Virat Kohli : A Complete Biography | An Indian International Crickter
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Author:
Pushkar KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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This book takes you into the extraordinary Life of a cricketer who redefined the spirit of the game and captured the hearts of millions. From his early days as a determined boy in Delhi to becoming one of the greatest icons in international cricket, this is the story of grit, passion and relentless pursuit of excellence. Follow Virat's journey through his record-breaking performances, fearless leadership and unwavering commitment to fitness that revolutionised modern cricket. Witness the highs of his remarkable centuries, the challenges he faced both on and off the field and his transformation into a global superstar. But there's more to Virat than the fiery batsman we see on the pitch. This biography explores his personal triumphs, his deep bond with family and his inspiring transition from a cricketing prodigy to a symbol of resilience and determination. Packed with inspiration and riveting detail, this book paints a vivid portrait of a legend who continues to inspire, both in sport and in life.
Read moreAbout the Book
This book takes you into the extraordinary Life of a cricketer who redefined the spirit of the game and captured the hearts of millions.
From his early days as a determined boy in Delhi to becoming one of the greatest icons in international cricket, this is the story of grit, passion and relentless pursuit of excellence.
Follow Virat's journey through his record-breaking performances, fearless leadership and unwavering commitment to fitness that revolutionised modern cricket.
Witness the highs of his remarkable centuries, the challenges he faced both on and off the field and his transformation into a global superstar.
But there's more to Virat than the fiery batsman we see on the pitch. This biography explores his personal triumphs, his deep bond with family and his inspiring transition from a cricketing prodigy to a symbol of resilience and determination. Packed with inspiration and riveting detail, this book paints a vivid portrait of a legend who continues to inspire, both in sport and in life.
Book Details
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ISBN9789355628589
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Pages136
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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लेकिन दुर्भाग्य से यह आत्मकथा पूरी न हो सकी। अगर पूरी हो गई होती तो निश्चय ही यह हिन्दी में एक महत्त्वपूर्ण आत्मकथा होती। ‘चित्रलेखा’, ‘भूले-बिसरे चित्र’, ‘रेखा’, ‘सबहिं नचावत राम गोसाईं’ जैसे उपन्यासों के रचनाकार भगवती बाबू ही यह कह सकते थे कि अपनी आत्मकथा वे दूसरों के मनोरंजन के लिए कह रहे हैं।
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- Description: अपने चेहरे पर अवध के देहातों की मासूमियत और होंठों पर हर वक़्त एक मेहमाननवाज मुस्कुराहट लिये, आँखों में हमेशा इन्तज़ार के चिराग़ जलाए, दोस्तों के क़दमों पर कान लगाए और कविता तथा शायरी को सीने से लगाए हुए शख़्स का नाम है ए.पी. मिश्र। 'सिफ़र से शिखर तक’ एक ऐसे शख़्स की कहानी है जो अपनी तहज़ीबी विरासत, संस्कारों और जद्दोजहद के बल पर अब एक शख़्सियत बन चुका है। गाँव की धूप-छाँव ने उनके चेहरे की शरीफ़ाना मासूमियत को बरकरार रखा है। ब्यूटीपार्लर कितनी ही तरक़्क़ी क्यों न कर जाए, लेकिन गाँव का अल्हड़पन और सादा-मिज़ाजी उसका मुक़द्दर नहीं बन सकती। महात्मा-मिज़ाज शायर अंगद जी महाराज की क़ुरबत और सोहबत ने उन्हें उस मासूम बच्चे जैसा बना दिया, जो कभी कुंभ के मेले में खो जाता है और कभी महाकुंभ में मिल जाता है। लेकिन उस बच्चे के हाथ में खिलौने नहीं होते, उसके हाथों में होती है मीर, कबीर, तुलसी और ग़ालिब की अमानत। अपनी बेपनाह मसरूफ़ियतों के बावजूद ताज़ादम रहना, पराए ग़मों की चादर ओढ़े हुए मुस्कुराते रहना दुश्वार है, लेकिन ‘सिफ़र से शिखर तक’ के शिल्पकार का यही तो हुनर है कि वह जंगली फूलों से शहर को आबाद करना जानता है। अँधेरे से जंग करते हुए उसे कई दहाइयाँ गुज़र गई हैं, लेकिन आज तक न तो उसके हाथों में कँपकँपाहट है और न चेहरे पर थकान। यूँ तो कुछ लोग किताबें लिखते हैं और कुछ ख़ुद किताब होते हैं। उनके जीवन का हर दिन एक वरक़ होता है और हर बरस एक दास्तान। ऐसे ही लोगों को दुनिया सूफ़ी, सन्त और कलन्दर मान लेती है। ऐसे लोग दूसरों पर अहसान करके भी आँखें नीची रखते हैं। 'सिफ़र से शिखर तक’ एक सन्त-मिज़ाज की जीवनी है, लेकिन इस जीवनी के ढेर सारे पन्नों में ऐसे बहुत से चेहरे शामिल हैं, जो ए.पी. मिश्र को संजीवनी मान लेते हैं। काश, इसी क़तार में कहीं हम भी खड़े दिखाई दे जाएँ— तेरे अहसान की ईंटें लगी हैं इस इमारत में, हमारा घर तेरे घर से कभी ऊँचा नहीं होगा। —मुनव्वर राना
A Complete Biography Of Nick Vujicic : Become Your Own Miracle!
