Hara Samundar, Gopi Chandar
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एक छाते की कहानी | नहीं, एक छाते के खो जाने की कहानी | नहीं...एक छाते को खो देने के बाद उसको खोने के लिए पड़ सकने वाली डाँट से बचने को बनाई एक कहानी | नहीं... कोई एक चीज़ बस कोई एक ही चीज़ कहाँ होती है | उसका चीज़-पना हमारे बोलने, बताने, समझने, समझाने के हर तरीके में घर कर लेता है | जैसे वरुण ग्रोवर के इस किस्से में समन्दर के हरे रंग से मेल खाता हुआ हरा छाता | वो छाता आता है तो अपने बयान में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, देहरादून में आवाजाही के साधन, मौसमी कैलेंडर और दुनिया की पलट गई जलवायु (साथ में कई कोष्ठक भी) | और जब वो छाता खो जाता है तो उसके खोने, उसके चोरी, चोर, शिकायत, तफ्तीश, शनाख्त (और मन ही मन उलझता जा रहा बे-छाता मास्टरमाइंड) | इन सारे शगलों के बराबर एलन शॉ के चित्र चलते रहते हैं | हर चित्र में उस एक छतरी की मानो अलग-अलग भंगिमा उभरी दिखती है | वरुण ग्रोवर ने एक बहुत साफ सुथरी पारदर्शी भाषा हासिल की है। बच्चों के लिए ऐसी भाषा लिखने वाले कम हैं। इस सिलसिले में ये किताब लेखकों के काम भी आ सकती है।
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एक छाते की कहानी | नहीं, एक छाते के खो जाने की कहानी | नहीं...एक छाते को खो देने के बाद उसको खोने के लिए पड़ सकने वाली डाँट से बचने को बनाई एक कहानी | नहीं...
कोई एक चीज़ बस कोई एक ही चीज़ कहाँ होती है | उसका चीज़-पना हमारे बोलने, बताने, समझने, समझाने के हर तरीके में घर कर लेता है | जैसे वरुण ग्रोवर के इस किस्से में समन्दर के हरे रंग से मेल खाता हुआ हरा छाता | वो छाता आता है तो अपने बयान में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, देहरादून में आवाजाही के साधन, मौसमी कैलेंडर और दुनिया की पलट गई जलवायु (साथ में कई कोष्ठक भी) | और जब वो छाता खो जाता है तो उसके खोने, उसके चोरी, चोर, शिकायत, तफ्तीश, शनाख्त (और मन ही मन उलझता जा रहा बे-छाता मास्टरमाइंड) | इन सारे शगलों के बराबर एलन शॉ के चित्र चलते रहते हैं | हर चित्र में उस एक छतरी की मानो अलग-अलग भंगिमा उभरी दिखती है |
वरुण ग्रोवर ने एक बहुत साफ सुथरी पारदर्शी भाषा हासिल की है। बच्चों के लिए ऐसी भाषा लिखने वाले कम हैं। इस सिलसिले में ये किताब लेखकों के काम भी आ सकती है।
Book Details
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ISBN9789349286801
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Pages20
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Avg Reading Time1 hrs
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Age11-18 yrs
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Country of OriginIN
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