Letters to My Kids
Author:
Dr. Kirti SisodiaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
This book doesn’t have any description
ISBN: 9789395386340
Pages: 136
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Thomas Alva Edison
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: बाल्यकाल में ही बधिरता जैसे अभिशाप को एकाग्रता जैसे अद्भुत गुण में परिवर्तित करनेवाले थॉमस अल्वा एडिसन ने जीवन के अंतिम प्रहर तक थकना नहीं सीखा। औपचारिक शिक्षा से वंचित होने पर भी साहित्य से लेकर विज्ञान तक का गहन अध्ययन करनेवाले इस वैज्ञानिक ने अपने कार्यकाल में औसतन हर पंद्रह दिन में एक पेटेंट हासिल किया; उनके जरिए दुनिया आधुनिक काल में प्रवेश कर गई और उपभोक्तावाद का प्रादुर्भाव हुआ। नियति ने उसे पल-पल पर खोने के लिए मजबूर किया। तमाम उद्योगों में घाटा हुआ, अनेक आविष्कार असफल हुए, प्रयोगशाला जल गई, मित्रों और सहयोगियों ने भी धोखा दिया, संतानों में अविश्वास उपजा; किंतु एडिसन आयु के हर पड़ाव पर दुनिया को देता ही रहा। बिजली, ग्रामोफोन, सिनेमा, रबर जैसे सैकड़ों अद्भुत आविष्कारों का जनक न युद्धकाल में चैन से बैठा और न ही शांतिकाल में। उसने पत्रकारिता भी की और समाज-सेवा भी। उसे मानव से प्यार था और पक्षियों से भी। वह नेत्रहीनों की सहायता भी करता रहा और फिल्मों के जरिए नवोदित कलाकारों की भी। अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर आम आदमी तक उसका मुरीद बन चुका था। आज भी एडिसन अनुसंधानकर्ताओं के लिए आइंस्टाइन की तरह रोचक विषय है। एक श्रेष्ठ जीवन की श्रेष्ठ गाथा है यह पुस्तक।
Hindu-Padpadshahi
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: शिवाजी महाराज ने एक पत्र में लिखा था—‘‘स्वयं भगवान् के ही मन में है कि हिंदवी-स्वराज्य निर्मित हो।’’ उस युवा वीरपुरुष ने क्रांतियुद्ध की पहल की। शिवाजी महाराज ने शालिवाहन संवत् 156७ (ई.स. 16४5) में अपने एक साथी के पास भेजे हुए पत्र में—स्वयं पर लगे इस आरोप का निषेध किया कि बीजापुर के शाह का प्रतिरोध कर उन्होंने राजद्रोह का पाप किया है। उन्होंने इस बात का स्मरण कराते हुए उच्च आदर्शों की भावना भी जाग्रत् की कि अपना एकनिष्ठ बंधन यदि किसी से है तो वह भगवान् से है, न कि किसी शाह- बादशाह से। उन्होंने उस पत्र में लिखा है— ‘‘आचार्य दादाजी कोंडदेव और अपने साथियों के साथ सह्याद्रि पर्वत के शृंग पर ईश्वर को साक्षी मानकर लक्ष्य प्राप्ति तक लड़ाई जारी रखने और हिंदुस्थान में ‘हिंदवी-स्वराज्य’ यानी हिंदू-पदपादशाही स्थापित करने की क्या आपने शपथ नहीं ली थी? स्वयं ईश्वर ने हमें यह यश प्रदान किया है और हिंदवी-स्वराज्य के निर्माण के रूप में वह हमारी मनीषा पूरी करनेवाला है। स्वयं भगवान् के ही मन में है कि यह राज्य प्रस्थापित हो।’’ शिवाजी महाराज की कलम से उतरे ‘हिंदवी-स्वराज’—इस शब्द मात्र से एक शताब्दी से भी अधिक समय तक जिस बेचैनी से महाराष्ट्र का जीवन तथा कर्तव्य निर्देशित हुआ और उसका आत्मस्वरूप जिस तरह से प्रकट हुआ, वैसा किसी अन्य से संभव नहीं था। मराठों की लड़ाई आरंभ से ही वैयक्तिक या विशिष्ट वर्ग की सीमित लड़ाई नहीं थी। हिंदूधर्म की रक्षा हेतु, विदेशी मुसलिम सत्ता का नामोनिशान मिटाने के लिए तथा स्वतंत्र और समर्थ हिंदवी-स्वराज्य स्थापित करने के लिए लड़ी गई वह संपूर्ण लड़ाई हिंदू लड़ाई थी।
Oorja Rajya Ka Sapna : Nakaratmakta Ke Mayajaal Mein
- Author Name:
Raj Kumar Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaidik Beejganit
- Author Name:
Shailendra Bhushan +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kumbh : Manthan Ka Mahaparva
- Author Name:
Sanjay Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Pandey Bechan Sharma ‘Ugra’ Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Pandey Bechan Sharma (Ugra)
- Book Type:

- Description: पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ असाधारण रचनाकार और सृजक थे। सारा हिंदी जगत् एक अरसे तक ‘उग्र’ की उग्रता से काँपता रहा, उनसे लोहा लेने में डरता रहा; मगर ‘उग्र’ जी का बाह्य व्यक्तित्व देख हिंदी जगत् ने उन्हें जीते जी उपेक्षा के गर्त में और विरोध की खाइयों में ढकेल दिया। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी व विडंबना थी। उनके अंतरंग कोमल पक्ष को, जो नारियल की तरह बाहर से कठोर और अंदर से मृदु व कोमल था, कोई नहीं जान पाया। ‘उग्र’ के संपूर्ण व्यक्तित्व पर विगत 44 वर्षों से अनथक अनवरत परिश्रम करते हुए उनके कृतित्व के अनछुए पहलुओं पर कार्य किया है। अब तक ‘उग्र’ पर, उनके साहित्य पर मेरी 24 से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनका हिंदी जगत् ने सम्यक् स्वागत किया है। हाँ, समीक्षकों से अवश्य हमेशा की तरह जैसा ‘उग्र’ के साथ हुआ, ‘उग्र’ के साहित्य को भी उपेक्षा और अवमूल्यन मिला है। खैर— मेरे लबों पे दुआ उसके लबों पे गाली, जिसके अंदर जो था वही तो बाहर निकला। इस क्रम में निवेदित है ‘उग्र’ की कलम से निःसृत मार्मिक और हृदयस्पर्शी लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।
Dr. Suresh Awasthi Ke Pratinidhi Vyangya "डॉ. सुरेश अवस्थी के प्रतिनिधि व्यंग्य" Book in Hindi
- Author Name:
Chakradhar Shukla
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Art of Trading Through Candlestick Charts | Technical Analysis Simplified Breakout Patterns with Explanation
- Author Name:
Shyam Sundar Goel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Body Language: Read What People Have in Their Minds
- Author Name:
M.K. Mazumdar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Marjar Kosh
- Author Name:
Parashuram Shukla
- Book Type:

- Description: मार्जार संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है—बिल्ली। सामान्यतया बिल्ली से घरेलू बिल्ली का बोध होता है; किन्तु जीवविज्ञान में इस शब्द का विस्तृत अर्थों में प्रयोग किया गया है एवं इसके अन्तर्गत बाघ और सिंह से लेकर पालतू बिल्ली तक को सम्मिलित किया गया है। ये सभी जीव मार्जार परिवार के जीव कहलाते हैं। बाघ सहित मार्जार परिवार के अन्य जीवों की जानकारी पुस्तक के परिचय में संक्षेप में दी गई है। इनमें रोचक और रोमांचक तथ्यों के साथ ही ज्ञानवर्धक जानकारियाँ भी हैं, जो निश्चित रूप से जनसामान्य के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी। इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। वन्यजीवों का सीधा सम्बन्ध वनों से है। वनों से वर्षा और वर्षा से जीवन। अर्थात् मानव का अस्तित्व बनाए रखने के लिए वन्यजीव आवश्यक हैं। हमारे देश में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने बाघ, सिंह, तेंदुए आदि का नाम तो सुना है, किन्तु इनके विषय में कुछ नहीं जानते। घरेलू बिल्लियाँ तो सभी ने देखी होंगी, किन्तु इनके विषय में भी जनसामान्य को विशेष जानकारी नहीं है। भारत में मार्जार परिवार के ऐसे अनेक जीव पाए जाते हैं, जिनका लोगों ने नाम तक नहीं सुना। इस पुस्तक में इन्हीं सब जीवों की जानकारी बड़े रोचक ढंग से दी गई है।
The Life and Times of Sri Aurobindo Ghosh
- Author Name:
Kaushal Kishore
- Book Type:

- Description: Aurobindo's ideology and principles embody divinity, ethics, spontaneity and knowledge. He was an accomplished teacher, a profound scholar, a writer and a spiritual Guru. For him, nationalism was a holy offering to the motherland when viewed from the divine perspective. Aurobindo also played a very prominent role as a revolutionary. His contribution to politics cannot be ignored. Although his writings are philosophical, they also provide valuable social and cultural analysis. He was the one who suggested that "Poorna Swaraj" should be the main aim behind the revolutionary movement against the British. Nationalists were aroused with the inspiration to seize power from foreign masters. Aurobindo was an eminent educationist also. He greatly valued the inherent qualities and talents in each child. He felt that the role of education should be to nurture and enhance these God-given qualities. This book throws light on Sri Aurobindo Ghosh's Life. This is a biographical sketch for readers.
