Shakespeare Ki Baal Kahaniyan (Hindi Translation of Tales from Shakespeare)
Author:
Charles Lamb, Mary LambPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
सन 1807 में विलियम गुडविन द्वारा मैरी लैंब एवं उनके छोटे भाई चाल्र्स लैंब से शेक्सपियर के सर्वाधिक लोकप्रिय नाटकों को सरल भाषा में रूपांतरित करने का अनुरोध किया गया था, ताकि बच्चे उन्हें आसानी से समझ सकें। युवा पाठकों, विशेषतया लड़कियों से, जो उस समय पुस्तकालयों में पहुँच पाने में असमर्थ थीं, के साथ शेक्सपियर का पहली बार परिचय कराने के उददेश्य से इन कहानियों को लिखा गया था। चाल्र्स एवं मैरी ने शेक्सपियर के सर्वाधिक लोकप्रिय बीस नाटकों का चयन किया और उन्हें लघुकथाओं के रूप में पुन: लिखा। उनके लेखन का परिणाम ‘शेक्सपियर की बाल कहानियाँ’ के रूप में सामने आया है, जो अत्यंत रोचक है। विश्व के महानतम नाटककार की कृतियों में आनंद, आमोद-प्रमोद एवं अभिनय का अदभुत संगम है।
ISBN: 9789355210739
Pages: 128
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Nand Chaturvedi Rachanawali : Vol. 1-4
- Author Name:
Pallav
- Book Type:

- Description: नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा लगभग एक शताब्दी की काव्य यात्रा है। औपनिवेशिक-सामंती भारत से भूमंडलीकृत-आधुनिक भारत की इस सुदीर्घ यात्रा में भाषा और रूप में भी पर्याप्त बदलाव देखे जा सकते हैं। ब्रजभाषा के पारम्परिक सवैयों से प्रारम्भ कर नंद चतुर्वेदी अपनी कविताओं को जिस छंदमुक्त लय में आधुनिक भावबोध के साथ रचते हैं वह हिन्दी काव्य भाषा के विकास का भी सुन्दर उदाहरण है। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के पहले खंड में कवि का समूचा काव्य संसार आ गया है जिसमें उनके सभी प्रकाशित संग्रहों में आई कविताओं के साथ-साथ अप्रकाशित रह गई अनेक कविताएँ और गीत-छंद इत्यादि हैं। कवि नंद चतुर्वेदी मनुष्य की स्वाधीनता और गरिमा की रक्षा के संकल्प के साथ उसके लिए तमाम अवसरों की उपलब्धता चाहते हैं। उनकी आकांक्षा है कि ये अवसर मनुष्य के सम्पूर्ण अभ्युदय के हों, उसके जीवन में सम्पूर्ण प्रकाश और तमाम उल्लासों के हों। वे मनुष्य होने की गरिमा के निर्वाह के लिए किसी भी लड़ाई के लिए तैयार हैं और उसके लिए लोकतंत्र को एक जरूरी उपाय मानते हैं। आकस्मिक नहीं कि औपनिवेशिक दासता के दौर से निकलकर भारतीय लोकतंत्र के बनने और उस पर हो रहे आघातों को वे अपनी कविताओं का विषय बनाते हैं। मनुष्य की स्वाधीनता में उन्हें धर्म जहाँ भी बाधक लगता है वे उसका मुँहतोड़ प्रतिकार करते हैं। इस बिन्दु पर वे बड़े सेक्युलर (सांसारिक) हो जाते हैं जो निर्भय होकर किसी भी सत्ता से भिड़ना जानता है। राजनीति वह क्षेत्र है जहाँ से नंद बाबू का कवि ऊर्जा ग्रहण करता है। वे आततायी राजनीति का चेहरा उघाड़ते हैं और मनुष्यधर्मी राजनीति की प्रस्तावना भी करते हैं। उनका स्वाधीन भारत के समाजवादी दलों से सीधा जुड़ाव भी रहा और वे किसी कार्यकर्ता की तरह आन्दोलनों, रैलियों और चुनावों में भागीदारी करते रहे। उनके ये जीवनानुभव जब कविताओं में रूपान्तरित होकर आते हैं तब नॉस्टेल्जिया उनकी कविताओं की रूढ़ि नहीं शक्ति प्रतीत होता है। युवा आलोचक पल्लव ने परिश्रमपूर्वक रचनावली का सम्पादन किया है। उनकी भूमिका कवि के कृतित्व को गहराई से जानने-समझने के लिए आकृष्ट करती है। नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा केवल कविताएँ लिखने तक सीमित नहीं थी। इस काव्य यात्रा में प्रभूत गद्य भी लिखा गया है। यह गद्य मोटे तौर पर दो प्रकार का है। चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य और स्मृतियों का गद्य। ‘रचनावली’ के दूसरे खंड में चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य संकलित कर लिया गया है। इस गद्य को पढ़ना नंद बाबू के काव्य सरोकारों को समझने का रास्ता देता है। ‘सप्त किरण’ शीर्षक से उन्होंने राजस्थान के कवियों की एक पुस्तक का सम्पादन भी किया था और इसे वे अस्तित्व रक्षा की संज्ञा देते थे। तो कहना न होगा कि अस्तित्व रक्षा के साथ प्रारम्भ हुआ आलोचना, सम्पादन और समीक्षा का यह सिलसिला पूरी शताब्दी तक नंद बाबू को सक्रिय बनाए रखता है। उन्होंने राजस्थान के हिन्दी कवियों के एक बड़े चयन का सम्पादन भी किया। गद्य लेखन नंद बाबू के लिए जीवनपर्यन्त आपद धर्म बना रहा। वे कवि थे और कविता के सम्बन्ध में निरन्तर विचार करना उन्हें प्रिय था। नंद बाबू कवि होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक विचार के समर्थक भी हैं। वे साहित्य को लोक शिक्षण का सस्ता औजार भले न मानते रहे हों तब भी उन्हें लोक रुचियों के विविध पक्षों पर लिखना जरूरी लगता था। उनके ऐसे ही निबन्धों की किताब ‘यह हमारा समय’ में उनके दो दर्जन से अधिक निबन्ध संकलित हैं जो हमारे जीवन और समय के विविध समकालीन पक्षों पर विचार करते हैं। नंद बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी विचारधारा का पक्ष चुना है लेकिन उनकी विचारधारा किसी गिरोहबन्दी से जन्म नहीं लेती। राजस्थान में सक्रिय रहे प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच के साथ उनका संवाद रहा। वे लघु पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे और उन्हें पढ़कर एक सजग पाठक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहे। उनके संस्मरण प्राय: राजस्थान के साहित्य से जुड़े उन लोगों पर होते थे जिनके अवदान से नई पीढ़ी अनभिज्ञ है। जिनमें पंडित गिरिधर शर्मा नवरत्न, हाड़ौती के कवि भैरूलाल कालाबादल, कवि प्रकाश आतुर के साथ-साथ जैनेन्द्र, श्यामाचरण दुबे, शिवमंगल सिंह सुमन, अश्क दम्पती, यशपाल, देवीलाल सामर, आलम शाह खान, युगलकिशोर चतुर्वेदी, कवि चित्रकार रामगोपाल विजयवर्गीय, भागीरथ भार्गव, कल्याणमल लोढ़ा और क़मर मेवाड़ी जैसे लेखक-साहित्यकार शामिल हैं। नंद बाबू राजस्थान में समाजवादी आन्दोलन के जमीनी सिपाहियों में रहे हैं। अपने साथियों पर लिखते हुए सम्बन्धों की ऊष्मा की आँच नंद बाबू पाठकों तक पहुँचाते हैं। हीरालाल जैन और नरेंद्रपाल सिंह जैसे अपने स्थानीय साथियों के अलावा देश में समाजवादी आन्दोलन के अगुआ रहे जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया पर भी उन्होंने लिखा। उनकी डायरी और अपने पत्रों में वे अपने निजी दायरे सार्वजनिक करते हैं। दो-टूक टिप्पणियाँ और निर्भीक कथन। इनमें बहुधा आत्मीयता का रस भी है तो बेहद निजी निराशाएँ भी। कथेतर की विभिन्न विधाओं में संकलित इस खंड में नंद चतुर्वेदी की रचनाशीलता के अनेक रूप विद्यमान हैं जो कवि के व्यापक दाय का प्रमाण बन गए हैं। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के चौथे और अन्तिम खंड में मुख्यत: कवि का अनुवाद कर्म है। नंद बाबू ने कविता और गद्य दोनों का अनुवाद किया। माना जाता है कि काव्यानुवाद बहुत मुश्किल साहित्य कर्म है क्योंकि अनुवादक ऐसा ही व्यक्ति होना चाहिए जो दोनों भाषाओं को ठीक से जानता हो। नंद बाबू ने साहित्यिक पत्रिकाओं के आग्रह पर काव्यानुवाद किये। ये काव्यानुवाद बहुत पुरानी प्राकृत की कविताओं के थे जो हाल कवि की गाथा सप्तशती से अंग्रेजी के रास्ते आए थे। ठीक इसी तरह कुछ संथाली कविताओं का अनुवाद भी उन्होंने किया जिन्हें अंग्रेजी में कवि सीताकांत महापात्र ने प्रस्तुत किया था। इन दोनों काव्यानुवादों में नंद बाबू की अपनी मेधा दिखाई देती है जो इन कविताओं की मूल संवदेना तक पाठकों को पहुँचाने में समर्थ है। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्रिका बिंदु और उस दौर की अनेक पत्रिकाओं के लिए साहित्य शास्त्र तथा साहित्य के अन्य प्रासंगिक विषयों पर लिखे प्रसिद्ध अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया। इस खंड में नंद बाबू द्वारा अनुवादित दो सम्पूर्ण कृतियाँ भी पढ़ी जा सकती हैं। ए. अप्पादुराई की एक अत्यन्त विचारोत्तेजक और महत्त्वपूर्ण किताब को उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद के लिए चुना। लगभग सवा दो सौ पृष्ठों की इस किताब का नाम था ‘भारतीय राजनीतिक चिन्तन’ जिसका अनुवाद नंद बाबू ने रघुवर दयाल के साथ मिलकर किया। 1990 में आई इस पुस्तक की गम्भीर सामग्री को जिस सहज और प्रभावी हिन्दी में नंद बाबू ने अनुवादित किया वह उनकी अद्भुत भाषिक क्षमता का उदाहरण है। दूसरी पुस्तक ‘दहेज पीड़ित महिलाएँ : एक अध्ययन’ लेखिका रंजना कुमारी की है जो भारत में महिला आन्दोलन में अग्रणी रही हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार से 1991 में छपी इस छोटी-सी किताब में उस दौर की दहेज समस्या का गम्भीरता से अध्ययन किया गया था। ये दोनों पुस्तकें हिन्दी अनुवाद के बाद और चर्चित हो गईं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में भी वे अनुवाद करते रहे। कभी कला प्रयोजन के सम्पादक हेमन्त शेष के आग्रह पर तो कभी और किसी पत्रिका के कहने पर। असल बात यही है कि साहित्य में जिस जीवन दृष्टि के लिए नंद बाबू संकल्पवान थे उसे बनाए रखने और गति देने के लिए अनुवाद भी एक जरूरी रास्ता लगता था।
Urdu Hindi Kosh
- Author Name:
Ramchandra Verma
- Book Type:

-
Description:
उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओं के प्रामाणिक ज्ञान और उन्हें निकट लाने में यह कोश अत्यन्त सहायक है।
उर्दू-भाषी पाठक और प्रेमी प्रायः ऐसे शब्दकोश की ज़रूरत महसूस करते हैं जो हो तो उर्दू की लिपि में किन्तु जिससे हिन्दी शब्दों का अर्थज्ञान हो सके। इसी प्रकार उर्दू से अनभिज्ञ हिन्दीभाषी नागरी लिपि में उर्दू शब्दों की प्रस्तुति से प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। इस दिशा में यह ‘उर्दू-हिन्दी कोश’ एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
यह कोश उर्दू भाषा में प्रयुक्त होनेवाले अरबी-फ़ारसी आदि के शब्दों का हिन्दी अर्थ जानने में पर्याप्त सहायक है। अरबी, फ़ारसी व तुर्की आदि की अधिकांश संज्ञाओं और विशेषणों के समावेश ने इस कोश की सार्थकता बढ़ा दी है। कोश की विश्वसनीयता फ़ारसी लिपि में मुख्य प्रविष्टियों के अंकन के कारण बढ़ गई है।
भाषाविदों, साहित्य-साधकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अनुवादकों, सम्पादकों, शोधार्थियों आदि के लिए यह कोश बहुत उपयोगी है।
1000 VIGYAN PRASHNOTTARI (PB)
- Author Name:
Dilip M. Salwi
- Book Type:

- Description: आरंभ से ही मानव स्वभाववश खोजी प्रवृत्ति का रहा है । उसके मस्तिष्क में सवाल कौंधते रहे हैं-यह क्या है, कैसे है, क्यों है आदि । ऐसे ही सवालों से जूझने का नाम विज्ञान है । सवालों की तह में जाने की कोशिश से ही हम जान पाते हैं कि हमारी पृथ्वी पर कभी डायनासोर जैसे विशाल सरीसृप का राज हुआ करता था तथा पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती हैं, न कि सूर्य पृथ्वी की- और ऐसे ही अनंत सवाल हैं, जो विज्ञान ने हमारे समक्ष रखे हैं । आज विज्ञान के प्रभामंडल से हमारी दुनिया ओतप्रोत है । जिधर भी निगाह डालिए उधर उसकी मौजूदगी मिलेगी- रेडियो, टेपरिकॉर्डर सिनेमा, वीडियो, फ्रिज, वाशिंग मशीन, टेलीविजन, कंप्यूटर, कार, रेल, जहाज, रॉकेट, मिसाइल, परमाणु बम आदि । यह सूची और भी लंबी है । जीवन का ऐसा कोई कोना नहीं बचा है जहाँ' उसका हस्तक्षेप नहीं हें, चाहे नितांत व्यक्तिगत हो या सामाजिक । जीवन में विज्ञान की इतनी उपयोगिता के बाद भी इसकी अनेक ऐसी छोटी- छोटी एवं महत्त्वपूर्ण बातें हैं जिनसे हम अनभिज्ञ हैं । इस पुस्तक में इन्हीं बातों को रोचक प्रश्नों के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया गया है ।
Kavita Kya Hai?
- Author Name:
Rameshraaj
- Rating:
- Book Type:

- Description: विचारों की सुन्दरतम् प्रस्तुति का नाम कविता है। कविता लोक या मानव के रागात्मक जीवन की एक रागात्मक प्रस्तुति है। कविता रमणीय शब्दावली से उद्भाषित होने वाला रमणीय अर्थ है। कविता आलंकारिक शैली में व्यक्त की गयी संगीत से युक्त एक ऐसी सौन्दर्यमय छटा है, जिससे सामाजिकों को आत्मतोष का अनुभव या अनुभूति होती है। कविता लोक-व्यवहार, लोकानुभव या लोकानुभूतियों की रसात्मक प्रस्तुति है। वस्तुतः कविता कवि की वह वैचारिक सृष्टि है, जिसमें वह अपनी वैचारिक अवधारणाओं, मान्यताओं निर्णयों की प्रस्तुति अपनी रागात्मक दृष्टि के साथ करता है या ये कहा जा सकता है कि कवि की हर प्रकार की मान्यताओं, अवधारणाओं और निर्णयों के बीच एक रागात्मक धारा बहती है। कवि की वैचारिक सृष्टि की यही रागात्मक धारा आलम्बन विभावों के धर्म को सौन्दर्यमय और सत्योन्मुखी बनाती है। अतः कहा जा सकता है कि विचारों की सुन्दरतम् प्रस्तुति का नाम ही कविता है। एक विवेचनात्मक निबंध को आपके कविता के प्रति विचारों को और व्यापक करेगा।
Superfast Computer Course
- Author Name:
Mrinal Talukdar
- Book Type:

- Description: Contents Preface —Pgs. 5 1. An Introduction to Computers —Pgs. 9 2. An Introduction to Windows —Pgs. 38 3. An Introduction to Windows 8 —Pgs. 51 4. General Functions of Windows 8 —Pgs. 57 5. System Management —Pgs. 106 6. System Tools and Maintenance —Pgs. 118 7. Windows 7 —Pgs. 137 8. Some Useful Software in General Use —Pgs. 159 9. An Introduction to Microsoft Word 2010 —Pgs. 185 10. Advanced Functions in MS Word —Pgs. 230 11. Microsoft Outlook 2010 —Pgs. 274 12. Microsoft PowerPoint 2010 —Pgs. 285 13. Microsoft Excel 2010 and Worksheet —Pgs. 318 14. Functions of Spreadsheet and Formatting —Pgs. 329 15. Advanced Handling in MS Excel Worksheet —Pgs. 356 16. An Introduction to Microsoft Access 2010 —Pgs. 371 17. Advanced Handling in Microsoft Access Database —Pgs. 384 18. An Introduction to Tally —Pgs. 424 19. CorelDRAW X6 —Pgs. 447 20. Adobe PageMaker 7.0 —Pgs. 481 21. Adobe Photoshop CS5 —Pgs. 512 22. Adobe Indesign CS5 —Pgs. 547 23. HTML and Web Page Designing —Pgs. 575 24. Networking —Pgs. 582 25. An Introduction to Internet —Pgs. 601 26. Memory Tips —Pgs. 618 27. Computer Security —Pgs. 622 28. Applications of Internet —Pgs. 630 29. Google —Pgs. 642 30. Facebook —Pgs. 654 31. Twitter —Pgs. 659
Handbook of Communication Skills & English Grammar
- Author Name:
Arvind Shah
- Book Type:

- Description: This book is written with the objective to make English language learning easy for good communication skills. Communication demands adherence to the rules of the language (grammar) and sensitivity to the content, style and presentation. It is therefore, a need that we understand the different aspects of use of correct language to help us to be good communicators. This book has lessons on grammar and communication skills to add efficiency to the expressions of an English language learner. Appropriate chapters of grammar have been written and explained with suitable examples. There are exercises associated with every chapter for practice of grammar and communication skills. There are detailed chapters on oral, visual and written communications to bring forth different aspects of communi-cation for improvement and efficiency. It is author’s conviction and firm belief that the students of English will find this book objectively suitable and meaningfully easy for learning English grammar and communication skills.
25 Practice Sets For Excise Constable Examination 2022
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPSC Prelims Civil Services Exam 2025
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: "Are you aiming to crack the UPSC Civil Services Exam and become an IAS officer? This book can be your one-stop resource for mastering the Prelims stage! Here's why you should consider this book: Comprehensive Coverage: It covers the last 30 years of questions (1995-2024) for General Studies (Paper I) and the last 14 years (2011-2024) for CSAT (Paper II). Up-to-Date and Revised: The book is thoroughly revised and updated to reflect any changes in the exam pattern. Topic-Wise Breakdown: All chapters are organized by topic, making it easy to focus on specific areas. (History, Geography, Polity, Economy, etc.) Precise Explanations: Get clear and accurate explanations for all the solved questions. Essential Information: Includes information on the Civil Services Exam format, exam schemes, tips & strategies, and time management techniques. CSAT Focused: Provides dedicated sections for all CSAT paper topics like comprehension, reasoning, and English language skills. Bonus Material: Get access to a list of past UPSC Mains Essay paper topics and even probable essay topics for 2025. Benefits of using this Book: Understand Exam Pattern: Analyze past questions to understand the nature of questions asked and the weightage given to different topics. Identify Important Topics: Focus your preparation on frequently tested areas and avoid wasting time on irrelevant subjects. Practice & Improve: Solve past questions to test your knowledge, identify your strengths and weaknesses, and improve your problem-solving skills. Develop Exam Strategy: Learn valuable tips and strategies for effective time management and exam success. Overall, this book is a valuable resource for anyone serious about cracking the UPSC Civil Services Prelims. It provides a comprehensive overview of the exam, helps you understand the question pattern, and offers practice questions with explanations."
