ञान की माँ’ कहा जाता है। वह इकिगाई के अध्ययन में अग्रणी लोगों में शामिल थीं और अपनी पुस्तक ‘इकिगाईनी- सुइत’ (क्या हमारे जीवन को जीने योग्य बनाता है) में उन्होंने अपने विचारों और शोध कार्य को प्रस्तुत किया है। पुस्तक को इकिगाई साहित्य में श्रेष्ठ ग्रंथों में माना जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि यह सन 1966 में प्रकाशित हुई थी। —इसी पुस्तक से इकिगाई में जीवन में खुशियाँ समाई हैं। यह हमारे होने का कारण है। इकिगाई की मदद से आप जीवन में हर दिन संतुलन, प्रसन्नता और तृप्ति ढूँढ़ पाते हैं। इकिगाई मात्र एक जीवन-दर्शन या विचारधारा नहीं बल्कि एक परिवर्तनकारी मानव-अनुभव है। इकिगाई किसी कंपास की तरह कॅरियर और जीवन के फैसलों में राह दिखा सकता है।
Hamara Panchayati Raj
- Author Name:
Pratapmal Devpura
- Book Type:

- Description:
भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। ग्राम-व्यवस्था वस्तुतः राष्ट्र-व्यवस्था की बुनियाद है। यही कारण है कि हमारे राष्ट्रनायकों ने सामाजिक उन्नयन, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक प्रगति और राजनीतिक चेतना की दृष्टि से गाँवों को पर्याप्त महत्त्व दिया है। सबका मानना है कि भारत के विकास का रास्ता गाँवों से होकर गुज़रता है। महात्मा गांधी के श्रम, स्वदेशी और स्वावलम्बन की कर्मभूमि अधिकांश अर्थ में गाँव ही है। प्रतापमल देवपुरा द्वारा लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ पुस्तक पंचायती राज के प्रति जानकारी व जागरूकता उत्पन्न करने हेतु लिखी गई है। पुस्तक जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य नागरिकों के लिए सामाजिक रूप से उपयोगी है। 50 छोटे-छोटे अध्यायों में पंचायती राज से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाओं व जानकारियों की सूत्र-शैली में प्रस्तुति सकारण है। इस पद्धति से सूचनाएँ सरलता से प्राप्त हो जाती हैं। जैसे ‘सूचना का अधिकार’ के अन्तर्गत पहला सूत्र है, ‘सूचना के अधिकार का अर्थ है—नागरिकों द्वारा सूचना माँगने पर सूचना मिले जिससे उसका जीवन बेहतर एवं सुरक्षित बने; इसके साथ ही सरकारी विभागों द्वारा सूचना देने का कर्तव्य।’ सरल व सुबोध भाषा में लिखित ‘हमारा पंचायती राज’ अत्यन्त जनोपयोगी पुस्तक है।
Katha Ek Kans Ki "कथा एक कंस की" | A Classic Play of Theatre Book in Hindi
- Author Name:
Daya Prakash Sinha
- Book Type:

- Description:
"नाटक साहित्य है और कला भी। नाटक का यह द्विआयामी चरित्र ही उसकी विशेषता है। कुछ नाटकों का साहित्य में बड़ा सम्मान होता है, किंतु रंगमंच पर उनकी प्रस्तुति सफल नहीं होती । इसी प्रकार कुछ नाटक रंगमंच पर बड़े सफल होते हैं, किंतु उनके आलेख में साहित्यगत मूल्यों का अभाव होता है। श्रेष्ठ नाटक वे होते हैं, जो साहित्यगत मूल्यों से भरपूर हों और जिनकी प्रस्तुतियाँ रंगमंच पर भी उतनी ही सफल सिद्ध हों; जैसे शेक्सपियर के नाटक। यह नाटक के मूल्यांकन की कसौटी हैं। नाटक “कथा एक कंस की' इस कसौटी पर खरा उतरता है। “कथा एक कंस की' नाटक देश के प्राय: सभी बड़े नगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गोरखपुर, कानपुर, देहरादून, प्रयागगाज, उदयपुर आदि की नाट्य संस्थाओं द्वारा मंचित हो चुका है। पंजाबी तथा ओडिया भाषाओं में भी इसका अनुवाद हो चुका है। तमिल, कनन्नड, तेलुगु, मलयालम और बांग्ला भाषाओं में अनुवाद प्रकाशनाधीन हैं। “कथा एक कंस की"" नाटक दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अनेक विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता रहा है। साहित्य-जगत तथा कला-जगत दोनों द्वारा स्वीकृत और सम्मानित “कथा एक कंस की ' हिंदी नाटक विधा की एक कालजयी कृति है।"
Over The Top "ओवर द टॉप" : OTT ka Mayajaal Book in Hindi - Anant Vijay
- Author Name:
Anant Vijay
- Book Type:

- Description:
ओवर द टॉप (ओ.टी.टी.) प्लेटफॉर्म हमारे देश के लिए मनोरंजन का अपेक्षाकृत नया माध्यम है। इस माध्यम को हमारे देश में आरंभ हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। देश में इंटरनेट का बढ़ता घनत्व और डाटा सस्ता होने के कारण इस प्लेटफॉर्म की व्याप्ति बढ़ी है। कोरोना महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन ने भी इस माध्यम को लोकप्रिय बनाया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों और ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के बीच ओ.टी.टी. के कंटेंट को लेकर विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जानेवाली सामग्री के विनियमन को लेकर जो त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई थी, उसके परिणाम संतोषजनक नहीं दिखाई दे रहे हैं। न तो अश्लीलता रुक रही है और न ही विवादित प्रसंग। ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जानेवाली सामग्री में गालियों की भरमार, यौनिकता और नग्नता का प्रदर्शन, जबरदस्त हिंसा और खून- खराबा, अल्पसंख्यकों की स्तिथि को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ, कई बार सैनिकों की छवि खराब करने जैसे प्रसंग भी सामने आते रहे हैं। अभिव्यक्त की रचनात्मक स्वतंत्रता और यथार्थ की आड़ में नग्नता एवं गाली-गलौज दिखाने का चलन कम नहीं हुआ। संसदीय समिति ने ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म पर दिखाई जानेवाली अश्लीलता पर चिंता प्रकट की थी। समिति के अधिकांश सदस्यों का मानना था कि इनमें दिखाई जानेवाली सामग्री भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है। ओ.टी.टी. के सभी पक्षों पर विश्लेषणात्मक विवरण देती विचारप्रधान पुस्तक।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book