DHYEYA YATRA (SET OF 2 VOL.)
About the book
ध्येय यात्रा एक ऐसा संदर्भ- ग्रंथ, जो राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर एक छात्र संगठन द्वारा व्यक्ति-निर्माण (नागरिक-निर्माण) को सामने रखकर किए गए बहुआयामी प्रयासों का प्रामाणिक अभिलेख प्रस्तुत करता है । इसमें राष्ट्र-विरोधी हिंसक शक्तियों पर लोकतंत्र एवं आत्म- बलिदान द्वारा अंकुश लगाने की तथ्यात्मक कहानी भी है और राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता व मानवीय संवेदना के विकास का प्रामाणिक दस्तावेज भी । यह बाह्न राष्ट्रीय परिवेश में स्थापित विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन की तथ्यात्मक पार्श्वकथा प्रस्तुत करता है, जिसमें सामाजिक परिवर्तन की रोमांचक एवं चमत्कृत कर देनेवाली परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने को लालसा और संकल्प के साथ ही मनुष्य- निर्माण-प्रक्रिया की सघन रचनात्मकता भी विद्यमान है। इस ग्रंथ में भारत के प्रति आत्मगौरव का भाव और छात्र- छात्राओं में आत्मविश्वास के साथ समर्पण व पुरुषार्थ का जागरण करनेवाले छात्र-संगठन का इतिवृत्त मुखरित हुआ है। इसे पढ़कर भारत के भविष्य के प्रति आश्वस्ति होती है, आगामी पीढ़ियों के प्रति विश्वास जाग्रत् होता है और शोध- अनुसंधान के नए क्षेत्रों का खुलासा भी । यह सामान्य समाज के लिए जहाँ छात्र-जीवन से ही दिशाबोध उत्पन्न करता है, वहीं मनुष्य-निर्माण की विशेष प्रणाली और सामाजिक संगठनों की भूमिका के संदर्भ में भी तथ्यात्मक मार्गदर्शन देता है।
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About the Book
ध्येय यात्रा एक ऐसा संदर्भ- ग्रंथ, जो राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर एक छात्र संगठन द्वारा व्यक्ति-निर्माण (नागरिक-निर्माण) को सामने रखकर किए गए बहुआयामी प्रयासों का प्रामाणिक अभिलेख प्रस्तुत करता है ।
इसमें राष्ट्र-विरोधी हिंसक शक्तियों पर लोकतंत्र एवं आत्म- बलिदान द्वारा अंकुश लगाने की तथ्यात्मक कहानी भी है और राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता व मानवीय संवेदना के विकास का प्रामाणिक दस्तावेज भी । यह बाह्न राष्ट्रीय परिवेश में स्थापित विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन की तथ्यात्मक पार्श्वकथा प्रस्तुत करता है, जिसमें सामाजिक परिवर्तन की रोमांचक एवं चमत्कृत कर देनेवाली परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने को लालसा और संकल्प के साथ ही मनुष्य- निर्माण-प्रक्रिया की सघन रचनात्मकता भी विद्यमान है।
इस ग्रंथ में भारत के प्रति आत्मगौरव का भाव और छात्र- छात्राओं में आत्मविश्वास के साथ समर्पण व पुरुषार्थ का जागरण करनेवाले छात्र-संगठन का इतिवृत्त मुखरित हुआ है। इसे पढ़कर भारत के भविष्य के प्रति आश्वस्ति होती है, आगामी पीढ़ियों के प्रति विश्वास जाग्रत् होता है और शोध- अनुसंधान के नए क्षेत्रों का खुलासा भी । यह सामान्य समाज के लिए जहाँ छात्र-जीवन से ही दिशाबोध उत्पन्न करता है, वहीं मनुष्य-निर्माण की विशेष प्रणाली और सामाजिक संगठनों की भूमिका के संदर्भ में भी तथ्यात्मक मार्गदर्शन देता है।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 500 grams
- ISBN-13
- 9789355620514
- Pages
- 816
- Reading time
- ~27 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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