UP TGT Vanijya 14 Practice Sets in Hindi Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Commerce Practice Book in Hindi)
Author:
Team PrabhatPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 180
₹
225
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789354880407
Pages: 198
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Duniya ke Mahan Chamatkar
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: दुनिया चमत्कारों से भरी है; इनमें कुछ चमत्कार मानव-निर्मित हैं, कुछ प्राकृतिक। मनुष्य की सदा से सहज चाह रही है कि वह कुछ नया करे, कुछ नया खोजे। उसकी इसी सहज वृत्ति ने हमारी दुनिया को चमत्कारों का पिटारा बना दिया। इन चमत्कारों में मिस्र के पिरामिड, ब्राजील का क्राइस्ट दि रिडीमर, भारत का ताजमहल, रूस का क्रेमलिन, कनाडा का सी.एन. टावर, अफ्रीका के नोरोनगोरो क्रेटर एवं सेरेंगेती, ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बेरियर रीफ, संयुक्त राज्य अमेरिका का माउंट रुशमोरे इत्यादि जैसे सैकड़ों चमत्कार शामिल हैं। ये चमत्कार केवल चमत्कार भर नहीं हैं, बल्कि उस स्थान और परिवेश की कला, संस्कृति, दर्शन और भौतिक-विशेषताओं के ध्वजवाहक भी हैं। इनमें दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता है। इन चमत्कारों के निर्माण के साथ-साथ इनके बारे में जाननेवालों की भी कमी नहीं है। जिज्ञासुओं और यायावरों की इसी जिज्ञासा पूर्ति हेतु इस पुस्तक की रचना की गई है। पुस्तक में दुनिया भर के सौ से अधिक मानव-निर्मित एवं प्राकृतिक चमत्कारों का सुरुचिपूर्ण और जीवंत विवरण दिया गया है। विवरण के साथ दिए गए चित्र पाठकों को सहज ही उस दुनिया से रूबरू करा देते हैं।
Best of Alhad Bikaneri
- Author Name:
Alhad Bikaneri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
FCI Non-Executive (Junior Engineer, Steno Evam Assistant Grade-III) Bharti Pareeksha Phase-I
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BHARTIYA VAYU SENA AIRMEN GROUP Y GAIR TAKNIKI TRADES PARIKSHA-2021 30 PRACTICE SETS (REVISED 2021)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sakshatkar : Kaise Hon Taiyar
- Author Name:
Shahroz
- Book Type:

- Description: फ़्रायड ने कहा है कि जब किरण फूटती है तो सवेरा होता है। वही महत्त्व संवाद का भी है कि जब कोई व्यक्ति बोलता है तो वह खुलता है। साक्षात्कार दरअसल नियोक्ता द्वारा उम्मीदवार को खोलने का ही प्रयास है जिससे वह पता लगाता है कि उम्मीदवार उनके संस्थान के लिए कितना समर्थ और योग्य है। यह पुस्तक साक्षात्कार की तकनीक पर केन्द्रित है, लेकिन इसका मूल स्वर आपके आत्मविश्वास को बढ़ाना है। साक्षात्कार के दौरान क्या कहना है, इसकी तैयारी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन कैसे कहना है, यह उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। यह पुस्तक युवा साथियों के सामने आनेवाली ऐसी कई दिक़्क़तों का हल बताती है। याद रखें—सफलता उन्हीं को मिलती है जिन्हें अपना लक्ष्य और उस तक पहुँचने का सही रास्ता मालूम होता है। इस रास्ते को सफलतापूर्वक तय कर लेना, बहुत बड़ा रहस्य या तिलिस्म नहीं है। अच्छी क्षमता होने के बावजूद अक्सर कुछ लोगों के क़दम डगमगा जाते हैं। इस पुस्तक का ध्येय यही है कि आप बिलकुल न डगमगाएँ।
Nand Chaturvedi Rachanawali : Vol. 1-4
- Author Name:
Pallav
- Book Type:

