The Grandfather’s Mystery
(0)
₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789355623355
-
Pages240
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
IROM SHARMILA AUR AAMARAN ANSHAN
- Author Name:
Shashidhar Khan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jabalpur Model Book In Hindi
- Author Name:
Ved Prakash
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tribal Hero Shibu Soren
- Author Name:
Anuj Kumar Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rajasthan REET Grade-III Adhyapak (Teacher) Level 2 Hindi Guide (Class 6 to 8)
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Main Albert Einstein Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Aashutosh Garg
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
"दिल्ली दरबार" Dilli Durbar Book in Hindi by Manoj Kumar Mishra
- Author Name:
Manoj Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Simultala Awasiya Vidyalaya Pravesh Pariksha Prarambhik Evam Mukhya Class 6
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Samay Ka Sach
- Author Name:
R.K. Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaigyanik Sant Dr. Kalam
- Author Name:
Lakshman Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ram Phir Laute "राम फिर लौटे" Book In Hindi
- Author Name:
Hemant Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ikkisvin Sadi : Aupniveshik Mansikta Aur Bhasha
- Author Name:
Harsh Bala Sharam
- Book Type:

- Description: भारत एक महत्त्वपूर्ण शक्ति है—लोकतंत्रात्मक सत्ता के माध्यम से प्रजा की ताकत को स्वीकार भी करता है पर 'भाषा' के खत्म होते जाने के खतरे से बाखबर होते हुए भी बेखबर रह रहा है। क्या यह कोई राजनीतिक षडयंत्र है अथवा अज्ञानता कि भारत की महत्त्वपूर्ण भाषा हिंदी ही नहीं, अन्य भारतीय भाषाएँ भी अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। पूरे विश्व में केंद्रीय सत्ता का केंद्र बना प्रथम दुनिया का सिरमौर अपनी भाषा में प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक देता है, पर भारत जैसे देश के विद्यार्थी को प्राथमिक शिक्षा भी अपनी भाषा में प्राप्त करने का हक नहीं। मजे की बात तो यह कि जाने अनजाने कोई यह हक लेना भी नहीं चाहता! रिक्शेवाले से लेकर उच्चतम स्तर पर रहनेवाला अंग्रेजी में पगी शिक्षा का आनन्द लेना चाहता है! यह स्थिति औपनिवेशिक मानसिकता की दासता की है जहाँ अपना सब कुछ त्यागकर उस बाजारवादिता के 'स्टैच्यू' में फिट होने की होड़ ही महत्त्वपूर्ण रह गई है। अंग्रेजी को भी भारतीय भाषा मानने की कवायद शुरू हो गई है!
Rajendra Yadav Rachanawali : Vols. 1-15
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र यादव आज़ाद हिन्दुस्तान की दहलीज़ पर तैयार खड़ी नौजवान पीढ़ी के उस समुदाय के सदस्य हैं जिसकी मानसिकता 20वीं सदी के तीसरे-चौथे-पाँचवें दशक में विश्वव्यापी निराशा और मोहभंग में संरचित हुई है। दहलीज़ पर खड़ी आज़ाद, नौजवान पीढ़ी के इस समुदाय के लिए विचार, दर्शन, रणनीति, भविष्य की संरचना, आगामी का नक़्शा—सब कुछ एक भिन्न विवेक और नए तर्क के सहारे गढ़ा जाना है। उसकी मंशा में नई शुरुआत अतीत के साथ सम्पूर्ण विच्छेद से होनी है।
राजेन्द्र यादव के रचनात्मक उपक्रम की अन्तर्वस्तु यही विचार है जो नई दुनिया की रचना का मूलाधार है। यह ‘कैंड़े’ के आदमी का काम है; गुर्दा चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो यह एक विरल पराक्रम है। अपनी पीढ़ी के रचनाकारों में राजेन्द्र यादव विशेषत: अपने विचार को उसकी तार्किक संगति की आख़िरी हद तक ले जा सकने की क्षमता से लैस दिखाई देते हैं। उनके उपन्यासों में ऐसे ही किसी जड़ीभूत पारिवारिक-सामाजिक-राजनीतिक आग्रहों के उच्छेदन का अभियान छेड़ा गया है। रचनावली के खंड 1 से 5 तक में संकलित उपन्यास इसकी गवाही देते हैं।
राजेन्द्र जी ने अपने लेखन का प्रारम्भ कविताओं से किया। परन्तु बाद में 1945-46 की इन आरम्भिक कविताओं को महत्त्वहीन मानकर नष्ट कर दिया। बाद में लिखी उनकी कविताएँ 'आवाज़ तेरी है' नाम से 1960 में ज्ञानपीठ प्रकाशन से प्रकाशित हुईं। इनके अतिरिक्त राजेन्द्र यादव की कुछ कविताएँ अभी तक अप्रकाशित हैं। रचनावली का पहला खंड उनके इसी आरम्भिक लेखन को समर्पित है। जिसमें एक तरफ़ उनकी प्रकाशित-अप्रकाशित कविताएँ हैं और दूसरी तरफ़ ‘प्रेत बोलते हैं’ और ‘एक था शैलेन्द्र’ जैसे प्रारम्भिक उपन्यास। दूसरे खंड में ‘उखड़े हुए लोग’ तथा ‘कुलटा’, तीसरे खंड में ‘सारा आकाश’, ‘शह और मात’, ‘अनदेखे अनजान पुल’ और चौथे खंड में ‘एक इंच मुस्कान’ तथा ‘मंत्रविद्ध’ जैसे उपन्यास शामिल हैं। रचनावली का पाँचवाँ खंड राजेन्द्र जी के अधूरे-अप्रकाशित उपन्यासों को एक साथ प्रस्तुत करता है। अधूरे होने के कारण इन सबको एक ही खंड में शामिल किया गया है।
Roohani Mohabbat
- Author Name:
Naazrin Ansari ‘Raafi’
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khushi Ke Khajane Ki Chabi Stories By Era Tak Book in Hindi
- Author Name:
Era Tak
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Asamiya Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Prof. Mahendra Nath Dubey
- Book Type:

- Description: भारतवर्ष में जो विविध भाषा-परिवारों की अनेक भाषाएँ आधुनिक काल में प्रचलित हैं, उनमें सभी में गद्य विधा सबसे पहले असमीया भाषा में ही शुरू हुई, अत: उसका गल्प-साहित्य भी काफी पुराना है। प्रस्तुत पुस्तक में आधुनिक काल की श्रेष्ठ कहानियों को संकलित किया गया है। इनमें असमीया भाषा के प्रतिष्ठित कथाकारों की लोकप्रिय कहानियाँ संकलित की गई हैं, जो अपने कथ्य, शिल्प, भाव, रोचकता, पठनीयता और सामाजिक सरोकारों केचलते पाठकों को बाँध लेंगी।
Rajneeti Aur Naitikta
- Author Name:
Ashutosh Partheshwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Ye Kya Hai Maa?
- Author Name:
Dr. Suresh Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gaban
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Delhi ko Poorna Rajya ka Darza?
- Author Name:
S.K. Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book