Satguru Nanak Dev

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संत शिरोमणि गुरु नानक सिख धर्म के प्रवर्तक और सिख धर्मावलंबियों के प्रथम गुरु हैं। नानक को ईश्‍वर का अवतार माना जाता है। बचपन से ही उनके मुक्‍त विचारों से उनकी महानता का परिचय मिलता है। पिता ने सौदा करने के लिए पैसे दिए तो उन्होंने भूखों को भोजन कराकर ‘सच्चा सौदा’ किया। नौकरी की तो वहाँ जी खोलकर अन्न-धन दान किया और खजाना भरा-भरा रहा। देश-विदेश में घूमकर गुरु नानक ने सच्चे धर्म और विचारों का प्रचार किया। बाबर को सद्बुद्धि दी तो उसने सभी कैदियों को आजाद कर दिया। मक्का में जहाँ उनके चरण घूमे, वहीं मदीना भी घूम गया। उन्होंने अपने आचरण से दर्शाया कि सच्चे और सरल भक्‍त को ईश्‍वर सहज ही हर जगह मिल सकता है। अपने अंतिम कुछ समय गृहस्थ धर्म का निर्वहण करके उन्होंने अपने अनुयायियों को सद‍्गृहस्थ होने की सीख दी। मानवता, साहस, बलिदान और त्याग जैसे सद‍्गुणों का विकास करनेवाले संत शिरोमणि गुरु नानक के प्रेरणाप्रद जीवन की गौरवगाथा है यह पुस्तक।

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ISBN
9789350484104
Pages
152
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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About the Book

संत शिरोमणि गुरु नानक सिख धर्म के प्रवर्तक और सिख धर्मावलंबियों के प्रथम गुरु हैं। नानक को ईश्‍वर का अवतार माना जाता है। बचपन से ही उनके मुक्‍त विचारों से उनकी महानता का परिचय मिलता है। पिता ने सौदा करने के लिए पैसे दिए तो उन्होंने भूखों को भोजन कराकर ‘सच्चा सौदा’ किया। नौकरी की तो वहाँ जी खोलकर अन्न-धन दान किया और खजाना भरा-भरा रहा।
देश-विदेश में घूमकर गुरु नानक ने सच्चे धर्म और विचारों का प्रचार किया। बाबर को सद्बुद्धि दी तो उसने सभी कैदियों को आजाद कर दिया। मक्का में जहाँ उनके चरण घूमे, वहीं मदीना भी घूम गया। उन्होंने अपने आचरण से दर्शाया कि सच्चे और सरल भक्‍त को ईश्‍वर सहज ही हर जगह मिल सकता है। अपने अंतिम कुछ समय गृहस्थ धर्म का निर्वहण करके उन्होंने अपने अनुयायियों को सद‍्गृहस्थ होने की सीख दी।
मानवता, साहस, बलिदान और त्याग जैसे सद‍्गुणों का विकास करनेवाले संत शिरोमणि गुरु नानक के प्रेरणाप्रद जीवन की गौरवगाथा है यह पुस्तक।

Book Details

  • ISBN
    9789350484104
  • Pages
    152
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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