MADHYA PRADESH POLICE ARAKSHAK SAMVARG (KARYAPALIK) BHARTI PAREEKSHA 15 PRACTICE SETS
Author:
Team PrabhatPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 220
₹
275
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789355219107
Pages: 152
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bhojpuri-Hindi-English Shabdkosh
- Author Name:
Arunesh Neeren
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी भाषा पर विचार करते समय हम उसकी सहभाषाओं के अवदान को नहीं भुला सकते, क्योंकि हिन्दी की असली शक्ति उसकी तद्भव सम्पदा में है। इन तद्भवों का एक बड़ा स्रोत उसकी सहभाषाएँ और बोलियाँ हैं। इन जनपदीय भाषाओं में रचे साहित्य ने भक्ति आन्दोलन और देश के स्वतंत्रता-संग्राम में विशेष योगदान किया था।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि तुलसी, कबीर, सूर, रैदास, मीरा जैसी विभूतियों को लेकर ही हिन्दी ‘हिन्दी’ है। ये सभी महान रचनाकार अपनी रचनाएँ हिन्दी की सहभाषाओं अवधी, ब्रज, भोजपुरी और राजस्थानी में रच रहे थे। इस तथ्य की सार्थकता हेतु जनपदीय भाषाओं के शब्दकोशों की आवश्यकता स्वयंसिद्ध है।
औपचारिक भाषा के रूप में आज खड़ी बोली हिन्दी ही अधिक प्रचलित हो रही है, इसलिए जनपदीय भाषाएँ अतिरिक्त ध्यान की अपेक्षा करती हैं। आज नगरीकरण और वैश्वीकरण से सब कुछ एकसार हुआ जा रहा है और भाषाओं की विविधता पर ख़तरा मँडराने लगा है। ऐसे में हिन्दी भाषा का दायित्व बढ़ जाता है।
भोजपुरी भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार क्षेत्र में प्रचलित एक जीवन्त भाषा है। साथ ही मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, गुयाना, फ़िजी आदि देशों में भारतवंशियों के बीच भी भोजपुरी का प्रयोग प्रचलित है। इस तरह भोजपुरी हिन्दी के अन्तरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का एक विशेष हिस्सा है जिसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।
भोजपुरी की वैश्विक भूमिका, लोकप्रियता, हिन्दी के बढ़ते अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व तथा अंग्रेज़ी की सार्वदेशिक उपस्थिति के परिप्रेक्ष्य में यह त्रिभाषी 'भोजपुरी-हिन्दी-अंग्रेज़ी शब्दकोश’ निश्चित रूप से कोशकला का एक अनुपम प्रमाण सिद्ध होगा। विस्मृति के गर्भ में चले गए शब्दों को पुनर्जीवित करने का प्रयत्न यहाँ नहीं किया गया है और फूहड़, एकांगी और विवादास्पद शब्दों से परहेज़ करके कोश को भारी-भरकम और बोझिल होने से बचाया गया है।
आशा है पाठकों को यह शब्दकोश उपयोगी लगेगा।
Essays For R.A.S. Mains Examination
- Author Name:
R.P. Tomar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yadon Ka Karvan
- Author Name:
Deepak Mahaan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BPSC Mukhya Pareeksha Paper-2 Samanya Adhyayan (BPSC Mains General Studies)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Hindi (MPTET Hindi Guide Book)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Ganit Practice MCQs (MPTET Maths Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Hindi 12 Practice Sets (UPSESSB PGT Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vastunisth Computer Jagrukta (Objective Computer Awareness Hindi) for SSC, Railways, NDA, CDS, B.Ed., CUET, Police & other Competitive Exam
