The Life and Times of Rajju Bhaiya (Includes his own recorded audio memories)
Author:
Ratan ShardaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
This book doesn’t have any desciption.
ISBN: 9789355213266
Pages: 246
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Over The Top "ओवर द टॉप" : OTT ka Mayajaal Book in Hindi - Anant Vijay
- Author Name:
Anant Vijay
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Himgiri Ki Gaurav Gathayen
- Author Name:
Dr. Ambika Prasad Gaur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rishwat Mahadevi Ki Jai!
- Author Name:
Yashwant Kothari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindu-Padpadshahi
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: शिवाजी महाराज ने एक पत्र में लिखा था—‘‘स्वयं भगवान् के ही मन में है कि हिंदवी-स्वराज्य निर्मित हो।’’ उस युवा वीरपुरुष ने क्रांतियुद्ध की पहल की। शिवाजी महाराज ने शालिवाहन संवत् 156७ (ई.स. 16४5) में अपने एक साथी के पास भेजे हुए पत्र में—स्वयं पर लगे इस आरोप का निषेध किया कि बीजापुर के शाह का प्रतिरोध कर उन्होंने राजद्रोह का पाप किया है। उन्होंने इस बात का स्मरण कराते हुए उच्च आदर्शों की भावना भी जाग्रत् की कि अपना एकनिष्ठ बंधन यदि किसी से है तो वह भगवान् से है, न कि किसी शाह- बादशाह से। उन्होंने उस पत्र में लिखा है— ‘‘आचार्य दादाजी कोंडदेव और अपने साथियों के साथ सह्याद्रि पर्वत के शृंग पर ईश्वर को साक्षी मानकर लक्ष्य प्राप्ति तक लड़ाई जारी रखने और हिंदुस्थान में ‘हिंदवी-स्वराज्य’ यानी हिंदू-पदपादशाही स्थापित करने की क्या आपने शपथ नहीं ली थी? स्वयं ईश्वर ने हमें यह यश प्रदान किया है और हिंदवी-स्वराज्य के निर्माण के रूप में वह हमारी मनीषा पूरी करनेवाला है। स्वयं भगवान् के ही मन में है कि यह राज्य प्रस्थापित हो।’’ शिवाजी महाराज की कलम से उतरे ‘हिंदवी-स्वराज’—इस शब्द मात्र से एक शताब्दी से भी अधिक समय तक जिस बेचैनी से महाराष्ट्र का जीवन तथा कर्तव्य निर्देशित हुआ और उसका आत्मस्वरूप जिस तरह से प्रकट हुआ, वैसा किसी अन्य से संभव नहीं था। मराठों की लड़ाई आरंभ से ही वैयक्तिक या विशिष्ट वर्ग की सीमित लड़ाई नहीं थी। हिंदूधर्म की रक्षा हेतु, विदेशी मुसलिम सत्ता का नामोनिशान मिटाने के लिए तथा स्वतंत्र और समर्थ हिंदवी-स्वराज्य स्थापित करने के लिए लड़ी गई वह संपूर्ण लड़ाई हिंदू लड़ाई थी।
Sunita Jain ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Sunita Jain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vyavharik Hindi Vyakaran
- Author Name:
Shyam Chandra Kapoor
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hattrick of Rising Hindutva : Verdict 2024
- Author Name:
Harsh Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kabeer Dohawali
- Author Name:
Neelotpal
- Book Type:

- Description: सामान्य तरीके से जन्म लेकर और एक अति सामान्य परिवार में पलकर कैसे महानता के शीर्ष को छुआ जा सकता है, यह महात्मा कबीर के आचार, व्यवहार, व्यक्तित्व और कृतित्व से सीखा जा सकता है। कबीर ने कोई पंथ नहीं चलाया, कोई मार्ग नहीं बनाया; बस लोगों से इतना कहा कि वे अपने विवेक से अपने अंतर्मन में झाँकें। कबीर मूर्ति या पत्थर को पूजने की अपेक्षा अंतर में बसे प्रभु की भक्ति करने पर बल देते थे। 