CTET Central Teacher Eligibility Test Paper-2 (Class Vi-Viii) Social Studies/Social Science 15 Practice Sets with Latest Solved Papers (English)
(0)
₹
295
₹ 236 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789354889721
-
Pages260
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Dwiteeya Vishwa Yuddha
- Author Name:
Capt. Rajpal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lokshilpi Delhi Nagar Nigam
- Author Name:
Jagdish Mamgain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
India First
- Author Name:
K. R. Malkani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
YATAYAT KE SADHAN
- Author Name:
Deepika
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Australiya Ki Pratinidhi Kahaniyan "ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि कहानियाँ" Book In Hindi
- Author Name:
Rita Kaushal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Likhaan Niyam: Law of Right Writing | The Magic of Writing - Write to Heal, Transform, and Transcend Book in Hindi
- Author Name:
Sirshree
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Maithilisharan Gupta Sanchayita
- Author Name:
Nandkishore Naval
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttal Umang
- Author Name:
Prahlad Agarwal
- Book Type:

- Description: सुभाष घई पिछले लगभग पाँच दशकों से सृजनरत हैं। एक नाचीज़ से शुरू हुई उनकी रचना-यात्रा शिखर-सन्धान करते हुए आज भी जारी है। ‘कालीचरण’ की शुरुआत का अनजाना व्यक्तित्व हिन्दी सिनेमा में एक प्रतिमान की तरह स्थापित हो चुका है। इस तरह कि उसकी कठोरतम आलोचना भी की जा सकती है लेकिन उपेक्षा नहीं। आज सुभाष घई एक विशाल कॉरपोरेट साम्राज्य के शीर्षपुरुष हैं। उनकी निर्माण संस्था के अन्तर्गत अनेक फ़िल्मकार फ़िल्में बना रहे हैं। फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित अनेक उपक्रमों के वे मालिक हैं। उन्होंने अपनी पिछली कई फ़िल्में ख़ुद ही प्रदर्शित की हैं और अब वितरण व्यवसाय में भी प्रवेश कर चुके हैं। उनका इरादा फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित प्रशिक्षण देनेवाला एक विराट संस्थान भी आरम्भ करने का है, कहा जाता है कि उसकी सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। पर हमारे लिए या कहना चाहिए कि सिनेमा के आशिकों के लिए सबसे बढ़कर महत्त्व का उनका फ़िल्मकार व्यक्तित्व है जिसने उन्हें लाखों दिलों की चाहतों में शामिल किया है। हमारी यह किताब सुभाष घई के फ़िल्मकार व्यक्तित्व से ही मुख़ातिब है जिसका हमसे लगातार प्रगाढ़ सम्बन्ध बनता चला गया। कई जानकारियों से अवगत कराती एक बेहद महत्त्वपूर्ण कृति।
HINDI SANYUKTA AKSHAR GYAN
- Author Name:
Mahesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC TRE 3.0 Bihar Teacher Recruitment Class 9-10 "Samajik Vigyan" Social Science | 20 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Dalit Sahitya Sanchayita
- Author Name:
Preeti Sagar
- Book Type:

- Description: सवर्णवाद के सामाजिक-सांस्कृतिक वर्चस्व को चुनौती देनेवाले दलित साहित्य का आधार आधुनिक संवैधानिक मूल्य, मानव की सार्वभौमिक समानता और प्रजातंत्र में विश्वास है, और प्रेरणा का स्रोत उस अनन्त पीड़ा में है जो इस देश की दलित जातियों ने सदियों-सदियों अकारण और बिना कोई प्रतिरोध किए सही है। सन् 1914 में ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हीरा डोम की कविता ‘अछूत की शिकायत’ से आरम्भ मानी जानेवाली दलित साहित्य की यात्रा अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के सामाजिक-राजनीतिक अदालतों और आज़ादी के बाद संविधान से मिले नए स्पेस से होती हुई आज एक स्थापित धारा का रूप ले चुकी है। मात्र प्रतिरोध और आक्रोश की कलाहीन अभिव्यक्ति के आरोपों को झुठलाते हुए अपनी रचनात्मकता को उसने एक भिन्न सौन्दर्यशास्त्रीय ज़मीन भी दी है। प्रस्तुत संचयिता पिछली पूरी शताब्दी की दलित मनीषा के प्रमुख पड़ावों को संकलित करने का हिन्दी में सम्भवतः पहला सर्वांगीण प्रयास है। विद्रोह की तीव्र आकांक्षा को बेलाग स्वर में वाणी देनेवाली कविता, दलित जन के संघर्ष को गहराई से रेखांकित करनेवाली कहानी, दलित जीवन के अन्तर्बाह्य रेशों की व्याख्या करनेवाले उपन्यासों की स्वानुभूत पीड़ा की प्रामाणिक अभिव्यक्ति, आत्मकथा और अपनी पहचान के लिए लड़ रही रचना को ठोस वैचारिक आधार प्रदान करनेवाली आलोचना, सभी विधाओं का सम्यक् प्रतिनिधित्व इसमें हुआ है। उद्देश्य यही है कि दलित साहित्य के पाठकों, अध्येताओं और छात्रों को पीड़ा और प्रतिकार से उपजी सन्दर्भमूलक रचनाएँ एक जिल्द में उपलब्ध हो सकें; और दलित साहित्य का मूल स्वर कुछ प्रमुख रचनाओं के माध्यम से सामने लाया जाए। संचयिता में उनतीस कवियों की कविताएँ, तेरह कहानियाँ, सात महत्त्वपूर्ण उपन्यास-अंश, छह आत्मकथा-अंश और आठ आलोचनात्मक आलेख शामिल हैं।
Bharat Mein Prashasanik Seva Pareekshayen : Mithak evam Yatharth
- Author Name:
Devender Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Safal Business Ke Funde
- Author Name:
N. Raghuraman
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Miracle of Gratitude | No Debate Only Thanks Book in Hindi
- Author Name:
Sirshree
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SAMVEDNA KI AADRATA
- Author Name:
Pushpita Awasthi
- Book Type:

- Description: Article
JHARKHAND KE PARYATAN STHAL
- Author Name:
SUKHDEV
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Vaastushastra
- Author Name:
Pawan K. Goyal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Purushottam Parashuram
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Living My Convictions
- Author Name:
Shanta Kumar
- Rating:
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
Libas
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
कथाकार, शायर, गीतकार, पटकथाकार गुलज़ार ने लीक से हटकर शरत्चन्द्र की-सी संवेदनात्मक मार्मिकता, सहानुभूति और करुणा से ओत-प्रोत कई उम्दा फ़िल्मों का निर्देशन किया जिनमें ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘परिचय’, ‘आँधी’, ‘मौसम’, ‘ख़ुशबू’, ‘मीरा’, ‘किनारा’, ‘नमकीन’, ‘लेकिन’, ‘लिबास’, और ‘माचिस’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं।
‘लिबास’ एक ऐसी फ़िल्म का मंज़रनामा है जिस पर 1986 में फ़िल्म बन गई मगर आज तक रिलीज़ नहीं हुई। हालाँकि अफ़साने की सूरत में यह ‘चाबी’ और ‘सीमा’ नाम से प्रकाशित हो चुका है।
‘लिबास’ सीमा और सुधीर नाम के थिएटर की दुनिया के एक युगल के बिखरे रिश्तों की कहानी है जिसके केन्द्र में सीमा का चंचल व्यक्तित्व है। वह बहुत दिनों तक एक ही स्थिति में नहीं रह सकती। यहाँ तक कि बोरियत दूर करने के लिए वह अपने पति को छोड़कर दूसरी शादी कर लेती है लेकिन पुनः उसे बोरियत महसूस होने लगती है। मगर शादी लिबास तो नहीं होती कि फट जाए, मैला हो जाए तो बदल लिया जाए।
शब्दों के धनी और संवेदनशील शायर गुलज़ार ने इस मंज़रनामे में थिएटर की दुनिया की भी झलक दिखाई है। निश्चय ही पाठकों को यह कृति एक औपन्यासिक रचना का आस्वाद प्रदान करेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book