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hidden Files
- Author Name:
Prof. Triveni Singh(IPS) +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: क्या आप विश्वास कर पाएँगे कि आपको एक ऐसे शख्स ने लूटा है, जो ढाई साल पहले मर चुका है। क्या एक SMS भेजना हो सकता है, आपके जीवन की सबसे बड़ी गलती। क्या गलती थी उसकी, उसने सिर्फ एक फ्रेंड रिक्वेस्ट ही तो रिसीव की थी। एक कॉल रिसीव किया और साफ हो गए उसके एकाउंट से पूरे 82 लाख रुपए। जब 14 साल का एक लड़का बन गया भारतीय रेलवे के लिए सबसे बड़ी मुसीबत। कैसे कमाए उस 22 साल के लड़के ने 3700 करोड़ रुपए सिर्फ फेसबुक से। आप विश्वास करेंगे, आपका बिजली का बिल भरकर, मैं कमा लूँ पूरे 100 करोड़ रुपए। जब एक मोबाइल एप्प के थ्रू हो गई एक किडनेपिंग। आप अपने घर का दरवाजा खुला छोड़ सकते हैं, पर अपना मोबाइल बिना पासवर्ड मत रखिए। जब मरी हुई लड़की के फिटबिट बैंड ने दी गवाही और पहुँचा दिया क्रिमिनल को सलाखों के पीछे। क्या आप जानना चाहेंगे कि आप के घर का Wi-Fi खोल सकता है आपके कौन-कौन से राज। जब उसकी मौत और जिंदगी के बीच में आ गया एक व्हाट्सएप मेसेज। उसकी जान की कीमत सिर्फ 3 बिटकॉइन। यदि उस दिन फोन न खोया होता तो वह मर जाती। जब बिजली के बल्ब से रोशनी के बजाय आने लगे धमकी की आवाज। आजकल हर व्यक्ति अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन बिताता है, चाहे वो खरीदारी करना हो, बिल पेमेंट करनी हो, दोस्त बनाना हो, जिसकावर्णन बेचनी हो या घर खरीदना हो, कॉलेज के एडमिशन से लेकर शादी के लिए जीवनसाथी ढूँढ़ने तक आपकी जिंदगी इस ऑनलाइन के मायाजाल में उलझ तो गई ही है। लगातार हर क्षण एक ऐसी दुनिया अपनी वास्तविक दुनिया के समांतर खड़ी हो रही है, जिसको हम आभासी दुनिया कहते हैं, पर इस दुनिया में वे सारे अपराध संभव हैं, जो असली दुनिया में होते हैं, इस कारण इस दुनिया की अँधेरी सच्चाइयों के प्रति खुद को जागरूक रखना बहुत जरूरी हो गया है। उत्सुकता बहुत है, जानने की चाह भी, पर इस भागती दुनिया में हमारे पास वक्त कहाँ है कि हम इन दिशा-निर्देशों को सीखें, कोई भी ऐसा ज्ञान या वीडियो बड़ा ही बोरिंग लगने लगता है, जब कोई कहता है कि OTP मत दीजिए, लिंक क्लिक मत कीजिए या फोन पर कोई डिटेल शेयर मत कीजिए। लेखकद्वय ने अनुभव किया कि लोग दिशा-निर्देश भले ही भूल जाएँ पर उन्हें कहानियाँ याद रहती हैं, तो क्यों न वे ये बातें कहानियों के द्वारा बताएँ और तब इस पुस्तक ‘साइबर क्राइम की रोमांचकारी कहानियाँ’ की जरूरत महसूस हुई।दरअसल ये कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उन्होंने इनके द्वारा कुछ अनुभव साझा किए हैं। उनका मानना है कि सच्चाइयाँ कल्पना से ज्यादा रोचक होती हैं; ये सच्ची कहानियाँ न सिर्फ आपको साइबर खबरों के प्रति आगाह करेंगी, बल्कि आपको सतर्क भी करेंगी, ऐसे क्रिमिनल्स से निपटने के लिए।
Nand Chaturvedi Rachanawali : Vol. 1-4
- Author Name:
Pallav
- Book Type:

- Description: नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा लगभग एक शताब्दी की काव्य यात्रा है। औपनिवेशिक-सामंती भारत से भूमंडलीकृत-आधुनिक भारत की इस सुदीर्घ यात्रा में भाषा और रूप में भी पर्याप्त बदलाव देखे जा सकते हैं। ब्रजभाषा के पारम्परिक सवैयों से प्रारम्भ कर नंद चतुर्वेदी अपनी कविताओं को जिस छंदमुक्त लय में आधुनिक भावबोध के साथ रचते हैं वह हिन्दी काव्य भाषा के विकास का भी सुन्दर उदाहरण है। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के पहले खंड में कवि का समूचा काव्य संसार आ गया है जिसमें उनके सभी प्रकाशित संग्रहों में आई कविताओं के साथ-साथ अप्रकाशित रह गई अनेक कविताएँ और गीत-छंद इत्यादि हैं। कवि नंद चतुर्वेदी मनुष्य की स्वाधीनता और गरिमा की रक्षा के संकल्प के साथ उसके लिए तमाम अवसरों की उपलब्धता चाहते हैं। उनकी आकांक्षा है कि ये अवसर मनुष्य के सम्पूर्ण अभ्युदय के हों, उसके जीवन में सम्पूर्ण प्रकाश और तमाम उल्लासों के हों। वे मनुष्य होने की गरिमा के निर्वाह के लिए किसी भी लड़ाई के लिए तैयार हैं और उसके लिए लोकतंत्र को एक जरूरी उपाय मानते हैं। आकस्मिक नहीं कि औपनिवेशिक दासता के दौर से निकलकर भारतीय लोकतंत्र के बनने और उस पर हो रहे आघातों को वे अपनी कविताओं का विषय बनाते हैं। मनुष्य की स्वाधीनता में उन्हें धर्म जहाँ भी बाधक लगता है वे उसका मुँहतोड़ प्रतिकार करते हैं। इस बिन्दु पर वे बड़े सेक्युलर (सांसारिक) हो जाते हैं जो निर्भय होकर किसी भी सत्ता से भिड़ना जानता है। राजनीति वह क्षेत्र है जहाँ से नंद बाबू का कवि ऊर्जा ग्रहण करता है। वे आततायी राजनीति का चेहरा उघाड़ते हैं और मनुष्यधर्मी राजनीति की प्रस्तावना भी करते हैं। उनका स्वाधीन भारत के समाजवादी दलों से सीधा जुड़ाव भी रहा और वे किसी कार्यकर्ता की तरह आन्दोलनों, रैलियों और चुनावों में भागीदारी करते रहे। उनके ये जीवनानुभव जब कविताओं में रूपान्तरित होकर आते हैं तब नॉस्टेल्जिया उनकी कविताओं की रूढ़ि नहीं शक्ति प्रतीत होता है। युवा आलोचक पल्लव ने परिश्रमपूर्वक रचनावली का सम्पादन किया है। उनकी भूमिका कवि के कृतित्व को गहराई से जानने-समझने के लिए आकृष्ट करती है। नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा केवल कविताएँ लिखने तक सीमित नहीं थी। इस काव्य यात्रा में प्रभूत गद्य भी लिखा गया है। यह गद्य मोटे तौर पर दो प्रकार का है। चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य और स्मृतियों का गद्य। ‘रचनावली’ के दूसरे खंड में चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य संकलित कर लिया गया है। इस गद्य को पढ़ना नंद बाबू के काव्य सरोकारों को समझने का रास्ता देता है। ‘सप्त किरण’ शीर्षक से उन्होंने राजस्थान के कवियों की एक पुस्तक का सम्पादन भी किया था और इसे वे अस्तित्व रक्षा की संज्ञा देते थे। तो कहना न होगा कि अस्तित्व रक्षा के साथ प्रारम्भ हुआ आलोचना, सम्पादन और समीक्षा का यह सिलसिला पूरी शताब्दी तक नंद बाबू को सक्रिय बनाए रखता है। उन्होंने राजस्थान के हिन्दी कवियों के एक बड़े चयन का सम्पादन भी किया। गद्य लेखन नंद बाबू के लिए जीवनपर्यन्त आपद धर्म बना रहा। वे कवि थे और कविता के सम्बन्ध में निरन्तर विचार करना उन्हें प्रिय था। नंद बाबू कवि होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक विचार के समर्थक भी हैं। वे साहित्य को लोक शिक्षण का सस्ता औजार भले न मानते रहे हों तब भी उन्हें लोक रुचियों के विविध पक्षों पर लिखना जरूरी लगता था। उनके ऐसे ही निबन्धों की किताब ‘यह हमारा समय’ में उनके दो दर्जन से अधिक निबन्ध संकलित हैं जो हमारे