HINDI CINEMA : SARTHAKTA KI TALASH
(0)
₹
170
₹ 139.4 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Book based on hindi cinema
Read moreAbout the Book
Book based on hindi cinema
Book Details
-
ISBN9789388799089
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Aakarshan ka Niyam
- Author Name:
William Walker Atkinson
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nayi Samiksha
- Author Name:
Amrit Rai
- Book Type:

Pravas Aur Pravas
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

- Description: कृष्ण बलदेव वैद हमारे वरिष्ठ लेखकों में बिरले हैं जिन्होंने साहित्य की अनौपचारिक विधाओं जैसे—डायरी, पत्र और संवाद में निरन्तर नवाचार किया है। इनमें उनकी बेबाकी, साफगोई, आत्मालोचन, विडम्बना-बोध आदि सब ज़ाहिर होते हैं। यह लम्बा संवाद उसी सिलसिले में है। जीवन और साहित्य दोनों को लम्बे समय से साधने की कोशिश में लगे वैद के अनुभव और विचार का रेंज बहुत व्यापक है और वे अपने समय, समाज, अध्ययन, लेखन, मित्रों, साहित्यिक और सांस्कृतिक स्थिति और तनावों आदि पर जो कहते हैं, वह एक साथ उन्हें समझने और हमारे समय में लेखक की स्थिति और विडम्बना को समझने में हमारी मदद करता है। इस लम्बे संवाद को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। — अशोक वाजपेयी
Dr. A.P.J. Abdul Kalam
- Author Name:
Sachin Sinhal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sherlock Holmes Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Sir Arthur Conan Doyle
- Book Type:

- Description: होम्स ने घंटी बजाते हुए जवाब दिया, ‘‘कुछ ठंडा मीट और एक गिलास बियर हो जाए, मैं इतना व्यस्त था कि मैं खाने के बारे में सोच भी न सका और मेरी आज की शाम के भी व्यस्त रहने की संभावना है। डॉक्टर, मुझे तुम्हारे साथ की जरूरत होगी।’’ ‘‘मुझे इसमें खुशी होगी।’’ ‘‘तुम्हें कानून तोड़ना बुरा तो नहीं लगेगा?’’ ‘‘बिलकुल नहीं।’’ ‘‘गिरफ्तार होने की संभावना से भी नहीं?’’ ‘‘अच्छे कारण के लिए, बिलकुल नहीं।’’ ‘‘हाँ, कारण तो बहुत ही अच्छा है।’’ ‘‘तब तो मैं तुम्हारा ही आदमी हूँ।’’ ‘‘मुझे यकीन था कि मैं तुम पर भरोसा कर सकता हूँ।’’ ‘‘मगर, तुम चाहते क्या हो?’’ —इसी संग्रह से शेरलॉक होम्स की कहानियाँ दुनिया भर में जासूसी और साहसिक कारनामों के लिए जानी जाती हैं। कहानी के अंत तक रोमांच तथा सस्पेंस बना रहता है। बेहद पठनीय एवं रोमांच से भरपूर सर आर्थर कॉनन डॉयल सृजित पात्र शेरलॉक होम्स की लोकप्रिय कहानियों का पठनीय संग्रह।
BPSC TRE 4.0 Bihar Shikshak Bahali Class 11 To 12 Geography (Bhugol) Higher Secondary School Teacher | 20 Practice Sets with Latest Solved Papers | Based on NCERT & SCERT Syllabus - Book in Hindi
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Rating:
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Alfred Nobel
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
BPSC Bihar Shikshak Bahali Class 9 To 10 Samajik Vigyan 20 Practice Sets Based on SCERT And NCERT With Latest Solved Paper Tre 4.0
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The First Indian Astronaut—Capt. Rakesh Sharma: A Complete Biography
- Author Name:
Harsha Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
KHATTE-MEETHE PHAL
- Author Name:
RAMKESH
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mahatma Gandhi - Pratham Darshan : Pratham Anubhuti
- Author Name:
Shanker Dayal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Annihilation of Caste
- Author Name:
DR. B.R. Ambedkar
- Book Type:

- Description: Annihilation of Caste is an undelivered speech written in 1936 by B. R. Ambedkar, an Indian academic turned politician. He wrote Annihilation of Caste for the 1936 meeting of a group of liberal Hindu caste reformers in Lahore. After reviewing the speech’s controversiality, conference organizers revoked Ambedkar’s invitation. He then self-published the work. The work is considered a classic and is being re-evaluated time and again.
Mahatma
- Author Name:
Manu Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vayumandaleeya Pradooshan
- Author Name:
Harinarayan Srivastava
- Book Type:

-
Description:
वायुमंडलीय प्रदूषण आज जिस तरह सघन होता जा रहा है, उससे पृथ्वी, प्रकृति और सम्पूर्ण जीवन-जगत को गम्भीर ख़तरा पैदा हो गया है। इसके मूल कारणों में हैं—तीव्र होता जा रहा शहरीकरण, अनियंत्रित औद्योगिक विकास और बढ़ती हुई आबादी।
डॉ. हरिनारायण श्रीवास्तव की यह पुस्तक पर्यावरण अथवा वायुमंडल-प्रदूषण की गम्भीर समस्या का वैज्ञानिक अध्ययन है। अपने अध्ययन-क्षेत्र के विशिष्ट विद्वान डॉ. श्रीवास्तव ने पूरी पुस्तक को आठ अध्यायों में बाँटा है। पहले अध्याय में वायुमंडल, जलवायु और वायुविलय सम्बन्धी जानकारी है। दूसरे में मौसम और प्रदूषण-मापक आधुनिक उपकरणों का विवरण है। तीसरे, चौथे और पाँचवें अध्याय में वायु, जल तथा ध्वनि-प्रदूषण के प्रभाव, उनके नियंत्रण आदि की चर्चा है। छठे में क्लोरोफ़्लूरो कार्बन के ओजोन परत पर पड़ रहे दुष्प्रभाव और उसकी प्रक्रिया को समझाया गया है। सातवें अध्याय में अम्ल-वर्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है, तथा आठवें में तापमान, वर्षा, पवनगति, सौर-विकिरण एवं कृषि आदि पर निरन्तर बढ़ती जा रही कार्बन डाइऑक्साइड एवं विरल गैसों के सम्भावित दुष्प्रभावों का विवेचन किया गया है। परिशिष्ट में दिए गए कुछ महत्त्वपूर्ण अध्ययन-निष्कर्षों तथा प्रत्येक अध्याय में यथास्थान शामिल विभिन्न तालिकाओं और रेखाचित्रों ने इस पुस्तक की उपयोगिता में और बढ़ोतरी की है।
कहना न होगा कि वर्तमान सभ्यता पर मँडराते सर्वाधिक घातक ख़तरे के प्रति आगाह करनेवाली यह कृति एक मूल्यवान वैज्ञानिक अध्ययन है।
HUM SURAKSHIT KAISE RAHEN
- Author Name:
Ram Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Subhash Chandra Bose Ki Adhoori Atmkatha
- Author Name:
Sisir Kumar Bose +1
- Book Type:

- Description: सुभाषचंद्र बोस की ‘भारत की खोज’, जवाहरलाल नेहरू की तुलना में उनके जीवन में काफी पहले ही हो गई, यानी उन दिनों वे अपनी किशोरावस्था में ही थे। वर्ष 1912 में पंद्रह वर्षीय सुभाष ने अपनी माँ से पूछा था, ‘स्वार्थ के इस युग में भारत माता के कितने निस्स्वार्थ सपूत हैं, जो अपने निजी स्वार्थ को त्याग कर इस आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं? माँ, क्या तुम्हारा यह बेटा अभी तैयार है?’’ 1921 में भारतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देकर वह आजादी की लड़ाई में कूदने ही वाले थे कि उन्होंने अपने बड़े भाई शरत को पत्र लिखा, ‘‘केवल बलिदान और कष्ट की भूमि पर ही हम अपने राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।’’ दिसंबर 1937 में बोस ने अपनी आत्मकथा के दस अध्याय लिखे, जिसमें 1921 तक की अपनी जीवन का वर्णन किया था और ‘माई फेथ-फिलॉसोफिकल’ शीर्षक का एक चिंतनशील अध्याय भी था। सदैव ऐसा नहीं होता कि जीवन के बाद के समय में लिखे संस्मरणों को शुरुआती, बचपन के दिनों की प्राथमिक स्रोत की सामग्री के साथ पढ़ा जाए। बोस के बचपन, किशोरावस्था व युवावस्था के दिनों के सत्तर पत्रों का एक आकर्षक संग्रह इस आत्मकथा को समृद्ध बनाता है। इस प्रकार यह ऐसी सामग्री उपलब्ध कराता है, जिसकी सहायता से उन धार्मिक, सांस्कृतिक, नैतिक, बौद्धिक तथा राजनीतिक प्रभावों का अध्ययन किया जा सकता है, जिनसे भारत के इस सर्वप्रथम क्रांतिधर्मी राष्ट्रवादी के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण हुआ।
Mother
- Author Name:
Maxim Gorky
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
CHANAKYA KE MANAGEMENT SOOTRA
- Author Name:
Mamta Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
MAHARSHI ARVIND
- Author Name:
Meena Manishika
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kya Likhoon? Kya Likhoon?
- Author Name:
Dr. Babita "Kiran"
- Book Type:

- Description: "‘क्या लिखूँ, क्या लिखूँ’ मेरी द्वितीय पुस्तक है। इस पुस्तक को लिखने की यात्रा बहुत रोचक रही है। सर्वप्रथम तो लिखने से पहले मन में कई प्रश्न उठ रहे थे, जैसे कि किस विधा में लिखूँ, किस विषय पर लिखूँ? पर्यावरण पर लिखूँ, भ्रूण हत्या पर लिखूँ या जल की समस्या पर लिखूँ। दिल कह रहा था, सब विषयों पर लिख दो, परंतु दिमाग सहमत नहीं था। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? मन मस्तिष्क के इस द्वंद्व में समय गुजरता जा रहा था। इसी बीच मैं बिटिया खुशी, जो मेरी प्रथम श्रोता है, से भी निरंतर पूछ रही थी कि क्या लिखूँ? आखिरकार एक दिन वह कह उठी, अरे मम्मी, क्या लिखूँ पर ही लिखो आप। तत्पश्चात् एक निरंतर कविता का जन्म हुआ, जो क्या लिखूँ के रूप में आपके समक्ष है। एक लेखक की जिम्मेदारी को निभाते हुए मैंने प्रयास किया है कि अपनी पुस्तक ‘क्या लिखूँ’ के माध्यम से मैं समाज में व्याप्त समस्याओं, मनुष्य के कर्तव्य, इतिहास, भूगोल, संस्कृति, आतंक सभी विषयों पर आप सभी का ध्यान आकर्षित कर सकूँ। कुछ पंक्तियाँ देखिए— शहर शहर कूड़े का पहाड़ लिखूँ संक्रमण, बदबू की दहाड लिखूँ फेफड़ों को मिलती हवा दूषित लिखूँ या पशु-पक्षी भी कुपोषित लिखूँ पर्यावरण की व्यथा लिखूँ या गाडिय़ाँ दौड़ाने की प्रथा लिखूँ सोचती हूँ मैं क्या लिखूँ? इसमें कहाँ तक सफल हो पाई हूँ, यह पाठक वर्ग ही बता सकता है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है मुझे कि आपको मेरी यह पुस्तक पसंद आएगी।"
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book