1000 Bharatiya Sanskriti Prashnottari
(0)
₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789352667581
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Mausam
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फ़ार्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ार्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
अथाह प्रेम, प्रेम के गहरे सम्मान और शुद्ध-सुच्चे भारतीय मूल्यों में रसी-पगी गुलज़ार की इस फ़िल्म को न देखा हो ऐसे बहुत कम लोग होंगे। लेकिन मंज़रनामे की शक्ल में इसे पढ़ना बिलकुल भिन्न अनुभव है। इतने कसाव और कौशल के साथ लिखी हुई पटकथाएँ निश्चित रूप से सिद्ध करती हैं कि मंज़रनामा एक स्वतंत्र साहित्यिक विधा है। बार-बार देखने लायक़ फ़िल्म की बार-बार पठनीय पुस्तकीय प्रस्तुति!
Kuchh Yoon Jeekar Dekhen Jara! "कुछ यूँ जीकर देखें जरा!" | Art of Loving Yourself & know About The Life | Book in Hindi
- Author Name:
Rahul Rajesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tips for Happiness in the Shadow of Cancer
- Author Name:
Dr. Meenu Walia
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi-Angrezi Abhivyakti Kosh
- Author Name:
Dr. Kailash Chandra Bhatia
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sangh Aur Swaraj (Punjabi Edition)
- Author Name:
Ratan Sharda
- Book Type:

- Description: पिछले कुछ समय से राजनीतिक मजबूरियों के कारण वामपंथी और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका के विषय में दुष्प्रचार कर रहे हैं और जनसेवा में इसके बेहतरीन रिकॉर्ड पर कीचड़ उछाल रहे हैं। यह पुस्तक हमें बताती है कि संघ अपने जन्म से ही स्वराज के प्रति समर्पित था। डॉ. हेडगेवार का जीवन और वह शपथ, जो स्वयंसेवक लेते थे, स्वतंत्रता संग्राम के प्रति समर्पण को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। इस स्वतंत्रता को स्वराज में बदलने के लिए भारत को अनुशासित और साहस रखनेवाले युवाओं की आवश्यकता थी, जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। ब्रिटिश दस्तावेज स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वे स्वतंत्रता संग्राम में संघ की बढ़ती ताकत को लेकर सतर्क थे। स्वतंत्रता का आंदोलन 15 अगस्त, 1947 को ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (भाग्य के साथ मुलाकात) से समाप्त नहीं हुआ, बल्कि शुरू हुआ अंतहीन अँधेरी रातों का भयावह सिलसिला, जब सुरक्षाबलों के अतिरिक्त सबसे संगठित बल के रूप में संघ के कार्यकर्ताओं ने तबाह हुई लाखों लोगों की जिंदगी से जो कुछ बचा सकते थे, उसके लिए अपने प्राणों को खतरे में डाला। यह फैसला भारत के लोगों और इतिहास को करना है कि साहस की ऐसी काररवाई देशभक्ति थी या सांप्रदायिक। लेखक अन्य तथ्यों पर प्रकाश डालते हैं, जिनके कारण हमें स्वतंत्रता मिली और यह रेखांकित करते हैं कि स्वाधीनता किसी एक आंदोलन या काररवाई का परिणाम नहीं थी, बल्कि एक लहर के साथ धीरे-धीरे बढ़ी, जिसका निर्माण भारत के महान् आध्यात्मिक गुरुओं के कारण शुरू हुए सांस्कृतिक पुनर्जागरण से हुआ था।
Kashi Ke Naam
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