- Description: नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा लगभग एक शताब्दी की काव्य यात्रा है। औपनिवेशिक-सामंती भारत से भूमंडलीकृत-आधुनिक भारत की इस सुदीर्घ यात्रा में भाषा और रूप में भी पर्याप्त बदलाव देखे जा सकते हैं। ब्रजभाषा के पारम्परिक सवैयों से प्रारम्भ कर नंद चतुर्वेदी अपनी कविताओं को जिस छंदमुक्त लय में आधुनिक भावबोध के साथ रचते हैं वह हिन्दी काव्य भाषा के विकास का भी सुन्दर उदाहरण है। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के पहले खंड में कवि का समूचा काव्य संसार आ गया है जिसमें उनके सभी प्रकाशित संग्रहों में आई कविताओं के साथ-साथ अप्रकाशित रह गई अनेक कविताएँ और गीत-छंद इत्यादि हैं। कवि नंद चतुर्वेदी मनुष्य की स्वाधीनता और गरिमा की रक्षा के संकल्प के साथ उसके लिए तमाम अवसरों की उपलब्धता चाहते हैं। उनकी आकांक्षा है कि ये अवसर मनुष्य के सम्पूर्ण अभ्युदय के हों, उसके जीवन में सम्पूर्ण प्रकाश और तमाम उल्लासों के हों। वे मनुष्य होने की गरिमा के निर्वाह के लिए किसी भी लड़ाई के लिए तैयार हैं और उसके लिए लोकतंत्र को एक जरूरी उपाय मानते हैं। आकस्मिक नहीं कि औपनिवेशिक दासता के दौर से निकलकर भारतीय लोकतंत्र के बनने और उस पर हो रहे आघातों को वे अपनी कविताओं का विषय बनाते हैं। मनुष्य की स्वाधीनता में उन्हें धर्म जहाँ भी बाधक लगता है वे उसका मुँहतोड़ प्रतिकार करते हैं। इस बिन्दु पर वे बड़े सेक्युलर (सांसारिक) हो जाते हैं जो निर्भय होकर किसी भी सत्ता से भिड़ना जानता है। राजनीति वह क्षेत्र है जहाँ से नंद बाबू का कवि ऊर्जा ग्रहण करता है। वे आततायी राजनीति का चेहरा उघाड़ते हैं और मनुष्यधर्मी राजनीति की प्रस्तावना भी करते हैं। उनका स्वाधीन भारत के समाजवादी दलों से सीधा जुड़ाव भी रहा और वे किसी कार्यकर्ता की तरह आन्दोलनों, रैलियों और चुनावों में भागीदारी करते रहे। उनके ये जीवनानुभव जब कविताओं में रूपान्तरित होकर आते हैं तब नॉस्टेल्जिया उनकी कविताओं की रूढ़ि नहीं शक्ति प्रतीत होता है। युवा आलोचक पल्लव ने परिश्रमपूर्वक रचनावली का सम्पादन किया है। उनकी भूमिका कवि के कृतित्व को गहराई से जानने-समझने के लिए आकृष्ट करती है। नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा केवल कविताएँ लिखने तक सीमित नहीं थी। इस काव्य यात्रा में प्रभूत गद्य भी लिखा गया है। यह गद्य मोटे तौर पर दो प्रकार का है। चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य और स्मृतियों का गद्य। ‘रचनावली’ के दूसरे खंड में चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य संकलित कर लिया गया है। इस गद्य को पढ़ना नंद बाबू के काव्य सरोकारों को समझने का रास्ता देता है। ‘सप्त किरण’ शीर्षक से उन्होंने राजस्थान के कवियों की एक पुस्तक का सम्पादन भी किया था और इसे वे अस्तित्व रक्षा की संज्ञा देते थे। तो कहना न होगा कि अस्तित्व रक्षा के साथ प्रारम्भ हुआ आलोचना, सम्पादन और समीक्षा का यह सिलसिला पूरी शताब्दी तक नंद बाबू को सक्रिय बनाए रखता है। उन्होंने राजस्थान के हिन्दी कवियों के एक बड़े चयन का सम्पादन भी किया। गद्य लेखन नंद बाबू के लिए जीवनपर्यन्त आपद धर्म बना रहा। वे कवि थे और कविता के सम्बन्ध में निरन्तर विचार करना उन्हें प्रिय था। नंद बाबू कवि होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक विचार के समर्थक भी हैं। वे साहित्य को लोक शिक्षण का सस्ता औजार भले न मानते रहे हों तब भी उन्हें लोक रुचियों के विविध पक्षों पर लिखना जरूरी लगता था। उनके ऐसे ही निबन्धों की किताब ‘यह हमारा समय’ में उनके दो दर्जन से अधिक निबन्ध संकलित हैं जो हमारे जीवन और समय के विविध समकालीन पक्षों पर विचार करते