Pravas Aur Pravas
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Author:
Udayan Vajpeyi, Krishna Baldev VaidPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
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कृष्ण बलदेव वैद हमारे वरिष्ठ लेखकों में बिरले हैं जिन्होंने साहित्य की अनौपचारिक विधाओं जैसे—डायरी, पत्र और संवाद में निरन्तर नवाचार किया है। इनमें उनकी बेबाकी, साफगोई, आत्मालोचन, विडम्बना-बोध आदि सब ज़ाहिर होते हैं। यह लम्बा संवाद उसी सिलसिले में है। जीवन और साहित्य दोनों को लम्बे समय से साधने की कोशिश में लगे वैद के अनुभव और विचार का रेंज बहुत व्यापक है और वे अपने समय, समाज, अध्ययन, लेखन, मित्रों, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थिति और तनावों आदि पर जो कहते हैं, वह एक साथ उन्हें समझने और हमारे समय में लेखक की स्थिति और विडम्बना को समझने में हमारी मदद करता है। इस लम्बे संवाद को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। — अशोक वाजपेयी
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कृष्ण बलदेव वैद हमारे वरिष्ठ लेखकों में बिरले हैं जिन्होंने साहित्य की अनौपचारिक विधाओं जैसे—डायरी, पत्र और संवाद में निरन्तर नवाचार किया है। इनमें उनकी बेबाकी, साफगोई, आत्मालोचन, विडम्बना-बोध आदि सब ज़ाहिर होते हैं। यह लम्बा संवाद उसी सिलसिले में है। जीवन और साहित्य दोनों को लम्बे समय से साधने की कोशिश में लगे वैद के अनुभव और विचार का रेंज बहुत व्यापक है और वे अपने समय, समाज, अध्ययन, लेखन, मित्रों, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थिति और तनावों आदि पर जो कहते हैं, वह एक साथ उन्हें समझने और हमारे समय में लेखक की स्थिति और विडम्बना को समझने में हमारी मदद करता है। इस लम्बे संवाद को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
— अशोक वाजपेयी
Book Details
-
ISBN9789388183949
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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