Chhand Chhand Par Kumkum
(0)
Author:
Shri Wagish ShuklaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Health-fitness-nutrition₹
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पाठ, टीका आदि की अनेक नयी विधियाँ भारतीय प्रसंड्भ में प्राकु-आधुनिक हूँ, भले इधर वे हिन्दी आलोचना के परिसर से बाहर ही रहती आयी हूँ । 'राम की शक्तिपूजा' की यह टीका निराला की कविता को उसकी पूरी अर्थाभा, आशयों और अन्तर्ध्वनियाँ में, समकालीन सन्दर्भों और पारम्परिक स्मृति के अत्यन्त सर्जनात्मक रसायन के रूप में पुनरायत्त करने का अवसर सुलभ कराती है। प्रकारान्तर से यह टीका सत्यापित करती है कि निराला की आधुनिक संवेदना में परम्परा के कितने सन्दर्भो-स्मृतियाँ और अन्तर्भावाँ का गुम्फन और पुनराविष्कार है। उसका एक अघोषित किन्तु असन्दिग्ध प्रतिपाद्य यह भी है कि श्रेष्ठ आधुनिकता के स्थापत्य में परम्परा की अनेक तहाँ और घटित स्तराँ का आधार है; यह भी कि प्रश्नाकुलता आधुनिकता भर का नहीं, हमारे यहाँ परम्परा का भी स्वभाव रहा है।
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पाठ, टीका आदि की अनेक नयी विधियाँ भारतीय प्रसंड्भ में प्राकु-आधुनिक हूँ, भले इधर वे हिन्दी आलोचना के परिसर से बाहर ही रहती आयी हूँ । 'राम की शक्तिपूजा' की यह टीका निराला की कविता को उसकी पूरी अर्थाभा, आशयों और अन्तर्ध्वनियाँ में, समकालीन सन्दर्भों और पारम्परिक स्मृति के अत्यन्त सर्जनात्मक रसायन के रूप में पुनरायत्त करने का अवसर सुलभ कराती है।
प्रकारान्तर से यह टीका सत्यापित करती है कि निराला की आधुनिक संवेदना में परम्परा के कितने सन्दर्भो-स्मृतियाँ और अन्तर्भावाँ का गुम्फन और पुनराविष्कार है।
उसका एक अघोषित किन्तु असन्दिग्ध प्रतिपाद्य यह भी है कि श्रेष्ठ आधुनिकता के स्थापत्य में परम्परा की अनेक तहाँ और घटित स्तराँ का आधार है; यह भी कि प्रश्नाकुलता आधुनिकता भर का नहीं, हमारे यहाँ परम्परा का भी स्वभाव रहा है।
Book Details
-
ISBN9789355212504
-
Pages324
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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