Anandiben Patel : Pratibadhhata Ke Padchinha

(0)

Language:

Hindi

Category:

Other

750

600 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


आनंदीबेनजी की सबसे बड़ी खूबी है—अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी शक्ति से और निरंतर उत्साह से प्रवृत्त रहना। कभी भी हार न मानना, कर्तव्य में शिाथिलता न लाना और आसपास उदासीनता उभरने नहीं देना। उत्साहपूर्वक प्रवृत्त होना ही उत्थान या अभ्युत्थान कहलाता है। महाभारत के शांति पर्व, अनुशासन पर्व आदि में सर्वत्र कहा गया है कि उत्साहपूर्ण कर्म ही राजधर्म का मूल है। इस कर्म के बल पर ही आनंदीबेनजी ने गुजरात में बड़े-बड़े लोकहितकारी परिवर्तन कर दिखाए। आज हमें यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है कि लोकहित के प्रति ऐसा समर्पण, ऐसी चिंता और ऐसी सजगता आज के परिदृश्य में दुर्लभ हो चुकी है। लोगों से संवाद, अधिकारियों के साथ बैठक और फाइल पर निर्णय लेने में उनकी सकारात्मकता देखते ही बनती है। 'समय पर न्याय न मिलना भी अन्याय ही है', इसको हमेशा ध्यान में रखकर आनंदीबेनजी ने कभी कोई काम कल पर नहीं टाला। ऐसी अनगिनत विशेषताएँ आनंदीबेनजी को सच्चा राजनेता बनाती हैं। उनके द्वारा किए कार्यों का संकलन करते समय हम बार-बार आश्चर्य में पड़ते रहे कि कितनी सहजता से आनंदीबेनजी बड़े-बड़े कार्य करती चली गईं। कर्मयोग का जीवंत दस्तावेज बन गई यह पुस्तक निश्चय ही सभी कर्मयोगियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी ।

Read more

ISBN
9789355620118
Pages
204
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

आनंदीबेनजी की सबसे बड़ी खूबी है—अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी शक्ति से और निरंतर उत्साह से प्रवृत्त रहना। कभी भी हार न मानना, कर्तव्य में शिाथिलता न लाना और आसपास उदासीनता उभरने नहीं देना। उत्साहपूर्वक प्रवृत्त होना ही उत्थान या अभ्युत्थान कहलाता है। महाभारत के शांति पर्व, अनुशासन पर्व आदि में सर्वत्र कहा गया है कि उत्साहपूर्ण कर्म ही राजधर्म का मूल है। इस कर्म के बल पर ही आनंदीबेनजी ने गुजरात में बड़े-बड़े लोकहितकारी परिवर्तन कर दिखाए।

आज हमें यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है कि लोकहित के प्रति ऐसा समर्पण, ऐसी चिंता और ऐसी सजगता आज के परिदृश्य में दुर्लभ हो चुकी है। लोगों से संवाद, अधिकारियों के साथ बैठक और फाइल पर निर्णय लेने में उनकी सकारात्मकता देखते ही बनती है। 'समय पर न्याय न मिलना भी अन्याय ही है', इसको हमेशा ध्यान में रखकर आनंदीबेनजी ने कभी कोई काम कल पर नहीं टाला। ऐसी अनगिनत विशेषताएँ आनंदीबेनजी को सच्चा राजनेता बनाती हैं। उनके द्वारा किए कार्यों का संकलन करते समय हम बार-बार आश्चर्य में पड़ते रहे कि कितनी सहजता से आनंदीबेनजी बड़े-बड़े कार्य करती चली गईं।
कर्मयोग का जीवंत दस्तावेज बन गई यह पुस्तक निश्चय ही सभी कर्मयोगियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी ।

Book Details

  • ISBN
    9789355620118
  • Pages
    204
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp