Super Cracker Series NTA CUET (UG) Sanskrit (CUET Sanskrit in Hindi 2022)
(0)
Author:
Team PrabhatPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
195
₹ 156 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789354880155
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Rajkamal Angreji Hindi Vakyansh Evam Muhavara Kosh
- Author Name:
Suresh Awasthi +1
- Book Type:

- Description: अनुवादकों तथा सामान्यतः अंग्रेज़ी भाषा में रुचि रखनेवाले पाठकों तथा विद्यार्थियों के लिए तैयार इस कोश में लगभग 7000 वाक्यांश तथा मुहावरे सम्मिलित हैं। इनका चयन किसी एक कोश से नहीं, बल्कि सामान्य प्रयोग में आनेवाले जनसंचार माध्यमों, पाठ्य-पुस्तकों और व्यावहारिक जीवन से किया गया है। प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत अनुवादकों को ध्यान में रखते हुए इसमें वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की शब्दावली में सम्मिलित वाक्यांशों को भी लिया गया है, ताकि प्रशासनिक साहित्य व दस्तावेज़ों का अनुवाद कार्य करनेवाले व्यक्तियों के लिए भी यह कोश उपयोगी हो सके। साथ ही इस कोश में उन वाक्यांशों को भी रखा गया है जो देखने में एकल क्रिया रूप प्रतीत होते हैं, लेकिन परसर्गों से मिलकर वाक्यांशों के रूप में प्रयुक्त होने लगते हैं।
Vastu Vidya
- Author Name:
K. Mahadev Shashtri +1
- Book Type:

- Description: ‘अनंत शयन संस्कृत ग्रंथावली’ के तीसवाँ (३०) अंक का प्रसिद्ध ‘वास्तु विद्या’ का यह द्वितीय संस्करण है। यह ११०६वें वर्ष (कोलंबाब्द) में आरम्मुळ वासुदेव मूस महाशय से प्राप्त वास्तु विद्या का केरल भाषा में लिखित व्याख्या के आधार पर, इसी ग्रंथालय में तात्कालिक अध्यक्ष, श्री महादेव शास्त्री के द्वारा प्रस्तुत लघु विवृत्ति नाम के व्याख्यान को अर्थ स्पष्टीकरण के लिए संयोजित किया है। वास्तु संबंधी ज्ञान इस ग्रंथ से प्राप्त हो, अतः इसका ‘वास्तु विद्या’, संज्ञा करण समुचित लगता है। और यह ‘साधन कथन’ से आरंभ होकर, ‘मृल्लोष्ट विधान’ तक सोलह अध्यायों में सगुंफित है। ग्रंथ के सोलहवें अध्याय के अंत में, समाप्ति प्रकटन का कोई दूसरा वाक्य उपलब्ध नहीं है। ‘इति वास्तु विद्या समाप्त’, ऐसा दृश्यमान होने पर भी— “दारुस्वीकरणं वक्ष्ये निधिगेहस्य लक्षणे।” (अध्याय १३) अर्थात् निधि गेह के लक्षण में दारु ग्रहण (लकड़ी का चयन) करना बताऊँगा। इस प्रकार ग्रंथकर्ता के ‘दारुस्वीकरण’ आदि स्वयं की वचनबद्धता से बोध के अभाव से (अज्ञानता या भ्रम के कारण) लेखक के द्वारा (‘इति वास्तु विद्या समाप्त’ ऐसा) लिखित होना संभावित होता है।
NTA UGC NET/JRF/SET Sociology 28 Solved Papers (2012-2021) & 10 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ram Kattha
- Author Name:
Hiralal Shukla
- Book Type:

-
Description:
आदिवासियों की कुडुख बोली की यह 'राम कत्था' उनके अपने जीवन, समाज, संस्कृति और
वर्तमान तथा भविष्य की कथा है। यह उनकी अपनी सृष्टि को रचने और उसमें बसने की भी कथा है।
इस पुस्तक की रामकथा वही रामकथा है जो गोस्वामी तुलसीदास के 'रामचरितमानस' की रही है। बस अन्तर
यह कि गोस्वामी जी ने तो रामकथा एक ही बार लिखी, पर इस जगत् के लोगों ने उसे अपने युग में अपनी-
अपनी भाषा-बोली में बार-बार लिखा, और अब भी लिख रहे हैं। यह एक कृति की जन से जुड़ने की बड़ी
सफलता होती है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने कर दिखाया था।
ज़ाहिर-सी बात है कि इस कथा में सबकी कथा थी और इस कथा की व्यथा में सबकी व्यथा, तभी तो यह कथा
गाथा बनी और बनती रही है। हमें इस रूप में भी इस पुस्तक को देखना चाहिए कि इसी कथा में राम के साथ
युद्ध में शामिल वे ही लोग थे, जो वानर, भालू, गिद्ध आदि जनजातियों के रूप में हाशिए की दुनिया के थे,
और जिनके बल पर जीत हासिल करते हैं राम। यह पुस्तक एक पुस्तक ही नहीं, जनजातियों की तरफ़ से एक
हस्तक्षेप भी है।
Vidhanmandal Paddhti Avam Prakriya
- Author Name:
Avadhesh Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Legislature's practice & Procedure
Urdu Hindi Kosh
- Author Name:
Ramchandra Verma
- Book Type:

-
Description:
उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओं के प्रामाणिक ज्ञान और उन्हें निकट लाने में यह कोश अत्यन्त सहायक है।
उर्दू-भाषी पाठक और प्रेमी प्रायः ऐसे शब्दकोश की ज़रूरत महसूस करते हैं जो हो तो उर्दू की लिपि में किन्तु जिससे हिन्दी शब्दों का अर्थज्ञान हो सके। इसी प्रकार उर्दू से अनभिज्ञ हिन्दीभाषी नागरी लिपि में उर्दू शब्दों की प्रस्तुति से प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। इस दिशा में यह ‘उर्दू-हिन्दी कोश’ एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
यह कोश उर्दू भाषा में प्रयुक्त होनेवाले अरबी-फ़ारसी आदि के शब्दों का हिन्दी अर्थ जानने में पर्याप्त सहायक है। अरबी, फ़ारसी व तुर्की आदि की अधिकांश संज्ञाओं और विशेषणों के समावेश ने इस कोश की सार्थकता बढ़ा दी है। कोश की विश्वसनीयता फ़ारसी लिपि में मुख्य प्रविष्टियों के अंकन के कारण बढ़ गई है।
भाषाविदों, साहित्य-साधकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अनुवादकों, सम्पादकों, शोधार्थियों आदि के लिए यह कोश बहुत उपयोगी है।
Chhayavadi Kavya-Kosh
- Author Name:
Suchita Verma +1
- Book Type:

-
Description:
छायावाद हिन्दी कविता का एक समृद्ध कालखंड है। प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी की इस दौर की कविताओं से प्रविष्टियाँ लेकर इस कोश का निर्माण किया गया है। शब्द और पदबंध के साथ काव्य-पंक्तियाँ दी गयी हैं ताकि छायावादी काव्य-प्रयोगों को व्यवस्थित रूप दिया जा सके। शब्द और पदबंध के प्रासंगिक अर्थ-निर्धारण का प्रयास किया गया है ताकि काव्यार्थ की दिशा को समझने में मदद मिल सके। प्रयुक्त शब्द और पदबंध से जुड़ी काव्य-पंक्तियों के सन्दर्भों को रचनावली/ग्रंथावली की पृष्ठ संख्या के साथ दर्शाया गया है। यह भी दर्ज किया गया है कि काव्य-पंक्ति किस कविता या पुस्तक से ली गयी है।
छायावाद शतायु को प्राप्त कर चुका है। इसकी काव्य-भाषा आकर्षक भी है और शास्त्रीय भी! बदलते दौर में इस काव्य-भाषा को समझने के लिए काव्य-कोश की आवश्यकता बढ़ती जाएगी। छायावादी काव्य के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ‘छायावादी काव्य-कोश’ मददगार होगा।
कोश का निर्माण वर्णानुक्रम से तो किया ही जाता है, इस कोश में काव्य-प्रयोगों को यथासंभव कालानुक्रम से भी रखने का प्रयास किया गया है। छायावादी कवियों के काव्य-प्रयोगों को तुलनात्मक रूप से समझने की प्रभूत सामग्री यह कोश प्रदान करता है।
इस कोश की भूमिका और परिशिष्ट में कई तरह की सूचियाँ दी गयी हैं जिनकी मदद से छायावाद को नये ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
DHAROHAR RAJ. BHUGOL EVAM ARTHVYASTHA
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ka Vikas Aur Rajniti
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description: भारत का विकास और राजनीति’ एक बहुआयामी पुस्तक है जिसमें भारत की धड़कन समाहित है तथा भारत के विकास की प्रमुख समस्याओं का सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत है। भारत एक विभिन्नता का देश है तथा विभिन्न प्रदेशों, ज़िलों तथा क्षेत्रों के विकास की विशेष समस्याएँ हल करके ही विकास के शिखर तक पहुँचा जा सकता है। अत: विकास के महायज्ञ में स्थानीय प्रशासन जैसे पंचायतों, नगरपालिकाओं तथा ज़िला प्रशासन की अहम भूमिका है पर इन्हें विकास के लिए धनराशि राज्य एवं केन्द्र से ही उपलब्ध हो सकती है। अत: केन्द्र से लेकर स्थानीय प्रशासन में भ्रष्टाचार का निवारण तथा कर्म संस्कृति की महती आवश्यकता है। आज भारत का विकास उत्तम स्थिति में है पर भारत को अग्रगणी अर्थव्यवस्था तथा अग्रणी विकसित राष्ट्रों की प्रथम पंक्ति में आने के लिए ज़न-जागृति, राजनीति में शुचिता तथा नौकरशाही में पारदर्शिता तथा विकास के लिए समर्पण आवश्यक है। भारत की 130 करोड़ जनसंख्या की जटिल समस्याओं का कोई भी सरकार सहज समाधान नहीं कर सकती है पर इस दिशा में उसके सद्प्रयास ही जनता की थाती हैं। जनता, जन-प्रतिनिधि तथा नौकरशाही मिलकर इस देश में वांछित प्रगति तथा समृद्धि के प्रभात का प्रादुर्भाव करेंगे। आशा है कि इस उद्देश्य से लिखी गई यह पुस्तक राजनीतिक प्रतिनिधियों, नौकरशाहों, बुद्धिजीवियों, प्रतियोगी परीक्षा में बैठनेवाले अभ्यर्थियों तथा जन सामान्य के लिए समान रूप से उपयोगी होगी।
Vaishali Ki Nagar Vadhu
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: अपने जीवन के पूर्वाह्न में--सन् 1909 में, जब भाग्य रुपयों से भरी थेलियाँ मेरे हाथों में पकड़ाना चाहता था--मैंने कलम पकड़ी। इस बात को आज 40 वर्ष बीत रहे हैं। इस बीच मैंने छोटी-बड़ी लगभग 84 पुस्तकें विविध विषयों पर लिखीं तथा दस हजार से अधिक पृष्ठ विविध सामयिक पत्रिकाओं में लिखे। इस साहित्य-साधना से मैंने पाया कुछ भी नहीं, खोया बहुत-कुछ, कहना चाहिए, सब कुछ--धन, वैभव, आराम और शांति। इतना ही नहीं, यौवन और सम्मान भी। इतना मूल्य चुकाकर निरंतर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी संपूर्ण साहित्य-संपदा को मैं आज प्रसन्नता से रदृद करता है और यह घोषणा करता हूँ कि आज मैं अपनी यह पहली कृति विनयांजलि सहित आपको भेंट कर रहा हूँ। यह सत्य है कि यह उपन्यास है, परंतु इससे अधिक सत्य यह है कि यह एक गंभीर रहस्यपूर्ण संकेत है, जो उस काले परदे के प्रति है, जिसकी ओट में आर्यों के धर्म, साहित्य, राजसत्ता और संस्कृति की पराजय और मिश्रित जातियों की प्रगतिशील संस्कृति की विजय सहस्राब्दियों से छिपी हुई है, जिसे संभवत: किसी इतिहासकार ने आँख उषधाड़कर देखा नहीं है।
Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
- Author Name:
Max Muller
- Book Type:

- Description: भारतीय साहित्य और संस्कृति पर मैक्स मूलर के अगाध ज्ञान को देखते हुए इंग्लैंड की सरकार ने उन्हें 1882 में आई.सी.एस. पास हुए अँग्रेज़ युवकों के प्रशिक्षण के दौरान भारतीय धर्म, साहित्य और संस्कृति पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया, ताकि ये भावी प्रशासक भारत की आत्मा को उचित ढंग से समझ सकें। इस अवसर पर प्रो. मैक्स मूलर ने सात व्याख्यान दिए जिन्हें बाद में पुस्तक के रूप में 1882 में ही प्रकाशित कर दिया गया। यह पुस्तक उसी का अनुवाद है। इन व्याख्यानों में उन्होंने बताया कि भारतीय समाज को पश्चिम से कमतर समझना भूल है। उन्होंने वेदों और यहाँ के पुराख्यानों की व्याख्या करते हुए बताया कि ये सब हिन्दुओं की जीवन-प्रणाली के प्राण हैं। आज भी उनके ये व्याख्यान भारतीय अस्मिता और प्रज्ञा को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। इन व्याख्यानों में वे क्रमश: भारत की भौगोलिक सम्पन्नता, सांस्कृतिक विविधता, चारित्रिक जटिलता और धार्मिकता पर अपने गहन अध्ययन की रोशनी में प्रकाश डालते हैं। वे बताते हैं कि नृतत्त्वशास्त्रियों, भाषाशास्त्रियों, इतिहासकारों, समाजशास्त्रियों और धार्मिक चिन्तकों के लिए भारत में कितना कुछ है, जिस पर वे काम कर सकते हैं। एक पूरा व्याख्यान इस शृंखला में उन्होंने सिर्फ़ इस धारणा को निरस्त करने के लिए दिया, जिसके अनुसार भारत के हिन्दू लोगों में सत्य के प्रति सम्मान नहीं है। इस पूर्वाग्रह के विरुद्ध उन्होंने अनेक विद्वानों के मन्तव्य देते हुए और कई ग्रन्थों के उदाहरण देते हुए सिद्ध किया कि ऐसा नहीं है। मैक्स मूलर को लेकर एक नकारात्मक विचार उस धारा के साथ भी चलता है, जिसमें मैकाले के अंग्रेज़ी को लेकर किए गए प्रयासों को एक साज़िश करार दिया जाता है, तो भी यह जानने के लिए कि मैक्स मूलर स्वयं भारत और भारतीय संस्कृति के बारे में क्या सोचते थे, यह पुस्तक एक अनिवार्य पाठ है।
Abhagi Ka Swarg
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: बांग्ला के उपन्यास-सम्राट् शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की संपूर्ण अमर कृतियाँ देश-विदेश की अनेक भाषाओं में अनूदित होकर प्रकाश में आ चुकी हैं; परंतु हिंदी में जहाँ एक ओर उनके उपन्यास तथा उपन्यास के रूप में बड़ी-बड़ी कहानियों के अनेक अनुवाद हुए हैं, वहाँ उनकी लघु-कथाओं के अनुवाद अपेक्षाकृत बहुत कम हो प्रकाश में आए हैं। प्रस्तुत पुस्तक में शरतबाबू की सात लघु-कथाएँ संकलित हैं। सभी कहानियाँ एक-से-एक सुंदर, प्रेरणाप्रद, मर्मस्पर्शी एवं शिल्प की दृष्टि से अत्युत्तम हैं। अनुवाद में केवल मूल भावों की ही रक्षा नहीं की गई है, अपितु वह अक्षरश: हो और प्रभाव में भी शिथिलता न पड़े, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया है। आशा है, रवींद्रकथा-माला की भाँति शरतकथा-माला को भी स्नेहपूर्वक अपनाकर हिंदी-पाठक हमारे श्रम को सार्थक करेंगे।
Lokbharti Brihat Pramanik Hindi Kosh
- Author Name:
Ramchandra Verma +1
- Book Type:

-
Description:
आचार्य रामचन्द्र वर्मा द्वारा सम्पादित ‘बृहत् प्रामाणिक हिन्दी कोश’ का उपयोग पिछले कई वर्षों से हिन्दी-प्रेमी निरन्तर करते चले आ रहे हैं।
प्रस्तुत बृहत् संस्करण वर्मा जी के मानदंडों के अनुरूप तथा वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सैकड़ों शब्दों को ढूँढ़-ढूँढ़कर इस कोश में स्थान दिया गया है जो पहले से हमारी भाषा के अंग हैं, परन्तु जिनका आज तक कोशों में समावेश नहीं हो पाया। आंचलिक तथा प्रादेशिक रचनाकारों के कुछ ऐसे शब्दों को भी इस कोश में स्थान दिया गया है जो हिन्दी साहित्य में अपना स्थान बना पाए हैं। समस्त पदों में पूर्वपद या उत्तरपद के रूप में कुछ विशिष्ट शब्दों के योग से बने नए शब्दों की बहुलता भी इस कोश में दर्शनीय है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य, प्रशासन, जनसंचार आदि क्षेत्रों में प्रयुक्त होनेवाले अंग्रेज़ी भाषा के ऐसे शब्दों को भी इस कोश में स्थान दिया गया है, जिनका व्यापक रूप से इधर प्रयोग हो रहा है। इस कोश में पहली बार ऐसे सैकड़ों क्रिया-विशेषण, विशेषण तथा संज्ञा शब्दों की प्रविष्टियाँ मिलेंगी जो सम्बन्धबोधकों की तरह प्रयुक्त होते हैं। इधर सहस्रों हिन्दी शब्दों में नए अर्थ विकसित हुए हैं। ऐसे अर्थों को सँजोने तथा विश्लेषित करने का काम इस बृहत् संस्करण का विशेष ध्येय रहा है।
अरबी, फ़ारसी, तुर्की आदि के अधिकतर प्रचलित शब्दों को मूल शुद्ध रूप में दिखाने का प्रयास किया गया है। अनेक शब्द भेदों में जिन शब्दों को बाँटा जा सकता है, ऐसे शब्दों को प्रयोग के आधार पर क्रिया-विशेषण, योजक, निपात, विस्मयादिक, सम्बन्धबोधक आदि नामों से अभिहित किया गया है। लिंग-सम्बन्धी भी अनेक भूलें ठीक की गई हैं। अनेक शब्दों की व्युत्पत्ति में भी सुधार किया गया है।
इधर सहस्रों नए शब्द हमारी भाषा में प्रविष्ट हुए हैं। इनमें से जिनका पत्र-पत्रिकाओं में विशेष रूप से प्रयोग देखने को मिला, उन्हें इस नवीन संस्करण में सम्मिलित कर लिया गया है।
निश्चय ही यह कोश, विद्यार्थियों, लेखकों, अध्यापकों, सम्पादकों, पत्रकारों, शोधार्थियों इत्यादि के लिए अत्यन्त उपयोगी तथा विश्वसनीय है।
Kuch Vichar
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक छात्रों को उनकी हिंदी परीक्षाओं में मार्गदर्शन करने के लिए बनाई गई है। इसमें दीर्घ, लघु, अति लघु और वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न और उत्तर शामिल हैं।
IBPS Clerk Prarambhik Pariksha-2022 (IBPS Clerk Pre Exam 20 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Adhunik Vividh Kala Shabdsagar
- Author Name:
Roop Narayan Batham
- Book Type:

- Description: ‘आधुनिक विविध कला शब्दसागर’ तेईस आधुनिक सर्जनात्मक और व्यावसायिक कलाओं के सामान्य प्रचलित और महत्त्वपूर्ण शब्दों का संग्रह है। इसमें चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नृत्य, नाटक, काव्य, फैशन, पाककला, गृहसज्जा, फोटोग्राफी, विज्ञान, फिल्म, टेलीविजन, संग्रहालय विज्ञान, पुरातत्त्व, अभिलेख, डिजाइन, शिल्प, सौन्दर्यशास्त्र, कला-समीक्षा, छापाकला आदि कलाओं से सम्बन्धित शब्द शामिल हैं। कोश के आरम्भिक पृष्ठों में सभी कला विषयों के शब्दों को अंग्रेजी के