जीवन और समय के विविध समकालीन पक्षों पर विचार करते हैं। नंद बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी विचारधारा का पक्ष चुना है लेकिन उनकी विचारधारा किसी गिरोहबन्दी से जन्म नहीं लेती। राजस्थान में सक्रिय रहे प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच के साथ उनका संवाद रहा। वे लघु पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे और उन्हें पढ़कर एक सजग पाठक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहे। उनके संस्मरण प्राय: राजस्थान के साहित्य से जुड़े उन लोगों पर होते थे जिनके अवदान से नई पीढ़ी अनभिज्ञ है। जिनमें पंडित गिरिधर शर्मा नवरत्न, हाड़ौती के कवि भैरूलाल कालाबादल, कवि प्रकाश आतुर के साथ-साथ जैनेन्द्र, श्यामाचरण दुबे, शिवमंगल सिंह सुमन, अश्क दम्पती, यशपाल, देवीलाल सामर, आलम शाह खान, युगलकिशोर चतुर्वेदी, कवि चित्रकार रामगोपाल विजयवर्गीय, भागीरथ भार्गव, कल्याणमल लोढ़ा और क़मर मेवाड़ी जैसे लेखक-साहित्यकार शामिल हैं। नंद बाबू राजस्थान में समाजवादी आन्दोलन के जमीनी सिपाहियों में रहे हैं। अपने साथियों पर लिखते हुए सम्बन्धों की ऊष्मा की आँच नंद बाबू पाठकों तक पहुँचाते हैं। हीरालाल जैन और नरेंद्रपाल सिंह जैसे अपने स्थानीय साथियों के अलावा देश में समाजवादी आन्दोलन के अगुआ रहे जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया पर भी उन्होंने लिखा। उनकी डायरी और अपने पत्रों में वे अपने निजी दायरे सार्वजनिक करते हैं। दो-टूक टिप्पणियाँ और निर्भीक कथन। इनमें बहुधा आत्मीयता का रस भी है तो बेहद निजी निराशाएँ भी। कथेतर की विभिन्न विधाओं में संकलित इस खंड में नंद चतुर्वेदी की रचनाशीलता के अनेक रूप विद्यमान हैं जो कवि के व्यापक दाय का प्रमाण बन गए हैं। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के चौथे और अन्तिम खंड में मुख्यत: कवि का अनुवाद कर्म है। नंद बाबू ने कविता और गद्य दोनों का अनुवाद किया। माना जाता है कि काव्यानुवाद बहुत मुश्किल साहित्य कर्म है क्योंकि अनुवादक ऐसा ही व्यक्ति होना चाहिए जो दोनों भाषाओं को ठीक से जानता हो। नंद बाबू ने साहित्यिक पत्रिकाओं के आग्रह पर काव्यानुवाद किये। ये काव्यानुवाद बहुत पुरानी प्राकृत की कविताओं के थे जो हाल कवि की गाथा सप्तशती से अंग्रेजी के रास्ते आए थे। ठीक इसी तरह कुछ संथाली कविताओं का अनुवाद भी उन्होंने किया जिन्हें अंग्रेजी में कवि सीताकांत महापात्र ने प्रस्तुत किया था। इन दोनों काव्यानुवादों में नंद बाबू की अपनी मेधा दिखाई देती है जो इन कविताओं की मूल संवदेना तक पाठकों को पहुँचाने में समर्थ है। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्रिका बिंदु और उस दौर की अनेक पत्रिकाओं के लिए साहित्य शास्त्र तथा साहित्य के अन्य प्रासंगिक विषयों पर लिखे प्रसिद्ध अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया। इस खंड में नंद बाबू द्वारा अनुवादित दो सम्पूर्ण कृतियाँ भी पढ़ी जा सकती हैं। ए. अप्पादुराई की एक अत्यन्त विचारोत्तेजक और महत्त्वपूर्ण किताब को उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद के लिए चुना। लगभग सवा दो सौ पृष्ठों की इस किताब का नाम था ‘भारतीय राजनीतिक चिन्तन’ जिसका अनुवाद नंद बाबू ने रघुवर दयाल के साथ मिलकर किया। 