- Description: हिन्दी की कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास और आलोचनाएँ—यहाँ तक कि साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक बहसें भी पिछले पचास वर्षों से अपने को टटोलने और जाँचने-परखने के लिए जिस अकेले एक समीक्षक से वाद-विवाद-संवाद करके सन्तोष का अनुभव करती रही थीं, निर्विवाद रूप से उसका नाम नामवर सिंह था। ‘काशी के नाम’ उन्हीं की चिट्ठियों का संकलन है जो उन्होंने काशीनाथ को लिखी थीं। नामवर सिंह हिन्दी के किंवदन्ती पुरुष थे। नब्बे वर्ष की उम्र में भी उतने ही तरो-ताज़ा और ऊर्जावान जितना पहले थे। वे अन्तत: न थके, न झुके। हर समय अपनी कहने को तैयार, दूसरे की सहने को तैयार। असहमति और विरोध तो जैसे उनके जुड़वाँ हों। हर आनेवाली पीढ़ी उन्हें देखना चाहती थी, सुनना चाहती थी लेकिन जानना भी चाहती थी—उनकी शख़्सियत के बारे में, उनके घर-परिवार के बारे में, नामवर के ‘नामवर’ होने के बारे में! क्योंकि वे जितने अधिक ‘दृश्य’ थे, उससे अधिक अदृश्य थे। इसी अदृश्य नामवर को प्रत्यक्ष करता है ‘काशी के नाम’। ऐसे तो, साहित्य के अनेक प्रसंगों से भरी पड़ी हैं चिट्ठियाँ लेकिन सबसे दिलचस्प वे टिप्पणियाँ हैं जो भाई काशी की कहानियों पर की गई हैं। कोई मुरव्वत नहीं, कोई रियायत नहीं, बेहद सख़्त और तीखी। ऐसी कि दिल टूट जाए। लेकिन अगर काशी का कुछ लिखा पसन्द आ गया तो नामवर का आलोचक सहसा भाई हो जाता है—भाव-विह्वल और आत्मविभोर। ‘काशी के नाम’ चिट्ठियों में जीवन और साहित्य साथ-साथ हैं—एक-दूसरे में परस्पर गुँथे हुए। घुले-मिले! कोई ऐसी चिट्ठी नहीं, जिसमें सिर्फ़ जीवन हो, साहित्य नहीं, या साहित्य हो जीवन नहीं। यदि एक तरफ़ नामवर का संघर्ष है, माँ-पिता हैं, भाई हैं, बेटा-बेटी हैं, भतीजे-भतीजियाँ हैं, उनकी चिन्ताएँ और परेशानियाँ हैं, तो उसी में कहीं न कहीं या तो साहित्यिक हलचलों या गतिविधियों पर टिप्पणियाँ हैं या ‘जनयुग’ और ‘आलोचना’ की ज़रूरतें हैं, या किन्हीं लेखों या कहानियों के ज़िक्र हैं या कथाकार को हिदायतें हैं। यानी परिवार हो या साहित्य-संसार या ये दोनों—इनके झमेलों के बीच नामवर के ‘मनुष्य’ को देखना हो तो किसी पाठक के लिए इन चिट्ठियों के सिवा कोई विकल्प नहीं।
Mahatma Jotiba Phule Rachanawali : Vols. 1-2
- Author Name:
Mahatma Jotiba Phule
- Book Type:

- Description: यह किताब जोतिबा फुले (जोतिराव गोविन्दराव फुले : 1827-1890) की सम्पूर्ण रचनाओं का संग्रह है। सन् 1855 से सन् 1890 तक उन्होंने जितने ग्रन्थों की रचना की, सभी को इसमें संगृहीत किया गया है। उनकी पहली किताब ‘तृतीय रत्न’ (नाटक) सन् 1855 में और अन्तिम ‘सार्वजनिक सत्यधर्म’ सन् 1891 में उनके परिनिर्वाण के बाद प्रकाशित हुई थी। जोतिराव फुले की कर्मभूमि महाराष्ट्र रही है। उन्होंने अपनी सारी रचनाएँ जनसाधारण की बोली मराठी में लिखीं। उनका कार्य और रचनाएँ अपने समय में भी विवादास्पद रहीं और आज भी हैं। लेकिन उनका लेखन हर पीढ़ी में सामाजिक क्रान्ति की चेतना जगाता रहेगा, इसमें कोई सन्देह नहीं। उनकी यह रचनावली उनके कार्य और चिन्तन का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।
Congress Presidents Files : (1885-1923) A Treasure Trove of Facts That Will Change Your Opinion About Congress
- Author Name:
Vishnu Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Bhag-(A) Anivaraya Prashan Patra (MPTET Higher Secondary Teacher Part A Guidebook in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
70th BPSC Mains Exam (Bihar Public Service Commission) Solved Papers 1&2 Years wise & Topicwise Detailed Solution 69th To 48th Combined Competitive & CDPO Exams
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Neta Nirman Udyog
- Author Name:
Hari Joshi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SAMVEDNA KI AADRATA
- Author Name:
Pushpita Awasthi
- Book Type:

- Description: Article
Malti Joshi ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Malti Joshi
- Book Type:

- Description: ‘‘ओह! बड़े ही नेक बंदे थे! खुदा उन्हें अपनी दरगाह में जगह दे!’’ उनमें से एक ने अफसोस प्रकट करते हुए कहा। कुछ क्षणों के लिए सब में खामोशी छा गई। ‘‘भरजाई, तेरे बच्चे कैसे हैं?’’ ‘‘वाहेगुरु की किरपा है, सब अच्छे हैं?’’ माँ ने धीरे से कहा। ‘‘अल्लाह उनकी उम्र दराज करे।’’ कई आवाजें एक साथ आईं। ‘‘भरजाई, तुम अपने बच्चों को लेकर यहाँ आ जाओ।’’ किसी एक ने कहा और कितनों ने दुहराया, ‘‘भरजाई, तुम लोग वापस आ जाओ... वापस आ जाओ।’’ प्लेटफॉर्म पर खड़ी कितनी आवाजें कह रही थीं— ‘‘वापस आ जाओ।’’ ‘‘वापस आ जाओ।’’ मैंने सुना, मेरे पीछे खड़े मामाजी कुढ़ते हुए कह रहे थे, ‘‘हूँ...बदमाश कहीं के! पहले तो हमें मार-मारकर यहाँ से निकाल दिया, अब कहते हैं, वापस आ जाओ...लुच्चे!’’ प्लेटफॉर्म पर खड़े लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी थी। वे कहे जा रहे थे— ‘‘भरजाई, तुम अपने बच्चों को लेकर वापस आ जाओ। बोलो भरजाई, कब आओगी? अपना गाँव तो तुम्हें याद आता है? भरजाई, वापस आ जाओ...।’’ —इसी संग्रह से —— 1 —— सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. महीप सिंह की लेखनी से निःसृत कहानियों ने मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार, जातीय संघर्ष, पारस्परिक संबंधों का ताना-बाना प्रस्तुत किया। पठनीयता से भरपूर इन कहानियों ने वर्ग-संघर्ष और सामाजिक कुरीतियों का जमकर विरोध किया। प्रस्तुत है उनकी लोकप्रिय कहानियों का संग्रहणीय संकलन।
Alec Mercer Dead Underground
- Author Name:
Jaideep Bhoosreddy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dictionary of Chemistry
- Author Name:
Taniya Sachdeva
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mere Business Mantra
- Author Name:
N.R. Narayana Murthy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Me And My Guru
- Author Name:
R.K.K Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Psychology of Becoming Super Rich with Share Market | Using Candlestick & Chart Patterns
- Author Name:
Shyam Sundar Goel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vimarsh - Jinhen Jurme Ishq Pe Naaz Tha
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: Vimarsh Jinhen Jurm e ishq pw naaz tha Writer Pankaj subeer Edit By Dr. sudha om dhingra
Ramchandra shukla Rachanawali : Vol. 1-8
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

-
Description:
आचार्य शुक्ल कोरे साहित्य समालोचक नहीं थे। वे गम्भीर अर्थों में साहित्य के समालोचक थे, जहाँ साहित्य के अन्तर्गत जीवन की चिन्ता, समाज की चिन्ता और पूरी संस्कृति की चिन्ता रहती थी। यह हिन्दी आलोचना का सौभाग्य है कि उसकी प्रतिष्ठा एक ऐसे समालोचक द्वारा हुई जो शुद्ध साहित्यिक आलोचक नहीं था, सिर्फ़ अलंकार और रस की मीमांसा करनेवाला काव्य-विवेचक नहीं था, बल्कि साहित्य को व्यापक सामाजिक सन्दर्भों में देखनेवाला और साहित्य की सामाजिक सार्थकता की प्रतिष्ठा करनेवाला आलोचक था। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल दुनिया के अनेक महान आलोचकों के समान ही भारत के पहले गम्भीर समालोचक दिखाई पड़ते हैं। आचार्य शुक्ल अपना चिन्तन साहित्य की सामाजिक सार्थकता और साहित्य में ‘लोक मंगल’ के व्यापक सन्दर्भ में करते हैं, तो स्वभावतः उनके व्यापक, विराट व्यक्तित्व की ओर हमारा ध्यान जाता है। उनके समग्र कृतित्व का संकलन हिन्दी साहित्य की परम्परा के सर्वश्रेष्ठ के पुनर्जीवन की तरह है।
आठ खंडों में प्रकाशित ‘रामचन्द्र शुक्ल रचनावली’ के पहले खंड में उनकी सर्वाधिक चर्चित और कालजयी कृति ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ संकलित है। रचनावली के सम्पादक नामवर सिंह ने इसकी भूमिका में आचार्य शुक्ल की इस कृति के महत्त्व और उसकी विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book