Sukhan Tumhare
Author:
Alys Faiz, Faiz Ahmed 'Faiz'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
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Price: ₹ 440
₹
550
Available
1951 की एक सुबह उर्दू के मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के घर पर छापा पड़ा और उन्हें रावलपिंडी साज़िश केस में उनके घर से गिरफ़्तार किया गया। घर से ले जाते वक़्त उन्हें कपड़े तक बदलने की मोहलत नहीं दी गई। फ़ैज़ के परिवार पर ये एक मुसीबत के दौर का आग़ाज़ था। उनकी पत्नी एलिस के अलावा उनकी दो लड़कियाँ मुनीज़ा और सलीमा भी अब लाहौर में अकेली रह गई थीं। मगर इस मुसीबत का सामना फ़ैज़ और एलिस ने जिस बहादुरी और हिम्मत से किया और अपने आपसी प्रेम को इस हिज्र और फ़ासले में और गहरा करते हुए, अपनी मोहब्बत के धारे को दुखी इनसानों के दर्दो ग़म को समझने की तरफ़ जिस तरह मोड़ा, ये बात इन ख़तों को पढ़ने से पता चलती है। इन ख़तों में जहाँ एक तरफ़ फ़ैज़ की बे-परवा, आज़ाद और शायराना फ़ितरत का पता मिलता है, वहीं एलिस के जज़्बे, याद के दुःख और राज्य से सीधे टकरा जाने का जज़्बा भी साफ़ दिखाई देता है।
हम इन ख़तों को पढ़ कर ही जान पाते हैं कि अगर ये हादसा फ़ैज़ की ज़िन्दगी में न गुज़रा होता तो हम फ़ैज़ की उस बाग़ी शायरी से शायद महरूम रहते जिसने उनसे इनसान की उस हिम्मत पर यादगार नज़्में और ग़ज़लें लिखवाईं, जिसे कोई भी रियासत, कैसी भी सियासत क़ैद में डाल कर फ़ना नहीं कर सकती। उसकी आवाज़ को रोकना ना-मुमकिन है, जैसा कि फ़ैज़ ने लिखा था—
मता-ए-लौह-ओ-क़लम छिन गई तो क्या ग़म है
कि ख़ून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियाँ मैंने
ज़बाँ पे मुहर लगी है तो क्या कि रख दी है
हर एक हल्क़ा-ए-ज़ंजीर में ज़बाँ मैंने
ISBN: 9789360867843
Pages: 400
Avg Reading Time: 13 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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