Main Ramvanshi Hoon
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रामायण इतिहास है। त्रेतायुग की ऐतिहासिक कथा। वस्तुत: इतिहास कथा ही तो है। अत: हमारे विद्वान पूर्वजों ने इतिहास-लेखन कथात्मक शैली में किया । रामायण इसका आदर्श उदाहरण है। यह श्रीराम का मार्ग है। यह प्रभु श्रीराम के चरित्र-चित्रण और जीवन-चरित्र की कथा है। श्रीराम युगपुरुष हैं, अवतार-पुरुष हैं, संस्कार-पुरुष हैं, आदर्श-पुरुष हैं, धर्म की प्रतिमूर्ति हैं, आर्यश्रेष्ठ हैं, नरश्रेष्ठ हैं, यह उन्हीं पुरुषोत्तम की जीवन-कथा है। यह विश्व के महानतम योद्धाओं में श्रेष्ठ धनुर्धर श्रीराम की शौर्यगाथा है । यह युगनिर्माण की कथा है। वर्तमान काल में श्रीराम अधिक प्रासंगिक हैं। अत: आज के गुरुकुल संस्कारवान आर्यों के निर्माण की प्रयोगशाला होने चाहिए, जहाँ रामकथा का प्रत्येक श्लोक छात्र के जीवन-यज्ञ का मंत्र बने। तभी हम उन्नत राष्ट्र का निर्माण कर पाएँगे। शस्त्र और शास्त्र के अलौकिक संगम से निर्मित श्रीराम का जीवन-चरित्र आर्यावर्त की गौरव-गाथा का प्रेरणा्रोत है। यह पुरुषोत्तम श्रीराम की मर्यादा की कथा है। इसका पठन-पाठन दानव को मानव और मानव को देवता बना देगा। सनातन परंपरा का पालन करते हुए आर्यावर्त का इतिहास लिखने के लिए लेखक ने भी कथात्मक शैली का मार्ग चुना । इसी प्रयास का प्रथम प्रतिफल था 'मैं आर्यपुत्र हूँ । पूर्व में प्रकाशित यह पुस्तक सतयुग की प्रामाणिक कथा है । ' मैं रामवंशी हूँ' इसी की अगली कड़ी है । यह त्रेतायुग की प्रामाणिक कथा है।
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रामायण इतिहास है। त्रेतायुग की ऐतिहासिक कथा। वस्तुत: इतिहास कथा ही तो है। अत: हमारे विद्वान पूर्वजों ने इतिहास-लेखन कथात्मक शैली में किया । रामायण इसका आदर्श उदाहरण है। यह श्रीराम का मार्ग है। यह प्रभु श्रीराम के चरित्र-चित्रण और जीवन-चरित्र की कथा है। श्रीराम युगपुरुष हैं, अवतार-पुरुष हैं, संस्कार-पुरुष हैं, आदर्श-पुरुष हैं, धर्म की प्रतिमूर्ति हैं, आर्यश्रेष्ठ हैं, नरश्रेष्ठ हैं, यह उन्हीं पुरुषोत्तम की जीवन-कथा है। यह विश्व के महानतम योद्धाओं में श्रेष्ठ धनुर्धर श्रीराम की शौर्यगाथा है । यह युगनिर्माण की कथा है।
वर्तमान काल में श्रीराम अधिक प्रासंगिक हैं। अत: आज के गुरुकुल संस्कारवान आर्यों के निर्माण की प्रयोगशाला होने चाहिए, जहाँ रामकथा का प्रत्येक श्लोक छात्र के जीवन-यज्ञ का मंत्र बने। तभी हम उन्नत राष्ट्र का निर्माण कर पाएँगे। शस्त्र और शास्त्र के अलौकिक संगम से निर्मित श्रीराम का जीवन-चरित्र आर्यावर्त की गौरव-गाथा का प्रेरणा्रोत है। यह पुरुषोत्तम श्रीराम की मर्यादा की कथा है। इसका पठन-पाठन दानव को मानव और मानव को देवता बना देगा। सनातन परंपरा का पालन करते हुए
आर्यावर्त का इतिहास लिखने के लिए लेखक ने भी कथात्मक शैली का मार्ग चुना । इसी प्रयास का प्रथम प्रतिफल था 'मैं आर्यपुत्र हूँ । पूर्व में प्रकाशित यह पुस्तक सतयुग की प्रामाणिक कथा है । ' मैं रामवंशी हूँ' इसी की अगली कड़ी है । यह त्रेतायुग की प्रामाणिक कथा है।
Book Details
-
ISBN9789395386975
-
Pages352
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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