JHARKHAND KE VEER SHAHEED
About the book
झारखंड की रत्नगर्भा धरती पर अनेक ऐसे वीरों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने मातृभूमि की आन-बान-शान और सम्मान के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दे दी है। उन्हीं वीर-सपूतों में शीर्ष स्थान पर सितारों की भाँति स्थापित हो चुके हैं--रघुनाथ महतो, तिलका माँसी, तेलंगा खड़िया, अर्जुन सिंह, जग्गू दीवान, कुर्जी मानकी, पोटो सरदार, गोनो पिंगुआ, बुधु भगत, इकुर विश्वनाथ शाहदेव, पांडेय गणपत राय, टिकैत उमराँव सिंह, शेख भिखारी, सिदो, कान्हू, चाँद, भेरव, फूलो, झानो, बिरसा मुंडा, गया मुंडा, जतरा टाना भगत आदि। देश की स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं बलिदानी सपूतों की वीर गाथाओं को सँजोने का प्रयास है। इस पुस्तक में जिन वीर-सपूतों की जीवन गाथा का बखान किया गया है, वे निश्चित रूप से अत्यंत साधारण थे, किंतु उन्होंने अपने 'सादा जीवन, उच्च विचार' की शैली में असाधारण कार्य कर न केवल देशवासियों, अपितु सात समुंदर पार से भारत में आकर सत्ता के शीर्ष पर बैठनेवाले सर्वशक्ति-संपनन अंग्रेजों को भी चकित-विस्मित कर दिया। प्रस्तुत पुस्तक उन वीर शहीदों के जीवन के कई अनुछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जिनसे जनसाधारण अभी तक अनभिनज्ञ रहा है । जहाँ तक इतिहासकारों की दृष्टि भी पहुँच नहीं पाई है, किंतु मान्यताओं, किंवदंतियों, लोककथाओं और लोकगीतों के रूप में आम झारखंडवासियों के दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ते रहे हैं। देश और समाज के भूले-भटके लोगों को राह दिखाने के लिए प्रकाश-स्तंभ स्थापित करने का विनम्र प्रयास है पुस्तक ' झारखंड के वीर शहीद '।
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About the Book
झारखंड की रत्नगर्भा धरती पर अनेक ऐसे वीरों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने मातृभूमि की आन-बान-शान और सम्मान के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दे दी है। उन्हीं वीर-सपूतों में शीर्ष स्थान पर सितारों की भाँति स्थापित हो चुके हैं--रघुनाथ महतो, तिलका माँसी, तेलंगा खड़िया, अर्जुन सिंह, जग्गू दीवान, कुर्जी मानकी, पोटो सरदार, गोनो पिंगुआ, बुधु भगत, इकुर विश्वनाथ शाहदेव, पांडेय गणपत राय, टिकैत उमराँव सिंह, शेख भिखारी, सिदो, कान्हू, चाँद, भेरव, फूलो, झानो, बिरसा मुंडा, गया मुंडा, जतरा टाना भगत आदि। देश की स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं बलिदानी सपूतों की वीर गाथाओं को सँजोने का प्रयास है। इस पुस्तक में जिन वीर-सपूतों की जीवन गाथा का बखान किया गया है, वे निश्चित रूप से अत्यंत साधारण थे, किंतु उन्होंने अपने 'सादा जीवन, उच्च विचार' की शैली में असाधारण कार्य कर न केवल देशवासियों, अपितु सात समुंदर पार से भारत में आकर सत्ता के शीर्ष पर बैठनेवाले सर्वशक्ति-संपनन अंग्रेजों को भी चकित-विस्मित कर दिया। प्रस्तुत पुस्तक उन वीर शहीदों के जीवन के कई अनुछुए पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जिनसे जनसाधारण अभी तक अनभिनज्ञ रहा है । जहाँ तक इतिहासकारों की दृष्टि भी पहुँच नहीं पाई है, किंतु मान्यताओं, किंवदंतियों, लोककथाओं और लोकगीतों के रूप में आम झारखंडवासियों के दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ते रहे हैं। देश और समाज के भूले-भटके लोगों को राह दिखाने के लिए प्रकाश-स्तंभ स्थापित करने का विनम्र प्रयास है पुस्तक ' झारखंड के वीर शहीद '।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 250 grams
- ISBN-13
- 9789355620101
- Pages
- 192
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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