Prem : Ek Album
- Author Name:
V. M. Girija
- Book Type:

-
Description:
मलयालम कविता जहाँ-जहाँ रूढ़ अवशेषों से टकराती है और अपनी भाषिक एवं सांस्कृतिक स्वत्वगत मौलिकता को बनाए रखते हुए समय में रचे-बसे औपनिवेशिक आयामों का अनावरण करती है, वहाँ यह समकालीन साबित होती है। मलयालम कविता का यह सृजनात्मक व दृष्टिसम्पन्न उन्मेष बहुआयामी इसलिए है कि वह सत्ता के बहुरंगी वर्चस्व को पहचानती है। अत: समकालीन मलयालम कविता एककेन्द्री नहीं बल्कि बहुकेन्द्री है। उसकी बहुस्वरता समय के सही सरोकारों से उपजी विशेषता है। इसलिए उसका प्रतिरोधी स्वर तमाम जटिल स्थितियों में अनुवाद गुंजित हो उठता है। आज की मलयालम कविता में नारी-स्वत्व का स्वर विद्रोह की बहिरंग मुखरता मात्र नहीं है। उसका पूरा तेवर मुक्ति की कामना को आद्यन्त अनावृत करने का रहा है।
पुरुषकेन्द्रित सामाजिक वर्चस्व को सरलीकृत करना मलयालम की नारीवादी कविता का उद्देश्य नहीं है। पुरुष-केन्द्रीकरण को वह नए सन्दर्भ में प्रस्तुत करती है।...मलयालम कविता ने नारी-दृष्टि को इसी व्यापक सन्दर्भ में अनुभव किया है। एक इतिहासबद्ध दृष्टि उसका सम्बल ही नहीं है, बल्कि वह उसकी अवस्थिति है। स्त्री-कामनाओं की कविता पुरुषविरोधी कविता नहीं है, वह पुरुषाधिष्ठित एकांगी मूल्यों की विरोधी कविता है। व्यापक सन्दर्भ में वह विपक्ष की कविता है। मुक्ति की पारदर्शी स्थिति उसमें अंकित है। वह अधिकार-केन्द्रित संस्कृति पर आघात करती है। ...मलयालम कविता में आधुनिक दौर से लेकर यह मुक्तिकामी स्वर मुखर रहा है। उसमें तमाम अवरोधों को तोड़ने का आग्रह भी है।
...समकालीन मलयालम कविता में वी.एम. गिरिजा का स्वर सबसे अधिक तेज़ तेवर से युक्त है। उनकी कविता के केन्द्र में उत्तप्त नारी ही विद्यमान है। उनके स्वर में विद्रोही दृष्टि की एकायामी बुलन्दियाँ नहीं हैं। गिरिजा के अनुभव-जगत् में स्त्री पूर्णरूपेण यथार्थ है। वह नैतिक अवलम्ब के सहारे प्रस्तुत नहीं होती है। वह अपनी जैविक स्थिति में प्रस्तुत होती है। इसलिए गिरिजा अपनी कविताओं में प्रकृति का भरसक उपयोग करती हैं। प्रत्येक प्रकरण प्रकृति के सहज विन्यास के साथ जुड़कर जैविक स्थिति का बोध कराता है। सवाल यह है कि गिरिजा की कविता की यह हरियाली किससे सम्बन्धित है? हरियाली के साथ उन्होंने मिट्टी के मटमैलेपन को भी उभारा है। लोकोन्मुखता का यह परिदृश्य गिरिजा की कविता का यथार्थ है जिससे उनकी सृजनात्मकता उभार लेती है और उनकी दृष्टि हमारी नैतिकताओं की जटिलताओं की भीतरी स्थितियों की थाह लेती है। प्रकृति यहाँ रूमानी आग्रह से विन्यासित नहीं है। ‘इको-पोयट्री’ की तरह जल, आकाश और हरियाली के बिम्बों और प्रतीकों की आवृत्ति गिरिजा करती रहती हैं। अपने में विकसने को उद्यत, अपने में सम्पुष्ट और अपने में सम्पूर्ण स्त्री-कामनाओं की विराट उपस्थिति गिरिजा के हर एक शब्द को बारीक बना देती है। प्रेम का यह एलबम प्रेमाभिव्यक्ति को निरी भावानुभूति के स्तर पर प्रस्तुत करनेवाली कविताओं का आकलन-भर नहीं है। यह प्रेम के मूल्यों को खोजने का धारदार उपक्रम भी है।
—भूमिका से
Chaitanya Mahaprabhu Aur Gaudiya Sampraday
- Author Name:
Dr. Deepka Vijayvargiya
- Book Type:

- Description: मध्यकाल के विषम और त्रासपूर्ण समय में विदेशी सत्ता के प्रभुत्व, स्वदेशी व्यभिचार के समावेश के कारण धार्मिक विकृति व धरमहारश तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विखंडन का दंश झेल रही जनता के तारणहार बने मध्यकाल में अवतरित चैतन्य महाप्रभु, जिन्होंने न केवल विकृत व पतित होते वैष्णव धर्म को बचाया, वरन् जन-जन को सरल व सरस भक्ति तथा संकीर्तन स्वरूप युगधर्म का वह उपहार दिया, जो ज्ञान की दुरूहता, दर्शन की रहस्यमयता तथा कर्मकांड व पाखंडों की प्रबलता से सर्वथा रहित था। महाप्रभु की जन्मभूमि बंगाल के गौड़ प्रदेश से नवभक्ति-उन्मेष के साथ प्रवाहित हुए धर्म-साधना व भक्ति के स्वरूप ने 'गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय' के रूप में एक नवीन संप्रदाय स्थापित कर दिया। प्रेम को सर्वोत्तम पुरुषार्थ रूप घोषित कर मानवधर्म के श्रेष्ठत्व को श्रीमहाप्रभु ने प्रतिपादित किया। मानव को परस्पर जोड़कर विश्वात्मक बनाने की प्रेरणा दी। चैतन्य-संकीर्तन तपित विश्व को जीवन के मधुर संगीत में रूपांतरित करने का प्रबल माध्यम है। प्रस्तुत पुस्तक 'चैतन्य महाप्रभु और गौड़ीय संप्रदाय' द्वारा गौड़ीय संप्रदाय से अवगत कराते हुए चैतन्य महाप्रभु के आदर्शों को आत्मसात् करने तथा चैतन्य की प्रेम शारदीया को आज की क्षत-विक्षत धरा पर उतारने की महती युगीन आवश्यकता को पूर्ण करने की ओर एक प्रयास है। श्रीचैतन्य महाप्रभु का जीवन कल, आज और कल के सुनहले संदर्भों का सुंदर समीकरण है।
