Mahamatya Ajanta
(0)
Author:
P. PrashantPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
225
₹ 184.5 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Historical Hindi Novel
Read moreAbout the Book
Historical Hindi Novel
Book Details
-
ISBN9789391925505
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Laalbatti Ki Amritkanyaanyen
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

- Description: कुसुम खेमानी का यह उपन्यास ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएँ’ कथावस्तु की दृष्टि से एक साहसिक क़दम माना जा सकता है क्योंकि यह वह इलाक़ा है जिस पर लिखने से हिन्दी लेखकों की क़लम प्राय: गुरेज करती है। फिर भी इस दिशा में कुछ उल्लेखनीय कृतियाँ तो देखने को मिलती ही हैं, यह उपन्यास उसी शृंखला की नवीनतम कड़ी है। यों उपन्यास कोलकाता के ‘सोनागाछी’ पर केन्द्रित है लेकिन यह लालबत्ती गली हर शहर और हर क़स्बे में होती है और अन्त:सलिला की तरह समाज के अन्तर में बहती रहती है। समाज इन स्त्रियों को विषकन्याएँ मानता है पर दरअसल ये समाज के भीतर छिपी गन्दगी को फैलने से रोकने के साथ ही उसका परिष्करण भी करती हैं और इस बिन्दु पर आकर ये ‘विषकन्याएँ’ अमृतकन्याओं में बदल जाती हैं। उपन्यास की कथा विष से अमृत की ओर बढ़ने की संघर्ष-गाथा है क्योंकि उपन्यास की पात्र वे स्त्रियाँ हैं, जिन्हें अमृत से वंचित कर ‘विष’ की ओर ढकेल दिया गया है। उपन्यास में इन स्त्रियों की रोज़-रोज़ की प्रताड़ना, अपमान और हत्या जैसे रोंगटे खड़े कर देनेवाले प्रसंगों का चित्रण कुसुम खेमानी ने जिस भाषाई कौशल और शिल्पगत दक्षता के साथ किया है, वह देखते ही बनता है। पहला पन्ना खोलते ही उपन्यास किसी रोचक फ़िल्म की तरह हमारे सामने खुलता चला जाता है। यह बतरस शैली डॉ. कुसुम खेमानी का अपना निजी और विशिष्ट कौशल है जो पाठकों को अन्त तक बाँधे रखता है। उपन्यास की कथा में सहारा देनेवाले हाथों का सन्दर्भ ही नहीं है बल्कि इन पतिता स्त्रियों द्वारा गिरकर ख़ुद उठने और सँभलने की कोशिशों का कलात्मक मंथन भी है। ‘लावण्यदेवी’, ‘जड़िया बाई’ और ‘गाथा रामभतेरी’ जैसे उपन्यासों से गुज़रने के बाद, निस्सन्देह यहाँ यह कहा जा सकता है कि इतनी ख़ूबियों से भरा-पूरा यह उपन्यास अगर किसी का हो सकता है, तो वह सिर्फ़ कुसुम खेमानी का हो सकता है। —एकान्त श्रीवास्
Diwaswapna
- Author Name:
Gijubhai Bedheka
- Book Type:

- Description: "इसी बीच प्रधानाध्यापक एकाएक आए और मुझे टोका, ‘‘देखिए, यहाँ पास में कोई खेल नहीं खेला जा सकता। चाहो, तो दूर उस मैदान में चले जाइए। यहाँ दूसरों को तकलीफ होती है।’’ मैं लड़कों को लेकर मैदान में पहुँचा। लड़के तो बे-लगाम घोड़ों की तरह उछल-कूद मचा रहे थे। ‘‘खेल! खेल! हाँ, भैया खेल!’’ मैंने कहा, ‘‘कौन सा खेल खेलोगे?’’ एक बोला, ‘‘खो-खो।’’ दूसरा बोला, ‘‘नहीं, कबड्डी।’’ तीसरा कहने लगा, ‘‘नहीं, शेर और पिंजड़े का खेल।’’ चौथा बोला, ‘‘तो हम नहीं खेलते।’’ पाँचवाँ बोला, ‘‘रहने दो इसे, हम तो खेलेंगे।’’ मैंने लड़कों की ये बिगड़ी आदतें देखीं। मैं बोला, ‘‘देखो भई, हम तो खेलने आए हैं। ‘नहीं’ और ‘हाँ ’ और ‘नहीं खेलते,’ और ‘खेलते हैं,’ करना हो तो चलो, वापस कक्षा में चलें।’’ लड़के बोले, ‘‘नहीं जी, हम तो खेलना चाहते हैं।’’ —इसी पुस्तक से बाल-मनोविज्ञान और शैक्षिक विचारों को कथा शैली में प्रस्तुत करनेवाले अप्रतिम लेखक गिजुभाई के अध्यापकीय जीवन के अनुभव का सार है यह—‘दिवास्वप्न’।
Kuthanv
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

- Description: ‘कुठाँव’ में स्त्री और पुरुष का, प्रेम और वासना का, हिन्दू और मुसलमान का और ऊँची-नीची जातियों का एक भीषण परिदृश्य रचा गया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह समाज और विशेष रूप से मुस्लिम समाज की आन्तरिक विडम्बनाओं और विसंगतियों को बख़ूबी चित्रित करते रहे हैं। इस उपन्यास में मेहतर समाज की मुसलमान औरत इद्दन और उसकी बेटी सितारा है जो ऊँची जाति के, पैसेवाले मुस्लिम मर्दों से लोहा लेती हैं। स्त्री और पुरुष के और भी आमने-सामने के कई समीकरण यहाँ रचे गए हैं और यौन को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करके अपनी सामाजिक और मर्दाना प्रतिष्ठा को द्विगुणित करने के कुप्रयासों का भी निर्दयतापूर्वक भंडाफोड़ किया गया है। यह प्रश्न कि सदियों से ताक़त के क़िस्म-क़िस्म के चौखटों में जकड़ी, लड़ती-भिड़ती और जीतती-हारती औरतों के लिए आख़िर मुक्ति की राह कहाँ है? इस सन्दर्भ में उपन्यास सपनों की अनन्त उड़ानों पर विराम लेता है। हम जान पाते हैं कि ये सपने ही हैं जो उन्हें अन्तत: मुक्ति की मंज़िल तक ले जाएँगे। तब न कोई अपनी दैहिक ताक़त से उन्हें परास्त कर पाएगा, न सामाजिक ताक़त से।
Tejo Tungabhadra
- Author Name:
Vasudhendra
- Rating:
- Book Type:

- Description: 15-16 ನೆಯ ಶತಮಾಮನದ ಲಿಸ್ಬನ್, ವಿಜಯನಗರ ಮತ್ತು ಗೋವಾ ನಗರಗಳ ಸಾಮಾಜಿಕ ಮತ್ತು ರಾಜಕೀಯ ಜೀವನವನ್ನು ಆಧರಿಸಿ ಬರೆದ ಜನಸಾಮಾನ್ಯರ ಕಾದಂಬರಿ. ನಿಮ್ಮ ಹೊಸ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಓದಿ ಮೂಕ ವಿಸ್ಮಿತನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಇಂತಹ ಶ್ರೇಷ್ಠ ಕೃತಿಯನ್ನು ಕನ್ನಡಿಗರಿಗೆ ಕೊಟ್ಟಿರುವ ನಿಮಗೆ ಹಾರ್ದಿಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು. – ಡಾ. ಸಿ ಎನ್ ರಾಮಚಂದ್ರನ್
Ghafil
- Author Name:
Sunil Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Hindi Novel
Pankh Se Chhuta
- Author Name:
Pragya Pandey
- Book Type:

- Description: प्रज्ञा पांडेय के इस उपन्यास में वल्लरी और उसकी बेटी अन्ना की यह कथा सिर्फ़ माँ-बेटी की कथा नहीं है। मानवीय संबंधों के सर्पिल पेंचदार गलियों से गुजरती इस कथा में मन के अनगिन गवाक्ष हैं और इन गवाक्षों में छिपा जीवन पाठकों को विलक्षण जीवनानुभव सौंपता है। प्रेम में चोटिल होने के बावजूद वल्लरी अपने गर्भ की रक्षा करती है और अन्ना को जन्म देती है। वह इसे अपने लिए केवल प्रकृति का उपहार नहीं मानती, बल्कि स्त्री-जीवन की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय मानती है. अन्ना का जन्म उसके अंतःकरण को नई शक्ति देता है.
Professor Ki Diary
- Author Name:
Dr. Laxman Yadav
- Book Type:

- Description: यह किताब डायरी, नोट्स और टिप्पणियों की शैली में अपने समय की तफ्तीश करती है। इसमें समाज और राजनीति की बड़ी परिघटनाएं हैं तो इसके बीच बनते हुए एक प्रबुद्ध नौजवान की कहानी भी है। यह आज़मगढ़ के पिछड़े किसान परिवार में पैदा होता है। इलाहाबाद और दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ायी करता है। दशक भर से ज़्यादा दिल्ली के एक कॉलेज में अध्यापन करता है। उसके कंधों पर गरीब परिवार की अपेक्षाओं और अपने सपनों का वज़न है। वह अकेला है। वह असमंजस, असुरक्षा और अनिश्चितता से घिरा हुआ है। वह डरा हुआ है। मगर वह किताबों को नौकरी पाने का जरिया नहीं बनाता, उनसे अपने समाज को समझने का नज़रिया हासिल करता है। सत्ताएँ उसे डराती हैं तो वह डरने की बजाय दुस्साहसी होता जाता है। धीरे-धीरे उसकी समझ, दायित्वबोध और लोकप्रियता का दायरा बढ़ता जाता है। वह क्लास के छात्रों से सुदूर ग्रामीण लोगों तक का प्रोफ़ेसर बन जाता है। यह फिक्शनल है, क्योंकि इसमें संज्ञाएँ बदल दी गयी हैं. यह नॉनफ़िक्शन है, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति, सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ रत्ती-रत्ती सही हैं। इसमें इसमें कथा, संवाद और सटायर है तो वक्तृता और विश्लेषण की चमक भी। इसमें वह सब है, जो एक पठनीय किताब में होना चाहिए।
Priywar
- Author Name:
Nimai Bhattacharya
- Book Type:

- Description: स्त्री-जीवन की विडम्बनाएँ हमेशा साहित्यिक चिन्ता को अपनी तरफ़ खींचती रही है। यह उपन्यास एक सफल भारतीय स्त्री के जीवन को उकेरते हुए बताता है कि कैसे भीतर से सुखी होने की उसकी चाहत क़दम-क़दम पर उन्हीं लोगों द्वारा छली जाती रही, जिनकी तरफ़ उसने उम्मीद की निगाह से देखा। उपन्यास की नायिका कविता चौधरी यूनाइटेड नेशंस में कार्यरत हैं, देश-विदेश के दौरों में उनका जीवन बीतता है। उनके पास सब कुछ है लेकिन भीतर एक ख़ालीपन है जो लगातार किसी तलाश में रहता है। ऐसी ही एक यात्रा में उसे एक पत्रकार मिलता है जिसके साथ उनका रिश्ता बड़ी बहन का बन जाता है। और फिर शुरू होता है पत्रों का एक सिलसिला जिसमें वे अपने अन्तस् को उघाड़कर अपने उस संवेदनशील छोटे भाई के सामने रख देती है। यह उपन्यास उन्हीं पत्रों को बुनकर तैयार किया गया है। इमसें भारतीय सामाजिक जीवन की नैतिक हिप्पोक्रेसी ख़ास तौर पर देखने लायक़ है जो नायिका की आन्तरिक पीड़ा के सामने और ज़्यादा ओछी लगती है।
Khonta Aa Chidai
- Author Name:
Mayanand Mishra
- Book Type:

- Description: Maithili Novel
Uttara
- Author Name:
Supreeth K N
- Book Type:

- Description: Novel based on seeking answers for fundamental question. ಉತ್ತರ’ ಸುಪ್ರೀತ್ ಕೆ.ಎನ್ ಅವರ ಕಾದಂಬರಿ. ಕನ್ನಡದ ಭರವಸೆಯ ಕಾದಂಬರಿಕಾರರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬರಾದ ಸುಪ್ರೀತ್ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿ ಕೃತಿಯನ್ನೂ ಅಧ್ಯಾತ್ಮದ ಅಡಿಪಾಯದಲ್ಲೇ ರಚಿಸಿದರೂ, ಪ್ರತಿ ಕೃತಿಯಲ್ಲೂ ಅಧ್ಯಾತ್ಮದ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಆಯಾಮಗಳನ್ನು ಪರಿಚಯಿಸುತ್ತಾರೆ. ಈ ‘ಉತ್ತರ’ ಕಾದಂಬರಿಯ ಮೂಲ ವಸ್ತು 'ನೋವು'. ಕಥನಾಯಕ ಸ್ಕಂದ ನೋವಿನ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯೊಂದರಲ್ಲಿ ಸಿಲುಕಿದಾಗ, ಮನುಷ್ಯನಿಗೆ ನೋವು ಯಾಕೆ ಕಾಡುತ್ತದೆ? ನೋವಿನ ಮೂಲವೇನು? ನಮ್ಮನ್ನು ಕಾಡುವ ನೋವಿನಿಂದ ಹೇಗೆ ಹೊರಬರಬೇಕು? ಎನ್ನುವಂತಹ ಮೂಲಭೂತ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಂಡು ಅದಕ್ಕೆ ಉತ್ತರ ಹುಡುಕುತ್ತಾ ಆಶ್ರಮವೊಂದಕ್ಕೆ ತೆರಳಿ ಅಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಾತ್ಮ ಸಾಧನೆಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಾ ತನ್ನ ನೋವಿನ ಮೂಲ ಹುಡುಕುತ್ತಾನೆ. ಉತ್ತರ ಹುಡುಕುವ ಈ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಕರ್ಮ ಸಿದ್ಧಾಂತಗಳ ಹಲವು ಮಜಲುಗಳ ಪರಿಚಯವು ಆಗುತ್ತದೆ.
Swadesh
- Author Name:
Mamta Chandrashekhar
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक एक उपन्यास है, जो यथार्थ के पंख लगाकर काल्पनिकता के धरातल पर एक सशक्त भारत की आधारशिला रखता है। 16 भागों में विभाजित इस उपन्यास में एक ऐसे सेवानिवृत्त प्राध्यापक की जिद में लिपटी जीवंतता को समेटा गया है, जो बौद्धिक प्रतिभा पलायन (brain drain) के बहाव को रोकना अपना राष्ट्रधर्म मानते हैं। वैश्विक पटल पर भारतमाता के सम्मान की जीवंत गाथा को अमरत्व प्रदान करने के लिए नवयुवकों को स्वदेश में रहने के लिए एक वातावरण की संरचना करने का नवाचार करते हैं। वह शैक्षणिक संस्थाओं, नवयुवकों व भारतीय परिवारों की चिर-परिचित मान्यताओं को अपने लक्ष्य के अनुरूप ढालने की चुनौती का सामना करते हैं। जनसामान्य की मानसिकता को परिवर्तित करने के लिए संघर्ष करते हैं। उनका मानना है, भौतिक सुख-सुविधाओं की चाह में स्वदेश छोड़ परदेश की ओर आकर्षित होते नवयुवक विदेशी राज्यों का माथा ऊँचा करते हैं। वे वहाँ पर उस हुनर का इस्तेमाल करते हैं, जिसे भारतमाता ने अपने आँगन के संस्कारों से पोषित किया है, अपनी खाद-पानी से सिंचित किया है। प्राध्यापक अपना शेष जीवन स्वदेश आंदोलन को समर्पित कर देते हैं ताकि भारतमाता के माथे से पिछड़े राष्ट्र के चिह्न को मिटा सकें और बुढ़ापे से जूझते बूढ़े माँ-बाप को वृद्धाश्रम में न रहना पड़े; उन्हें परदेश में रहनेवाली अपनी संतान का मुँह देखे बिना तड़प-तड़पकर न मरना पड़े। अपनों से अपनों का अपनत्व बना रहे। इसके लिए प्रोफेसर एक मिशन छेड़ते हैं ‘स्वदेश’।
Sindbad Ki Antim Yatra
- Author Name:
Ravindranath Tyagi
- Book Type:

- Description: हिंदी की व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। त्यागीजी ने अपने दो अन्य सहयात्रियों के साथ हिंदी-व्यंग्य को एक सुनिश्चित दिशा प्रदान की और उसे एक विधा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने में अप्रतिम योगदान दिया। इस व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी की व्यंग्य-दिशा पूर्णत: भिन्न थी। हरिशंकर परसाई का क्षेत्र राजनीतिक था, शरद जोशी में विषय का वैविध्य एवं नए प्रयोगों का कौशल था, जबकि त्यागीजी में साहित्य और लालित्य की प्रधानता थी। त्यागीजी का यह विशिष्ट रंग था, अपनी मौलिक सर्जनात्मकता थी और हिंदी-व्यंग्य को शिखर तक ले जाने की प्रतिभा थी। यही कारण है कि हिंदी-व्यंग्य में उनकी अपनी अलग पहचान है तथा व्यंग्य-त्रयी के अंग होने पर भी वे अपने जैसे अकेले ही हैं। हिंदी-व्यंग्य के इतिहास में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान रहेगा और नई पीढ़ी के प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगे। रवींद्रनाथ त्यागी ने विपुल मात्रा में व्यंग्य रचनाएँ कीं। संभव है, आज उनकी संपूर्ण व्यंग्य-कृतियाँ उपलब्ध न हों और पाठक उनकी प्रतिनिधि तथा उच्च कोटि की रचनाओं से वंचित रह जाएँ। इसी को ध्यान में रखकर रवींद्रनाथ त्यागी के संपूर्ण व्यंग्य-साहित्य में से कुछ चुनी हुई रचनाएँ इस पुस्तक में प्रकाशित की गई हैं। इससे पाठकों को उनके व्यंग्य-साहित्य की एक झलक मिल सकेगी और वे अपने इस प्रिय व्यंग्यकार की रचनाओं का रसास्वादन कर सकेंगे।
Prem Ek Paltu Billi
- Author Name:
Nidhi Agarwal
- Book Type:

- Description: ‘प्रेम एक पालतू बिल्ली’ की कहानियों में उदासी से भरी कायनात की गहरी तफ़सीलें चली आई हैं और इस दुनिया के जोखिम भरे अनुभव, उनके यथार्थ-बोध का हिस्सा बनते गए हैं। इनमें दर्ज हुए विषाद की वजह खोजें तो वहाँ हमें, भीतर-बाहर से जूझती हुई ज़िन्दगी मिलेगी। स्त्री-पुरुष दोनों के किरदार, अपनी रूह में जागे हुए-से शैतानी फ़ितरतों से मुकाबले में दिखाई देंगे। तब ‘शैतानी तुरही’ जैसी कहानी में उभर आए अँधेरे, कीच और लीच ही नहीं बल्कि गहन अकेलेपन को भी आप बहुत सारे सवालों की नींव उधेड़ते हुए महसूस करेंगे। ये कहानियाँ जीवन में पैवस्त हुए नैतिक-अनैतिक से कहीं अधिक मनुष्य होने के ज़रूरी आधारों को पुकारती हैं। इस तरह वे इनसानी रूह को रोगिल बना देने पर आमादा हुए अँधेरे के ज़हर से टकरा रही हैं और यह ज़हर कई रंग का है, किन्तु जहाँ भी है, दारुण है। इसके भीतर जीवन को अवरुद्ध करने वाला पतन है, असम्भव क़िस्म की वारदातें हैं, जीवन की सुन्दरताओं को नष्ट कर जाने वाला पाप-बोध का विषैला पुष्प है, और है मनुष्यता की ओर से जारी हुई एक अनवरत जिरह, जो न होती तो ये कहानियाँ अधूरी रह जातीं। निधि अग्रवाल की कहानियाँ, यथार्थ के प्रचलित इलाक़ों की कहानियाँ नहीं हैं और न ही शिल्प की ज़रा-सी भी सुस्ती इन्हें मंज़ूर है। ये जीवन के भीतर और बाहर को शिद्दत-भरी संवेदनशीलता में रचने में कामयाब हुई कहानियाँ हैं, जिनकी भाषा की भीतर झाँकने वाली ख़ूबी बेजोड़ है।
Shisha Ghar
- Author Name:
Pratyaksha
- Book Type:

- Description: ‘शीशाघर’ के केन्द्र में एक परिवार है जो सन् सैंतालिस में बिखरना शुरू होता है तो बिखरता ही जाता है। और जब हम एक मुल्क के, एक भरी-पूरी दुनिया के विभाजित होते जाने की त्रासदी से गुज़र रहे होते हैं तब एक इलहाम की तरह यह बात भीतर प्रकट होती है कि यह उपन्यास विभाजन और बिखराव से ज़्यादा उस अन्दरूनी इनसानी एकता के बारे में है जो इसके चरित्रों को बिखरकर भी बिखरने नहीं देती और वे एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर, दूसरे देशों में अपना रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी एक-दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस उपन्यास के केन्द्र में है प्रेम, जिसका प्रवाह धर्म, नस्ल, राष्ट्र और भूगोल के सिरों को धूमिल करता, साथ ही लोगों के बसने, उजड़ने और फिर बसने की यादों को सहेजता चलता है। केन्द्रीय कथा से इतर भी इसमें बहुतेरे ऐसे चरित्र हैं जो प्रेम की आग में झुलसकर बन और बिगड़ रहे हैं या कि उनका व्यक्तित्व उस प्रेम की याद से बन रहा है। कभी न भूलनेवाले यादगार किरदारों, उनके द्वन्द्व और चाहनाओं, ज़िद और लापरवाहियों से बुनी हुई, देखी-जानी दुनिया के समानान्तर उतनी ही ज़िन्दा, सम्मोहक और मानीख़ेज़ एक दूसरी दुनिया।
Moorkhon Ki Kami Nahi
- Author Name:
Shri Krishna
- Book Type:

- Description: श्रीकृष्ण द्वारा संपादित ‘मूर्खों की कमी नहीं’ बाल कहानियों का संकलन है। इसमें अलग-अलग बाल साहित्यकारों की कुल सात बाल-कथाएँ हैं। सभी कहानियों का विषय बाल-मनोविज्ञान है। बाल-साहित्यकारों की परम्परा की नई झलक इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण बना देती है।
Imperfect Maa
- Author Name:
Ankita Jain
- Book Type:

- Description: एक माँ के रूप में ख़ुद को और अपने बच्चे को बेहतर समझने का अवसर देती है यह किताब । पैरेंट्स बनने से पहले मन में अनगिनत संशय, उत्सुकताएँ और भय होते हैं और पैरेंट्स बन जाने के बाद तो हर क्षण कुछ-न-कुछ बदलता रहता है- पल-प्रतिपल नयी चुनौतियाँ सामने आती हैं और सलाह की ज़रूरत महसूस होती है। पहले हम यह सलाह दादी-ताई से लेते थे, आज इंटरनेट से लेते हैं । पर हम सब जानते हैं कि ऐसी सलाहें अक्सर उतनी मददगार नहीं होतीं, कई बार तो उलझन और बढ़ा देती हैं। यह किताब किसी भी तरह के निर्देश देने का दावा नहीं करती। इसके विपरीत, यह स्वीकार करती है कि हर माँ, हर बच्चा और हर परिस्थिति अलग होती है। इसलिए यह केवल अपने अनुभवों को साझा करती है - ताकि आप पढ़ते हुए कभी अपने अनुभवों से जुड़ सकें, और कभी उनसे अलग होकर अपनी स्थितियों को नये नज़रिये से समझ सकें ।
Deepavirada Daariyalli
- Author Name:
Sushanth Kotiyan
- Rating:
- Book Type:

- Description: ದೀಪವಿರದ ದಾರಿಯಲ್ಲಿ-ಈ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಲೇಖಕ ಸುಶಾಂತ ಕೊಟ್ಯಾನ್ ಅವರು ರಚಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸಾಹಿತಿ ಡಾ. ಪುರುಷೋತ್ತಮ ಬಿಳಿಮಲೆ, ಕೃತಿಗೆ ಮುನ್ನುಡಿ ಬರೆದು ‘ಸಲಿಂಗರತಿಯಂಥ ವಸ್ತುವನ್ನು ಆಯ್ದುಕೊಂಡ ಕಾದಂಬರಿಯು ಓದುಗರನ್ನು ಬೌದ್ಧಿಕವಾಗಿ ಬೆಳೆಸುತ್ತದೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ಕಾದಂಬರಿಯ ನಾಯಕನಾದ ಸುಕೇಶನೂ ಒಬ್ಬ ಸ್ತ್ರೀ ವೇಷಧಾರಿ. ಇಡೀ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಅವನ ಸುತ್ತಲೇ ಕಟ್ಟಿ ಬೆಳೆಸಲಾಗಿದೆ. ಹಾಗೆ ಕಟ್ಟುವಾಗ, ಸುಕೇಶನೊಳಗಿನ ಹೆಣ್ತನದ ಸೂಕ್ಷ್ಮಗಳಿಗೆ ಗೌರವ ತಂದುಕೊಡಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಅವನನ್ನು ಲೈಂಗಿಕವಾಗಿ ಶೋಷಿಸುವವರನ್ನು ಬಯಲುಗೊಳಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇವುಗಳ ನಡುವೆ ಐಉಃಖಿಕಿ ನ ಹಲವು ಸಂಕೀರ್ಣ ಮುಖಗಳು ಕಾದಂಬರಿಯಲ್ಲಿ ಅನಾವರಣಗೊಳ್ಳುತ್ತಾ ಓದುಗರನ್ನು ಶೈಕ್ಷಣಿಕವಾಗಿಯೂ ಬೆಳೆಸುತ್ತದೆ. ‘ದೀಪವಿರದ ಕತ್ತಲ ದಾರಿಯಲ್ಲಿ ಒಂಟಿಯಾಗಿ ನಿಂತಿದ್ದನು ಸುಕೇಶ. ಅವನು ಇಷ್ಟರವರೆಗೆ ಬಯಸಿದ ಬದುಕವನಿಗೆ ದೊರೆಯಲೇ ಇಲ್ಲ. ಅಷ್ಟೊತ್ತಿಗೆ ಮೂಡಣದಲ್ಲಿ ಮೇಲೇರಿದ್ದ ರವಿ ತನ್ನ ಹೊಂಗಿರಣದ ಹೊಂಬೆಳಕನ್ನು ಭುವಿಯೆಡೆಗೆ ಚೆಲ್ಲಿದ್ದನು. ಟ್ಯಾಕ್ಸಿ ನಿಧಾನವಾಗಿ ಮುಂದಕ್ಕೆ ಚಲಿಸಿತ್ತು. ಸುಕೇಶ ಅಂಧಕಾರದ ಬದುಕಿನಲ್ಲಿ ಬೆಳಕಿಗಾಗಿ ಅರಸುತ್ತಿದ್ದನು. ಅಂತ್ಯವಿಲ್ಲದ ಕತೆಯ ಆರಂಭ ಅವನ ಬದುಕಿನಲ್ಲಿ ಇದೀಗ ಆಗಿತ್ತು. ಹೀಗೆ ಈ ಕಾದಂಬರಿಯು ಲೈಂಗಿಕತೆಯ ವಿಭಿನ್ನ ಮಜಲುಗಳನ್ನು ಧೈರ್ಯವಾಗಿ ಶೋಧಿಸುತ್ತದೆ. ರವೀಂದ್ರ, ಆಕಾಶ್ ಮತ್ತು ಸುಕೇಶರ ನಡುವಣ ತ್ರಿಕೋನ ಸಂಬಂಧಗಳ ಜೊತೆಗೆ ಗಂಡಸರ ಹಿಂದೆ ಹೋಗುವ ರಘುಪತಿಯ ಸಮಸ್ಯೆಗಳೂ ಬಿಚ್ಚಿಕೊಳ್ಳುತ್ತವೆ. ಗೇ ಸೆಕ್ಸ್ ವೀಡಿಯೋ ನೋಡುವ ಅವನನ್ನು ಬಿಟ್ಟು, ಅವನ ಹೆಂಡತಿ ಗುಜರಾತಿಯೊಬ್ಬನ ಸ್ನೇಹ ಮಾಡುತ್ತಾಳೆ. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ಸಮಾಜವು ತನ್ನ ಮೂಗಿನ ನೇರಕ್ಕೆ ವ್ಯಾಖ್ಯಾನಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾ ಹೋಗುತ್ತದೆ. ಇಂಥ ಸಂಕೀರ್ಣ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಕಾದಂಬರಿ ತಣ್ಣಗೆ ಕಟ್ಟಿಕೊಡುತ್ತದೆ. ಈ ಕಾದಂಬರಿಯ ವಸ್ತು ಮತ್ತು ಪಾತ್ರಗಳು ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ತೀರಾ ಹೊಸದು. ಕಾನೂನಿನ ತೊಡಕುಗಳು, ಸಂಪ್ರದಾಯಸ್ಥರ ಆಕ್ರಮಣ, ಮಡಿವಂತಿಕೆ, ನಿಷೇಧ, ಭಯ ಇತ್ಯಾದಿ ಕಾರಣಗಳಿಂದಾಗಿ ಏಕಾಏಕಿ ಸಾಹಿತ್ಯವು ಮುಖ್ಯಧಾರೆಗೆ ಬರಲೇ ಇಲ್ಲ. ಸುಶಾಂತ್ ಕೋಟ್ಯಾನ್ ತುಂಬ ಧೈರ್ಯವಹಿಸಿ ಈ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಬರೆದು ನಮ್ಮ ಅರಿವಿನ ಗಡಿರೇಖೆಗಳನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸಿದ್ದಾರೆ’ ಎಂದು ಪ್ರಶಂಸಿಸಿದ್ದಾರೆ.
Go Back to Paris
- Author Name:
D. Jayakanthan +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: In "Go Back to Paris," the renowned Tamil author Jayakanthan thoughtfully explores the tension between tradition and modernity in both art and personal life. Musician Sarangan returns to India infused with an idealistic zeal for modernized Carnatic music. However, he faces a significant challenge from his father, Seshiah, a vina virtuoso who views music as divine. Lalitha, a passionate writer, finds herself caught in a struggle between her deep love for Sarangan and her unwavering commitment to her noble husband. The conflict lies not between dharma and adharma but between different interpretations of dharma, resulting in a delicate balance.
Suraj Mere Saath Mein
- Author Name:
Smt. Kamna Singh
- Book Type:

- Description: सूरज मेरे साथ में’ चार उपन्यासों का संकलन है। बाल एवं किशोर मन की दैनंदिन समस्याओं से जुड़े ये चारों उपन्यास सचमुच सूरज की ऐसी उजली किरण हैं, जो बच्चों के पथ को प्रकाशित करने में समर्थ हैं। ‘परीक्षा के बाद’ गौरव का स्कूली परीक्षा के साथ-साथ जीवन के इम्तिहान में भी ऊँचे अंक लेकर सफलता पाने का किस्सा है। बच्चों के लिए पल-पल जिन रोचक-रोमांचक घटनाओं की पिटारी खुलती है, वे उन्हें चमत्कृत किए बिना नहीं रहतीं। ‘खट्टी-मीठी गोलियाँ’ में बाल-मजदूरी उन्मूलन की बात कही गई है। ‘मुझे तो पढ़ना है’ में शिक्षा के बाल अधिकार को एक निर्धन तदपि पढ़ने की ललक रखनेवाले बालक के माध्यम से दरशाया गया है। ‘सूरज मेरे साथ में’ भी कथानायक रोशन के हौसलों की उड़ान है, जो उसे सफलता दिलाती है। कुल मिलाकर चारों उपन्यास बच्चों को सद्गुणों से तो जोड़ते ही हैं, जीवन के प्रति समझ भी जगाते हैं। कदाचित् यही आज के समय की माँग भी है।
Karbala Dar Karbala
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description: 1980's blindings to 1989's massacre 'कर्बला दर कर्बला' अपने ढंग का एक अलग उपन्यास है। विमर्शों के इस दौर में यह अपना नया विमर्श चाहता है। गौरीनाथ का यह उपन्यास हमें एक भयावह दुनिया में ले जाता है। ऐसी दुनिया में जो अपराध जगत, पुलिस-प्रशासन और कट्टर धार्मिक संगठनों के गँठजोड़ से बनी है और जहाँ युवाओं के मधुर हो सकने वाले पल भी सहसा कटु हो उठते हैं। यह भागलपुर की दास्तान है। उसी भागलपुर की, जहाँ का अँखफोड़वा काण्ड और नब्बे के दशक में महीनों चले साम्प्रदायिक दंगों ने पूरे इतिहास को ही झकझोर दिया था। शिव और ज़रीना के सपनों की कहानी के बहाने लेखक ने ऐसी कथा बुनी है जो सत्ता और पूँजी के बल पर उत्पीड़ित और लांछित मानवता की कहानी बन गई है। 'कर्बला दर कर्बला' में कल्पना और यथार्थ से भी आगे बढ़कर तथ्यात्मकता को जिस तरह पिरोया गया है वह हिन्दी में उपन्यास-लेखन के क्षेत्र में एक साहसिक प्रयोग है। इस उपन्यास को पढऩा एक दु:स्वप्न से गुज़रना है। मगर उस दु:स्वप्न में कोई फ़ैंटेसी नहीं, बल्कि सच्चाइयों के बनते-बिगड़ते चित्र भरे पड़े हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र। —अब्दुल बिस्मिल्लाह ... और... भागलपुर से डॉ चन्द्रेश कहते हैं-- लेखक-पत्रकार गौरीनाथ ने बिहार के भागलपुर शहर को केन्द्र में रखकर लगभग दस साल के कालखण्ड में हुए उन चर्चित घटनाओं को समेटने की कोशिश की है, जिसने इस अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के चेहरे को दाग़दार बनाया है, वह चाहे कुख्यात अंधाकरण काण्ड हो या 1989 का भयानक हिन्दू-मुस्लिम दंगा। लेखक ने यथासंभव तटस्थ भाव से इन घटनाओं का सूक्ष्म अन्वेषण कर इसके इर्द-गिर्द गल्प का ताना-बाना बुना गया है, जो उपन्यास के बहाने अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है यानी दस्तावेज़ में उपन्यास की महक और उपन्यास में दस्तावेज़ की झलक।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book