1990 में आई इस पुस्तक की गम्भीर सामग्री को जिस सहज और प्रभावी हिन्दी में नंद बाबू ने अनुवादित किया वह उनकी अद्भुत भाषिक क्षमता का उदाहरण है। दूसरी पुस्तक ‘दहेज पीड़ित महिलाएँ : एक अध्ययन’ लेखिका रंजना कुमारी की है जो भारत में महिला आन्दोलन में अग्रणी रही हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार से 1991 में छपी इस छोटी-सी किताब में उस दौर की दहेज समस्या का गम्भीरता से अध्ययन किया गया था। ये दोनों पुस्तकें हिन्दी अनुवाद के बाद और चर्चित हो गईं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में भी वे अनुवाद करते रहे। कभी कला प्रयोजन के सम्पादक हेमन्त शेष के आग्रह पर तो कभी और किसी पत्रिका के कहने पर। असल बात यही है कि साहित्य में जिस जीवन दृष्टि के लिए नंद बाबू संकल्पवान थे उसे बनाए रखने और गति देने के लिए अनुवाद भी एक जरूरी रास्ता लगता था।
Student Hindi Dictionary
- Author Name:
Virendranath Mandal
- Book Type:

-
Description:
भारत की राष्ट्रभाषा होने के बावजूद जनसाधारण के हिन्दी सम्बन्धी ज्ञान को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। शैक्षिक जीवन में पाठ्य-पुस्तकों आदि के सन्दर्भ में भी हिन्दी के शब्दार्थ, शब्द और वाक्य-प्रयोग आदि को लेकर विद्यार्थियों को सदैव समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इसी के मद्देनज़र इस कोश में विद्वान कोशकार का बल विस्तार के बजाय भाषा की व्यावहारिक उपयोगिता पर रहा है। पाठ्यक्रम तथा रोज़मर्रा जीवन, मीडिया माध्यमों आदि में प्रयुक्त होनेवाले आवश्यक शब्दों, उनके अर्थों, उनकी व्याकरणगत स्थिति तथा प्रयोगों से सम्पन्न यह कोश विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों, अनुवादकों, भाषाकर्मियों व भाषा-अधिकारियों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
इसके अलावा इसमें ‘रामायण’, ‘महाभारत’, बुद्धचरित, प्रमुख पर्वतमालाओं, नदियों, पशु-पक्षियों तथा देवी-देवताओं से सम्बन्धित शब्दावलियों को अलग से सँजोया गया है।
Super Genius Computer Learner-3
- Author Name:
Manuj Bajaj +1
- Book Type:

- Description: आधुनिक युग के विकास में कंप्यूटर का अतुलनीय योगदान है। आज किसी भी क्षेत्र में कंप्यूटर की उपस्थिति अनिवार्य रूप में देखी जा सकती है। हमारे राजमर्रा के लगभग सभी कार्य कंप्यूटर पर निर्भर हैं। बैंकका लेन-देन, टिकट, ए.टी.एम. सेवा, मोटरकार व हवाई जहाज नियंत्रण, पुस्तक-प्रकाशन, दस्तावेज तैयार करना, फोटो, फिल्म व संगीत से जुड़े कार्य, कक्षा में पढ़ाई करना इत्यादि सभी कार्य कंप्यूटर की मदद से सरलता से, तेजी से और त्रुटिहीनता के साथ पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज के युग को ‘कंप्यूटर का युग’ कहा जाता है। विज्ञान, तकनीकी, शोध, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी, उड्डयन, संचार एवं शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर ने कृषि के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाई है। कंप्यूटर क्रांति ने विश्व को एकसूत्र में बाँध दिया है। इंटरनेट ने तो कंप्यूटर के प्रचार-प्रसार में और भी बड़ी भूमिका निभाई है। इंटरनेट के माध्यम से आज एक ‘क्लिक’ करके हम दुनिया के किसी भी कोने में पहुँच सकते हैं। इंटरनेट टेलीफोनी और इ-मेल ने संचार क्रांति को पंख लगा दिए हैं। इंटरनेट टेलीफोन से हम लगभग निशुल्क दुनिया के किसी भी कोने में टेलीफोन की तरह बात कर सकते हैं। ‘चैट’ के जरिए ‘लाइव’ बातचीत की जा सकती है।
