Satrangi Dastarkhwan
(0)
Author:
Geet Chaturvedi, Vandana Rag, Sumana Roy, Kunal RayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
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आदिम इच्छाओं में भूख शामिल होती है। मन और शरीर की गहन ज़रूरत की तरह। यह किताब उस इच्छा को सम्मानित करती हुई इस बात की भी खोज करती है कि सभ्यता के विकास के साथ-साथ खाने की संस्कृति का भी क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विकास कैसे और क्योंकर हुआ। आज वैज्ञानिक, इतिहासकार और पाककला-विशेषज्ञ खाने के ज़रिये सभ्यताओं-संस्कृतियों की कहानी भी रोशनी में लाने लगे हैं। इस ज़रूरी दस्तावेज़ीकरण से खाने के इतने डायनमिक्स अनावृत हो गए कि अचम्भा होता है। उसी अचम्भे की बानगी है यह ‘सतरंगी दस्तरख़्वान’। भारत के सुदूर कोनों के इतिहास, विरासत, क्षेत्रीय प्रभावों और मिलीजुली संस्कृतियों से उपजी यादों से बनी यह किताब जहाँ एक ओर गोवा में प्रचलित पावरोटी की कहानी कहती है तो दूसरी ओर कलकत्ता के निराले रसोइये की कहानी भी। यहाँ सन्देश जैसी बंगाली मिठाई की कहानी एक परिवार के इतिहास से निकलकर समकाल की सामाजिक कहानी हो जाती है। अमृतसर से इंग्लैंड और असम से चेन्नई तक अपने कलाकारों, लेखकों को कैसे अपने खाने से सींचते-सँजोते हैं यह भी दर्ज है यहाँ। फिर लंगर जब इक्कीसवीं सदी में प्रतिरोध का स्वर बन जाए और साधारण दाल-भात अपने समय पर टिप्पणी करने लगें तब खाने के इस आर्काइवल महत्त्व को बखूबी जाना और समझा जा सकता है। बहुआयामी आस्वादों से भरी इस किताब में खाने की बायोग्राफी के बहाने कलाकारों, लेखकों, ऐक्टिविस्टों के धड़कते दिलों की कहानी भी है जिनके संग चलते-चलते हम चमत्कृत यात्री अपना देश घूम लेते हैं। असाधारण रूप से पठनीय एक किताब
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आदिम इच्छाओं में भूख शामिल होती है। मन और शरीर की गहन ज़रूरत की तरह। यह किताब उस इच्छा को सम्मानित करती हुई इस बात की भी खोज करती है कि सभ्यता के विकास के साथ-साथ खाने की संस्कृति का भी क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विकास कैसे और क्योंकर हुआ। आज वैज्ञानिक, इतिहासकार और पाककला-विशेषज्ञ खाने के ज़रिये सभ्यताओं-संस्कृतियों की कहानी भी रोशनी में लाने लगे हैं। इस ज़रूरी दस्तावेज़ीकरण से खाने के इतने डायनमिक्स अनावृत हो गए कि अचम्भा होता है। उसी अचम्भे की बानगी है यह ‘सतरंगी दस्तरख़्वान’।
भारत के सुदूर कोनों के इतिहास, विरासत, क्षेत्रीय प्रभावों और मिलीजुली संस्कृतियों से उपजी यादों से बनी यह किताब जहाँ एक ओर गोवा में प्रचलित पावरोटी की कहानी कहती है तो दूसरी ओर कलकत्ता के निराले रसोइये की कहानी भी। यहाँ सन्देश जैसी बंगाली मिठाई की कहानी एक परिवार के इतिहास से निकलकर समकाल की सामाजिक कहानी हो जाती है। अमृतसर से इंग्लैंड और असम से चेन्नई तक अपने कलाकारों, लेखकों को कैसे अपने खाने से सींचते-सँजोते हैं यह भी दर्ज है यहाँ। फिर लंगर जब इक्कीसवीं सदी में प्रतिरोध का स्वर बन जाए और साधारण दाल-भात अपने समय पर टिप्पणी करने लगें तब खाने के इस आर्काइवल महत्त्व को बखूबी जाना और समझा जा सकता है।
बहुआयामी आस्वादों से भरी इस किताब में खाने की बायोग्राफी के बहाने कलाकारों, लेखकों, ऐक्टिविस्टों के धड़कते दिलों की कहानी भी है जिनके संग चलते-चलते हम चमत्कृत यात्री अपना देश घूम लेते हैं। असाधारण रूप से पठनीय एक किताब
Book Details
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ISBN9788119159222
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
Saahi & Sudhir
- Author Name:
Yogita Warde
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“साही '&' सुधीर” दोस्ती, प्रेम और आकर्षण पर आधारित उपन्यास है। यह उपन्यास सभी पीढ़ियों को अपने समय, जीवन और कहानीसे वाकिफ कराता है, यह एक प्यारी सी कहानी है जिसमें साही और सुधीर बचपन के दोस्त हैं। सुधीर पेंटिंग बनाता है और साहीलेखिका है, जब साही सुधीर के जीवन में आयी तब उसने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन कुछसमय बाद सुधीर और साही दोनों को एहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है, फिर क्याहोता है? क्या वे फिर कभी मिलेंगे? क्या वे अपने प्यार का इजहार करेंगे? क्या पेंटिंग और लेखन दोनों का आपस में जुड़ पाते हैं? ऐसेबहुत से सवाल हैं, और जवाब के लिए आपको "साही '&' सुधीर” उपन्यास पढ़ना होगा। यह उपन्यास आपके दैनिक जीवन के साथआसानी से जुड़ सकता है। इस उपन्यास में स्कूली जीवन, दोस्ती और अलगाव के कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं जो हर किसी को यहसोचने पर मजबूर करते हैं कि अब आगे क्या होगा, हिंदी साहित्य में लेखिका की यह सर्वश्रेष्ठ पहली रचना है एक परिपक्व कलमआपकी समीक्षाओं के साथ-साथ आलोचना की भी प्रतीक्षा कर रही है, ताकि अगले उपन्यास में आपके सामने और बेहतर काम किया जा सके।
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