1 4 वीं सदी में कबीर दलितों के सबसे बड़े मसीहा बनकर उभरे और उच्च वर्गों के शोषण के विरद्ध उन्हें जागरूक करते रहे। वह निरंतर घूम-घूमकर जन-जागरण चलाते और लोगों में जागृति पैदा करते थे। ‘रमैनी’, ‘सबद’ और ‘साखी’ में उन्होंने अंधविश्वास, वेदांत तत्त्व, धार्मिक पाखंड, मिथ्याचार, संसार की क्षणभंगुरता, हृदय की शुद्धि, माया, छुआछूत आदि अनेक प्रसंगों पर बड़ी मार्मिक उक्तियाँ कही हैं। महात्मा कबीर अपनी कालजयी रचनाओं के कारण युगों-युगों तक हमारे बीच उपस्थित रहेंगे। उनकी वाणी का अनुसरण करके हम अपना वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी सँवार सकते हैं। कबीर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे। प्रस्तुत पुस्तक में, वर्तमान प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर ही, संत कबीर की जीवनी और काव्य-रचना के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि पाठकों को कबीर को समझने और उनके दरशाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल सके।
Bhagwan Ke Desh Ka DNA
- Author Name:
Dr. Jaikaran
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Sautar
- Author Name:
Dr. Birendra Prasad
- Book Type:

- Description: home English BooksOther The Sautar: In Search of Identity and Livelihood by Dr. Birendra Prasad (Book in English)The Sautar: In Search of Identity and Livelihood by Dr. Birendra Prasad (Book in English)The Sautar: In Search of Identity and Livelihood by Dr. Birendra Prasad (Book in English) The Sautar: In Search of Identity and Livelihood by Dr. Birendra Prasad (Book in English) ₹300 In stock We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00 DeliveryUsually delivered in 5-6 days. AuthorDr. Birendra Prasad (IAS) Features ISBN : 9789355217561 Language : English ...more NEW RELEASES More Information Author Dr. Birendra Prasad (IAS) ISBN 9789355217561 Language English Publisher Prabhat Prakashan Publication Year 2023 Number of pages 140 Binding Style Soft Cover Weight 155 Grams Description Sautar is an indigenous tribe residing mainly in West Bengal, Bihar, Jharkhand and Assam. Sautars belong to the Proto-Australoid racial group. Both men and women of the Sautar community are masters in archery. They are often considered a martial community by the masses. Since they are skilled fighters, they were often hired by the commoners during fights. Due to this practice, several Sautars were killed. In Bihar, Sautar is one of the major communities, forming a majority of the state's tribal population. The Sautar mostly speak Sautari, a member of the Munda language family. In Bihar, the Sautars are mostly landless. Though, some people from the tribe engage themselves in agriculture. This community has fallen prey to ignorance in the process of socialisation. The ignorance of the Sautar community developed gradually when most of their people were converted to Christianity. Some also became followers of Chauvinism. Due to this religious conversion, their original beliefs and culture got destroyed. In the cultural structure of India, the cultural identity and values of Sautars were ignored. This book is an attempt by the author to present the few aspects and facts behind the problems being faced by this community.
