Vedic Ankganit
About the book
अंकगणित का मूल आधार संख्याएँ तथा उनका योग, व्यवकलन, गुणन, विभाजन आदि प्रमुख संक्रियाएँ हैं । इसके अतिरिक्त संख्याओं के गुणनखंड, मूल तथा घात निकालने की भी आवश्यकता पड़ती है । दो संख्याओं का मध्यानुपाती ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वर्गाकार क्षेत्र की भुजा ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वृत की त्रिज्या ज्ञात करने, मानक विचलन निकालने आदि अनेक प्रकार के प्रश्नों में वर्गमूल निकालने की आवश्यकता होती है । क्षेत्रफल और आयतन के प्रश्नों में, बोधायन-पाइथागोरस प्रमेय के अनुप्रयोग में, दो बिंदुओं के बीच की दूरी की गणना करने में, चक्रवृद्धि ब्याज के प्रश्न हल करने में, संख्याओं के वर्गफल या घनफल निकालने की आवश्यकता होती है । हमारे देश के विद्वानों ने ऐसी अनेक विधियाँ खोजी हैं, जो गणनाओं को अति अल्प समय में करने में सहायक होती हैं तथा मौखिक रूप से गणनाएँ सरलता से की जा सकती हैं । प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य ' वैदिक गणित ' के ज्ञान को व्यावहारिक बनाना है, जिससे जन-जन में इसकी पैठ हो सके । इसमें मात्र अंकगणित के क्षेत्र में ' वैदिक गणित ' की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है । वैदिक विधियाँ अत्यंत सरल हैं, जो गणनाओं के करने में छात्रों के समय तथा श्रम की बचत करती हैं, जिसका लाभ प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक के सभी छात्र उठा सकते हैं । व्यावहारिक जीतन में तो. ये विधियों अति उपयोगी हैं ही, साथ ही जनसामान्य के लिए भी अति उपयोगी हैं ।
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About the Book
अंकगणित का मूल आधार संख्याएँ तथा उनका योग, व्यवकलन, गुणन, विभाजन आदि प्रमुख संक्रियाएँ हैं । इसके अतिरिक्त संख्याओं के गुणनखंड, मूल तथा घात निकालने की भी आवश्यकता पड़ती है । दो संख्याओं का मध्यानुपाती ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वर्गाकार क्षेत्र की भुजा ज्ञात करने, दिए क्षेत्रफल के वृत की त्रिज्या ज्ञात करने, मानक विचलन निकालने आदि अनेक प्रकार के प्रश्नों में वर्गमूल निकालने की आवश्यकता होती है ।
क्षेत्रफल और आयतन के प्रश्नों में, बोधायन-पाइथागोरस प्रमेय के अनुप्रयोग में, दो बिंदुओं के बीच की दूरी की गणना करने में, चक्रवृद्धि ब्याज के प्रश्न हल करने में, संख्याओं के वर्गफल या घनफल निकालने की आवश्यकता होती है ।
हमारे देश के विद्वानों ने ऐसी अनेक विधियाँ खोजी हैं, जो गणनाओं को अति अल्प समय में करने में सहायक होती हैं तथा मौखिक रूप से गणनाएँ सरलता से की जा सकती हैं । प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य ' वैदिक गणित ' के ज्ञान को व्यावहारिक बनाना है, जिससे जन-जन में इसकी पैठ हो सके । इसमें मात्र अंकगणित के क्षेत्र में ' वैदिक गणित ' की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है । वैदिक विधियाँ अत्यंत सरल हैं, जो गणनाओं के करने में छात्रों के समय तथा श्रम की बचत करती हैं, जिसका लाभ प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक के सभी छात्र उठा सकते हैं । व्यावहारिक जीतन में तो. ये विधियों अति उपयोगी हैं ही, साथ ही जनसामान्य के लिए भी अति उपयोगी हैं ।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 200 grams
- ISBN-13
- 9789383110377
- Pages
- 154
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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