Book of Happiness
Author:
Jagdish GuptaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Unavailable
Awating description for this book
ISBN: 9788184302103
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Mission MBA
- Author Name:
Dr. Rajiv Thakur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JHTET Jharkhand Teacher Eligibility Test 2024 Paper (Shikshak Patrata Pariksha Class 1 - 5) Complete Study Guide in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NDA/NA National Defence Academy & Naval Academy Entrance Examination Solved Papers (2024-2015) | Paper 1 (Mathematics) & Paper 2 (General Ability Test)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vishwa Ke Mahan Ganitagya
- Author Name:
Rajesh Kumar Thakur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bihar B.Ed Sanyukt Pravesh Pareeksha CET B.Ed. 2023 Combined Entrance Test 20 Practice Sets in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Premchand Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: दस-बारह रोज और बीत गए। दोपहर का समय था। बाबूजी खाना खा रहे थे। मैं मुन्नू के पाँवों में पीनस की पैजनियाँ बाँध रहा था। एक औरत घूँघट निकाले हुए आई और आँगन में खड़ी हो गई। उसके वस्त्र फटे हुए और मैले थे, पर गोरी सुंदर औरत थी। उसने मुझसे पूछा, ‘‘भैया, बहूजी कहाँ हैं?’’ मैंने उसके निकट जाकर मुँह देखते हुए कहा, ‘‘तुम कौन हो, क्या बेचती हो?’’ औरत-‘‘कुछ बेचती नहीं हूँ, बस तुम्हारे लिए ये कमलगट्टे लाई हूँ। भैया, तुम्हें तो कमलगट्टे बड़े अच्छे लगते हैं न?’’ मैंने उसके हाथ में लटकती हुई पोटली को उत्सुक आँखों से देखकर पूछा, ‘‘कहाँ से लाई हो? देखें।’’ स्त्री, ‘‘तुम्हारे हरकारे ने भेजा है, भैया!’’ मैंने उछलकर कहा, ‘‘कजाकी ने?’’ स्त्री ने सिर हिलाकर ‘हाँ’ कहा और पोटली खोलने लगी। इतने में अम्माजी भी चौके से निकलकर आइऔ। उसने अम्मा के पैरों का स्पर्श किया। अम्मा ने पूछा, ‘‘तू कजाकी की पत्नी है?’’ औरत ने अपना सिर झुका लिया। -इसी पुस्तक से उपन्यास सम्राट् मुंशी पेमचंद के कथा साहित्य से चुनी हुई मार्मिक व हृदयस्पर्शी कहानियों का संग्रह।
SIDDH-NATH AUR SANT SAHITYA KI RACHNATMAK ANTARDHARA
- Author Name:
Anupam Singh
- Book Type:

- Description: अब तक सिद्धों-नाथों और संतों के बीच दार्शनिक सम्बन्ध ही अधिक खोजा गया है। परन्तु इस पुस्तक में मैंने दार्शनिक पक्ष के साथ-साथ उनके सामाजिक पक्ष को भी अंत:सम्बद्धता में देखा है। सिद्धों-नाथों और संतों के बीच अनेक समान्तर अंत सूत्र होने के बावजूद उनके दर्शन और विचार, उनकी भाषा और उनके सामाजिक सरोकार में अंतर देखने को मिलता है। यह भेद और उनके बीच की समानता को इस पुस्तक में कथ्य, संवेदना,रूप आदि के अलग-अलग स्तरों पर देखा गया। इस पुस्तक को प्रकाशित कराने का मेरा विचार 'प्रति संस्कृति' के निर्माण में सिद्धों, नाथों एवं संतों के योगदान को देखकर हुआ। अपने समय में प्रचलित मान्यताओं से इन्होंने अलग राह ली। परन्तु उसमें से कुछ समय से आगे और कुछ समय के दबाव और बहाव में ही गति करती रहीं। तीनों सम्प्रदाय के कवियों ने समाज में व्याप्त अनेक बाह्य आडम्बरों पर प्रहार किया, उनसे प्रति प्रश्न किया। परन्तु स्त्री के प्रति प्रचलित नजरिये को सिर्फ सिद्ध कवि ही तोड़ पाए। आडम्बरों पर तीनों सम्प्रदाय के कवि मुखर हैं परन्तु नाथों एवं संतों ने स्त्री को 'पितृसत्तात्मक' समाज में घुटने के लिए छोड़ ही नहीं दिया बल्कि अपनी राह भी अलग कर लीं।
