Samaj, Paryavaran Aur Abhiyantriki
(0)
₹
350
280 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
प्रस्तुत पुस्तक में तीन अलग-अलग विषयों—समाजशास्त्र, पर्यावरण तथा इंजीनियरी को एक-दूसरे का आधार मानते हुए समाहित किया गया है। ये तीनों ही विषय समाज के विभिन्न घटकों को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। आठ अध्यायों में विभाजित इस पुस्तक में समाजशास्त्र, सामाजिक उद्विकास एवं प्रक्रियाएँ, अभियन्ता एवं समाज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी निर्धारण एवं हस्तान्तरण, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा उद्योगों में मानवीय सम्बन्ध, आदि के विभिन्न क्षेत्रों में होनेवाले विकास तथा समाज से सम्बन्धों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक दी इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स, (इंडिया) द्वारा संचालित सेक्शन ‘ए’ के पाठ्यक्रम के अनुसार तथा हिन्दी-भाषी विद्यार्थियों की कठिनाइयों को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लिखी गई है। विश्वास है कि अन्य पाठकों के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Read moreAbout the Book
प्रस्तुत पुस्तक में तीन अलग-अलग विषयों—समाजशास्त्र, पर्यावरण तथा इंजीनियरी को एक-दूसरे का आधार मानते हुए समाहित किया गया है। ये तीनों ही विषय समाज के विभिन्न घटकों को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। आठ अध्यायों में विभाजित इस पुस्तक में समाजशास्त्र, सामाजिक उद्विकास एवं प्रक्रियाएँ, अभियन्ता एवं समाज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी निर्धारण एवं हस्तान्तरण, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा उद्योगों में मानवीय सम्बन्ध, आदि के विभिन्न क्षेत्रों में होनेवाले विकास तथा समाज से सम्बन्धों पर प्रकाश डाला गया है।
पुस्तक दी इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स, (इंडिया) द्वारा संचालित सेक्शन ‘ए’ के पाठ्यक्रम के अनुसार तथा हिन्दी-भाषी विद्यार्थियों की कठिनाइयों को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लिखी गई है। विश्वास है कि अन्य पाठकों के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Book Details
-
ISBN9788171787746
-
Pages312
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Dharti Ki Pukar
- Author Name:
Sundarlal Bahuguna
- Book Type:

- Description:
विकास बनाम पर्यावरण इस सदी की सबसे बड़ी बहसों में से एक है। आज जबकि पूरी दुनिया में पर्यावरण-चेतना फैल रही है और विकास की लगभग हर गतिविधि के लिए पर्यावरणीय मानदंड निर्धारित किए जा रहे हैं, फिर भी विकासवादी निरन्तर इस कोशिश में रहते हैं कि पर्यावरणीय ख़तरों की अनदेखी करके भी किस तरह कोई बड़ा बाँध, कोई बड़ी परियोजना शुरू की जाए। इसलिए जब सुन्दरलाल बहुगुणा दुनिया के अन्य पर्यावरणविदों के साथ सुर मिलाकर यह कहते हैं कि तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया है और वह तथाकथित विकासवादियों द्वारा प्रकृति के विरुद्ध छेड़ा गया है, तो वे ग़लत नहीं होते।
वे कहते हैं, ‘‘प्रश्न केवल विकास के विरोध का नहीं है, ज़िन्दा रहने के अधिकार की रक्षा का है। जिन परियोजनाओं को सरकारी मीडिया और शासन व अर्थनीति पर हावी आभिजात्य वर्ग देश के त्वरित विकास के लिए अनिवार्य मानता है, उन परियोजनाओं के औचित्य को चुनौती देनेवालों को विदेशी एजेंट, देशद्रोही और विकास के दुश्मन के रूप में प्रचारित किया जाता है।’’
सुन्दरलाल बहुगुणा भी इस दृष्टि से बौद्धिक समाज में नायक और खलनायक दोनों हैं। लेकिन हिमालय, गंगा, जंगल और टिहरी बाँध को लेकर जो सवाल बहुगुणा ने खड़े किए हैं और सरकार की प्रकृति-विरोधी नीतियों का पर्दाफ़ाश किया है, उसमें शायद ही किसी को आपत्ति हो। साथ ही उन्होंने विकास की जो वैकल्पिक दृष्टि दी है, उससे भी किसी को परहेज़ नहीं होगा।
यह पुस्तक ‘धरती की पुकार’ बहुगुणा जी के चिन्तन का सार है। इसमें ‘चिपको आन्दोलन’ से लेकर टिहरी बाँध के विरोध में उनके लम्बे उपवासों तक की चिन्तनभूमि के दर्शन होते हैं। आशा है, यह पुस्तक विकास और पर्यावरण के रिश्तों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने-समझने में मदद करेगी।
Marjar Kosh
- Author Name:
Parashuram Shukla
- Book Type:

- Description:
मार्जार संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है—बिल्ली। सामान्यतया बिल्ली से घरेलू बिल्ली का बोध होता है; किन्तु जीवविज्ञान में इस शब्द का विस्तृत अर्थों में प्रयोग किया गया है एवं इसके अन्तर्गत बाघ और सिंह से लेकर पालतू बिल्ली तक को सम्मिलित किया गया है। ये सभी जीव मार्जार परिवार के जीव कहलाते हैं। बाघ सहित मार्जार परिवार के अन्य जीवों की जानकारी पुस्तक के परिचय में संक्षेप में दी गई है। इनमें रोचक और रोमांचक तथ्यों के साथ ही ज्ञानवर्धक जानकारियाँ भी हैं, जो निश्चित रूप से जनसामान्य के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी। इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। वन्यजीवों का सीधा सम्बन्ध वनों से है। वनों से वर्षा और वर्षा से जीवन। अर्थात् मानव का अस्तित्व बनाए रखने के लिए वन्यजीव आवश्यक हैं। हमारे देश में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने बाघ, सिंह, तेंदुए आदि का नाम तो सुना है, किन्तु इनके विषय में कुछ नहीं जानते। घरेलू बिल्लियाँ तो सभी ने देखी होंगी, किन्तु इनके विषय में भी जनसामान्य को विशेष जानकारी नहीं है। भारत में मार्जार परिवार के ऐसे अनेक जीव पाए जाते हैं, जिनका लोगों ने नाम तक नहीं सुना। इस पुस्तक में इन्हीं सब जीवों की जानकारी बड़े रोचक ढंग से दी गई है।
Griha Vatika
- Author Name:
Pratibha Arya
- Book Type:

- Description:
आज से हज़ारों वर्ष पूर्व भी मनुष्य अपने घर के चारों ओर फूल, घास व कमल के तालाब आदि लगाता रहा होगा। बेबीलोन के ‘हैंगिंग गार्डन’ विश्व के सात आश्चर्यों में एक माने गए हैं। आज जब हम गृह वाटिका की बात करते हैं तो हमारे सामने उद्यान कला का एक दीर्घ इतिहास साकार हो उठता है। रूप योजना कैसी भी क्यों न रही हो, घर के भीतर, आसपास, रास्तों, दीवारों को, फूलों की झाड़ियों, लताओं, वृक्षों द्वारा सजाने की परम्परा बहुत पुरानी रही है। गुफाओं में रहनेवाले मानव ने जब घर बनाकर स्थिर जीवनचर्या शुरू की तो उसे सजाने-सँवारने का काम भी शुरू कर दिया। जीवन में जब स्थिरता आ जाती है तो मानव-मन कला-सौन्दर्य की ओर झुक जाता है। प्राचीन भारतीय उद्यानों में लतामंडप, पुष्पित लताओं, झाड़ियों वाली वीथियाँ, कुंज, सुगन्धित पुष्प व कमल फलों के जलाशयों का वर्णन मिलता है। वासन्ती लता, लवंग-लता, नवमल्लिका जैसी सुगन्धित लताओं एवं वृक्षों के झुरमुट से घिरी वीथियाँ एवं वाटिकाएँ, जहाँ गृहवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ आमोद-प्रमोद के क्षण व्यतीत करता था। मुग़लकालीन उद्यान सीढ़ीदार होते थे, साथ-साथ उनमें पानी की नहरें व फुहारें अवश्य होते थे। मध्य एशिया से सर्द एवं फलों से भरे प्रदेश से आए मुग़ल बादशाहों ने वहाँ की स्मृति को याद रखते हुए और भारत की गर्मी से बचने के लिए जल की योजना वाटिकाओं में ख़ूब बनाई। उद्यान की योजना का रूप, आकार चाहे अलग रहा हो परन्तु मूल में एक प्रवृत्ति ही काम करती रही—वह थी प्रकृति की सुन्दर आकर्षक विविध प्रकार की वनस्पतियों, पौधों, झाड़ियों, वृक्षों, लताओं को आकर्षक रूप में लगाना, उसे सँजोना और प्राकृतिक भूदृश्यों को अपनी कल्पना के पुट द्वारा अपने घर के भीतर प्रस्तुत करना। उद्यान कला के भी मूलभूत सिद्धान्त लगभग सभी जगहों पर एक जैसे ही होते हैं। इन्हें जानने व समझने के बाद पौधों की देखभाल का कार्य काफ़ी सरल हो जाता है। उद्यान कला एक वैज्ञानिक विषय है, परन्तु शौक़ के रूप में अपनाए जाने पर यह आनन्द व अनुभव का विषय बन जाता है।
Jal Sankat Aur Jal Sangrah
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कहा जाने लगा है कि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो बहुत ही सम्भव है कि वह पानी को लेकर ही हो। शहरी इलाक़ों में पानी की कमी और उसके लिए रोज़-रोज़ होनेवाले स्थानीय झगड़े शायद इसी की बानगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में जल-स्तर न सिर्फ़ नीचे जा रहा है, पेयजल के रूप में उसका उपयोग भी ख़तरनाक होता जा रहा है। जनसंख्या के साथ-साथ जहाँ पानी की आवश्यकता बड़े पैमाने पर बढ़ी है, वहीं जल-संग्रहण की पारम्परिक पद्धतियों को भी हमने भुला दिया है, जितना जल उपलब्ध है, वह बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप प्रदूषण का शिकार है। आँकड़े बताते हैं कि इस समय देश में रोज़ छह हज़ार से ज़्यादा लोग दूषित जल से पैदा होनेवाली बीमारियों से मर जा रहे हैं। यह पुस्तक इस विकराल संकट से निबटने के लिए एक आरम्भिक ढाँचा सुझाती है जिसका उपयोग हम जल-संरक्षण, और सामान्यत: पानी के प्रति अपना आधारभूत दृष्टिकोण बदलने में कर सकते हैं। वर्षा जल के संग्रहण की पुरानी और नई प्रविधियों, इसके साथ भू-जल स्रोतों की सम्यक् सार-सँभाल, जल-अपव्यय को रोकने की ज़रूरत तथा तरकीबें, सूखे इलाक़ों में जल-संचयन की वैज्ञानिक पद्धति, विभिन्न क़िस्म के बाँधों, कुँओं, तालाबों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आपूर्ति और वितरण की समस्या और कृषि-उपयोग के लिहाज़ से जल-प्रबन्ध, इन तमाम विषयों पर यह पुस्तक अद्यतन और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
Bharat Ke Sankatgrast Vanya Prani
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description:
हम इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि किसी दिन इस धरती पर केवल मानव जाति का अस्तित्व होगा। पशु–पक्षियों व अन्य जीवधारियों की असंख्य प्रजातियों और वनस्पतियों की अगणित क़िस्मों के अभाव में क्या इस सृष्टि में जीवन को बचाए रखना सम्भव होगा। सच्चाई तो यह है कि सृष्टि एक अखंड इकाई है। चराचर की पारस्परिक निर्भरता ही जीवन का मूल मंत्र है। यदि किसी कारण से जीवन–चक्र खंडित होता है तो इसके भीषण परिणाम हो सकते हैं। ‘भारत के संकटग्रस्त वन्य प्राणी’ में प्रसिद्ध लेखक गुणाकर मुळे ने ऐसे प्राणियों की चर्चा की है जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने अनेक ऐसे प्राणियों का ज़िक्र किया है जिन्हें अब इस धरती पर कभी नहीं देखा जा सकता। विगत दशकों में 36 प्रजातियों के स्तनपायी प्राणी और 94 नस्लों के पक्षी प्रकृति के अंधाधुंध शोषण के कारण नष्ट हो चुके हैं। लेखक की चिन्ता यह है कि यदि इसी प्रकार हिंसा, लालच और अतिक्रमण का दौर चलता रहा तो इस ख़ूबसूरत दुनिया का क्या होगा! यह असन्तुलन विनाशकारी होगा। लेखक के अनुसार, ‘हमारे देश में प्राचीन काल से वन्य प्राणियों के संरक्षण की भावना रही है। हमारी सभ्यता और संस्कृति में वन्य प्राणियों के प्रति प्रेम-भाव रहा है। इसलिए हमारे समाज में वन्य जीवों को पूज्य माना जाता है। वन्य जीवों तथा पक्षियों को मुद्राओं और भवनों पर भी चित्रित किया जाता रहा है।’ हमें आज इस भाव को नए सन्दर्भों में विकसित करना होगा। वन्य प्राणी संरक्षण के लिए बनाए गए अधिनियमों से अधिक आवश्यकता व्यापक नागरिक चेतना की है। गुणाकर मुळे ने सहज, सरल भाषा में इस आवश्यकता को रेखांकित किया है। अनेक चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक पर्यावरण के प्रति जागरूकता निर्माण के लिए बहुत ही उपयोगी है। हर आयु के पाठकों के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Manav Upayogi Ped
- Author Name:
Ramesh Bedi
- Book Type:

- Description:
जल, जंगल, ज़मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़मियाजा मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक थे। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है। इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों—अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं। पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है, वरन् आम जन के लिए स्वस्थ जीने के नुस्ख़े भी मुहैया कराती है।
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
- Author Name:
Aseem Shrivastava
- Book Type:

- Description:
यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ; पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष; लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा रॉय; समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी; अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी ज़िन्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी; लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई; नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल; पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर; समाजकर्मी
Prithvi Manthan : Vaishvik Bharat Banane Ki Kahani
Aseem Shrivastava
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Vichar Ka Kapda
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
‘‘क़ायदे से अनुपम मिश्र न लेखक थे, न पत्रकार। वे साफ़ माथे के एक आदमी थे जो हर हालत में माथा ऊँचा और साफ़ रखना चाहते थे। उनकी निराकांक्षा उनकी बुनियादी बेचैनियों को ढाँप नहीं पाती थी। ये बेचैनियाँ ही उन्हें कई बार ऐसे प्रसंगों, व्यक्तियों, घटनाओं, वृत्तियों को खुली नज़र देखने-समझने की ओर ले जाती थीं। उनकी संवेदना में ऐसी ऐन्द्रियता थी कि वे विचार का कपड़ा भी पहचान लेती थीं। कुल मिलाकर अनुपम मिश्र की अकाल मृत्यु के बाद शेष रह गई सामग्री में से किया गया यह संचयन हिन्दी में सहज, निर्मल और पारदर्शी, मानवीय गरमाहट से भरे गद्य का विरल उपहार है। हमें मरणोत्तर अनुपम मिश्र को उनकी भरी-पूरी जीवन्तता में प्रस्तुत करने में प्रसन्नता है।”
—अशोक वाजपेयी
Bin Pani Sab Soon
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो सामग्री मिली है उसमें से यह संचयन किया गया है। वह हिन्दी में बची ज़मीनी सोच और लोकचिन्ताओं से एक बार फिर हमें अवगत कराता है। वह इसका साक्ष्य भी है कि साफ़-सुथरा गद्य साफ़-सुथरे माथे से ही लिखा जा सकता है।” —अशोक वाजपेयी
Sheron Se Meri Mulakatein
- Author Name:
Sherjung
- Book Type:

- Description:
“अचानक जंगल में सन्नाटा गहरा गया। उस गहरे सन्नाटे को चीरती हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज़ें, तभी एक अजीब–सी आवाज़ हाथियों की ओर से आई। मैं समझ गया कि यह वही आवाज़ है जो हाथी अपनी सूँड़ ज़मीन पर पटककर निकालते हैं लेकिन सिर्फ़ शेर के आसपास होने पर–––और फिर सारा जंगल शेर की दहाड़ से काँप उठा।’’ शेर से नज़दीकी का हैरतअंगेज़ रोमांच और एक शिकारी होने का एहसास आपके ज़ेहन को गुदगुदाए बिना नहीं रहेगा। हास्य और व्यंग्य से सँवारे ये लेखक के नितान्त अपने अनुभव हैं। शेरजंग की इस किताब में एक शिकारी का रोमांच भी है और शेरों के प्रति बाल सहज जिज्ञासा के जवाब भी। शुरू करते ही एक रोचकता पाठक को जकड़ते हुए, एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ शेर ही नहीं जंगल के सारे जानवरों का एहसास होता है। जिसमें शामिल हैं—उनकी आदतें, व्यवहार और उनका जीवन–चक्र।
Bhukamp
- Author Name:
Harinarayan Srivastava
- Book Type:

- Description:
भूकम्प है क्या? यह किन परिस्थितियों में विध्वंसक हो जाता है? क्या इससे बचने का कोई उपाय है? इन और ऐसे ही अनेक प्रश्नों के माध्यम से इस पुस्तक में भूकम्प जैसे भौगोलिक और वैज्ञानिक विषय की शोध–खोज की गई है—यानी पृथ्वी के भीतरी, सर्वाधिक भयावह और रोमांचक घटना–क्षणों की विस्तृत और रोचक छानबीन। भूकम्पों के कारण, उनके पूर्वानुमान, भूकम्प–विज्ञान के विभिन्न उपयोगों—जैसे भूकम्प इंजीनियरिंग, नाभिकीय विस्फोटों का पता एवं चन्द्र–कम्पों आदि के बारे में आधुनिक अनुसन्धानों की विस्तृत चर्चा इस पुस्तक में की गई है। यद्यपि यह विषय भौतिकी और गणित के मूल सिद्धान्तों पर आधारित है, पर अपनी सहज भाषा–शैली और सार्थक प्रस्तुति के कारण दुरूह बिलकुल नहीं रह गया है। भूगोल के विद्यार्थियों, प्रोफ़ेसरों, भूगर्भशास्त्रियों, इंजीनियरों और धरती के गर्भ में पलते–पनपते, उमड़ते–घुमड़ते रहस्यों को जानने की इच्छा रखनेवाले सामान्य पाठकों के लिए भी यह सचित्र प्रकाशन समान रूप से उपयोगी और अनूठा है।
Ek Tha Zanskar : SuvaranKhudaiya Chiunton Ka Des
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description:
अजय सोडानी प्रकृति की यात्रा करते हैं, लेकिन वे सिर्फ़ यात्रा नहीं करते—वे एक पक्षधर यात्रा करते हैं। एक ऐसी यात्रा जो प्रकृति के पवित्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और यह जानने के लिए आरम्भ होती है कि मनुष्य ने प्रकृति की इतनी विराट सभ्यता के ठीक मुक़ाबले पर अपनी यह सभ्यता खड़ी की तो क्यों, जिसमें सब तरफ क्षरण ही क्षरण है। वे प्रकृति के वकील की हैसियत से अपना झोला उठाते हैं। यह यात्रा-कथा है जाँस्कर की जहाँ आज 2900 हेक्टेयर में खेती होती है और कुल जनसंख्या है 13773। लद्दाख का यह हिस्सा न तो हमलावरों की नज़र में ज़्यादा पड़ा, न भारत आने वाले मुसाफ़िरों की। इसलिए वह विकास की मार से भी बचा रहा, अपनी जीवन शैली और संस्कृति के साथ। रेत के नीचे से सोना खोदने वाले चींटे भी अपना काम करते रहे यानी यहाँ से जुड़ी कथाएँ भी दूर देश के सैलानियों को आकर्षित करती रहीं। मंथर गति में एक समूचा जीवन जीने वाले जाँस्कर का यह सफ़र जुलाई 2013 में किया गया, जिसके बाद यात्रावृत्तकार को कहना पड़ा कि ‘नवपाषाण युग जैसे अभी-अभी ही व्यतीत हुआ हो इधर से।’ हिमालय की बर्फ़ीली दुनिया के इस यात्रावृत्त में रोमांच जितना है, उतने ही इतिहास और संस्कृति के हवाले भी हैं, कथाएँ-उपकथाएँ भी हैं। अर्थात इस पुस्तक को पढ़कर जब आप अपनी दुनिया में लौटते हैं तो सिर्फ़ दृश्यों के, जोखिमों के, थकानों और आश्चर्यों के दृश्य आपके साथ नहीं होते, ढेरों नए तथ्य और तर्क भी होते हैं। साथ ही सफ़रगोई की वह ताज़गी, कहन की वह रवानी भी जो अजय सोडानी की अपनी ईजाद है।
Paryavaran Ke Paath
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description:
''अनुपम मिश्र एक अत्यन्त विनम्र, निरभिमानी व्यक्ति थे जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में साधारण और सामुदायिक विवेक और विधि का जैसा अवगाहन किया वैसा आधुनिक टेकनॉलजी के दुश्चक्र में फँसे अन्य पर्यावरणविद् अकसर नज़रन्दाज़ करते रहे हैं। अनुपम जी लगभग ज़िद कर अपनी इस धारणा पर डटे रहे कि साधारण लोग और समुदाय पढ़े-लिखों से ज़्यादा जानता-समझता है और आधुनिकता को अपनी सर्वज्ञता के दम्भ से मुक्त हो सकना चाहिए। उनसे बातचीत का यह संचयन इस अनूठे व्यक्ति के सोच-विचार की नई परतें सहजता से खोलेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।" —अशोक वाजपेयी
Janwar Aur Unka Bhojan
- Author Name:
Varen Nocks
- Book Type:

- Description:
पेड़-पौधों को खाकर जीनेवाले जानवर कौन-से होते हैं कीड़े-मकोड़े हमारे लिए क्या करते हैं अलग-अलग जानवरों के दाँत पैर आदि किस तरह अलग-अलग होते हैं। मौसमों के अनुसार हमें कौन से पक्षी कीड़े आदि दिखाई देते हैं और इसी तरह के ढेरों प्रश्नों के जवाब बच्चे चित्रों की सहायता से इस पुस्तक में पाएँगे। पानी के प्राणियों के साथ पानी और उसके विभिन्न रूपों पर भी एक अध्याय है और पृथ्वी के विषय में जानकारी देनेवाली कुछ सामग्री भी इस पुस्तक में रखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अपने आसपास के परिवेश के विषय में वैज्ञानिक जानकारी देना है। सरल प्रयोगों प्रश्न-अभ्यासों और ‘स्वयं करके देखो’ जैसी प्रविधियों से प्रयास किया गया है कि यह ज्ञान बच्चों की सोच का हिस्सा बन जाए और वे आगे चलकर विज्ञान सम्मत सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
Ped-Paudhe Aur Jeev-Jantu
- Author Name:
Varen Nocks
- Book Type:

- Description:
छोटे स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई यह पुस्तक उन्हें प्रकृति,पेड़-पौधों जीव-जन्तुओं और वर्षा आँधी जैसी घटनाओं के बारे में आरम्भिक जानकारी देती है। चित्रों की सहायता से कहीं कहानी की तरह तो कहीं घर में किए जा सकनेवाले प्रयोगों के माध्यम से यह बच्चों को उनके आसपास के परिवेश का वैज्ञानिक बोध कराती है। दिशाएँ क्या हैं, उन्हें कैसे पहचानें, आकाश में ध्रुवतारे, सूरज, चाँद आदि के बारे में सरल शब्दों में बताया गया है जिससे बालक अपनी आरम्भिक जिज्ञासाओं को भविष्य के लिए वैज्ञानिक सोच की तरफ़ मोड़ सकें। आभास के लिए सरल प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बच्चे अकेले या अपने साथियों के साथ दिलचस्प खेल भी खेल सकते हैं।
Social Concepts in Rural India
- Author Name:
Dr. Abhishek Chauhan +2
- Book Type:

- Description:
This book on Rural Development in India comprises of eight units which focus to reconstruct the importance of villages in India since time immemorial. The authors have very well tried their level best to provide a historical and conceptual clarity on various aspects of Indian villages. The authors have discussed about the types and characteristics of Indian villages with focus on theoretical concepts like—Sanskritisation, Westernisation, Globalisation, Tribe-Caste-Continum. Focus has also been made on the practice of Jajmani System within the Indian villages. Above all the well-defined and chronological sequence of Indian village studies has been explained in this book.
Sadak Se Sansad Tak
- Author Name:
Shivanand Tiwari
- Book Type:

- Description:
लोहिया, जेपी, किशन पटनायक, रामानन्द तिवारी, कर्पूरी ठाकुर वाली परम्परा के ही नेता हैं शिवानंद तिवारी। जितना लम्बा उनका राजनीतिक जीवन है आज की राजनीति में कम लोगों का है। वे गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई राजनीति करते रहे हैं और सन् पैंसठ के पहले से सक्रिय हैं। बाबा के नाम से विख्यात शिवानन्द जी के पास अनुभव, किस्सों और प्रत्यक्ष देखी घटनाओं का सम्भवत: सबसे बड़ा खजाना है। वे साठ के दशक के आखिर में शुरू हुए अंग्रेजी हटाओ आन्दोलन वाले दौर से सक्रिय रहे हैं और चौहत्तर के जेपी आन्दोलन के अगुआ लोगों में हैं। उन्होंने किशन पटनायक के साथ लोहिया विचार मंच और समता संगठन की राजनीति की और उनसे अलग होकर भी उनकी वैचारिक और व्यावहारिक राजनीति के पाठ से अलग नहीं हुए। इन भाषणों और टिप्पणियों से उनके चिन्तन का दायरा और दिशा झलकती है। साफ लगता है कि भूमंडलीकरण और साम्प्रदायिक राजनीति उनकी चिन्ता के केन्द्र में है। शिवानंद जी के इन भाषणों में किसानों की आत्महत्या, बुनकरों की भुखमरी और आत्महत्या, पेटेंट रीजीम से होने वाली मुश्किलों और उसकी कानूनी लड़ाई, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा गरीबों का भोजन बढ़ाने से महँगाई आने के कुतर्क की आलोचना, किसानों के खेती छोड़ने पर टिप्पणी है। और इसमें से काफी चीजों के लिए नई आर्थिक नीतियों को दोषी बताया गया है। यह आलोचना सही थी और यह किताब का महत्त्व है क्योंकि भूमंडलीकरण के पूरे दौर में कहीं से संसद के अन्दर इन नीतियों की आलोचना नहीं हुई।
Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
- Book Type:

- Description:
"जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया। जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया। उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।
The Little Book of Rumi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
- Author Name:
J.B. Kriplani
- Book Type:

- Description:
अनेक दूसरे लोगों की तरह मैं भी विदेशी साम्राज्यवाद के जुए से मातृभूमि को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी आंदोलन से करीब से जुड़ा था। गांधीजी जब सन् 1915 के शुरू में दक्षिण अफ्रीका से आए तो उनके निकट संपर्क में आने वाला मैं पहला राजनीतिक कार्यकर्ता था। मैं उनके पहले सत्याग्रह आंदोलन के साथ भी करीब से जुड़ा था, जो चंपारण (बिहार) में गोरे निलहों के अत्याचार के खलाफ हुआ। हमारी आजादी की लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण और बेचैनी वाले दौर में मैं कांग्रेस का बारह वर्ष तक महामंत्री रहा। जिस साल देश को आजादी मिली, उस वक़्त मैं कांग्रेस अध्यक्ष था। मेरे दोस्तों को लगता है कि हमारे राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में मेरी जानकारी काफी अंतरंग और नई चीजें सामने लाने वाली होगी। इस कारण मेरे संस्मरणों का कुछ ऐतिहासिक महत्व होगा। इसलिए मैंने जो कुछ लिखा है, उसमें अपने बारे में कम लिखकर हमारी आजादी की लड़ाई पर ज्यादा लिखा है। इस पुस्तक को मैंने ‘माई टाइम्स : मेरा दौर’ नाम दिया है, पर इसमें ‘मैं’ का जिक्र उतना ही भर है, जितना जरूरी है। मेरे जीवन की कथा में भी कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का बड़ा हिस्सा समाया हुआ है। इसलिए यह कोई आत्मकथा न होकर, इन बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड भी है और इनका वर्णन करते हुए मैंने यह जिक्र कम किया है कि मैंने क्या-क्या किया, बल्कि यह बताने की कोशिश की है कि मैंने तब क्या देखा और समझा।
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
J.B. Kriplani
20% off₹ 900
₹ 720
Available
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book