Janiye Upanishadon Ko
(0)
Author:
Ramkishore VajpayeePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
250
200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
स्वाध्याय-यात्रा का विराम-बिंदु तब तक लक्षित नहीं होता, जब तक मेधा विश्रांति में पर्यवसित होने को विकल न हो। विश्रांति में पर्यावसान से ही विद्या के आस्वादन की पीठिका सजती है। श्री रामकिशोर वाजपेयी की स्वाध्याय-यात्रा का यही परिदृश्य है। अध्यापन, वित्तीय संस्थान में सेवा, टे्रड यूनियन की गतिविधियाँ, सामाजिक सरोकार तथा राजनीति विज्ञान के शिखर विचारकों के चिंतन और बीसवीं सदी की राजनैतिक उथल-पुथल के विपुल साहित्य के अनुशीलन तथा लेखन में प्रवृत्त होकर श्री वाजपेयी अगाध जिज्ञासा के नए प्रस्थान खोजते रहे। विगत शती के साठ से अस्सी के दशकों के बीच सतीर्थ श्री वाजपेयी आधुनिक शंकर स्वामी करपात्रीजी महाराज और स्वामी महेशानंद गिरि के सान्निध्य में ब्रह्मविद्या विषयक जिज्ञासाओं का स्थिर समाधान खोज रहे थे तथा अपने विद्वत् शोध-पत्रों एवं व्याख्यानों में उसे अभिव्यक्त कर रहे थे। वैदिक सृष्टि-विज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे गूढ़ विषयों पर उन्हें प्रामाणिक साहित्य के स्वाध्याय का सुअवसर सुलभ हुआ। प्रस्तुत पुस्तक में उपनिषद् विषयक सही और संक्षिप्त परिचय इसी अभिप्रेत से उनके द्वारा संकलित है कि ब्रह्मविद्या की आलोक-गुहा में ऋषियों के अनुभूत सत्यों की विविधता एवं उनके आत्मप्रकाश की प्रखरता से प्रवेशार्थी भ्रमित न हो जाएँ; ऐसे में यह कृति आश्वस्ति है और पाथेय भी। —डॉ. शिवकुमार दीक्षित ललित निबंधकार
Read moreAbout the Book
स्वाध्याय-यात्रा का विराम-बिंदु तब तक लक्षित नहीं होता, जब तक मेधा विश्रांति में पर्यवसित होने को विकल न हो। विश्रांति में पर्यावसान से ही विद्या के आस्वादन की पीठिका सजती है।
श्री रामकिशोर वाजपेयी की स्वाध्याय-यात्रा का यही परिदृश्य है। अध्यापन, वित्तीय संस्थान में सेवा, टे्रड यूनियन की गतिविधियाँ, सामाजिक सरोकार तथा राजनीति विज्ञान के शिखर विचारकों के चिंतन और बीसवीं सदी की राजनैतिक उथल-पुथल के विपुल साहित्य के अनुशीलन तथा लेखन में प्रवृत्त होकर श्री वाजपेयी अगाध जिज्ञासा के नए प्रस्थान खोजते रहे।
विगत शती के साठ से अस्सी के दशकों के बीच सतीर्थ श्री वाजपेयी आधुनिक शंकर स्वामी करपात्रीजी महाराज और स्वामी महेशानंद गिरि के सान्निध्य में ब्रह्मविद्या विषयक जिज्ञासाओं का स्थिर समाधान खोज रहे थे तथा अपने विद्वत् शोध-पत्रों एवं व्याख्यानों में उसे अभिव्यक्त कर रहे थे। वैदिक सृष्टि-विज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे गूढ़ विषयों पर उन्हें प्रामाणिक साहित्य के स्वाध्याय का सुअवसर सुलभ हुआ।
प्रस्तुत पुस्तक में उपनिषद् विषयक सही और संक्षिप्त परिचय इसी अभिप्रेत से उनके द्वारा संकलित है कि ब्रह्मविद्या की आलोक-गुहा में ऋषियों के अनुभूत सत्यों की विविधता एवं उनके आत्मप्रकाश की प्रखरता से प्रवेशार्थी भ्रमित न हो जाएँ; ऐसे में यह कृति आश्वस्ति है और पाथेय भी।
—डॉ. शिवकुमार दीक्षित
ललित निबंधकार
Book Details
-
ISBN9789384343941
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
UPTET Uttar Pradesh Shikshak Patrata Pareeksha Ganit/Vigyan (Maths & Science Paper-2 Class : 6-8) 15 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhagvadgita Ke Anmol Moti
- Author Name:
G.K. Varshney
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Karma Hi Dharma Hai
- Author Name:
Ravindra Nath Prasad Singh
- Book Type:

- Description: जीवन का औचित्य ही है-अपना और दूसरों का कल्याण करना, खुद के सपनों को साकार करना, जरूरतमंदों के काम आना | अतः कर्म करें और कर्म से भागें नहीं | कर्म ही धर्म है | धर्म का अर्थ ही है-जो धारण करने योग्य हो और जिसे धारण करने से मानव तथा अन्य प्राणियों का कल्याण हो | अतः कर्म करने के पूर्व सोचें-समझें, विचोरें, तदुपरांत कर्म करें, ताकि किसी को हानि न पहुँचे | कर्म ही पूजा है, और पूजा का अर्थ है-अपने कर्तव्य के प्रति पूरी आस्था, निष्ठा एवं समर्पण का भाव रखना | कर्म हमारी पहचान है और कर्म ही हमें महान् बनाता है । एक चेतनशील प्राणी होने के नाते यह महत्त्वपूर्ण है कि हम क्या करें? और “क्या नहीं करें? को पहले सुनिश्चित करें | मनुष्य के जीवन में सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय, सफलता-विफलता, पाप-प्रुण्य आदि का निर्धारण कर्म के आधार पर होता है। अतः फल-प्राप्ति की नहीं, कर्म की चिंता करें | कर्म करना आपके वश में है, परंतु फल आपके हाथ में नहीं है | कहने का आशय स्पष्ट है कि हम जैसा कर्म करते हैं और जिस नीयत से करते हैं, उसका प्रभाव उसी रूप में हमारे तन, मन और वाणी पर पड़ता है। प्रस्तुत पुस्तक में सुखी एवं दीर्घायु जीवन जीने के 90 सीक्रेट्स दिए गए हैं, जिनको अपनाकर पाठक अपने जीवन को सफल और सुखी बना सकते हैं |
Meri Maa Ke Baees Kamre : Kashmiri Pandito Ke Palayan Ki Kaljayi Katha (Hindi Translation of Our Moon Has Blood Clots: A Memoir of A Lost Home In Kashmir)
- Author Name:
Rahul Pandita
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Samajik Vigyan Practice MCQs (MPTET Social Science Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
1000 Jeev Jantu Prashnottari
- Author Name:
Menaka Gandhi
- Book Type:

- Description: 1000 जीव-जंतु प्रश्नोत्तरी ' में संसार भर के समस्त जीवों-चाहे वे जल में वास करनेवाले हैं या जमीन पर रहनेवाले हैं अथवा गगन में स्वच्छंद विचरण करनेवाले; जमीन पर रेंगनेवाले, पानी में तैरनेवाले या जमीन पर जीवन के लिए संघर्ष करनेवाले हैं-उनकी आदतों, वातावरण, रहन-सहन, शिकार एवं भोजन प्राप्ति, उनकी संतति तथा उनकी जीवन- रक्षा की पद्धति से संबंधित रहस्यपूर्ण व जानकारीपरक वर्णन है । जीव-जगत् का समग्र दिग्दर्शन करानेवाले जंतु विज्ञान का विशद् ज्ञान कराने के उद्देश्य से एक हजार प्रश्नों का संकलन बड़ी सूझ-बूझ और सुबोध एवं सरल भाषा में किया गया है । प्रस्तुत पुस्तक को पढ़कर पाठकगण जीव-जंतुओं के अनोखे संसार की रोचक जानकारी प्राप्त कर इस क्षेत्र में अपने ज्ञान का विस्तार सहज ही कर पाएँगे ।
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Chayan Pariksha Bhugol (MP High School Teacher Recruitment Geography) 15 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Essays Demystified For UPSC. CSE & Competitive Exams
- Author Name:
Abhishek Saraf +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vedic Mathematics For Students
- Author Name:
Manu Tripathi
- Book Type:

- Description: This book ‘Vedic Mathematics for Students’ is a learning and knowledge tool for anyone who wants to acquire knowledge of Vedic Mathematics. Which is one of the easiest approaches to solving Mathematics. Mathematics is one subject, that is the same all across the globe and mathematical calculations are needed everywhere. With the help of techniques of Vedic Mathematics, it becomes much easier. Vedic Mathematics is well-recognised methodology by most Indian scholars. This book is a value addition to this particular ancient knowledge with small sachets of Vedic Mathematic’s knowledge in the form of chunks of different methods and techniques. This book is compiled in such a manner that whosoever reads it, will definitely get benefited. A must-read book for anyone who wants to add more value and knowledge in Mathematics in very less time with minimum efforts.
Mulayam Singh Yadav
- Author Name:
Abhay Kumar Dubey
- Book Type:

- Description: Reference Book
UPSC CSAT Samanya Adhyayan Paper-Ii Solved Papers 2011-2023
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
RRB/RRC Group D Level-I Bharti Pareeksha Ganit (Railway Recruitment Exam Mathematics 75 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Ankush Sir
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prasad Kavya-Kosh
- Author Name:
Suchita Verma +1
- Book Type:

-
Description:
जयशंकर प्रसाद ने ब्रजभाषा और हिन्दी में कविताएँ रची थीं। छायावाद के वे श्रेष्ठ कवि और नाटककार हैं; मगर उनकी रचना-यात्रा छायावाद से एक दशक पहले से प्रारंभ हो चुकी थी। प्रसाद का देहांत और छायावाद का ‘युगांत’ लगभग एक साथ घटित हुआ था। छायावाद का अधिकतम प्रतिनिधित्व प्रसाद की रचनाएँ करती हैं।
‘कामायनी’, ‘आँसू’, ‘लहर’, ‘झरना’ आदि काव्य-पुस्तकों के साथ उनके नाटकों के गीतों को मिलाकर उनके कवि-व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता रहा है। प्रसाद का ब्रजभाषा काव्य उनके काव्य-संस्कार की बुनियाद को बनाता है और नाटकों के गीतों में इतिहास-सम्मत भावजगत बिखरा हुआ है। इस प्रभूत काव्य-संसार में शब्दों और पदबंधों की विविधता भरी-सजी है।
जयशंकर प्रसाद की समस्त काव्य-कृतियों में प्रयुक्त शब्दों और पदबंधों के आधार पर 'प्रसाद काव्य-कोश' का निर्माण किया गया है। प्रसाद के शब्द-प्रयोगों से जुड़ी काव्य-पंक्तियों को एक साथ पढ़कर अलग ढंग का आनंद आता है और उसके अर्थ की विभिन्न छायाओं को जानकर महसूस होता है कि हिन्दी की काव्य-भाषा कितनी समृद्ध है! प्रसाद के शब्द-संसार का सम्बन्ध संस्कृत, ब्रज और हिन्दी से भाषिक स्तर पर तो है ही, उनके ज्ञान का दायरा न जाने कितने ढंग के लोक और शास्त्र से जुड़ा है। उनके साहित्य में आया हुआ लोक अनेक कालखंडों से सम्बद्ध है। इन सब का प्रभाव उनके शब्द-संसार के वैविध्य और विस्तार पर पड़ा है।
गहरी साहित्यिक रुचि को आज भी प्रसाद का काव्य आकर्षित करता है। प्रसाद के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यह कोश अर्थ तक पहुँचने में मददगार होगा।
Computer Awareness
- Author Name:
Rajesh Garg
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Jail Prahari Evam Van Rakshak Bharti Pariksha (MP Jail Prahari Forest Guard Exam Guidebook in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Gadya Vinyas Aur Vikas
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Hindi Gadya Vinyas Aur Vikas
Bhasha Sanshay Shodhan
- Author Name:
Kamlesh Kamal
- Book Type:

- Description: पुस्तक को पढ़कर कहा जा सकता है कि लेखक ने भाषाई शुद्धता संबंधी लगभग सभी पक्षों को छूने का प्रयास किया है। आशा करता हूँ, विश्वविद्यालयों, विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ सभी हिंदी प्रेमी इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे। -गिरिधर मालवीय कुलाधिषति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के साथ-साथ यह पुस्तक उन सभी सुधी पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिन्हें हिंदी भाषा से स्नेह है और जो सदैव इस भाषा के विकास के लिए विचार करते हैं अथवा प्रयास करते हैं । सिविल सेवा अभ्यर्थियों में लेखन कौशल के विकास में यह अत्यधिक सहायक होगी । -सी.बी.पी. श्रीवास्तव निदेशक; डिस्कवरी आई. ए. एस., दिल्ली यह पुस्तक आज के दौर में भाषाई अनुशासन को कायम रखने की दिशा में अभिनव प्रयोग है। यह मीडियाकर्मियों, विद्यार्थियों, लेखकों के साथ-साथ हर हिंदीप्रेमी के लिए अच्छी मार्गदर्शिका के रूप में पठनीय है। -प्रो. संजीव भानावत पूर्व अध्यक्ष जनसंचार केंद्र, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, संपादक; “कम्युनिकेशन टुडे यह पुस्तक पत्रकारिता और लेखन से जुड़े लोगों के लिए एक अत्यावश्यक संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी। -संजय स्वतंत्र मुख्य उपसंपादक, जनसत्ता, इंडियन एक्सप्रेस सगृह
Horoscope 2023
- Author Name:
Dr. A. Shanker
- Book Type:

- Description: The effects of twelve Signs (Rāśis) and Planets have been described in various classical books of Astrology. In this small booklet, we have provided the general pattern of Zodiac Signs for the year 2023. This pattern is based on the transition of planets, their daśā and effects on that Rāśi at a particular point of time. Zodiac signs concur special effects. Its portable nature will help the natives born under these sun signs to understand the zodiac characteristics and the impact of these planetary movement on these sun-signs. A general awareness about the characteristics of the different Zodiac signs can give one an advantage on their relations with people around the self (Native). Astrological traits of every zodiac sign are different from each sign, understanding the way their personalities are, can make it easier to understand why people do the things they do and helps in a better understanding of relationships.
IBPS Clerk Prarambhik Pariksha-2022 (IBPS Clerk Pre Exam 20 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhakti Ke Teen Swar : Miraan, Sur, Kabir
- Author Name:
John Stratton Hawley
- Book Type:

- Description: प्रो. हौली पिछले कई दशकों से भक्ति और हिन्दू परम्परा के अन्य पहलुओं पर विचारोत्तेजक काम करते रहे हैं। केनेथ ब्रायंट के साथ मिलकर उन्होंने सूरदास के पदों की प्रामाणिकता और पाठ-निर्धारण पर काम किया है। प्रस्तुत पुस्तक मूल अंग्रेज़ी में 2005 में प्रकाशित हुई थी। इस बीच नई खोजें हुई हैं, भक्ति-विमर्श में नए प्रश्न, नई शब्दावलियाँ आई हैं। प्रो. हौली ने पुस्तक की सामग्री को नई खोजों की रोशनी में अद्यतन किया है, हालाँकि ऐसा करते समय भी वे अपने मूल तर्क, आग्रहों और पद्धति को बनाए रहे हैं। सूरदास रचित पदों की संख्या ठीक-ठीक लाख नहीं तो हजारों में माननेवालों के लिए यह बहुत चौंकानेवाली बात होगी कि प्रो. हौली इनमें से केवल चार सौ तैंतीस को इस अर्थ में प्रामाणिक मानते हैं कि वे सूरदास से सम्बन्धित प्राचीनतम पांडुलिपियों में प्राप्त होते हैं। हौली इस पुस्तक में सूरदास, मीराँ और कबीर से जुड़े विशिष्ट सवालों—समय, रचनाओं की प्रामाणिकता, संवेदना का स्वभाव, लोक-स्मृति में उनका स्थान—आदि पर तो विचार करते ही हैं, वे इनके बहाने भक्ति-संवेदना से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर भी विचार करते हैं। वे उस विमर्श में भी हिस्सा लेते हैं, जो भक्ति-संवेदना के ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से अभूतपूर्व पहलुओं को समझने की कोशिश करता रहा है। निर्गुण ही नहीं, यह बात तुलसी, सूर, मीराँ जैसे सगुण कवियों के बारे में भी सच है कि उनकी कविता आचार्यों द्वारा कर दिए गए ब्रह्म-निरूपण का जन-सुलभ मुहावरे में प्रचार करने के लिए नहीं रची गई है। वह सचमुच स्वायत्त और नवाचार सम्पन्न 'निज ब्रह्म विचार' है। इस निज ब्रह्म विचार और इसकी काव्याभिव्यक्ति के तीन सर्वाधिक मनोहर स्वरों को सुनते हुए प्रो. जॉन स्ट्रैटन हौली बहुत ही विचारोत्तेजक निष्कर्षों तक पहुँचे हैं, जिनमें से कुछ इस पुस्तक के माध्यम से आपके सामने मौजूद हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book