B.SC. Nursing Entrance Exam Books 2025 General Nursing and Midwifery (GNM & CNET) Training Selection Test 12 Practice Sets With Latest Solved Paper & Aptitude Questions
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Sanskar
- Author Name:
Indu Veerendra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
MAHARSHI ARVIND
- Author Name:
Meena Manishika
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Muktibodh Samagra : Vols. 1-8
- Author Name:
Gajanan Madhav Muktibodh
- Book Type:

-
Description:
मुक्तिबोध की कविताओं के बारे में यदि शमशेर बहादुर सिंह के शब्दों में कहें तो उनकी ‘कविता, अद्भुत संकेतों-भरी, जिज्ञासाओं से अस्थिर—कभी दूर से ही शोर मचाती, कभी कानों में चुपचाप राज़ की बातें कहती चलती है। हमारी बातें हमीं को सुनाती है और हम अपने को एकदम चकित होकर देखते हैं, और पहले से और भी अधिक पहचानने लगते हैं।’
और मुक्तिबोध समग्र के रूप में, ‘हमारी बातें हमीं को’ सुनानेवाली उनकी कविताओं का यह पहला खंड है। इसमें 1935 से लेकर 1956-57 तक की कविताएँ हैं जिनमें प्रारम्भिक काव्य-प्रयासों से लगाकर आधुनिक हिन्दी-कविता में अपना अलग, निजी मुहावरा हासिल कर लेने तक मुक्तिबोध के काव्य-व्यक्तित्व के विकास के सभी चरण एक साथ मौजूद हैं। साथ ही परवर्ती लेखन में अनुभव और सृजन सम्बन्धी जिन उलझनों, अन्तर्द्वन्द्वों और उनकी अभिव्यक्ति का सशक्त और अनोखा रूप सामने आया, उसकी शुरुआत भी प्रारम्भिक रचनाओं तथा तार सप्तककालीन कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। इस दृष्टि से यह खंड मुक्तिबोध-काव्य के प्रेमी पाठकों के लिए निस्सन्देह एक नया अनुभव होगा।
Discover the Power Within You
- Author Name:
Arun H. Raikar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
HINDI VYAKARAN EKVACHAN-BAHUVACHAN
- Author Name:
SATISH AHUJA
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jyotipunj Vivekananda
- Author Name:
Debashish Ghosh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
1000 Vigyan Prashnottari
- Author Name:
Dilip M. Salwi
- Book Type:

- Description: आरंभ से ही मानव स्वभाववश खोजी प्रवृत्ति का रहा है। उसके मस्तिष्क में सवाल कौंधते रहे हैं—यह क्या है, कैसे है, क्यों है आदि। ऐसे ही सवालों से जूझने का नाम विज्ञान है। सवालों की तह में जाने की कोशिश से ही हम जान पाते हैं कि हमारी पृथ्वी पर कभी डायनासोर जैसे विशाल सरीसृप का राज हुआ करता था तथा पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, न कि सूर्य पृथ्वी की—और ऐसे ही अनंत सवाल हैं, जो विज्ञान ने हमारे समक्ष रखे हैं। आज विज्ञान के प्रभामंडल से हमारी दुनिया ओतप्रोत है। जिधर भी निगाह डालिए उधर उसकी मौजूदगी मिलेगी—रेडियो, टेपरिकॉर्डर, सिनेमा, वीडियो, फ्रिज, वाशिंग मशीन, टेलीविजन, कंप्यूटर, कार, रेल, जहाज, रॉकेट, मिसाइल, परमाणु बम आदि। यह सूची और भी लंबी है। जीवन का ऐसा कोई कोना नहीं बचा हैं जहाँ उसका हस्तक्षेप नहीं है, चाहे नितांत व्यक्तिगत हो या सामाजिक। जीवन में विज्ञान की इतनी उपयोगिता के बाद भी इसकी अनेक ऐसी छोटी- छोटी एवं महत्त्वपूर्ण बातें हैं, जिनसे हम अनभिज्ञ हैं। इस पुस्तक में इन्हीं बातों को रोचक प्रश्नों के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया गया है।
Shrinaresh Mehta Rachanawali : Vols. 1-11
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

-
Description:
श्रीनरेश मेहता अपनी परम्परा के प्रति ‘आत्मविस्मृत आधुनिकों’ में नहीं, बल्कि उन आधुनिक कवियों में हैं, जो तमाम आयातित विचारों और प्रवृत्तियों के लिए खुले रहते हुए भी उनकी अधीनता स्वीकार नहीं करते। इतना ही नहीं, सतत एक आधुनिक भारतीय कवि की उपस्थिति भी दर्ज कराते हैं। वे निषेध नहीं करते, वरन् अपरिहार्य हो उठे आयातित विचारों और विचारधाराओं के बीचोबीच अपनी ही संस्कारगत प्रज्ञा से नई लपट उठाते हैं, अपने भीतर से विचारों और मूल्यों का सन्धान करते हैं, जो वैकल्पिक या ‘प्रति’ नहीं हैं, स्वयं संकल्प हैं, जिनकी सन्दर्भवत्ता भी है, प्रासंगिकता भी और सनातनता भी।
भाषा के नए प्रयोगों और अन्वेषणों की दृष्टि से श्रीनरेश मेहता का आधुनिक युग में भी कोई सर्जक उल्लंघन नहीं कर सका है। उसका कारण उनका वैदिक, औपनिषदिक, सांस्कृतिक परम्परा में प्रयुक्त भाषा में नवार्थ भरना है; भागवत, वृन्दावन, प्रार्थना, ऋचा, मंत्र, गायत्री, अनुष्टुप, शिवत्व, उपनिषद्, वैष्णवता, उत्सव, यज्ञ, बिल्व–पत्र, यज्ञोपवीत, अश्वत्थ—जैसे पचासों शब्दों और उनके विभिन्न रूपों का सिर्फ़ प्रयोग ही नहीं, इनमें नया अर्थ भरना सर्वथा भाषा का मौलिक अन्वेषण है। इसके अलावा मालवा के लोक–शब्द, बांग्ला–शब्द आदि का भरपूर प्रयोग श्रीनरेश जी की भाषा में मिलता है; और कहना न होगा कि वह सर्जक वास्तव में बहुत बड़ा होता है जो भाषा का सन्धान करता है।
श्रीनरेश मेहता के काव्य में प्रकृति की महत् भूमिका है। प्रकृति से उनका बड़ा घरोपा है। उनके भीतर के तार उससे जुड़े हैं। यहाँ तक कि उनका स्वयं का जीवन प्रकृत रहा—अकृत्रिम, सहज। प्रकृति के अनेक रूप, रंग, बिम्ब, सम्बन्ध श्रीनरेश मेहता के काव्य में आद्यन्त खिले हुए हैं। वह उनके सोच और अभिव्यक्ति की सहयात्री है।
ग्यारह खंडों में प्रकाशित श्रीनरेश मेहता रचनावली का यह पहला खंड है। इस खंड में ‘बनपाखी! सुनो!!’, ‘बोलने दो चीड़ को’, ‘मेरा समर्पित एकान्त’, ‘उत्सवा’, ‘तुम मेरा मौन हो’, ‘अरण्या’, ‘आखिर समुद्र से तात्पर्य!’ शीर्षक काव्य–संकलन शामिल हैं।
Constitution of India
- Author Name:
Dr. P.K. Agrawal +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Panchtantra Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: पंचतंत्र की कहानियों की रचना आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व भारत के दक्षिण में स्थित तत्कालीन महिलारोप्य नामक नगर में राजा अमरशक्ति के शासनकाल में हुई। राजा अमरशक्ति ने अपने तीन मूर्ख और अहंकारी पुत्रों— बहुशक्ति, उग्रशक्ति और अनंतशक्ति के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सर्वशास्त्रों के ज्ञाता और कुशल ब्राह्मण पंडित विष्णु शर्मा को सौंपी। राजकुमारों को व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित करने के लिए पंडित विष्णु शर्मा ने नीतिशास्त्र से संबंधित कथाएँ उन्हें सुनाईं। इन कथाओं में पात्रों के रूप में उन्होंने पशु-पक्षियों का वर्णन किया और अपने विचारों को कथारूप में मुख से व्यक्त कर राजकुमारों को उचित-अनुचित आदि का ज्ञान दिया व व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित किया। राजकुमारों का शिक्षण पूरा होने पर पंडित विष्णु शर्मा ने इन कहानियों को पंचतंत्र की प्रेरक कहानियों के रूप में संकलित किया। आज भी इन अमर कथाओं की प्रासंगिकता जस-की-तस बनी हुई है। इनके अध्ययन और अनुकरण द्वारा निश्चित ही नीतिशास्त्र में निपुण हुआ जा सकता है, इसमें जरा भी संदेह नहीं है। हर आयु के पाठकों के लिए पठनीय, संग्रणीय और अनुकरणीय पुस्तक।
Business Secrets
- Author Name:
Motilal Oswal
- Book Type:

- Description: "बिजनेस सीक्रेट्स—मोतीलाल ओसवाल छोटे वाक्य या सूक्तियों का प्रभाव बड़ा गहरा तथा स्थायी होता है। ऐसे वाक्य तथा सूक्तियाँ प्रेरणा देती हैं तथा हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए संबल प्रदान करती हैं। कई अवसरों पर ये सूक्तियाँ हमारी संकल्पना को स्पष्ट करती हैं तथा विचार-निर्माण में मदद करती हैं। ‘बिजनेस सीक्रेट्स’ में बिजनेस और मैनेजमेंट के शीर्षस्थ लोगों, यथा पीटर ड्रकर, ब्रायन ट्रैसी, जैक वेल्च, रामचरन, पीटर सेंज, रोबिन शर्मा, जिग जिगलर, एड्रियन स्लीवोत्ज्की, नेपोलियन हिल, सैम वाल्टन, अजीम प्रेमजी आदि के लंबे व्यावहारिक अनुभव से उपजे सूत्रों को संकलित किया है। इनका अध्ययन और उपयोग बिजनेस की बढ़ोतरी में अवश्य सहायक सिद्ध होंगे। ये ‘बिजनेस सीक्रेट्स’ प्रासंगिक हैं, सरल हैं, प्रभावकारी हैं तथा प्रेरणादायी भी। इनके माध्यम से आप बिजनेस मैनेजमेंट तथा नेतृत्व-क्षमता के गुण विकसित कर सकते हैं। पुस्तक का कथ्य बोझिल न बने, इसलिए रुचिकर तथा हास्य भाव पैदा करनेवाले कार्टून चित्रों का भरपूर उपयोग किया गया है। इससे आपको नेतृत्व-क्षमता, बिजनेस तथा मैनेजमेंट के अनमोल गुरुमंत्र मिलेंगे और आप सफलता का शिखर छुएँगे। "
Sri Aurobindo and Shakespeare
- Author Name:
Dr. Meenu Sodhi Sharma
- Rating:
- Book Type:

- Description: In this book an attempt has been made to compare the two legendary writers by comparing the eastern way of thinking with the western way. Shakespeare is amongst the writers Sri Aurobindo holds in high esteem. Sri Aurobindo’s admiration for the great dramatist resulted in obvious Shakespearean influences on him. He adopts for his plays Elizabethan model of drama perfected by Shakespeare’s genius. Shakespeare’s influence is traceable also in Sri Aurobindo’s sonnets. It is said that Sri Aurobindo had Shakespearean literature on his bed-side when he left his mortal remains. Both the great writers were not satisfied by merely holding mirror to the nature but due to their greater and deeper life power, they recreated the human life in its beauty and completeness. Therefore, there is an obvious need to compare and contrast Shakeapeare and Sri Aurobindo so as to bring out affinities that may be there between their creative ideal and vision as well as their poetic and dramatic art, along with the former’s influence on the later. In this book an attempt has been made to fulfill the need and to contribute, in some measure to the appreciation of Sri Aurobindo’s poetry and plays. It also briefly touches upon Indian response to Shakespeare. It focuses mainly on Sri Aurobindo’s numerous insights and critical observations on him. To sum up writings of the two such outstanding writers, who represent two very different ways of thinking. On one hand Shakespeare potrays lot of blood shed, gory tales and a wild kind of poetic justice in his writings, but on the other hand Sri Aurobindo truely follows Indian ethos of non violence or ‘Ahimsa’. The author underlines the stark similarities and differences in both the writer’s exploring their plays and sonnets. The structure of plays and sonnets may be same of both the greatest minds but ethos and personna ingrained in their writings is quite different.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book