हैं। नंद बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी विचारधारा का पक्ष चुना है लेकिन उनकी विचारधारा किसी गिरोहबन्दी से जन्म नहीं लेती। राजस्थान में सक्रिय रहे प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच के साथ उनका संवाद रहा। वे लघु पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे और उन्हें पढ़कर एक सजग पाठक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहे। उनके संस्मरण प्राय: राजस्थान के साहित्य से जुड़े उन लोगों पर होते थे जिनके अवदान से नई पीढ़ी अनभिज्ञ है। जिनमें पंडित गिरिधर शर्मा नवरत्न, हाड़ौती के कवि भैरूलाल कालाबादल, कवि प्रकाश आतुर के साथ-साथ जैनेन्द्र, श्यामाचरण दुबे, शिवमंगल सिंह सुमन, अश्क दम्पती, यशपाल, देवीलाल सामर, आलम शाह खान, युगलकिशोर चतुर्वेदी, कवि चित्रकार रामगोपाल विजयवर्गीय, भागीरथ भार्गव, कल्याणमल लोढ़ा और क़मर मेवाड़ी जैसे लेखक-साहित्यकार शामिल हैं। नंद बाबू राजस्थान में समाजवादी आन्दोलन के जमीनी सिपाहियों में रहे हैं। अपने साथियों पर लिखते हुए सम्बन्धों की ऊष्मा की आँच नंद बाबू पाठकों तक पहुँचाते हैं। हीरालाल जैन और नरेंद्रपाल सिंह जैसे अपने स्थानीय साथियों के अलावा देश में समाजवादी आन्दोलन के अगुआ रहे जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया पर भी उन्होंने लिखा। उनकी डायरी और अपने पत्रों में वे अपने निजी दायरे सार्वजनिक करते हैं। दो-टूक टिप्पणियाँ और निर्भीक कथन। इनमें बहुधा आत्मीयता का रस भी है तो बेहद निजी निराशाएँ भी। कथेतर की विभिन्न विधाओं में संकलित इस खंड में नंद चतुर्वेदी की रचनाशीलता के अनेक रूप विद्यमान हैं जो कवि के व्यापक दाय का प्रमाण बन गए हैं। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के चौथे और अन्तिम खंड में मुख्यत: कवि का अनुवाद कर्म है। नंद बाबू ने कविता और गद्य दोनों का अनुवाद किया। माना जाता है कि काव्यानुवाद बहुत मुश्किल साहित्य कर्म है क्योंकि अनुवादक ऐसा ही व्यक्ति होना चाहिए जो दोनों भाषाओं को ठीक से जानता हो। नंद बाबू ने साहित्यिक पत्रिकाओं के आग्रह पर काव्यानुवाद किये। ये काव्यानुवाद बहुत पुरानी प्राकृत की कविताओं के थे जो हाल कवि की गाथा सप्तशती से अंग्रेजी के रास्ते आए थे। ठीक इसी तरह कुछ संथाली कविताओं का अनुवाद भी उन्होंने किया जिन्हें अंग्रेजी में कवि सीताकांत महापात्र ने प्रस्तुत किया था। इन दोनों काव्यानुवादों में नंद बाबू की अपनी मेधा दिखाई देती है जो इन कविताओं की मूल संवदेना तक पाठकों को पहुँचाने में समर्थ है। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्रिका बिंदु और उस दौर की अनेक पत्रिकाओं के लिए साहित्य शास्त्र तथा साहित्य के अन्य प्रासंगिक विषयों पर लिखे प्रसिद्ध अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया। इस खंड में नंद बाबू द्वारा अनुवादित दो सम्पूर्ण कृतियाँ भी पढ़ी जा सकती हैं। ए. अप्पादुराई की एक अत्यन्त विचारोत्तेजक और महत्त्वपूर्ण किताब को उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद के लिए चुना। लगभग सवा दो सौ पृष्ठों की इस किताब का नाम था ‘भारतीय राजनीतिक चिन्तन’ जिसका अनुवाद नंद बाबू ने रघुवर दयाल के साथ मिलकर किया। 1990 में आई इस पुस्तक की गम्भीर सामग्री को जिस सहज और प्रभावी हिन्दी में नंद बाबू ने अनुवादित किया वह उनकी अद्भुत भाषिक क्षमता का उदाहरण है। दूसरी पुस्तक ‘दहेज पीड़ित महिलाएँ : एक अध्ययन’ लेखिका रंजना कुमारी की है जो भारत में महिला आन्दोलन में अग्रणी रही हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार से 1991 में छपी इस छोटी-सी किताब में उस दौर की दहेज समस्या का गम्भीरता से अध्ययन किया गया था। ये दोनों पुस्तकें हिन्दी अनुवाद के बाद और चर्चित हो गईं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में भी वे अनुवाद करते रहे। कभी कला प्रयोजन के सम्पादक हेमन्त शेष के आग्रह पर तो कभी और किसी पत्रिका के कहने पर। असल बात यही है कि साहित्य में जिस जीवन दृष्टि के लिए नंद बाबू संकल्पवान थे उसे बनाए रखने और गति देने के लिए अनुवाद भी एक जरूरी रास्ता लगता था।
