Anuvrat Anushasta Acharya Mahapragya: Global Reflections And Tributes
(0)
₹
600
₹ 480 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789355622907
-
Pages352
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
RRB NTPC STAGE – 2 (MAINS) EXAMINATION
- Author Name:
Rajeev Bhatia
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tips for Happiness in the Shadow of Cancer
- Author Name:
Dr. Meenu Walia
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rom Rom Mein Ram "रोम-रोम में राम" Book in Hindi
- Author Name:
Rajendra Arun
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Katra-Katra Zindagi
- Author Name:
Anup Kochhar Dewan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Aandolan Aur Nagari Pracharini Sabha
- Author Name:
Amish Verma
- Book Type:

- Description: उन्नीसवीं सदी का उत्तरार्द्ध हिन्दी भाषा के स्वरूप निर्माण के लिए एक महत्त्वपूर्ण दौर था। इस समय हिन्दी को एक सुनिश्चित रूप देने के लिए कई स्तरों पर संगठित प्रयास भी हो रहे थे। हिन्दी को राष्ट्रीयता का आधार-बिन्दु मानकर जहाँ विदेशी शासकों का मुकाबला किया जा रहा था, वहीं उसे हिन्दू धर्म से जोड़कर उसे एक धार्मिक प्रतीक के रूप में भी खड़ा किया जा रहा था। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना इसी सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण में 1893 में हुई। यह आश्चर्यजनक है कि हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए समर्पित इस संस्था को लेकर हिन्दी में कोई महत्त्वपूर्ण अध्ययन अब तक नहीं हुआ है। युवा अध्येता अमिष वर्मा का यह अध्ययन ‘हिन्दी आन्दोलन और नागरीप्रचारिणी सभा’ इस कमी को दूर करता है। सभी उपलब्ध स्रोतों की श्रम-साध्य पड़ताल के आधार पर सम्पन्न यह शोध हिन्दी आन्दोलन के सन्दर्भ में सभा की शुरुआती गतिविधियों और उसकी भाषा-नीति का विश्लेषण करता है। इस पुस्तक से हम हिन्दी-उर्दू के अन्तर्सम्बन्धों के इतिहास से भी परिचित होते हैं। इसमें उन ऐतिहासिक कारणों को समझने का प्रयास किया गया है जिनके चलते ये दोनों भाषाएँ न सिर्फ अलग हो गईं, बल्कि दो अलग धर्मों से भी जुड़ गईं, और अभिव्यक्ति का माध्यम न रहकर राजनीतिक औजार बन गईं। नागरीप्रचारिणी सभा की 1893-1902 की रिपोर्ट और पदाधिकारियों सम्बन्धी अन्य जानकारियाँ इस पुस्तक की विशेष उपलब्धि है जिसे परिशिष्ट में संयोजित किया गया है।
Jaishankar Prasad Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: "जयशंकर प्रसाद की श्रेष्ठ कहानियाँ महान् कथाकार और हिंदी साहित्य जगत् में कहानी को एक संपूर्ण विधा के रूप में स्थापित करनेवाले श्री जयशंकर प्रसाद का योगदान अविस्मरणीय है। कहानी के क्षेत्र में प्रसादजी के पाँच कथा-संग्रह प्रकाशित हुए-‘छाया’, ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘आँधी’ तथा ‘इंद्रजाल’। इन पाँचों कहानी संग्रहों में प्रसादजी की कुल 70 कहानियाँ प्रकाशित हईं। इन कहानियों में मानव-जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रदर्शित किया गया है। करुणा, वात्सल्य के अतिरिक्त पारिवारिक संबंधों की गहराई तक पहुँचने का प्रयास प्रसादजी ने अपनी कहानियों में बखूबी किया है। शौर्य और वीरता की भी झलक उनकी कहानियों में