Mahila Patrakarita
Author:
Sudha ShuklaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789350481189
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Sankalp Kaal Speeches By Shri Atal Bihari Vajpayee
- Author Name:
Dr. N.M. Ghatate
- Book Type:

- Description: Awaiting description
Sheeba Ki Rani Makeda
- Author Name:
Sushma Gupta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Cinema Aur Itihas
- Author Name:
Chandrabhushan Gupt Ankur
- Book Type:

- Description: Cinema
Hindi-Angrezi Abhivyakti Kosh
- Author Name:
Dr. Kailash Chandra Bhatia
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tata : Ek Carporate Brand Ka Vikas
- Author Name:
Morgen Witzel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Meri Pyari Gudiya
- Author Name:
Maya Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samay Ka Sach
- Author Name:
R.K. Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tulsi Ke Hiye Heri
- Author Name:
Vishnukant Shastri
- Book Type:

- Description: भारतीय जीवन-दृष्टि को रूपायित, व्याख्यायित एवं परिष्कृत करने वाला संत तुलसीदास का काव्य आज भी देश की जनता के मन-प्राण में समाया हुआ है। ध्यान देने की बात तो यह है कि शिक्षित और अशिक्षित सभी उसे समान आदर और सम्मान देकर भावविभोर होते हैं। प्रस्तुत पुस्तक के लेखक ने ठीक ही कहा है कि ‘गहि न जाइ अस अद्भुत बानी।’ वस्तुतः तुलसी-काव्य में इतना मर्म और भारतीय संस्कृति का व्यापक फलक समाहित है कि उसमें नयी-नयी प्रेरणाओं के अनन्त स्रोत समाहित हैं। उनकी काव्य-सरिता में अवगाहन करने वाले को सदा नयी स्फूर्ति और नयी चेतना मिलती रहेगी। प्रस्तुत पुस्तक के लेखक ने विनम्र भाव से तुलसी-काव्य के मर्म तक पहुँचने की बात कही है लेकिन सच्चाई यह है कि उसकी आत्म-निमग्नता और सांस्कृतिक दृष्टि ने अप्रतिम सफलताएँ प्राप्त की हैं। इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि तुलसी-काव्य के प्रेमियों को इस पुस्तक से अपार तुष्टि प्राप्त होगी।
Netaji Subhas Chandra Bose
- Author Name:
Meenu Sinhal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Second Lieutenant Arun Khetarpal
- Author Name:
Major Rajpal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samaj, Paryavaran Aur Abhiyantriki
- Author Name:
Arvind Kumar Gupta
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में तीन अलग-अलग विषयों—समाजशास्त्र, पर्यावरण तथा इंजीनियरी को एक-दूसरे का आधार मानते हुए समाहित किया गया है। ये तीनों ही विषय समाज के विभिन्न घटकों को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। आठ अध्यायों में विभाजित इस पुस्तक में समाजशास्त्र, सामाजिक उद्विकास एवं प्रक्रियाएँ, अभियन्ता एवं समाज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी निर्धारण एवं हस्तान्तरण, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा उद्योगों में मानवीय सम्बन्ध, आदि के विभिन्न क्षेत्रों में होनेवाले विकास तथा समाज से सम्बन्धों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक दी इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स, (इंडिया) द्वारा संचालित सेक्शन ‘ए’ के पाठ्यक्रम के अनुसार तथा हिन्दी-भाषी विद्यार्थियों की कठिनाइयों को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लिखी गई है। विश्वास है कि अन्य पाठकों के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
The Sangh & Swaraj
- Author Name:
Ratan Sharda
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Zanjeeren Aur Deewaren
- Author Name:
Ramvriksh Benipuri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
STRAY WRITINGS (PB)
- Author Name:
Raj Kumar Bhatia
- Book Type:

- Description: the author is a respected social activist in Delhi belonging to RSS school of thought. In over six decades of his public life, he wrote on several subjects which are compiled in this book. He spent over four decades in Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad and was it’s top office bearer and ideologue. Several of his writings relate to that phase of his life. It’s a thought provoking collection of author’s writings on diverse subjects.
Modi : Comman Man's PM
- Author Name:
Kishor Makwana
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vishwa Ke 20 Mahan Samaj Sudharak
- Author Name:
Gopi Krishna Kunwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Young India
- Author Name:
Lala Lajpat Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Diabetes : Safety And Control In Your Hands
- Author Name:
Dr. N.K. Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Duniya Meri Nazron Mein (Hindi Translation of The World as I See It)
- Author Name:
Albert Einstein
- Book Type:

- Description: मनुष्य के कार्य उसकी बाहरी व आंतरिक आवश्यकताओं से निर्धारित होते हैं। अल्बर्ट आइंस्टाइन को उनके ‘सापेक्षता के सिद्धांत’ तथा सैद्धांतिक भौतिकी में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। सन् 1921 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। क्वांटम थ्योरी, वॉर्महोल्स तथा थर्मोडायनामिक्स पर उनके लेख एवं शोध आज भी नवोदित वैज्ञानिकों के दिमाग में जिज्ञासा की तरंगें उत्पन्न करते हैं। ‘द वल्र्ड ऐज आई सी इट’ (1934) पुस्तक की रचना प्रथम विश्वयुद्ध तथा हिटलर के सत्तारूढ़ होने के परिणामस्वरूप हुई थी, जिसमें आइंस्टाइन अपने जीवन में संतुलन बिठाने की तमाम उथल-पुथल के बीच भी एक शांतिपूर्ण विश्व की कामना करते हैं। वैज्ञानिक शब्दजाल से परे इस पुस्तक में आइंस्टाइन ने कई पत्रों, लेखों तथा साक्षात्कारों के माध्यम से यहूदी समाज में व्याप्त शिक्षा, नैतिकता, राजनीति, विज्ञान, धर्म आदि महत्त्वपूर्ण विषयों पर अपनी अंतर्दृष्टि प्रकट की, जिससे वे असंख्य पाठकों में लोकप्रिय बन गए।
Mere Priya
- Author Name:
Saiyed Haider Raza
- Book Type:

- Description: रज़ा साहब जब 2010 के अन्त में अपने जीवन का आख़िरी चरण बिताने दिल्ली आ गए तो अपने साथ पुस्तकों, कैटलॉगों व अन्य काग़ज़ात का एक बड़ा संग्रह भी लाए। इस सारी सामग्री को एकत्र और व्यवस्थित कर रज़ा अभिलेखागार बनाया जा रहा है। जो काग़ज़ात हमें मिले उनमें रज़ा के कलाकार-मित्रों के कई पत्र भी मिले हैं। इनमें मक़बूल फिदा हुसेन, फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, के.एच. आरा, रामकुमार, कृष्ण खन्ना और तैयब मेहता शामिल हैं। उनके पत्राचार में निजी, कलात्मक, सामाजिक आदि कई विषयों पर लिखा गया है और उन्हें पढ़ने से एक मूर्धन्य कलाकार की संघर्ष-गाथा के कई पहलू समझ में आते हैं। उस परिवेश, उन मित्रों और उनके सम्बन्धों पर भी रोशनी पड़ती है जिन्होंने रज़ा को एक व्यक्ति और कलाकार के रूप में विकसित होने में भूमिका निभाई। यह एक तरह का अनौपचारिक रिकॉर्ड भी है जो हमें बताता है कि हमारे कुछ कला-मूर्धन्य अपने समय कैसे देख-समझ रहे थे, उनकी उत्सुकताएँ और बेचैनियाँ क्या थीं और एक विकासशील सौन्दर्य-बोध कैसे आकार ले रहा था। इस पत्राचार को क्रमश: कुछ पुस्तकों में प्रकाशित करने का इरादा है। इस सीरीज़ में पहली पुस्तक रज़ा और कृष्ण खन्ना के पत्राचार की है। सौभाग्य से इन दोनों ने एक-दूसरे के पत्र सँभालकर रखे। दो मूर्धन्य कलाकारों के बीच यह पत्र-संवाद बिरला है और इसे हिन्दी अनुवाद में प्रकाशित करते हमें प्रसन्नता है। —अशोक वाजपेयी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book