वर्णक्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उसका वर्गीकरण, उच्चारण, हिन्दी पर्याय तथा साधारण शब्दों में उसकी सामान्य व्याख्या प्रस्तुत की गई है। अनेक कम प्रचलित किन्तु महत्त्वपूर्ण शब्दों के साथ कई अन्य तत्सम्बन्धित शब्दों के भी अंग्रेजी समानार्थी शब्द दिये गए हैं ताकि पाठक सहजता से कोश में प्रयुक्त शब्दों के भाव समझ सकें। शब्दों के शुद्ध उच्चारण के सम्बन्ध में सदैव मतभेद रहा है, मुख्यतः विदेशी भाषाओं के सन्दर्भ में। इस समस्या के निदान के लिए इसमें विदेशी शब्दों के शुद्ध उच्चारण में एक व्यावहारिक समझौता किया गया है, जैसे— Colour के वास्तविक उच्चारण ‘कलअॅ’ के स्थान पर ‘कलर’ ही रखा है, इस प्रकार ‘अ’, (R) ‘र’ की ध्वनि से समझौता किया गया है। उसी तरह Art के शुद्ध उच्चारण में ‘आट’ के स्थान पर ‘आर्ट’ स्वीकारा है। नाटक के एक शब्द ‘Daddy’ के लिए ‘पितातुल्य’ प्रतिष्ठित ‘नाट्यकर्मी’ के साथ उर्दू के शब्द ‘उम्रदराज फनकार’ को भी लिया गया है। अंग्रेजी शब्दों के हिन्दी सुबोध पर्यायों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं के बोलचाल से जुड़े अनेक शब्दों को स्वीकार किया गया है। जैसे—‘Dedicated Artist’ के लिए ‘जुझारू कलाकार’, ‘व्रती कलाकार’ आदि। शब्दों के अधिकाधिक पर्याय देने के प्रयास में उनके भावार्थ से जुड़े भाव को प्राथमिकता दी गई है। जैसे Design शब्द के 18 तो Aesthetics के 9 पर्याय दिये गए हैं। यह कोश कभी-कभार कला के किसी शब्द की जानकारी मात्र देने वाला कोश नहीं है, कला के विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और जिज्ञासुओं के लिए महत्त्वपूर्ण पाठ है। भारत में बहुउपयोगी कलाओं के समग्र कोश की रचना का यह सम्भवतः पहला प्रयास है, अतः इसमें अनेक त्रुटियों और कमियाँ रह गई होंगी। मुझे आशा है कि सुधी-पाठक इसे और समृद्ध करने के लिए अपने बहुमूल्य सुझावों से हमें अवगत करायेंगे।
Shodh Drishti-Sudha Om Dhingra Ka Sahitya
- Author Name:
Balvir Singh +1
- Book Type:

- Description: Book
Ethics, Integrity and Aptitude
- Author Name:
Dr. B. Ramaswamy +1
- Book Type:

- Description: This book boasts of presenting IAS aspirants with maximum number of case studies presented at one place in this Paper till date. The right way to answer case-study questions are also given so as to facilitate the UPSC candidates to the maximum for scoring best possible marks in this rather difficult paper. Various appendices are given to acquaint UPSC candidates with primary sources of information on this theme, such as, Right to Public Services Legislation in India; The Right of Citizens for Time Bound Delivery of Goods and Services and Redressal of Their Grievances Bill, 2011; India’s Citizen’s Charter and Grievance Redressal Bill, 2011; Official Secrets Act of India, 1923; and the International NGO Accountability Charter. Previous years’ questions of IAS GS Mains Paper IV on “Ethics, Integrity & Aptitude” are given with focus on model questions of IAS GS Mains Paper IV: Ethics, Integrity & Aptitude for 2018.