Sachchidanand Sinha Rachnawali : Vol. 1-8
- Author Name:
Sachchidanand Sinha
- Book Type:

- Description: मुद्रित शब्दों की मुख्यधारा के हिन्दी संसार को यह रचनावली ऐसा बहुत कुछ देनेवाली है जिससे हम अभी तक वंचित रहे आए हैं। यह राजनीति, अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र के साथ-साथ दर्शन, कला, संस्कृति और धर्म आदि सभी विषयों पर मौलिक, वैकल्पिक और दिशादर्शक चिन्तन-लेखन करनेवाले भारतीय समाजशास्त्री सच्चिदानन्द सिन्हा के समग्र लेखन की प्रस्तुति है जिसका अधिकांश ऐसा है जो पाठकों के सामने पहली बार व्यवस्थित रूप में आ रहा है। व्यापक अध्ययन और उतने ही बड़े फलक पर उनकी राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता ने सच्चिदा जी को विचार, विवेचना और अभिव्यक्ति की जो सामर्थ्य दी वह उनके लेखन को भी विशिष्ट बनाती है और उनके जीवन को भी। उनके विचार संघर्षशील जन से उनके सीधे जुड़ाव से परिपक्व हुए, उन्होंने जो लिखा वह अपने समाज, देश और जन-गण की परिस्थितियों में वास्तविक परिवर्तन को लक्ष्य करके लिखा। उनका लेखन न तो शोधवृत्तियों और वजीफों के परिणामस्वरूप हुआ, और न ही किसी अकादेमिक उपलब्धि के लिए, उसकी प्रेरणा इससे कहीं ज्यादा गहरी थी और पढ़नेवाले को वह उतनी ही गहराई में छूती भी है। उन्होंने अनेक विषयों पर लिखा, अनेक रूपों में लिखा, और अलग-अलग मकसद से लिखा। गहन अवधारणात्मक चिन्तन पुस्तकों में आया, समकालीन मुद्दों पर अखबारों-पत्रिकाओं में लिखा, कार्यकर्ता-शिविरों के लिए अलग ढंग से लिखा, और जरूरत महसूस हुई तो बच्चों के लिए गीत भी लिखे। इस रचनावली में यह सब समेटने का प्रयास किया गया है। सच्चिदानन्द रचनावली के इस पहले खंड में कला, संस्कृति, भारतीयता, जीवन तथा कला-बोध से सम्बन्धित उनके लेखन को शामिल किया गया है। इसमें तीन पुस्तकें, कुछ भाषण और कुछ लेख संकलित हैं। कला की बुनियादी समझ बनानेवाली उनकी चर्चित पुस्तक ‘अरूप और आकार’ को भी इसमें संकलित किया गया है। इस खंड की सामग्री कला और समाज की पारस्परिकता, तथा संस्कृति व मनुष्य की अन्तर्निर्भरता के व्यापक परिप्रेक्ष्य में हमें एक समग्र जनसापेक्ष दृष्टि विकसित करने में सहायता देती है।
Super Child
- Author Name:
Rohit Mehra (Irs)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SIDDH-NATH AUR SANT SAHITYA KI RACHNATMAK ANTARDHARA
- Author Name:
Anupam Singh
- Book Type:

- Description: अब तक सिद्धों-नाथों और संतों के बीच दार्शनिक सम्बन्ध ही अधिक खोजा गया है। परन्तु इस पुस्तक में मैंने दार्शनिक पक्ष के साथ-साथ उनके सामाजिक पक्ष को भी अंत:सम्बद्धता में देखा है। सिद्धों-नाथों और संतों के बीच अनेक समान्तर अंत सूत्र होने के बावजूद उनके दर्शन और विचार, उनकी भाषा और उनके सामाजिक सरोकार में अंतर देखने को मिलता है। यह भेद और उनके बीच की समानता को इस पुस्तक में कथ्य, संवेदना,रूप आदि के अलग-अलग स्तरों पर देखा गया। इस पुस्तक को प्रकाशित कराने का मेरा विचार 'प्रति संस्कृति' के निर्माण में सिद्धों, नाथों एवं संतों के