- Author Name:
Ashwini Bhatnagar
- Book Type:

- Description: Nicholas James Vujicic, famously known as Nick Vujicic, is a real-life ‘miracle man’ who, despite his severe disabilities, achieved impossible levels of success and fame. Australian-American Nick was born with extremely rare autosomal recessive congenital disorder which is characterized by the absence of arms and legs on human body. Nick’s parents were distressed by his condition, but Nick did not seem to mind it too much. He quickly adapted himself to doing things everyone does in daily life, and, as he grew older, charted a clear path for himself as a motivational speaker and Christian evangelist. He soon became an international icon with millions of fans and followers across the globe. Nick’s incredible journey is one of the rarest of rare inspirational life stories in which impossible odds were turned into deeply fulfilling successes. It will move you to strive for the next level of excellence in your own life.
Akela Aadmi (Kahani Nitish Kumar Ki)
- Author Name:
Sankarshan Thakur
- Book Type:

- Description: नीतीश कुमार सन् 1974 में विश्वविद्यालय में पढ़नेवाले एक युवा ही थे, तभी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ पटना की सड़कों पर जनांदोलन शुरू हो गया। आंदोलन बढ़ता गया और देश भर में फैल गया। छात्र, राजनेता, मजदूर और पुराने राजामहाराजा—सब आंदोलन में शामिल हो गए। इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर भारत के लोकतंत्र पर बड़ा आघात किया। युवा संकर्षण ठाकुर तब स्कूल में ही पढ़ते थे और इन घटनाओं को चुपचाप देखा करते थे। वह समय, जब जनता आदर्शवाद के सपने देखने लगी थी, गुजर गया, उसके बाद दशक गुजर गए और सारे सपने राख हो गए। हालाँकि उस राख से एक ऐसा नेता निकला, जिसने बिहार का स्वरूप बदल दिया और उसे देश की सबसे संपन्न अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करा दिया। बिहार में लालूप्रसाद यादव के अंधकारमय, नैराश्यपूर्ण और अराजक शासन के बाद बिहार को नीतीश कुमार के रूप में सभ्य, आधुनिक और काम करनेवाला मुख्यमंत्री मिला। उनके नेतृत्व में बिहार ने हर क्षेत्र में जबरदस्त कामयाबी हासिल की। हालाँकि, उनकी इस यात्रा में कई कमियाँ भी हैं। क्या नीतीश कुमार सफल होंगे या असफल हो जाएँगे? नीतीश कुमार आज जो हैं, वो कैसे बने? वे हैं कौन? इस पुस्तक में समकालीन राजनीति के छलकपट, रिपोर्ताज, किस्सागो और विश्लेषण दिए गए हैं; जिनके बीच नीतीश कुमार देश के एक अँधेरे कोने से उभरे और पुंज बनकर चमके। संकर्षण ठाकुर ने नीतीश कुमार के जटिल व्यक्तित्व की परतें निपुणतापूर्वक और आकर्षक रूप से खोली हैं।
SHABDAPURUSH MANIKCHANDRA VAJPAYEE
- Author Name:
Prof. Sanjay Dwivedi +1
- Book Type:

- Description: राष्ट्रीय भावधारा के कुछ महत्त्वपूर्ण पत्रकारों का उल्लेख जब भी किया जाएगा, श्री माणिकचंद्र वाजपेयी का नाम उसमें अग्रणी है। उनका समूचा जीवन रचना, सृजन और संघर्ष का अभूतपूर्व उदाहरण है। वे अपनी वैचारिकता में बहुत स्पष्ट हैं और जीवन में उतने ही उदार व समावेशी। आजादी के बाद पत्रकारिता के अनेक नायक सामने आते हैं, जिनमें देश के सर्वांगीण विकास की तड़प दिखती है। इसी दौर में भारतबोध से जुड़ी पत्रकारिता का प्रारंभ भी होता है, जिसके नायक पं. दीनदयाल उपाध्याय हैं। ‘राष्ट्रधर्म’, ‘स्वदेश’ और ‘पाञ्चजन्य’ जैसे तीन प्रकाशनों के माध्यम से वे पत्रकारिता में भारतीयता की अलख जगाते हैं, जिससे राष्ट्रीय भावधारा के पत्रकारों की एक मालिका खड़ी हो जाती है। बाद में ‘युगधर्म’ और ‘तरुण भारत’ जैसे पत्रों और ‘हिंदुस्थान समाचार’ जैसी समाचार एजेंसी से यह भाव और प्रखरता से सामने आता है। यह आवश्यक है कि हम अपने ऐसे नायकों को याद करें और उनका पुण्य स्मरण भी करें। स्व. माणिकचंद्र वाजपेयी की जन्मशती के अवसर पर यह पुस्तक उनके बारे में महत्त्वपूर्ण संदर्भ देती है। उनके कुछ बहुत महत्त्वपूर्ण लेख इस पुस्तक में हैं, जो उनकी वैचारिकी के बारे में बताते हैं। साथ ही उनकी स्मृति को समर्पित कुछ लेख उनके जीवन और कृतित्व की बानगी भी देते हैं। आज जबकि भारतीय पत्रकारिता पर तमाम प्रश्न खड़े हो रहे हैं, ऐसे समय में मामाजी की याद बहुत स्वाभाविक और मार्मिक हो उठती है। —प्रो. संजय द्विवेदी महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
Hum Hashmat : Vol. 3
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

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Description:
‘हम हशमत’ हमारे समकालीन जीवन-फलक पर एक लम्बे आख्यान का प्रतिबिम्ब है। इसमें हर चित्र घटना है और हर चेहरा कथानायक। ‘हशमत’ की जीवन्तता और भाषायी चित्रात्मकता उन्हें कालजयी मुखड़े के स्थापत्य में स्थित कर देती है।
प्रस्तुत है ‘हम हशमत’ का तीसरा खंड। समकालीनों के संस्मरणों के बहाने, इस शती पर फैला हिन्दी साहित्य समाज, यहाँ अपने वैचारिक और रचनात्मक विमर्श के साथ उजागर है।
हिन्दी के सुधी पाठकों और आलोचकों ने ‘हम हशमत’ को संस्मरण विधा में मील का पत्थर माना था; ‘हम हशमत’ की विशेषता है तटस्थता। कृष्णा सोबती के भीतर पुख़्तगी से जमे ‘हशमत’ की सोच और उसके तेवर विलक्षण रूप से एक साथ दिलचस्प और गम्भीर हैं। नज़रिया ऐसा कि एक समय को साथ-साथ जीने के रिश्ते को निकटता से देखे और परिचय की दूरी को पाठ की बुनत और बनावट में जज़्ब कर ले। ‘हशमत’ की औपचारिक निगाह में दोस्तों के लिए आदर है, जिज्ञासा है, जासूसी नहीं। यही निष्पक्षता नए-पुराने परिचय को घनत्व और लचक देती है और पाठ में साहित्यिक निकटता की दूरी को भी बरकरार रखती
है।अपनी ही आत्मविश्वासी आक्रामकता की रौ और अभ्यास में पुरुष-सत्ता द्वारा बनाए असहिष्णु साहित्य-समाज में एक पुरुष का अनुशासनीय बाना धरकर कृष्णा जी ने ‘हशमत’ की निगाह को वह ताक़त दी है जिसे सिर्फ़ पुरुष रहकर कोई मात्र पुरुष-अनुभव से सम्भव नहीं कर सकता, न ही कोई स्त्री, स्त्री की सीमाओं को फलाँगे बग़ैर साहित्य समाज की इस मानवीय गहनता को छू सकती है। ऐसा पाठ साहित्य और कलाओं में अर्द्धनारीश्वर की रचनात्मक सम्भावनाओं की ओर इंगित करता है।
‘हशमत’ के इस तीसरे खंड में शामिल हैं—सत्येन कुमार, जयदेव, निर्मल वर्मा, अशोक वाजपेयी, देवेन्द्र इस्सर, निर्मला जैन, विभूतिनारायण राय, रवीन्द्र कालिया, शम्भुनाथ, गिरधर राठी, आलोक मेहता और विष्णु खरे।
‘हम हशमत’ कृष्णा सोबती की क़लम की वह तुर्श और तीखी भंगिमा है, जो समय के पेचोख़म में सिर छुपाए बैठे मामूलीपन की आँख में सीधी जाकर लगती है।
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