CRPF Kendriya Reserve Police Bal Head Constable (Ministerial) Evam A.S.I. Steno Bharti Pariksha 20 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Police SI (Civil Police, Platoon Commander, PAC & Fire Brigade Officer) Exam 6 SOLVED PAPERS & 15 Practice Sets
- Author Name:
Dharmendra Singh
- Book Type:

- Description: Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board (UPPRPB) have released the notification of 9,534 seats this year for both male and female candidates in the various posts including Sub Inspector and Platoon Commander (PAC). • The presented book Uttar Pradesh Civil Police & PAC Sub Inspector (SI) & Platoon Commander is written for the aspirants of Uttar Pradesh Police for SI posts. In the presented book there are 6 solved papers and 15 practices sets. • All solutions are written in easy to understand language with the aim of providing conceptual clarity and in all practice sets questions are set as per the latest syllabus along with detailed solutions. • The presented book helps in studying, revising and practicing the concepts and improves the confidence for Uttar Pradesh Civil Police & PAC Sub Inspector (SI) & Platoon Commander Exam. Amazon title: Uttar Pradesh Police SI (Civil Police, Platoon Commander, PAC & Fire Brigade Officer) Exam 6 Solved Papers and 15 Practice Sets
GS SCORE Concept Mapping Workbook History Vol-2 Modern History
- Author Name:
Manoj K. Jha
- Rating:
- Book Type:

- Description: —Public Service Examinations across the Board in India offers immense opportunity for young talent to secure not only employment at prestigious positions but also gives them the chance to serve the nation in various capacities. —These examinations are of a highly diverse nature as they test the candidates on diverse subjects, further spanning multiple dimensions largely the subjects related to Polity, Economy, History, Geography, Science and Technology, environmental sciences and miscellaneous topics like sports, awards and other events of national and international importance. —All of this demand not only to study of these varied subjects but also practice in tackling the questions which are asked in the examination. Highlights of the Book Approach towards the subject —The book introduces you to the subject and the way in which this subject should be approached in order to score maximum. Micro Detailing of the Syllabus—The entire UPSC CSE syllabus has been clubbed into broad themes and each theme will be covered with the help of MCQs. Chronological Arrangement of Theme Based Questions—The various identified themes are arranged chronologically so that the entire Syllabus of a subject is roped in a logical line. Last Minute Concept Revision—The end of the book contains the summary of important concepts related to the subject which can be used as your effective revision notes. About GS SCORE—GS SCORE has been home to numerous toppers of UPSC's prestigious Civil Services Examination. Learning at GS SCORE is driven by two predominant objectives i.e. excellence and empowerment.