योगदान को देखकर हुआ। अपने समय में प्रचलित मान्यताओं से इन्होंने अलग राह ली। परन्तु उसमें से कुछ समय से आगे और कुछ समय के दबाव और बहाव में ही गति करती रहीं। तीनों सम्प्रदाय के कवियों ने समाज में व्याप्त अनेक बाह्य आडम्बरों पर प्रहार किया, उनसे प्रति प्रश्न किया। परन्तु स्त्री के प्रति प्रचलित नजरिये को सिर्फ सिद्ध कवि ही तोड़ पाए। आडम्बरों पर तीनों सम्प्रदाय के कवि मुखर हैं परन्तु नाथों एवं संतों ने स्त्री को 'पितृसत्तात्मक' समाज में घुटने के लिए छोड़ ही नहीं दिया बल्कि अपनी राह भी अलग कर लीं।
Sarjnatmak Shiksha
- Author Name:
Raghav Prakash +1
- Book Type:

- Description: आज हर समझदार माता-पिता अपने बच्चे को सही शिक्षा दिलवाने के लिए बेचैन हैं, हर चैतन्य शिक्षक अपने विद्यार्थी को ऊँचाइयाँ देने के लिए आतुर है और हर प्रबुद्ध शिक्षा-प्रशासक अपने स्कूल-कॉलेज की शिक्षण-पद्धति को परवान चढ़ाकर उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए संकल्पित है। किन्तु, कुछ अपवादों को छोड़कर, दुनिया भर की शिक्षा सर के बल खड़ी है। असल में, व्यवस्था-केन्द्रित शिक्षा-पद्धति को विद्यार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षा की मूल्य-दृष्टि, उसका पाठ्यक्रम शिक्षण-पद्धति और मूल्यांकन-पद्धति सबकुछ विद्यार्थी की वृत्ति, रुचि, योग्यता और गति के अनुरूप होनी चाहिए; विद्यार्थी की चेतना में गहरे छिपी उसकी मूल्यवान सर्जनात्मक क्षमता का, अधिकतम विकास कैसे किया जा सकता है, उसकी तजबीज ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ में प्रस्तुत की गई है। इसमें जीवन-दृष्टि और शिक्षा-दृष्टि के ठहराव को उजागर कर कल्याणकारी जीवन-दृष्टि और उसी के अनुरूप सर्जनात्मक पाठ्यक्रम, सर्जनात्मक शिक्षण-पद्धति, सर्जनात्मक मूल्यांकन पद्धति एवं रचनात्मक शिक्षा-प्रशासन-व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है। पूर्व और पश्चिम के लगभग सौ शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, धर्मशास्त्रियों, शिक्षा-वैज्ञानिकों आदि द्वारा लिखित शोधपूर्ण पुस्तकों का गहन मंथन करने के उपरांत जो शिक्षा-दृष्टि और शिक्षा-व्यवहार विकसित हुआ है; ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ उसी का ऐसा ‘अमृत तत्त्व’ है जो उत्कृष्ट की तलाश में जुटे हुए प्रत्येक शिक्षाविद्, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षा-प्रबन्धक और चैतन्य विद्यार्थी के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय है।
Prema
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BIHAR KE TEERTHSTHAL
- Author Name:
SAMARTH
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yamini Katha
- Author Name:
Surya Bala
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jabalpur Model Book In Hindi
- Author Name:
Ved Prakash
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
MAHAKAVI RAMDHARI SINGH DINKAR
- Author Name:
Kapil
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...