Asha (Hindi)
- Author Name:
Shri Bhuvendra Tyagi
- Book Type:

- Description: जब हर तरफ दहशत हो, मायूसी हो, लाचारी हो, तो नाउम्मीदी के अँधेरे चारों ओर उग ही आते हैं। तब जरूरत होती है नई आशा की, जो इन अँधेरों को दूर करके मनोबल बढ़ाए और हालात से जूझने का जज्बा दिलाए। ‘आशा’ संग्रह की कविताएँ इसी रोशनी और संबल के प्रसार के लिए हैं। अंग्रेजी के 46 कवियों की 51 कविताओं के अनुवाद का यह कविता संग्रह कोरोना-काल ही नहीं, तमाम विषम परिस्थितियों में एक सच्चे दोस्त और शुभचिंतक की तरह हौसला बनाए रखने की ताकत देनेवाला है। माया एंजेलो की कालजयी कविता ‘फिर भी उठूँगी मैं’, रुडयार्ड किपलिंग की ‘अगर’, कैटी ए. ब्राउन की ‘खुद से हार कभी मत मानो’, जॉयस अलकांतारा की ‘देखोगे नहीं मुझे कभी हारते’, हेनरी वर्ड्सवर्थ लॉन्गफेलो की ‘जीवन-मंत्र’, लैंग्स्टन ह्यूजेस की ‘अब भी जंग में डटा हुआ हूँ’, थॉमस हार्डी की ‘आशा का गीत’, मैक्स एरमन की बहुचर्चित कविता ‘मनोकामनाएँ’ (डेसिडराटा) और बर्टन ब्रैली की ‘चाह जीत की’ जैसी ओजस्वी कविताएँ किसी के भी मन से निराशा दूर करके आशा जगाने और किसी भी निरुत्साही को उत्साह और उमंग से भरकर जीवन को सुंदर बनाने में सक्षम हैं। ये आशा जाग्रत् करने के लिए सहज, सरल, शाश्वत, सार्वभौमिक और सर्वकालीन कविताएँ हैं।
Railway Samanya Gyan (Vastunisth)
- Author Name:
Vivek Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Persian Hindi Dictionary : Vols. 1
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

-
Description:
फ़ारसी भाषा, हिन्दी की ही तरह, भारतीय आर्य भाषा उपकुल का एक भाग है। ईरान एवं भारत, दोनों कृषि–प्रधान देश रहे हैं। दोनों की संस्कृतियों में अनेक समानताएँ आज भी विद्यमान हैं। मुग़ल–पूर्व, मुग़ल और मुग़लोत्तर शासन के दौरान हिन्दुस्तान में फ़ारसी भाषा का प्रसार एवं प्रचार अपनी चरम सीमा पर था। कबीरदास, सूरदास, मलिक मुहम्मद जायसी जैसे हिन्दी के कालजयी महान कवियों ने फ़ारसी भाषा के अनेक शब्दों को अपनी भावाभिव्यक्ति का साधन बनाया और उनका रचनात्मक प्रयोग किया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि फ़ारसी ने हिन्दी साहित्य की रचनाधर्मिता पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फ़ारसी के अनेक शब्द ऐसे भी हैं, जिनका चलन आज ईरान में लगभग समाप्त हो चला है, लेकिन हिन्दी में वे अब भी जीवित हैं और साहित्य में ही नहीं, आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग किए जा रहे हैं। फ़ारसी के अनेक मुहावरे अनूदित होकर हिन्दी की निधि बन चुके हैं।
प्रस्तुत ‘फ़ारसी–हिन्दी शब्दकोश’ हज़ारों वर्षों में फैले भारत–ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों को रेखांकित करनेवाला प्रथम शब्दकोश है। विभिन्न विषयों एवं अलग–अलग परिप्रेक्ष्यों से सम्बन्धित लगभग 25,000 शब्द–प्रविष्टियों से सम्पन्न यह शब्दकोश, जिसमें पुरातन और नवीन दोनों प्रकार की अर्थ–परम्पराओं का समावेश है, प्राचीन और अर्वाचीन शब्दों का सुन्दर मिश्रण है।