School Debate Book
- Author Name:
R. Shankar
- Book Type:

- Description: आमतौर पर सभी स्कूलों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इस प्रतियोगिता में एक दल के सदस्य चयनित विषय के पक्ष में विचार प्रस्तुत करते हैं और दूसरे दल के सदस्य विरोध में। इस प्रकार एक के बाद एक सदस्य एक-दूसरे के विचारों की तब तक काट प्रस्तुत करते जाते हैं, जब तक सभी सदस्य नहीं बोल चुकते। अंत में अध्यक्षीय भाषण होता है, जिसमें दोनों पक्षों के विचारों का निचोड़ पेश किया जाता है। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों की भाषण देने की कला में निखार आता है तथा उनकी तार्किक शक्ति प्रबल होती है। उनमें विरोधियों की कटु बातें सुनने की सहिष्णुता भी बढ़ती है। साथ ही विचारशक्ति इतनी प्रखर हो जाती है कि आगे चलकर जीवन की कठिन समस्याओं से जूझना आसान हो जाता है। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से मस्तिष्क का विकास होता है, झिझक खुलती है और सबसे बड़ी बात, इसमें भाग लेकर विद्यार्थियों को यह अच्छी तरह समझ में आ जाता है कि जो व्यक्ति हमारे विचारों से सहमत नहीं है, उसकी राय का भी महत्त्व है। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेनेवाले प्रतिभागियों हेतु एक आवश्यक पुस्तक।
MPPEB MADHYA PRADESH SHIKSHAK PATRATA PARIKSHA-2020 BAL VIKAS EVAM SHIKSHAN SHASTRA (40 PRACTICE SETS)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kabira Baitha Debate Mein
- Author Name:
Piyush Pandey
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
GS SCORE Concept Mapping Workbook Indian Polity & Governance
- Author Name:
Manoj K. Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khushhaal Family Ke Funde
- Author Name:
N Raghuraman
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NCERT Objective Samanya Vigyan Evam Prodyogiki (General Science & Technology) for UPSC, State PSCs and Other Competitive Exams
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ravindra Gita
- Author Name:
Ravindra Jain
- Book Type:

- Description: भगवान् श्रीकृष्ण संपूर्ण सृष्टि के सबसे बड़े आकर्षण, सबसे बड़े सम्मोहन और सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। इन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण का दिव्य वचनामृत है—‘श्रीमद्भगवद्गीता’। यह भगवान् श्रीकृष्ण का परम आदेश, परम निर्देश तो है ही, साथ ही यह संपूर्ण मानवता का परम उपयोगी संविधान भी है। चूँकि ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ जीवमात्र के लिए परम उपयोगी और संपूर्ण मानवता के लिए एक संविधानस्वरूप है, इसलिए इस महाउपयोगी महाग्रंथ का सरल और सर्वग्राही होना परम आवश्यक है। ‘रवीन्द्र गीता’ भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा उपदेशित मूल श्रीमद्भगवद्गीता का सरल हिंदी पद्यानुवाद है। सरस्वती-पुत्र, परम संगीत-साधक, विलक्षण सृजन प्रतिभा के धनी रवींद्र जैनजी ने संगीत की सेवा से संपूर्ण विश्व में ईश्वर की महिमा और भक्ति-भावना को एक नई ऊँचाई, एक नया स्वरूप, एक नया आकर्षण दिया। ‘रामायण’, ‘श्रीकृष्ण’, ‘जय हनुमान’ जैसे अनेकानेक पौराणिक विषयों को ग्रंथों से निकालकर संगीत और स्वर से सजाकर जनसामान्य तक सरलता, व्यापकता और पूरी सफलता के साथ पहुँचाया। यह कृति योगेश्वर श्रीकृष्ण के शाश्वत संदेश को जनमानस तक पहुँचाकर समाज में सकारात्मकता और सद्मूल्यों को विकसित करे, तो इसका लेखन तथा प्रकाशन सार्थक होगा।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...