EK SHAM PARIVAR KE NAAM
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Practical English Hindi Dictionary
- Author Name:
Ed. Dr. Badri Nath Kapoor
- Book Type:

- Description: यह अद्यतन कोश है और इसमें अंग्रेज़ी के उन सभी शब्दों तथा पदबंधों का संकलन किया गया है जो जीवन के विविध क्षेत्रों से संबद्ध हैं तथा विद्यार्थियों- अध्यापकों, लेखकों- अनुवादकों, संपादकों-पत्रकारों, अधिकारियों-कर्मचारियों आदि को जिनके हिंदी समानार्थी जानने की नित्य आवश्यकता होती है । अंग्रेज़ी के सभी शब्दों को अक्षरक्रम से रखा गया है । अन्य प्रमुख अंग्रेज़ी-हिंदी कोशों में विकारी शब्दों तथा समस्त पदों को मूल शब्द के अंतर्गत अर्थात् पेटे में रखा गया है, परंतु इस कोश में ऐसे शब्दों की स्वतंत्र प्रविष्टियाँ हैं । आशा है, इससे पाठकों को विभिन्न शब्दों तक पहुँचने में सुगमता होगी । अनियमित क्रियाओं के भूतकालिक, भूतकृदंत तथा वर्तमानकालिक कृदंत रूप भी दिए गए हैं । प्राय : विशेषणों के उत्तरावस्था और उत्तमावस्था कें विशिष्ट रूप भी दिए गए हैं । शब्दों का उच्चारण अधिक सुगमतापूर्वक तथा व्यवस्थित ढंग से किया जा सके, इसके लिए शब्दों को अक्षरों (syllables) में विभाजित किया गया है और उन्हें योजिका (hyphen) से अलग- अलग करके दिखलाया भी गया है । शब्द के जिस अक्षर पर बलाघात है उसपर चिह्न भी लगाया गया है । आवश्यकता प्रतीत होने पर शब्दों के ब्रितानवी और अमेरिकी दोनो प्रकार के उच्चारण भी दिए गए हैं । हर शब्द के अर्थ अंग्रेज़ी और हिंदी दोनो भाषाओं में दिए गए हैं । चष्टा रही है कि अंग्रेजी अर्थ की प्रमुख विवक्षा हिंदी समानार्थी से स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो । पदबंधों और मुहावरों की व्याख्या करते समय उनके अर्थ-सौष्ठव को यथावत् प्रतिबिंबित करने का प्रयास भी किया गया है । इस कोश में भारत सरकार द्वारा स्थिर किए हुए विधि, प्रशासन, न्याय, प्रौद्योगिकी तथा विभिन्न शास्त्रों और विज्ञानों के शब्दों को प्रमुखता दी गई है । उच्चारण-तालिका अन्यत्र दी गई है । इसमें अंग्रेज़ी की कुछ विशिष्ट ध्वनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संकेत चिह्नों के आधार पर कुछ हिंदी वर्णो में विशेष चिह्न जोड़े गए हैं । आशा है, पाठकों को इससे सही उच्चारण करने में सुविधा होगी ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book