आशा है, यह शब्दकोश विभिन्न प्रकार के अध्ययनकर्ताओं तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
Bihar Police Daroga Prarambhik Pareeksha 30 Practice Sets (Avar Seva Ayog Patna) (vol-1)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Matribhoomi
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: इसका रचना-काल द्वितीय महायुद्ध का अंतिम काल है, जबकि मानव संहार के पीड़ित समाचारों को पढ़कर आचार्यजी का हृदय हाहाकार कर रहा था। युद्ध के दिन थे, सब चीजें बेहद महँगी और दुर्लभ हो रही थीं। लिखने के लिए कागज और जलाने के लिए मिट्टी का तेल भी उन्हें मुश्किल से मिलता था। उन दिनों हमारे मकान में बिजली नहीं थी। टीन की छत के तीन कमरे और फूँस का एक गोल छप्पर ही हम शाहदरे की भूमि में बना पाए थे। उसी छप्पर में बैठकर रात को मिट्टी का दिया जलाकर उन्होंने इन उपन्यास का आरंभ किया था।
Gumnaam Nayakon Ki Gauravshali Gathayen
- Author Name:
Vishnu Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Super Cracker Series NTA CUET (UG) Grah Vigyan (CUET Home Science in Hindi 2022)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tweet Kahaniyan
- Author Name:
Dr. Lata Kadambari Goel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC Bihar Teacher Recruitment for Secondary School Teachers Part-1 English 15 Practice Sets
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shuddha Anna Swastha Tan
- Author Name:
Prempal Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Spain Ki Shreshtha Kahaniyan
- Author Name:
Bhadra Sen Puri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaigyanik Kosh
- Author Name:
Shanti Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: विज्ञान और वैज्ञानिकों का मनुष्य-जीवन और सभ्यता के लिए अतुल्य योगदान रहा है। विकास के रथ को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में उन्होंने बहुधा अपने जीवन और जीवन की सुख-सुविधाओं तक को महत्त्व नहीं दिया। यह ‘वैज्ञानिक कोश’ संसार के ऐसे ही वैज्ञानिकों से हमारा परिचय कराता है जिनके आविष्कारों और खोजों ने दुनिया को इतना उन्नत और सुविधाजनक बनाया है जिसमें रहते हुए हम मानव-जाति के भविष्य के बारे में सोच सकते हैं। इनमें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक भी शामिल हैं जिनका परिचय अलग से दिया गया है। हिन्दी में अभी तक ऐसी और इतनी विस्तृत पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। यह हिन्दी के प्रमुख विज्ञान-लेखक गुणाकर मुळे के बरसों के श्रम का नतीजा है, जिसे अन्तिम रूप उनकी पत्नी और सुपुत्र ने सावधानी और यत्नपूर्वक दिया है। हर पाठक के लिए उपयोगी यह कोश न सिर्फ़ विश्व के महान वैज्ञानिकों के जीवन, उनके आविष्कारों और उपलब्धियों के विषय में आवश्यक जानकारी देता है, बल्कि हमें वैज्ञानिक ढंग से सोचने को भी प्रेरित करता है। परिशिष्ट में प्रस्तुत की गई सामग्री इस अध्ययन को और भी उपयोगी बनाती है जिसमें भौतिकी, रसायन और चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों की संक्षिप्त एवं सारगर्भित जानकारी दी गई है।
UP TGT Sanskrit 14 Practice Sets Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Sanskrit Practice Book)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kritrim Upgrahon Mein Ooshmiya Prabandhan
- Author Name:
Kamlesh Kumar Baraya
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book