INDIAN AIR FORCE AIRMEN GROUP X (TECHNICAL TRADES EXAM) 25 PRACTICE SETS (REVISED 2021)
- Author Name:
Vinay Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NCERT Objective Bharat Ka Itihas, Kala Evam Sanskriti (History of India, Art & Culture) for UPSC, State PSCs and Other Competitive Exams
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Paramhans Ek Khoj
- Author Name:
Sankar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh B.Ed. Sanyukt Pravesh Pariksha 15 Practice Sets Vigyan Varg (UP B.Ed Science Entrance Exam 2023 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prabhat Sookti Kosh
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: सूक्तियाँ गागर में सागर भरे वे शब्द समूह हैं, जो सीधे मर्म पर चोट करते हैं। इन शब्दों में ऐसी शक्ति होती है कि ये इनसान को सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं और कई बार वह क्षण जीवन का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित होता है, जो जीवन की दशा और दिशा को बदलकर रख देता है, यह व्यक्ति का मानो नया जन्म होता है; उसका चीजों को देखने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। महात्मा बुद्ध के कुछ सूक्ति वाक्य ज्यों अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तित कर देते हैं और वह डाकू से संत बन जाता है; सूक्तियाँ कुछ यों ही मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में दुनिया भर के महान् विचारकों की सूक्तियों का संकलन किया गया है, जो प्रबुद्ध पाठकों के लिए निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा।
PARINITA & BARI DIDI (PB)
- Author Name:
Sharat Chandra Chattopadhyaya
- Book Type:

- Description: विचारो में डूबे हुए गुरुचरण बाबू एकांत कमरे में बैठे थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा, “बाबू! बाबू! माँ ने एक नन््ही सी बच्ची को जन्म दिया है।'' यह शुभ समाचार गुरुचरण बाबू के हृदय में तीर की भाँति समा गया, उसका चेहरा ऐसा सूख गया, मानो कोई बड़ा भारी अनिष्ट हो गया हो! यह पाँचवीं कन्या थी, जो बिना किसी बाधा के उत्पन्न हुई थी। गुरुचरण बाबू एक साधारण आदमी थे। वह केवल साठ रुपए मासिक वेतन के नौकर थे। उनकी दशा शोचनीय थी, जीवन शुष्क तथा नेत्रों में निराशा की झलक थी। शरीर दुर्बल, मरियल, टट्टू की भाँति था। देखने में ऐसा लगता था कि जान होते हुए भी बेजान हों। फिर ऐसी दशा में यह अशुभ समाचार सुनते ही उनका खून ही सूख गया और हाथ में हुक््का लिये हुए निर्जीव की भाँति, फटे-पुराने तकिए के सहारे लेट रहे। जान पड़ता है कि साँस लेने में भी उन्हें कष्ट हो रहा था। अन्नाकाली से यह शुभ समाचार सुनकर भी गुरुचरण बाबू कुछ नहीं बोले तो थोड़ी देर बाद वह उन्हें हिलाकर फिर कहने लगी, ““बाबूजी, मुन्नी को देखने न चलोगे ?!!
IBPS Clerk Prarambhik Pariksha-2022 (IBPS Clerk Pre Exam 20 Practice Sets in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Radio Aavritti Ke Siddhant Evam Radio Aavritti Memos Switch Analysis
- Author Name:
Kamaljeet Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book