Second Lieutenant Arun Khetarpal
Author:
Major Rajpal SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 80
₹
100
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789389982473
Pages: 16
Avg Reading Time: 1 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Mahiyasi Mahadevi
- Author Name:
Ganga Prasad Pandey
- Book Type:

- Description: पाण्डेय जी की इस कृति का महत्त्व मैं कई दृष्टियों से मानता हूँ। महादेवी साहित्य के सम्बन्ध में हिन्दी–पाठकों की रुचि अब पहले से कई गुना अधिक बढ़ चुकी है, पर उसके कुतूहल के उपशय की सामग्री हिन्दी में अभी प्राय: नहीं के बराबर पाई जाती है। महादेवी के काव्य और गीत साहित्य की व्याख्या अभी तक यदि किसी ने ढंग से की है तो वह केवल पाण्डेय जी ने ही। महादेवी जी की एक–एक कविता, एक–एक गीत केवल अपने–आप में अनमोल मोती नहीं है, वरन् वह एक–एक मोती अपने–आप में अनेक अनमोल मोतियों को छिपाए हैं। और उनमें से प्रत्येक मोती को मोती बनने में जिन अपार साधनाओं और बाधाओं का सामना करना पड़ा है, उनकी व्याख्या किसी भी हालत में सहज–साधारण नहीं है। किसी भी सीप की मोती बनने की प्रक्रिया साधारण नहीं होती, फिर महादेवी मानस के मोती तो साहित्य–संसार में दुर्लभतम और अमूल्य निधि हैं। उनकी प्रक्रिया और भी जटिल है कि उनके लिए केवल स्वाति–नक्षत्र की ही आवश्यकता नहीं है, वरन् स्वाति–नक्षत्र के भी कुछ विशिष्ट ही दुर्लभ क्षणों या सुदुर्लभ संयोग की अत्यन्त आवश्यकता है और वह एक–एक क्षण भी अपने भीतर अन्तर्जीवन की किन रहस्यानुभूतियों का अधियोग सँजोए है, इसका ठीक–ठीक हिसाब लगा सकना आज किसी विद्वत्तम साहित्यालोचकों के लिए भी सहज–सम्भव नहीं रह गया है। इसके लिए चाहिए अन्तरतम की निगूढ़तम अनुभूति और सहज तादात्म्य, जो केवल पाण्डेय जी जैसे आलोचकों में ही सम्भव पाया जा सकता है। अतएव इस ग्रन्थ के भावी समीक्षकों से मेरा नम्र निवेदन है कि यदि वे समीक्षा के पूर्व उपरोक्त सभी तथ्यों पर विशेष ध्यान दिए बिना समीक्षा करने बैठ जाएँगे तो कभी इस अमूल्य रचना के साथ न्याय नहीं कर पाएँगे। महादेवी जी की रचनाओं को आज एक बिलकुल ही नई दृष्टि से देखने व परखने की आवश्यकता आ पड़ी है। महादेवी जी जैसी कवयित्री का कोई उदाहरण विश्व–साहित्य के इतिहास के किसी भी युग में, किसी भी देश में शायद ही पाया गया है। उनके समान मौलिक चिन्तनशीलता और अछूती कल्पना का कोई उदाहरण कहीं भी सहज–सुलभ नहीं है, केवल भावना के क्षेत्र में ही उन्होंने निराली रसमयता का प्लावन नहीं बहाया है, वरन् वैचारिकता और चिन्तन के क्षेत्र में भी उनके समान प्रौढ़ और आत्मविश्वास–परायण नारी का जोड़ मिलना कठिन है। यह उपलब्धि केवल एक ही जन्म की साधना द्वारा सम्भव नहीं है, इसके लिए युग–युग की सांस्कृतिक चेतना के जन्म–जन्मान्तरीण विकास की अनिवार्य आवश्यकता है। पाण्डेय जी ने इसी कारण ‘सांस्कृतिक पृष्ठभूमि’ नाम से एक अलग अध्याय अपने गहन अध्ययन के फलस्वरूप इस ग्रन्थ में दिया है, जिसकी बहुत बड़ी आवश्यकता थी, साथ ही ‘महादेवी काव्य की पृष्ठभूमि’ शीर्षक से एक दूसरे महत्त्वपूर्ण अध्याय में उन्होंने महादेवी जी के सांस्कृतिक चेतना के विकास पर अतिरिक्त प्रकाश डालने का स्तुत्य प्रयास किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि महादेवी साहित्य के अध्ययन के लिए जिस प्रकार की रचना के नितान्त अभाव का अनुभव पिछले कुछ दशकों में किया जा रहा था, उसकी पूर्ण पूर्ति इस ग्रन्थ द्वारा हो जाएगी। केवल इसी युग के साहित्य–श्रद्धेताओं के लिए नहीं, आनेवाली पीढ़ियों के लिए भी। यह ग्रन्थ वास्तव में पाण्डेय जी की महत्त्वाकांक्षा के अनुरूप ही तैयार हुआ है और हिन्दी आलोचना–क्षेत्र में यह निश्चय ही एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करके रहेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। —इलाचन्द्र जोशी
Shivkamini Mahadevi Ahilyabai "शिवकामिनी महादेवी अहिल्याबाई" Book in Hindi
- Author Name:
Arundhati Singh Chandel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dwarka Ka Suryasta
- Author Name:
Dinkar Joshi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aamool Kranti Ka Dhwaj-Vahak Bhagatsingh
- Author Name:
Ranjit
- Book Type:

- Description: भगतिंसह को यदि मार्क्सवादी ही कहना हो, तो एक स्वयंचेता या स्वातंत्र्यचेता मार्क्सवादी कहा जा सकता है। रूढ़िवादी मार्क्सवादियों की तरह वे हिंसा को क्रान्ति का अनिवार्य घटक या साधन नहीं मानते। वे स्पष्ट शब्दों में कहते हैं—‘क्रान्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष अनिवार्य नहीं है और न ही उसमें व्यक्तिगत प्रतिहिंसा के लिए कोई स्थान है। वह बम और पिस्तौल का सम्प्रदाय नहीं है।’ अन्यत्र वे कहते हैं—‘हिंसा तभी न्यायोचित हो सकती है जब किसी विकट आवश्यकता में उसका सहारा लिया जाए। अहिंसा सभी जन-आन्दोलनों का अनिवार्य सिद्धान्त होना चाहिए।’ आज जब भगतसिंह के समय का बोल्शेविक ढंग समाजवाद मुख्यत: जनवादी मान-मूल्यों की निरन्तर अवहेलनाओं के कारण, समता-स्थापन के नाम पर मनुष्य की मूलभूत स्वतंत्रता के दमन के कारण, ढह चुका है, यह याद दिलाना ज़रूरी लगता है कि स्वतंत्रता उनके लिए कितना महत्त्वपूर्ण मूल्य था। स्वतंत्रता को वे प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार घोषित करते हैं। क्योंकि वे अराजकतावाद के माध्यम से मार्क्सवाद तक पहुँचे थे, इसलिए स्वतंत्रता के प्रति उनके प्रेम और राजसत्ता के प्रति उनकी घृणा ने उन्हें कहीं भी मार्क्सवादी जड़सूत्रवाद का शिकार नहीं होने दिया।
HINDI SANYUKTA AKSHAR GYAN
- Author Name:
Mahesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Acharya Gulab Kothari : Roopantaran Ke Sootrakar
- Author Name:
Prof. Dayanand Bhargva +2
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
AALE "आले" Stories Collections Book in Hindi
- Author Name:
Meenu Tripathi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Safal Businessman Kaise Banen?
- Author Name:
Dinanath Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh General Studies "सामान्य अध्ययन" Part-2 Main Examination, Paper-VI Book in Hindi | UPPSC, ACF, RFO UPSSSC Lower PCS, Jr Assistant, VDO आदि परीक्षाओं के लिए उपयोगी
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Surgical Strike
- Author Name:
Ish Kumar Gangania
- Book Type:

- Description: Had the terrorist attack been confined to Pulwama and the martyrdom of the Indian CRPF, there was no point for me to pen this novel Surgical Strike. But when the political flames began to swallow the nation and its social fabric to exploit the situation, it was obvious for the protagonist Aajivak Babu to be involved in surgical strikes on different fronts. He collides with the culture of becoming a large gathering turned into robots, sheep, mindless crowd, a product ‘For Sale’ with their remote controls in the hands of unbridled radical forces to hostage the constitutional institutions where media play as an auctioned players of ‘Indian Media Premier league’, then what bitter experience the Indian society and the nation pass through, ‘Surgical Strike’ mirrors it all as lifeline of the novel.
Rabbi "रब्बी" | Collection of Short Fiction Stories | Book in Hindi
- Author Name:
Naresh Kaushik
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Six Glorious Epochs of Indian History
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: "Six Glorious Epochs of Indian History is a learning experience which covers the period of Muslim invasions in India and brave retaliation by the natives. No less was the struggle of Indian manes against British rule and for freedom and liberation of the mother country. The author’s tribute to the martyrs and his letters to dear ones from Andamans, miscellaneous statements and writings are also included in this book. The first four epochs are covered in only hundred plus pages while the last two epochs span almost four hundred plus pages, signifying the importance that the author gave to this period. So far we have been given the picture of British rule, the history and politics in India by foreign and leftist writers, but in this book Veer Savarkar makes us look at the country’s history and politics from the Bharatiya perspective. Not only does he analyse the mistakes committed by Hindus since the time of Alexander’s invasion till the British rule, he tries to enlighten our minds with the prevalent situation in his time. All that he himself learnt from history, he tries to correct through this book of his.
Simultala Awasiya Vidyalaya Pravesh Pariksha Prarambhik Evam Mukhya Class 6
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Amar Karantiveer Chandrashekhar Azad
- Author Name:
Bharat Bhushan
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनका मूल नाम चंद्रशेखर तिवारी था। भले ही लोग स्वतंत्रता-संग्राम में उनके योगदान को पूर्ण रूप से न जानते हों, लेकिन इतना अवश्य जानते हैं कि वे इस संग्राम के अग्रगण्य क्रांतिकारियों में एक थे और उनके नाम से बड़े-बड़े अंग्रेज पुलिस अधिकारी तक काँप उठते थे। बाल्यावस्था में ही उन्होंने पुलिस की बर्बरता का विरोध प्रकट करते हुए एक अंग्रेज अफसर के सिर पर पत्थर दे मारा था। अपने क्रांतिकारी जीवन में आजाद ने कदम-कदम पर अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। उन्होंने सुखी जीवन का त्याग करके कँटीला रास्ता चुना और अपना जीवन देश पर बलिदान कर दिया। भले ही वे अपने जीवन में आजादी का सूर्योदय न देख पाए, लेकिन गुलामी की काली घटा को अपने क्रांति-तीरों से इतना छलनी कर गए कि आखिरकार उस काली घटा को भारत की भूमि से दुम दबाकर भागना पड़ा। महान् क्रांतिकारी, अद्वितीय देशाभिमानी एवं दृढ़ संकल्पवान् चंद्रशेखर आजाद के अनछुए जीवन-प्रसंगों के साथ संपूर्ण व्यक्तित्व का दिग्दर्शन करानेवाली अनुपम कृति।
PRAMUKH DESHON KE RASHTRIYA DHWAJ
- Author Name:
Anushka
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BHARTIYA SAMAJ HINDI CINEMA AUR STREE
- Author Name:
Sulbha Kore
- Book Type:

- Description: Book based on hindi cinema
The Constitution of India and Dr. Babasaheb Ambedkar
- Author Name:
Kishor Makwana
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
TAMSO MA JYOTIRGAMAYA (PB)
- Author Name:
Renu Rajvanshi Gupta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Bal Sahitya Ka Itihas
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bin Gaye Geet
- Author Name:
Narmada Prasad Upadhyaya
- Book Type:

- Description: विचार आता है, सभी फूल अशोक जैसे क्यों नहीं बनाए सृष्टा ने? कौन सी विवशता के कारण कुटज की, कुटज जैसे उजाड़ में ही जन्मकर जीवन बिता देनेवालों की सृष्टि करनी पड़ी। इसलिए कि कुटज नहीं बनाए जाते तो अशोक की पहचान कैसे बनती? सर्जक की विवशता थी कि वह अशोक के आभिजात्य को दरशाने के लिए कुटज के बियाबान को रचता। बियाबानों की नियति ही है कि वे हरे-भरे उद्यानों को पहचान देने के लिए निर्मित कर दिए जाते हैं। कुटज और उसके जैसे फूल इसी विवशता की देन हैं और यह विवशता भी इसलिए है कि अशोक की सामथ्र्य के बूते पर ही सर्जक की सत्ता टिकी रहती है, इसलिए सृष्टा की विवशता का किरीट है कुटज। ठीक अशोक और कुटज की तरह मनुष्य भी गढऩे पड़े। सर्जक ने आरंभ में बनाए तो सभी मनुष्य एक जैसे, लेकिन समय के आगे बढऩे के साथ यह समानता स्वयं सृष्टा को भारी पड़ी। मनुष्य ने ही उसे विवश किया कि वह इस समानता में बदलाव लाए और परिणाम यह हुआ कि फिर मनुष्य भी अशोक और कुटज होने लगे। —इसी संग्रह से प्रसिद्ध ललित-निबंधकार श्री नर्मदा प्रसाद उपाध्याय के भाषाई लालित्य और भारतीय दृष्टि से समादृत निबंध, जो पाठकों के अंतस को छू जाएँगे और रससिक्त करेंगे। आवरण—अजंता की दूसरी गुफा की सीलिंग पर निर्मित भित्तिचित्र : पाँचवीं सदी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book