Janiye Upanishadon Ko
About the book
स्वाध्याय-यात्रा का विराम-बिंदु तब तक लक्षित नहीं होता, जब तक मेधा विश्रांति में पर्यवसित होने को विकल न हो। विश्रांति में पर्यावसान से ही विद्या के आस्वादन की पीठिका सजती है। श्री रामकिशोर वाजपेयी की स्वाध्याय-यात्रा का यही परिदृश्य है। अध्यापन, वित्तीय संस्थान में सेवा, टे्रड यूनियन की गतिविधियाँ, सामाजिक सरोकार तथा राजनीति विज्ञान के शिखर विचारकों के चिंतन और बीसवीं सदी की राजनैतिक उथल-पुथल के विपुल साहित्य के अनुशीलन तथा लेखन में प्रवृत्त होकर श्री वाजपेयी अगाध जिज्ञासा के नए प्रस्थान खोजते रहे। विगत शती के साठ से अस्सी के दशकों के बीच सतीर्थ श्री वाजपेयी आधुनिक शंकर स्वामी करपात्रीजी महाराज और स्वामी महेशानंद गिरि के सान्निध्य में ब्रह्मविद्या विषयक जिज्ञासाओं का स्थिर समाधान खोज रहे थे तथा अपने विद्वत् शोध-पत्रों एवं व्याख्यानों में उसे अभिव्यक्त कर रहे थे। वैदिक सृष्टि-विज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे गूढ़ विषयों पर उन्हें प्रामाणिक साहित्य के स्वाध्याय का सुअवसर सुलभ हुआ। प्रस्तुत पुस्तक में उपनिषद् विषयक सही और संक्षिप्त परिचय इसी अभिप्रेत से उनके द्वारा संकलित है कि ब्रह्मविद्या की आलोक-गुहा में ऋषियों के अनुभूत सत्यों की विविधता एवं उनके आत्मप्रकाश की प्रखरता से प्रवेशार्थी भ्रमित न हो जाएँ; ऐसे में यह कृति आश्वस्ति है और पाथेय भी। —डॉ. शिवकुमार दीक्षित ललित निबंधकार
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About the Book
स्वाध्याय-यात्रा का विराम-बिंदु तब तक लक्षित नहीं होता, जब तक मेधा विश्रांति में पर्यवसित होने को विकल न हो। विश्रांति में पर्यावसान से ही विद्या के आस्वादन की पीठिका सजती है।
श्री रामकिशोर वाजपेयी की स्वाध्याय-यात्रा का यही परिदृश्य है। अध्यापन, वित्तीय संस्थान में सेवा, टे्रड यूनियन की गतिविधियाँ, सामाजिक सरोकार तथा राजनीति विज्ञान के शिखर विचारकों के चिंतन और बीसवीं सदी की राजनैतिक उथल-पुथल के विपुल साहित्य के अनुशीलन तथा लेखन में प्रवृत्त होकर श्री वाजपेयी अगाध जिज्ञासा के नए प्रस्थान खोजते रहे।
विगत शती के साठ से अस्सी के दशकों के बीच सतीर्थ श्री वाजपेयी आधुनिक शंकर स्वामी करपात्रीजी महाराज और स्वामी महेशानंद गिरि के सान्निध्य में ब्रह्मविद्या विषयक जिज्ञासाओं का स्थिर समाधान खोज रहे थे तथा अपने विद्वत् शोध-पत्रों एवं व्याख्यानों में उसे अभिव्यक्त कर रहे थे। वैदिक सृष्टि-विज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे गूढ़ विषयों पर उन्हें प्रामाणिक साहित्य के स्वाध्याय का सुअवसर सुलभ हुआ।
प्रस्तुत पुस्तक में उपनिषद् विषयक सही और संक्षिप्त परिचय इसी अभिप्रेत से उनके द्वारा संकलित है कि ब्रह्मविद्या की आलोक-गुहा में ऋषियों के अनुभूत सत्यों की विविधता एवं उनके आत्मप्रकाश की प्रखरता से प्रवेशार्थी भ्रमित न हो जाएँ; ऐसे में यह कृति आश्वस्ति है और पाथेय भी।
—डॉ. शिवकुमार दीक्षित
ललित निबंधकार
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 175 grams
- ISBN-13
- 9789384343941
- Pages
- 120
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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