DHAROHAR RAJ. BASIC & VARISHTHA COMPUTER ANUDESHAK
(0)
Author:
Kunwar Kanak Singh RaoPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
650
₹ 520 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789354882760
-
Pages448
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
CRPF Kendriya Reserve Police Bal Head Constable (Ministerial) Evam A.S.I. Steno Bharti Pariksha 20 Practice Sets
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tweet Kahaniyan
- Author Name:
Dr. Lata Kadambari Goel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Police Aur Samaj
- Author Name:
S. Akhilesh
- Book Type:

- Description: डॉ. एस. अखिलेश द्वारा लिखी गई यह पुस्तक ‘पुलिस और समाज’ एक अनूठी पुस्तक है। यह पुस्तक पुलिस अनुसन्धान एवं विकास ब्यूरो, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समस्त देश की पुलिस प्रशिक्षण-शालाओं के लिए अनुशंसित पाठ्यक्रम के अनुरूप है। इस पुस्तक की रचना के सम्बन्ध में लेखक की विषय पर पकड़, मौलिक विचार और वैज्ञानिक विश्लेषण प्रशंसनीय है। पुस्तक के सत्रह अध्याय इस प्रकार हैं : ‘राष्ट्रीय स्वतंत्रता-आन्दोलन’, ‘प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं का योगदान’, ‘संविधान की प्रमुख विशेषताएँ’, ‘मौलिक अधिकार : कर्तव्य एवं नीति-निर्देशक सिद्धान्त’, ‘स्वाधीन भारत में राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन और उनका पुलिस पर प्रभाव’, ‘समाज के दुर्बल वर्ग के लोगों का उत्थान’, ‘राजनीतिक दलों का संगठन एवं उनकी विचारधाराएँ’, ‘राष्ट्रीय एकीकरण’, ‘प्रमुख सामाजिक समस्याएँ’, ‘प्रमुख तात्कालिक घटनाएँ’, ‘मानव व्यवहार’, ‘पुलिस की छवि’, ‘लोक-सम्पर्क एवं लोक-सम्पर्क अधिकारी’, ‘पुलिस-आचरण के सिद्धान्त एवं दृष्टिकोण’, ‘पुलिस का व्यवहार’, ‘नीति और नैतिकता’, ‘शिष्टाचार’, ‘नागरिक अधिकार एवं स्वतंत्रताएँ’। निस्सन्देह, अपने विषय उद्देश्य में एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कृति।
Share Market Dictionary
- Author Name:
A. Sulthan
- Book Type:

- Description: Share Market Dictionary has been produced to aid beginning traders in the challenging task of becoming familiar with the new Vocabulary and terminology used in Stock Exchanges. The book could be a valuable reference tool for use while attending seminars, watching or listening to financial programmes, and reading material on the financial market. The book contains a 600-glossary and over 100 commonly used abbreviations and acronyms in finance and the stock market.
Aatmkatha Ke Elake Mein
- Author Name:
Bharat Singh +1
- Book Type:

-
Description:
बनारसीदास जैन ने 'अर्धकथा' (1641) में लिखा कि 'गर्भित कथा कहाँ हिय खोल।' छिपाए जानेवाले या कहें कि गोपन प्रसंगों को भी दिल खोलकर अथवा खुलकर बताना आत्मकथा को प्रसिद्धि दिलाता है, निवैयक्तिक बनाता है। आत्मकथा चर्चित विधा है और आत्मकथा- लेखन की एक समृद्ध परम्परा है, लेकिन यह आलोचना से परे विधा हो, ऐसा भी नहीं है। बाबू बनारसीदास चतुर्वेदी ने आत्मकथा लेखक की पात्रता का सवाल उठाया था। चतुर्वेदी जी ने 'जागरण' में यह सवाल उठाया था कि आत्मकथा किसे लिखनी चाहिए। भाव यह था कि आत्मकथा किसे नहीं लिखनी चाहिए। हालाँकि उनके द्वारा तय की गई शर्तों पर आगे लोगों ने आत्मकथा लिखी, ऐसा भी नहीं है। जब प्रेमचन्द ने 'हंस' का आत्मकथांक (1932) निकाला तो नन्ददुलारे वाजपेयी ने यह कहकर विरोध किया था कि इससे आत्म-विज्ञापन का भाव बढ़ेगा जो कि हिन्दी के हित में नहीं होगा।
लेखिकाओं की आत्मकथा में स्त्री-वेदना के विविध स्वर सुनाई पड़ते हैं। इनकी वेदना समस्त स्त्रियों को शोषण के खिलाफ विरोध की ताकत देती है। इन्होंने अपने आत्मकथा-साहित्य के द्वारा जहाँ स्त्री करुणा, शोक, वेदना, विवशता को व्यक्त किया वहीं उसे हिंसा, शोषण, अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इन्होंने स्त्री स्वतन्त्रता, समानता, सम्मान, सहभागिता इत्यादि जैसे प्रश्नों पर विचार करते हुए पितृसत्तात्मक व्यवस्था से स्त्री-मुक्ति की भी वकालत की।
आत्मकथाओं में अपने भीतर की यात्रा के जरिये बाहर का जो सफ़र तय होता है उसमें केवल अपनी दुनिया की ही बात नहीं होती है पूरा सामयिक सन्दर्भ आ जाना स्वाभाविक है। दलित आत्मकथाओं को आत्मकथात्मक उपन्यास यूँ ही नहीं कहा जाता है। जीवन का पूरा विस्तार है यथार्थ को देखने की एक नई दृष्टि के साथ ये आत्मकथाएँ हिन्दी साहित्य के मुख्य धारा के साहित्य की चेतना को झकझोरती हैं और उसकी चली आ रही परम्परा में एक तरह की वैचारिक हलचल पैदा करती हैं, दलित आत्मकथाएँ, साहित्य की दुनिया में निर्मित 'औदात्य' की धारणा को बदलकर रख देती हैं और जीवन के नए-नए मुहावरों के बीच अपने पाठकों को ले जाकर खड़ा करती हैं।
GS SCORE Concept Mapping Workbook Environment & Ecology: The Ultimate Guide to Cover Concepts through MCQs for Civil Services, State PCS & Other Competitive Examinations
- Author Name:
Manoj K. Jha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UP TGT Samajik Vigyan 14 Practice Sets in Hindi Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Social Science Practice Book in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hinduon ke vrat parv aur Tyohar
- Author Name:
Rampratap Tripathi Shastri
- Book Type:

-
Description:
भारतरत्न बाबू पुरुषोत्तमदास जी टण्डन की पुण्य स्मृति में समर्पित इस पुस्तक में हिन्दुओं के सम्पूर्ण व्रतों, त्योहारों और पर्वों से सम्बन्धित पौराणिक, लौकिक तथा शास्त्रीrय विद्याओं की परम्परागत प्राचीन विधियों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
व्रत, पर्व और त्योहार यद्यपि ये तीनों उत्सव के भिन्न-भिन्न रूप हैं तथापि किसी-न-किसी रूप में इनमें परस्पर विचित्र समानता पायी जाती है। व्रत का विधान बहुधा आध्यात्मिक अथवा मानसिक शक्ति की प्राप्ति के लिए, चित्त अथवा आत्मा की शुद्धि के लिए, संकल्प-शक्ति की दृढ़ता के लिए, ईश्वर की भक्ति और श्रद्धा के विकास के लिए, वातावरण की पवित्रता के लिए, दूसरों पर अपने प्रभाव जमाने के लिए, अपने विचारों को उच्च एवं परिष्कृत करने के लिए तथा प्रकारान्तर से स्वास्थ्य की प्रगति के लिए किया जाता है। यद्यपि भारतीय विचारधारा में व्रत का सामान्य अर्थ व्रत अथवा उपवास ही है, तथापि कुछ ऐसे व्रत हैं जिनमें उपवास का स्थान गौण है और चित्त-शुद्धि अथवा आत्म-परिष्कृत का स्थान मुख्य है। पर्व किसी मुख्य तिथि अथवा ज्योतिष के अनुसार ग्रहों आदि के संयोग का ही दूसरा नाम है, जो किसी निर्दिष्ट समय पर आता है। पर्व का बीच-बीच में निर्दिष्ट अवधि पर आते रहते हैं जैसे कुम्भ पर्व आदि। आकाश के नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति के अनुसार इन पर्वों का धरती के जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। त्योहार एक सामान्य शब्द है। आजकल इसका प्रयोग व्रत और पर्व के लिए भी होने लगा है, किन्तु इसका तात्पर्य वस्तुत: लौकिक उत्सवों एवं समारोहों की तिथि से ही अधिक समीप है जैसे दशहरा, होली आदि।
व्रत दो प्रकार के होते हैं, ‘काम्य’ और ‘नित्य’। काम्य उन्हें कहते हैं जो किसी विशेष कामना को लेकर किये जाते हैं और नित्य वे हैं, जिनमें किसी कामना का समावेश नहीं होता, वरन् जो भक्ति और प्रेम के कारण आध्यात्मिक प्रेरणा से किये जाते हैं। निष्काम अथवा नि:स्वार्थ व्रत का ही स्थान ऊँचा होता है।
व्रत का सामान्य अर्थ आज ‘उपवास’ हो गया है। उपवास शब्द का अर्थ है दुर्गुणों एवं दोषों से बचकर आत्मा अथवा गुणों के साथ वास अर्थात् निवास। इन व्रतों अथवा पर्वों में हमारे देश के भिन्न-भिन्न मतावलम्बी लोगों के लिए अपनी-अपनी कुल-परम्परागत मान्यता के अनुसार चलने की पूरी सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं। एक धर्म अथवा सम्प्रदाय के देवता का अन्य धर्म अथवा सम्प्रदाय में बड़ी उदारता एवं सहानुभूति के साथ चित्रण किया गया है। सनातन हिन्दू धर्म में तो इस व्यापक दृष्टिकोण का पदे-पदे परिचय मिलता है। भगवान् विष्णु के चौबीसों अवतारों में जैन धर्म के आदि प्रवर्तक भगवान् ऋषभदेव तथा बुद्ध धर्म के प्रतिष्ठापक भगवान् गौतम बुद्ध का भी गिनाया गया है और इनकी जयन्तियों तथा पुण्यकथाओं को सुनने-सुनाने का बड़ा माहात्म्य वर्णित है।
सनातनी हिन्दुओं के मुख्य त्योहारों होली, दीवाली, विजयादशमी, वसन्तपंचमी, नागपंचमी आदि त्योहार तो बौद्ध, जैन आदि मतों में भी सनातन धर्म के समान ही समादृत और महत्त्वपूर्ण हैं। कुछ अन्य त्योहार तो ऐसे भी हैं जो सनातन धर्म में किसी अन्य कारण से महत्त्व रखते हैं और बौद्ध तथा जैन धर्म में किसी अन्य कारण से। किन्तु हिन्दुओं के सभी मतानुयायियों में उनकी विशेषता अखण्डित है। कार्तिकी पूर्णिमा, मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी, अक्षय तृतीया, अनन्त चतुर्दशी आदि व्रतों अथवा पर्वों का सनातन हिन्दू धर्म तथा बौद्ध एवं जैन धर्मों में समान महत्त्व है, किन्तु कारण भिन्न-भिन्न दिये गये हैं।
Heart Ki Dekhbhal
- Author Name:
Dr. H.S. Wasir
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lockdown Love Stories
- Author Name:
Rashmi
- Book Type:

- Description: कोरोना महामारी एक विकट संकट बनकर अचानक ही हमारे जीवन में आ गई। उन आठ-नौ महीनों के लिए जैसे सब थम सा गया। जो जहाँ था, ठहर गया। किंतु इस संकटकाल में भी प्रेम ने ही लोगों को हौसला दिया। इसी ने आपस में एक-दूसरे से जोड़े ÚUææÐ ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं कि जिन लोगों के बीच में किन्हीं वजहों से दूरियाँ आ गई थीं, उन्होंने इस दौरान आपस में बातचीत शुरू की और पुनः अपने संबंधों में मधुरता जगाई। प्रेम मनुष्य को दिल बड़ा करना सिखाता है, संकुचित करना नहीं। कितने ही लोगों ने अपने उन मित्रों और संबंधियों को याद किया, जिन्हें वर्षों से भुलाए बैठे थे। ऐसे विकट समय में अपने और अपनों का प्रेम ही संबल बना रहा और तमाम तरह की मुश्किलों से उबारने में काम आया। ऐसे दुर्लभ और अमूल्य क्षणों को समेटे इन कहानियों में प्रेम के अलग-अलग रंग हैं। युवाओं का प्रेम, दो अजनबियों का प्रेम, परिवारीजनों का प्रेम, दो बुजुर्गों का आत्मीय प्रेम, आदि सभी तरह की कहानियाँ आपको इस पुस्तक में पढ़ने के लिए मिलेंगी। दरअसल प्रेम कभी भी रंग, रूप, जाति, धर्म, समाज, उम्र, रस्मो-रिवाज नहीं देखता। आज के तकनीकी युग में तो दूरियाँ भी प्रेम के आड़े नहीं आतीं। मानवता, करुणा, पारस्परिकता, सहयोग और आत्मीयता का बोध करानेवाली पठनीय कहानियों का रोचक संकलन।
Virus Se Vaccine Tak
- Author Name:
Aditya Shrivastava
- Book Type:

- Description: कोरोना के साथ बीते शुरुआती एक साल की यादें, सबक़, सब याद रखा जाना चाहिए। इसलिए मेरे प्रिय अनुज, सहयोगी आदित्य की किताब ‘वायरस से वैक्सीन तक' की उपयोगिता आज तो है ही, पर जैसे-जैसे साल बीतेंगे इसकी उपयोगिता और बढ़ती जाएगी। -अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक ये किताब न सिर्फ़ कोरोनाकाल को देखने वाले बल्कि आने वाली पीढ़ी को उस दौर को जानने और समझने का सबसे सशक्त दस्तावेज़ है। पुस्तक में जिस संवेदना के साथ घटनाओं का वर्णन किया गया है वो पाठकों को उद्दवेलित करेगा, हमें स्वार्थी होने से रोकेगा। -सईद अंसारी, जाने-माने टीवी न्यूज़ एंकर कोरोना के आने से लेकर कोरोना के पैर पसारने और फिर वैक्सीनेशन तक के सारे कभी न भुलाये जाने वाले अनुभवों को पत्रकार और लेखक आदित्य ने हम सबके लिए सरल भाषा में संजोया है, इस समझाइश के साथ की इतिहास भूलने की नहीं सबक़ लेने की चीज़ है। -डॉ ब्रजेश राजपूत, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक लेखक आदित्य श्रीवास्तव की तीसरी किताब है "वायरस से वैक्सीन तक"... पेशे से टीवी पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव की ये तीसरी किताब साहित्य की ‘रिपोर्ताज’ विधा में प्रकाशित हुई है। आदित्य श्रीवास्तव ने इससे पहले जहाँ युवा पीढ़ी के जीवन के अंदर झाँककर उसके अंदर चलने वाले द्वंद्व को अपने एक उपन्यास 'द्वंद्व कहाँ तक पाला जाए' में लिखा तो वहीं एक कविता संग्रह 'तुम ही मैं हूँ' में हर व्यक्ति के अंदर के दूसरे और अदृश्य चेहरे को पाठकों के बीच रखा है। एक संवेदनशील पत्रकार होने की वजह से आदित्य के लेखन में मानव जीवन की संवेदनाएं बहुत सरल भाषा में महसूस की जा सकती हैं
Fundamentals of English Grammar
- Author Name:
N.C. Sinha
- Book Type:

- Description: English enjoys the status of the World Language. No other language has ever scaled this height. It is the language that encompasses everything in the world. It is used and cherished by millions whose mother tongue is not English. Spoken English, as a natural corollary to that, has become an important tool in our hands today. Without mastery over it, the gateway to success will remain a distant dream in today’s globalised market. Command on any language depends primarily on command on its grammar. Grammar is a repository of rules, governing how words are put together into sentences. These rules govern most constructions in a given language. Grammar is the science of correct use of language. It is concerned only with correct speaking and writing.Fundamentals of Grammar need to be fully comprehended to to acquire skills of quality English. Aim of this book is a practical one: an aid to good English, to take you places on the wings of English. The book is designed to meet the requirements of students completing their schooling and entering colleges or job market, or preparing for various competitions.
Railway RPF / RPSF SI Recruitment Exam 2024-2025 (RPF & RPSF Sub Inspector Study Guide Include 2 Practice Sets and 2023 Solved Papers) in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक रेलवे सुरक्षा बल / रेलवे सुरक्षा विशेष बल RPF/RPSF सब-इंस्पेक्टर (पुरुष/महिला) भर्ती परीक्षा CBT (कंप्यूटर आधारित टेस्ट) RPF/RPSF Sub-Inspector Bharti Pareeksha (CBT) को विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए बनाया गया है, जो रेलवे मंत्रालय द्वारा आयोजित RPF/RPSF सब-इंस्पेक्टर की तैयारी कर रहे हैं। पुस्तक के मुख्य विषय: • सामान्य ज्ञान • अंकगणित • तर्कशक्ति योग्यता अन्य विशेषताएँ : 2 प्रैक्टिस सेट्स एवं सॉल्व्ड पेपर 2023 सहित। वस्तुनिष्ठ एवं महत्वपूर्ण प्रश्नों का संस्करण। नवीनतम सिलेबस एवं पैटर्न पर आधारित। सभी विषय का संक्षिप्त अवलोकन।
Bhasha Sanshay Shodhan
- Author Name:
Kamlesh Kamal
- Book Type:

- Description: पुस्तक को पढ़कर कहा जा सकता है कि लेखक ने भाषाई शुद्धता संबंधी लगभग सभी पक्षों को छूने का प्रयास किया है। आशा करता हूँ, विश्वविद्यालयों, विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ सभी हिंदी प्रेमी इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे। -गिरिधर मालवीय कुलाधिषति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के साथ-साथ यह पुस्तक उन सभी सुधी पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिन्हें हिंदी भाषा से स्नेह है और जो सदैव इस भाषा के विकास के लिए विचार करते हैं अथवा प्रयास करते हैं । सिविल सेवा अभ्यर्थियों में लेखन कौशल के विकास में यह अत्यधिक सहायक होगी । -सी.बी.पी. श्रीवास्तव निदेशक; डिस्कवरी आई. ए. एस., दिल्ली यह पुस्तक आज के दौर में भाषाई अनुशासन को कायम रखने की दिशा में अभिनव प्रयोग है। यह मीडियाकर्मियों, विद्यार्थियों, लेखकों के साथ-साथ हर हिंदीप्रेमी के लिए अच्छी मार्गदर्शिका के रूप में पठनीय है। -प्रो. संजीव भानावत पूर्व अध्यक्ष जनसंचार केंद्र, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, संपादक; “कम्युनिकेशन टुडे यह पुस्तक पत्रकारिता और लेखन से जुड़े लोगों के लिए एक अत्यावश्यक संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी। -संजय स्वतंत्र मुख्य उपसंपादक, जनसत्ता, इंडियन एक्सप्रेस सगृह
Sanshipt Hindi Shabad Kosh
- Author Name:
Virendranath Mandal
- Book Type:

-
Description:
भारत की राष्ट्रभाषा होने के बावजूद जनसाधारण के हिन्दी सम्बन्धी ज्ञान को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। शैक्षिक जीवन में पाठ्य–पुस्तकों आदि के सन्दर्भ में भी हिन्दी के शब्दार्थ, शब्द और वाक्य–प्रयोग आदि को लेकर विद्यार्थियों को सदैव समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी के मद्देनज़र इस कोश में विद्वान कोशकार का बल विस्तार के बजाय भाषा की व्यावहारिक उपयोगिता पर रहा है।
पाठ्यक्रम तथा रोज़मर्रा जीवन, मीडिया माध्यमों आदि में प्रयुक्त होनेवाले आवश्यक शब्दों, उनके अर्थों, उनकी व्याकरणगत स्थिति तथा प्रयोगों से सम्पन्न यह कोश विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों, अनुवादकों, भाषाकर्मियों व भाषा–अधिकारियों के लिए समान रूप से उपयोगी है। इसके अलावा इसमें रामायण, महाभारत, बुद्धचरित, प्रमुख पर्वतमालाओं, नदियों, पशु–पक्षियों तथा देवी–देवताओं से सम्बन्धित शब्दावलियों को अलग से सँजोया गया है।
Ekada Bharatvarshe
- Author Name:
Hemant Sharma
- Book Type:

- Description: एकदा भारतवर्षे--- की कथाएँ संस्कृति के कैप्सूल हैं समय के साथ-साथ कहानियों का स्वरूप बदलता रहता है, किंतु उनमें अंतर्निहित भावना सदा जीवित रहती है। 21 वीं सदी की ये बोधकथाएँ पाठक को कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति और अच्छे समय में सुख के साझे की सन्मति प्रदान करती है। इन कहानियों का भाव हमारे वर्तमान समय के साथ जुड़ा है। एकदा भारतवर्षे की कहनियाँ अपने समकालीन संदर्भो से जुड़कर एक नए रूप में सामने आता है, नया अर्थ वैभव देता है, जो हमें समझने और जीने की शक्ति प्रदान करता हैं। इस कारण ये कहानियाँ आज अधिक महत्वपूर्ण हैं।
Operation Z Live: Russia-Ukraine Yuddha
- Author Name:
Neeraj Rajput
- Book Type:

- Description: यह युग युद्ध का नहीं है, फिर भी रूस यूक्रेन युद्ध को पूरा एक साल हो गया, लेकिन अभी तक हार-जीत का फैसला नहीं हो पाया है। हार-जीत तो दूर, यह भी तय कर पाना मुश्किल है कि जंग में पलड़ा किसका भारी है—सुपरपावर रूस का या अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों की मदद ले रहे यूक्रेन का? दोनों देश लड़ाई को लेकर रोजाना अपने-अपने दावे जरूर पेश करते रहते हैं। प्रतिदिन दोनों देशों की सेनाएँ, राष्ट्राध्यक्ष और विदेशी खुफिया एजेंसियाँ आँकड़े एवं विश्लेषण जारी करती हैं, फिर भी लगता है कि सब सच्चाई से कोसों दूर हैं। ऐसे में पूरी दुनिया हैरान है कि आखिर युद्ध के मैदान में चल क्या रहा है! दरअसल, यह युद्ध जितना मैदान में लड़ा जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा भीषण तरीके से इन्फॉर्मेशन स्पेस में लड़ा जा रहा है, यानी इंफो वॉरफेयर, जिसके चलते यह पता करना बेहद मुश्किल हो रहा है कि युद्ध में आखिर चल क्या रहा है। युद्ध को कवर करनेवाले पत्रकार भी इस खेल को नहीं समझ पा रहे हैं। किसी भी युद्ध को कवर करने के लिए किसी पत्रकार को सेनाओं के साथ एंबेडेड होने की क्या मजबूरी होती है, उस पर भी कुछ सामग्री इस पुस्तक में है। क्योंकि बिना एंबेडेड जर्नलिज्म के युद्ध की कवरेज करना मुश्किल होता है। लेकिन उस तरह की पत्रकारिता की क्या कमियाँ हो सकती हैं और उसे कैसे सुधारा जा सकता है, उसके बारे में थोड़ा बताने और समझाने का प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।
Flat No. 714 Mein Rahasyamayi Maut Aur Anya Thriller Kahaniyan
- Author Name:
Swati Gautam
- Book Type:

- Description: आप यहाँ कैसे ? आपकी गाड़ी कहीं दिखाई नहीं दे रही ?'! “वहीं तो खड़ी थी। आपने नहीं देखा ?!' वह मुसकराई | “हाँ, शायद मेरा ध्यान नहीं गया।” “आप डरे हुए लगते हैं ?”! “'नहीं-नहीं, वह तो इस सड़क के बारे में बहुत कुछ सुन रखा है, इसलिए थोड़ा''मैं इस सड़क से नहीं आता । आज ही आया हूँ।”! “हर काम कभी-न-कभी तो पहली बार किया ही जाता है, अक्षय ।'! अक्षय डर गया, '“' लेकिन आपको मेरा नाम कैसे पता ?”! “आपके आई-कार्ड पर लिखा है।'! वह हलकी सी मुसकराई। अक्षय ने अब तक की सबसे गहरी साँस ली। “जी, जी, मैं भूल गया था।'! अक्षय सोच रहा है कि वह बेकार ही डर रहा था। लड़की तो बहुत अच्छी और जरूरतमंद लगती है। अच्छा हुआ, जो उसने उसे बिठा लिया, वरना वह कहाँ जाती! क्या यही है सड़क का सच ? लोग बेकार में डरते हैं और सड़क को बदनाम कर दिया । जबकि यही एक मेन सड़क है, जो दो शहरों को जोड़ती है । -इसी पुस्तक से प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ अपनी किस्सागोई तथा कथारस से भरपूर हैं, रोमांचक भी | अतः हर आयु वर्ण के पाठक के लिए मनोरंजक एवं पठनीय हैं ।
SSC CHSL (10+2) Sanyukt Higher Secondary Level LDC/DEO/PSA Online Pareeksha (Tier-1) 20 Practice Sets Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Angreji Raj Aur Hindi Ki Pratibandhit Patrakarita
- Author Name:
Santosh Bhadoria
- Book Type:

- Description: पेशे से प्राध्यापक संतोष भदौरिया ने ब्रिटिश काल के मीडिया पर बेहद महत्वपूर्ण अनुशीलन प्रस्तुत किया है। उनकी किताब पढ़ते हुए आज के पाठक जान सकेंगे कि पराधीन भारत में किस तरह शब्दों पर पहरे बिठा दिए जाते थे। किस तरह पत्रिकाओं को प्रतिबंधित किया जाता था और प्रतिबंधों के बावजूद किस तरह तत्कालीन पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाया और स्वाधीनता संग्राम में हिस्सेदारी के लिए आम जनता को प्रेरित किया। संतोष ने उन अखबारों-पत्रिकाओं के तेवर, रुझान और प्रतिबद्धता का गंभीर अध्ययन किया है, जिन पर ब्रिटिश शासनकाल में प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। क्या आज के नए पत्रकारों को पता है कि 1907 में इलाहाबाद से निकले 'स्वराज साप्ताहिक' के आठ- आठ संपादकों को जेल हुई। एक संपादक जेल जाता तो दूसरा संपादक आता। इसी तरह के कई तथ्यों का पता संतोष भदौरिया की किताब से चलता है। प्रकारान्तर से संतोष की किताब पराधीनता के उस काले दौर में हिंदी पत्रकारिता के संघर्ष का लेखा-जोखा भी है तो वहीं देश की आजादी की लड़ाई में प्रतिबंधित पत्र-पत्रिकाओं के अवदान को भी सामने लाती है। इन कृतियों से आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता के योगदान का भी पता चलता है। संतोष पत्रकारिता के इतिहास के अन्यतम अध्येता और विशेषज्ञ हैं। वे विचारों से प्रगतिशील हैं। उनके साहित्य में सुसंगत इतिहास बोध और इतिहास दृष्टि है, इसी कारण वे मूल्यवान इतिहास रच सके हैं और पाठकों को भी वे अतीत में उतरने का मौका देते हैं। पत्रकारिता के इतिहास के विद्यार्थियों को संतोष से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि तरह-तरह की किंवदंतियों के घटाटोप को पार कर कैसे तथ्यों और प्रामाणिक सूचनाओं पर आधारित अनुशीलन किया जाता है। - महाश्वेता देवी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book