REET Level-II Exam-2022 (class: VI-VIII) General Studies
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Parsai Rachanawali : Vols. 1-6
- Author Name:
Harishankar Parsai
- Book Type:

-
Description:
परसाई रचनावली के इस पहले खंड में उनकी लघु कथात्मक रचनाएँ—कहानियाँ, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, संस्मरण आदि शामिल हैं। कहानीकार के रूप में हरिशंकर परसाई हिन्दी कथा-साहित्य के परम्परागत स्वरूप का वस्तु और शिल्प—दोनों स्तरों पर अतिक्रमण करते हैं।
परसाई की कथा-दृष्टि समकालीन भारतीय समाज और मनुष्य की आचरणगत जिन विसंगतियों और अन्तर्विरोधों तक पहुँचती है, साहित्यिक इतिहास में उसकी एक सकारात्मक भूमिका है, क्योंकि रोगोपचार से पहले रोग-निदान आवश्यक है और अपनी कमजोरियों से उबरने के लिए उनकी बारीक पहचान । परसाई की कलम इसी निदान और पहचान का सशक्त माध्यम है।
परसाई के कथा-साहित्य में रूपायित स्थितियाँ, घटनाएँ और व्यक्ति-चरित्र अपने समाज की व्यापक और एकनिष्ठ पड़ताल का नतीजा हैं । स्वातंत्र्योत्तर भारत के सामाजिक और राजनीतिक यथार्थ के जिन विभिन्न स्तरों से हम यहाँ गुजरते हैं, वह हमारे लिए एक नया अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है । इससे हमें अपने आसपास को देखने और समझनेवाली एक नई विचार-दृष्टि तो मिलती ही है, हमारा नैतिक बोध भी जाग्रत् होता है; साथ ही प्रतिवाद और प्रतिरोध तक ले जानेवाली बेचैनी भी पैदा होती है। यह इसलिए कि परसाई के कथा-साहित्य में वैयक्तिक और सामाजिक अनुभव का द्वैत नहीं है। हमारे आसपास रहनेवाले विविध और बहुरंगी मानव-चरित्रों को केन्द्र में रखकर भी ये कहानियाँ वस्तुत: भारतीय समाज के ही प्रातिनिधिक चरित्र का उद्घाटन करती हैं । रचना-शिल्प के नाते इन कहानियों की भाषा का ठेठ देसी मिजाज और तेवर तथा उनमें निहित व्यंग्य हमें गहरे तक प्रभावित करता है। यही कारण है कि ये व्यंग्य कथाएँ हमारी चेतना और स्मृति का अभिन्न हिस्सा बन जाती हैं ।
History Quiz Book
- Author Name:
Sachin Singhal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madam Bhikaji Kama
- Author Name:
Rachna Bhola 'Yamini'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ka Rashtriya Vriksh Aur Rajyo Ke Rajya Vriksh
- Author Name:
Parashuram Shukla
- Book Type:

-
Description:
‘भारत का राष्ट्रीय वृक्ष और राज्यों के राज्य वृक्ष’ एक अनूठी पुस्तक है। इसका उद्देश्य है पाठकों को अपने पर्यावरण के प्रति सचेत व सहृदय बनाना।
इस पुस्तक में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष सहित 25 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों के राज्य वृक्षों का परिचय दिया गया है। छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने अभी तक अपने राज्य वृक्ष घोषित नहीं किए हैं। इसके साथ ही चंडीगढ़, दादर नगर हवेली, दमन एवं दीव और पांडिचेरी के भी राज्य वृक्ष नहीं हैं। केन्द्रशासित प्रदेशों में केवल लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार ने अपने राज्य वृक्ष घोषित किए हैं।
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है। यह ओड़िसा का राज्य वृक्ष भी है। लगभग ऐसी ही स्थिति पीपल और हुलुंग की है। पीपल को बिहार और हरियाणा दोनों ने अपना राज्य वृक्ष घोषित किया है। हुलुंग विश्व-भर में होलांग के नाम से प्रसिद्ध है। हुलुंग को अरुणाचल प्रदेश और असम दोनों ने अपना राज्य वृक्ष माना है।
प्रत्येक वृक्ष के परिचय में वृक्ष का हिन्दी नाम, अंग्रेज़ी नाम और वैज्ञानिक नाम दिया गया है।
पुस्तक का उद्देश्य वृक्षों से सम्बन्धित भ्रामक धारणाओं का खंडन करते हुए वैज्ञानिक जानकारियाँ प्रदान करना और इनके महत्त्व एवं उपयोग से परिचित कराना है।
समाजशास्त्री और पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम शुक्ल ने उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में वृक्षों के बारे में विस्तार से जानकारियाँ दी हैं। ये रोचक और ज्ञानवर्द्धक हैं। हिन्दी में अपने विषय पर यह अकेली पुस्तक है।
37 Years 2024-1988 NEET Chapterwise And Topicwise Solved Papers Physics (Bhautik Vigyan) Syllabus Based on NCERT Class 11 & 12
- Author Name:
Subhash Jain
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Itihas Practice MCQs (MPTET Higher Secondary Teacher History Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mata Jijabai
- Author Name:
Priya Ghatwai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Raksha Vigyan
- Author Name:
Dr. Manmohan Bala
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jyotsna Milan ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Jyotsna Milan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...