Tirange Ko Kabhi Jhukane Na Doge: Deshbhakti Ke Pavan Geet
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About the Book
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Book Details
-
ISBN9789394871021
-
Pages208
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Jupinderjit Singh
- Book Type:

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शहीद भगत सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हम सब जानते हैं कि उन्होंने 17 दिसंबर, 1928 को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या अमेरिका में बने एक .32 कोल्ट पिस्टल से की थी। लेकिन हम यह नहीं जानते कि उसके बाद उस पिस्टल का क्या हुआ और कैसे यह स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गई थी। हम यह भी नहीं जानते कि उस हुतात्मा ने फिर कभी किसी की हत्या क्यों नहीं की। वह पिस्टल 86 वर्षों तक इतिहास की परतों में और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार तब तक गुम ही रही, जब तक कि इस पुस्तक के लेखक ने उस हथियार के सफर का पता नहीं लगा लिया और उसे लोगों के सामने लेकर नहीं आए। क्या थी उस पिस्टल की रहस्यमयी कहानी ? कैसे भगत सिंह शायद महात्मा गांधी से भी बड़े अहिंसा के पुजारी थे, यह जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें ।
KRANTIDRISHTA SHYAMJI KRISHNAVARMA
- Author Name:
M.A. Sameer
- Book Type:

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"भारत को आजाद कराने में अनेक देशभक्तों ने आत्मबलिदान किया। उनमें श्यामजी कृष्ण वर्मा भी एक थे, जो लंबे समय तक गुमनाम बने रहे। उन्होंने अपनी मृत्यु के समय कहा था, ‘मेरी अस्थियाँ भारत में तभी ले जाई जाएँ, जब वह अंग्रेजों का गुलाम भारत न होकर हमारा आजाद भारत हो चुका हो।’ उनकी यह अभिलाषा भारत की आजादी के 55 वर्ष बाद श्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरी हुई। श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्तूबर, 1857 को गुजरात में कच्छ के मांडली गाँव में हुआ। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान् तथा ऑक्सफोर्ड से एम.ए. और बैरिस्टर की उपाधियाँ प्राप्त करनेवाले पहले भारतीय थे। वे कुछ समय तक ऑक्सफोर्ड में संस्कृत के प्रोफेसर भी रहे। सन् 1905 में लॉर्ड कर्जन की ज्यादतियों के विरुद्ध उन्होंने क्रांतिकारी छात्रों को लेकर ‘इंडियन होम रूल सोसाइटी’ की स्थापना की। भारत की आजादी के समग्र संघर्ष हेतु सन् 1905 में ही उन्होंने इंग्लैंड में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की। जब अंग्रेज सरकार ने वहाँ पहरा बिठा दिया तो वे स्विट्जरलैंड चले गए और वहाँ से ‘दि इंडियन सोशिओलॉजिस्ट’ मासिक में अपनी लेखनी से आजादी के आंदोलन को धार देने लगे। 31 मार्च, 1933 को जेनेवा के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। 73 साल तक उनकी अस्थियाँ स्विट्जरलैंड के एक संग्रहालय में मुक्ति के इंतजार में छटपटाती रह्वहीं।"
Ekta Ki Brahmmurti Sardar Vallabhbhai Patel
- Author Name:
Baldev Vanshi
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सरदार वल्लभभाई पटेल को पहले से जानता था। जब वह भारतीय संविधान परिषद् के सदस्य थे तो मेरा उनसे परिचय बढ़ गया। वहाँ दिए हुए उनके भाषणों को मुझे अच्छी तरह स्मरण है। उनकी वाणी राष्ट्र की आवाज होती थी, जिसके संबंध में न तो कोई अशुद्धि कर सकता था और न भ्रांति हो सकती थी। जब वह बंबई के बिड़ला भवन में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे तो मुझे स्मरण है कि मैं सोवियत संघ जाते समय उनसे विदा लेने गया था। उन्होंने मुझे चेतावनी दी थी कि यह कार्य बड़े-बड़े प्रसिद्ध व्यक्तियों को असफलता दे चुका है, किंतु साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘‘जहाँ अन्य व्यक्ति असफल हो चुके हैं, वहाँ आप सफल होंगे।’’ वास्तव में सरदार के उक्त शब्द मास्को में मेरे राजदूत काल भर मेरी स्मृति में रहे। मैं आपको यह बतला रहा हूँ कि वह किस प्रकार परिस्थिति के निर्णायक, भावी रूप के विधाता तथा सुदूर भविष्य को ठीक-ठीक देख लेने की क्षमता रखते थे। जब तक वर्तमान भारत जीवित है, उनका नाम वर्तमान भारत के ऐसे राष्ट्र-निर्माता के रूप में सदा स्मरण किया जाता रहेगा, जिन्होंने 600 भारतीय देशी राज्यों का एकमात्र संघ बनाया। उनका यह कार्य हमारे देश के एकीकरण की दिशा में अत्यधिक स्थायी कार्य था। इस विषय में उनके कार्य को हम कभी नहीं भूल सकते। जैसा कि मैंने कहा है, जब तक भारत जीवित है, वर्तमान भारत के निर्माता के रूप में उनका नाम सदा स्मरण किया जाता रहेगा। —आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री की पुस्तक ‘राष्ट्रनिर्माता सरदार पटेल’ से
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