स्पष्ट दिखाई पड़ती है। काव्य, नाटक, कथा-साहित्य, आलोचना, दर्शन, इतिहास सभी क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा अद्वितीय रही। ‘कामायनी’ जैसे महाकाव्य; ‘चंद्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’, ‘अजातशत्रु’ जैसे नाटक; ‘कंकाल’, ‘तितली’ जैसे उपन्यास तथा अनेक विशिष्ट कहानियाँ उनकी रचनात्मक दृष्टि को सार्थक करती हैं। प्रस्तुत संग्रह में जयशंकर प्रसाद की चुनी हुई प्रसिद्ध कहानियाँ प्रस्तुत की गई हैं, ताकि ऐसे महान् साहित्यकार की रचनाएँ पाठकों के बीच अधिक-से-अधिक पहुँचें और वे इनका भरपूर लाभ उठाएँ।
Grihapravesh
- Author Name:
Smt.Suryabala
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Karmayoddha Jai Karan
- Author Name:
Madhurendra Sinha
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक के प्रेरणा-स्रोत और लेखक को प्रोत्साहित करनेवाले जय करण जी के तीनों सुपुत्र—राजेश, मुकेश और सचिन। ये अपने पिता को गाइड और गुरु मानते हैं और उनकी सीख को अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए उन्होंने बड़े जतन से यह पुस्तक प्रकाशित करवाई। उनका लक्ष्य उनके जीवन की अच्छाइयों को आम जन तक पहुँचाना है। जय करण जी के जीवन से प्रेरणा पाकर अगर कुछ युवा उनके दिखाए रास्ते पर चल पड़ेंगे तो इस पुस्तक के लेखन का उदेसिये पूरा हो जाएगा। मैं इस किताब को अपने पिता को समर्पित करना चाहता हूँ जो मेरे गुरू और मेरे हीरो भी थे। मैंने बचपन से उन्हें हर पल को जीते देखा। वह कहते थे कि कोई भी ब्रांड यूँ ही नहीं बन जाता है। उसके लिए वर्षों तक लगातार क्वालिटी सर्विस देनी पड़ती है और तभी कस्टमर का भरोसा जीता जाता है। मैं चाहता हूँ कि उनकी इस जीवनी को पढऩेवाले उन सभी को प्रोत्साहन मिले जो स्टार्ट अप शुरू कर रहे हैं या अपना सफल उद्यम खड़ा चाहते हों या अपना प्रतिष्ठित ब्रांड बनाना चाहते हों। मैंने कोशिश की है कि यह एक पुस्तक नहीं बल्कि एक जीवन को जीने की गाथा बने जिसे प्रस्तुत करने के लिए मैंने दो साल की मेहनत और देश के विभिन्न शहरों और गाँवों में दो सौ से भी ज्यादा लोगों के इंटरव्यू को आधार बनाया। पुस्तक का सार यह है कि कैसे इस कमर्शियल दुनिया में खुश भी रहा जाए और सफलता भी पाई जाए। —सचिन हरितश
Nirala Aur Pant Kavya Ke Aadhyatmik Prerna Srot
- Author Name:
Chanda Devi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
HINDI SHABDA GYAN
- Author Name:
DURGESH
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahashakti Bharat
- Author Name:
Dr. A.P.J. Abdul Kalam +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dansh
- Author Name:
Smt. Shobha Tripathi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JEENE KI RAAH SHRIMADBHAGVADGITA
- Author Name:
Suhaib Ilyasi
- Book Type:

- Description: आपि यह पुस्तक उठाकर पढ़ रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप कहीं-न-कहीं आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक शांति तलाश रहे हैं। बेशक हजारों युगों से मानव का पथ-प्रदर्शन करनेवाली श्रीमद्भगवद्गीता आपके लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी कभी यह महाबली अर्जुन या उन्नत महापुरुषों की प्रतिकूल अवस्थाओं में रही है। ‘जीने की राह’ में मौजूद श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित ‘सफलता के व्यावहारिक नियम’ आपके जीवन को सुखद और मंगलमय बनाने के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। इस पुस्तक में वे सनातन रहस्य छिपे हैं, जो आपके विशिष्ट स्वप्नों को साकार करने में आपका मार्गदर्शन और आपकी सहायता करेंगे। यह इस धारणा को पुष्ट करती है कि आर्थिक या आध्यात्मिक सफलता केवल सुनिश्चित योजनाओं, उच्च महत्त्वाकांक्षा और कठिन परिश्रम से ही प्राप्त हो सकती है। प्रख्यात टेलीविजनकर्मी सुहैब इल्यासी ने इस पुस्तक में स्वयं अपने जीवन में श्रीमद्भगवद्गीता की व्यावहारिक उपयोगिता का प्रेरणात्मक उल्लेख किया है। उनका मानना है कि जब हम श्रीमद्भगवद्गीता द्वारा बताए तरीके से जीवन गुजारना शरू करते हैं तो फिर प्रकृति से तादात्म्य सहज ही स्थापित हो उठता है और जीवन में सुख-सौभाग्य, सुस्वास्थ्य, सुमधुर संबंध और भौतिक सुख अनायास ही प्राप्त होने लगते हैं। यह पुस्तक जीवन में आध्यात्मिक उत्थान और स्वयं की पहचान करानेवाली तथा जीवन को जबरदस्त उत्प्रेरणा से भर देनेवाली एक व्याहारिक कृति है।
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Bhugol Practice MCQs (MPTET Higher Secondary Teacher Geography Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lagan
- Author Name:
Vrindavan Lal Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shravasti Ka Vijayparva "श्रावस्ती का विजयपर्व" Book In Hindi - Shatrughan Prasad
- Author Name:
Shatrughan Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Prophet (Hindi Translation of The Prophet)
- Author Name:
Kahlil Gibran
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JAWAHAR LAL NEHRU
- Author Name:
S.K. Agrawal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Akhilesh : Ek Samvad
- Author Name:
Piyush Daiya
- Book Type:

-
Description:
भारतीय कला के व्यापक क्षेत्र में, और हिन्दी में तो बहुत कम, ऐसा हुआ है कि कोई कलाकार अपनी कला, संसार की कला, परम्परा, आधुनिकता आदि पर विस्तार से, स्पष्टता से, गरमाहट और उत्तेजना से बात करे और उसे ऐसी सुघरता से दर्ज किया जाए। चित्रकार अखिलेश इस समय भारत के समकालीन कला-दृश्य में अपनी अमूर्त कला के माध्यम से उपस्थित और सक्रिय हैं। उनकी बातचीत से हिन्दी में समकालीन कला-संघर्ष के कितने ही पहलू ज़ाहिर होते हैं। पीयूष दईया एक कल्पनाशील सम्पादक, कवि और सजग कलाप्रेमी हैं। उनकी उकसाहट ने इस बातचीत में उत्तेजक भूमिका निभाई है।....
ऐसी अनेक जगहें इस बातचीत में हैं जहाँ बतरस के सुख के साथ-साथ कुछ नया या विचारोत्तेजक जानने को मिलता है। हमारे समय में कला को तथाकथित सामाजिक यथार्थ के प्रतिबिम्बन और अन्वेषण के रूप में देखने की जो वैचारिकी उसके प्रतिबिन्दु, प्रतिरोध की तरह उभरती है, इस पुस्तक का महत्त्व इससे और बढ़ जाता है। वह एक अपेक्षाकृत जनाकीर्ण परिदृश्य में वैकल्पिक कला और सौन्दर्यबोध के लिए जगह खोजती और बनाती है। उसकी दिलचस्पी किसी को अपदस्थ करने में नहीं है : वह तो अपनी जगह की तलाश करती और फिर उस पर रमने की ज़िद से उपजी है।
—अशोक वाजपेयी
Aadhi Duniya Ki Poori Patrakarita
- Author Name:
Dr. Mangala Anuja
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book