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Bhartiya Islami Sanskriti

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लब्धप्रतिष्ठ लेखक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की 'भारतीय इस्लामी संस्कृति' एक महत्त्वपूर्ण विषय पर एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। उसके नौ अध्याय इस्लामी धर्म और व्यवस्था, ज्ञान और विज्ञान, कला और संगीत के विस्तृत आयामों का संक्षिप्त पर विशद वर्णन प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने इस्लामी परम्परा के भारतीय विकास पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। उनका दृष्टिकोण सन्तुलित और युक्तिसंगत है। अनेकता में एकता के प्रसिद्ध सूत्र को अपनाए रखने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता को लेखक ने रेखांकित किया है। औपनिवेशिक भेद नीति से उबरने के लिए यह आवश्यक है कि हिन्दू और मुस्लिम परम्पराओं का समन्वित अध्ययन किया जाये। प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासुओं को आवश्यक तथ्यों और विचारों से अवगत कराने में सहायक सिद्ध होगी। प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा को इतनी सुन्दर पुस्तक लिखने के लिए बधाई। —प्रो. गोविन्द चन्द्रपाण्डे; नई दिल्ली; 20 अप्रैल, 2011

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लब्धप्रतिष्ठ लेखक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की 'भारतीय इस्लामी संस्कृति' एक महत्त्वपूर्ण विषय पर एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। उसके नौ अध्याय इस्लामी धर्म और व्यवस्था, ज्ञान और विज्ञान, कला और संगीत के विस्तृत आयामों का संक्षिप्त पर विशद वर्णन प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने इस्लामी परम्परा के भारतीय विकास पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। उनका दृष्टिकोण सन्तुलित और युक्तिसंगत है। अनेकता में एकता के प्रसिद्ध सूत्र को अपनाए रखने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता को लेखक ने रेखांकित किया है। औपनिवेशिक भेद नीति से उबरने के लिए यह आवश्यक है कि हिन्दू और मुस्लिम परम्पराओं का समन्वित अध्ययन किया जाये।
प्रस्तुत पुस्तक जिज्ञासुओं को आवश्यक तथ्यों और विचारों से अवगत कराने में सहायक सिद्ध होगी।
प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा को इतनी सुन्दर पुस्तक लिखने के लिए बधाई।
—प्रो. गोविन्द चन्द्रपाण्डे; नई दिल्ली; 20 अप्रैल, 2011

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2013
Weight
536 grams
ISBN-13
9788180316265
Pages
392
Reading time
~13 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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